आंटी का मीठा मीठा द...
 

आंटी का मीठा मीठा दर्द  

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 Anonymous
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मेरा नाम राज है, मैं इन्दौर का रहने वाला हूँ। मैं जब भी अपने घर जाता था तो हमेशा पड़ोस की आँटी को चोदने के बारे में सोचता रहता था।

इस बार जब मैं अपने घर गया तो मेरे ऊपर कृपा हो ही गई, मुझे चोदने का मौका मिल ही गया। मैं जिम जाने लगा था जिसका असर मुझे घर पर मालूम चला। आँटी के पति दुबले पतले थे और दिन भर को़र्ट में रहते थे।

उस दिन आँटी का हीटर ख़राब हो गया था। हमारे शहर में कई लोग हीटर पर खाना बनाते हैं। आँटी का भी खाना नहीं बना था, मैं गाय को रोटी देने बाहर आया तो आँटी बोली- राज, मेरा हीटर खराब हो गया है, उसे सुधार दो !

मैंने मजाक में कहा- आप तो खुद ही इतनी गर्म हो कि तपेली को हाथ से पकड़ लो तो पानी भाप बन जाये !

वो हंस दी, मैंने आज तो रास्ता साफ समझा और उनका हीटर सही करने उनके घर आ गया। उनकी लड़की जो दसवीं में है, स्कूल जा रही थी।

मैं हीटर को सही करने लगा, उनसे टेस्टर माँगा तो वो उसे लेकर खुद ही हीटर की स्प्रिंग को चैक करने लगी। तब उनके बड़े बड़े स्तन उनके ब्लाउज़ से बाहर दीखने लगे थे। मन तो कर रहा था कि उनके स्तनों को पकड़ कर मसल डालूँ पर मर्यादा मुझे रोक रही थी।

तब मैंने उनसे टेस्टर लेना चाहा तो उनका हाथ मेरे हाथ से छू गया। मुझे लगा कि आँटी इतनी हॉट हैं, अंकल की तो रोज जन्नत की सैर है।

मैंने जब स्प्रिंग से टेस्टर छुआ तो मेरे आँटी के ख्यालों के चक्कर में मुझे करंट का एक झटका लगा, मैं लगभग बेहोश हो गया था। आँटी घबरा गई और उन्होंने पानी लाकर मेरे ऊपर डाला और मुझे अपनी गोद में ले लिया और मुझे उठाने लगी।

मेरा सीना एकदम उभरा था जो शर्ट का बटन खुला होने से आँटी को दिख रहा था। आँटी ने अपना एक हाथ मेरी शर्ट में डाल दिया और धीरे-धीरे मेरे सीने पर फ़िराने लगी।

मुझे होश आने लगा था, आँटी बड़े प्यार से अपना गर्म हाथ मेरे 40 इंच के सीने पर घुमा रही थी।

मेरा लंड घोड़े के लंड की तरह धीरे धीरे बढ़ने लगा था जो मेरे रीबोक की चड्डी से बाहर निकलने को तरस रहा था और आँटी मेरे सीने को रगड़े जा रही थी।

अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा था, मैंने अपनी आंख खोल दी। वो एकदम से मुझसे अलग हो गई।

मैंने बोला- आँटी करो ना ! मुझे मजा आ रहा है।

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Posted : 11/01/2012 10:23 am
 Anonymous
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Posted : 11/01/2012 10:23 am
 Anonymous
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उसने पूछा- पहले कभी सेक्स नहीं किया ?

मैंने मना कर दिया- नहीं !

मेरा दिमाग गर्म हो रहा था कि अगर आज सेक्स नहीं कर पाया तो मैं मर जाऊँगा।

वो शायद मेरी अवस्था समझ चुकी थी, वो मेरे पास आई और हाथ को चूमने लगी। मुझे कुछ होने लगा था। उसने धीरे से मेरे माथे को चूम लिया। मेरा लंड जोर जोर से सांस ले रहा था। आँटी की भी सांसें गर्म होने लगी थी। फिर वो मेरी दोनों आँखों को चूमने लगी। मेरी तो हवा ख़राब होने लगी थी। वो इतनी गोरी थी कि अगर हाथ रख दो तो लाल हो जाये।

उसने मेरे दोनों हाथ अपने वक्ष पर रख दिए और बोली- इनको दबाओ !

वो मुझे अनाड़ी समझ रही थी। मैंने अपने हाथ उसके नर्म-नर्म बोबों पर घुमाने शुरु कर दिए। वो मचलने लगी और मेरे मसल्स को सहलाने लगी।

मैंने धीरे से उसकी साड़ी के अंदर अपना हाथ डाल दिया और उसकी चूत के दाने को छू लिया।

वो सिसकने लगी और बोली- तेरे अंकल को तो कोर्ट से ही समय नहीं है, मैं सात महीने से अपनी प्यास मोमबत्ती या अपने हाथ से मिटा रही हूँ। मेरी प्यास बुझा दे, तेरा मुझ पर उपकार होगा।

मैं उसकी चूत को रगड़े जा रहा था, उसने भी मेरे लंड को पकड़ लिया और रगड़ने लगी। मैंने उसके पेट पर हाथ रखा तो वो स्प्रिंग की लहरों की तरह हिलने लगा। अब हमारी धड़कने बढ़ चुकी थी। मैंने अपना लंड उसके कहने पर उसके दोनों बोबों के बीच रख दिया। मैं तो जैसे जन्नत में पहुँच गया था।

उसके बाद वो मुझसे बोली- लंड को धीरे-धीरे आगे पीछे करो !

मेरी उत्तेजना की सीमा पार हो रही थी, साथ ही मजा भी बढ़ता जा रहा था। मेरी सांसें तेज होने लगी थी। मेरा लंड ठीक उसके मुँह के पास आ जा रहा था। वो अपनी जीभ से उसे चाटने की कोशिश कर रही थी, मुझे बड़ा मजा आ रहा था। मेरा लंड जैसे दो रुई के गोलों के बीच में हो जिनको हल्का गर्म कर दिया हो।

तभी वो जोर जोर से चिल्लाने लगी- और जोर लगाओ अह अहअहहहह अहह हहहहहहह ...........

उसने मेरे कूल्हे कस कर पकड़ लिए और एकदम ढीली हो गई .....

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Posted : 11/01/2012 10:23 am
 Anonymous
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तो दोस्तो, उसके बाद आंटी मुझसे अलग होने लगी पर मेरा मूसल देव तो तन कर खड़ा था तो मैंने आंटी को कहा- अब मैं क्या करूँ?

वो भी मेरा और मौके का पूरा मजा लेना चाहती थी इसलिए बोली- अब क्या मेरी गाण्ड मारोगे?

मैंने आंटी को कहा- नेक काम में देर किस बात की?

वो कहने लगी- तेरे अंकल ने आज तक मेरी गाण्ड नहीं मारी ! उनको यह सब गन्दा लगता है। पर तुमको ?

मैं थोड़ा खुल चुका था, मैं बोला- मैंने आज से पहले कभी किसी की चूत नहीं मारी थी तो गाण्ड मारने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। आप मारने दो तो ?

वो कुछ ना बोली, मैं जाने के लिए तैयार होने लगा। मन तो बहुत कर रहा था कि वो रुकने को कह दे पर जबरदस्ती भी नहीं कर सकते थे। अगर ना कर दे तो क्योंकि मुझे पता था कि गाण्ड मारने में तो मजा आता है पर मरवाने वाली की गाण्ड फ़ट जाती है, मतलब नई गाण्ड में दर्द बहुत होता है। मैं इस बात को जानता था इसलिए मैं कुछ ना बोला और जाने लगा।

आंटी थोड़ी देर की चुप्पी के बाद बोली- तुम्हारा मतलब पूरा हो गया तो चल दिए ? चाय तो पीते जाओ।

मैंने सोचा- चलो चाय तो पीते जायें ! उसके बाद देखेंगे।

वो मेरे लिए चाय बना कर लाई एकदम मेरी पसंद की ज्यादा चीनी, ज्यादा दूध !

चाय पीते-पीते मैं उनके ( www.indiansexstories.mobi ) चहरे को देख रहा था, वो मुँह से कुछ नहीं कह रही थी पर उनकी आँखें सब कुछ कह रही थी, उनकी आँखें इतने नशीली हो रही थी कि मेरा जाने को मन नहीं कर रहा था।

कुछ देर मैं उन्हें एकटक देखता रहा। मेरा लंड देव अब वापिस अपने दंड रूप में आने लगे थे। उन्हें भी इस बात का अहसास हो गया था, मेरी मचलन को वो समझते हुए वो बोली- अगर दर्द हुआ तो कभी पास भी नहीं आने दूंगी !

मैंने स्वीकृति में सर हिला दिया।

इसके बाद मैंने उनसे कहा- घर में घी तो होगा ही?

उन्होंने कहा- ले आओ !

वो एक कटोरी में घी लेकर आई। अब मैंने जल्दी से उनके कपड़े उतारे और उनकी गाण्ड में घी लगाया। उनकी गाण्ड एकदम चिकनी हो गई थी जिसको देख कर मेर लंड खड़ा हो गया। अब मैंने उनकी गाण्ड में उंगली घुमानी चालू कर दी।

उनकी सिसकारियाँ चालू हो गई, वो अपनी गाण्ड हिलाने लगी थी, अब उन्हें भी मजा आने लगा था।

मैंने धीरे से उनकी गाण्ड में अपनी उंगली घुसा दी। वो हल्के से बोली- धीरे से डाल !

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Posted : 11/01/2012 10:24 am
 Anonymous
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मैंने उंगली को अन्दर-बाहर करना चालू रखा। अब वो भी अपनी गाण्ड उचकाने लगी थी।

मैंने पूछा- अब लंड डाल दूँ?

उन्होंने अपनी गाण्ड उचका दी।

मैंने अपना लण्ड घी से चुपड़ कर उनकी गाण्ड के छोटे से छेद पर टिका दिया और बिल्कुल हौले-हौले उनकी गाण्ड में घुसाने लगा। वो भी मस्त हो चुकी थी, वो अपने स्तनों को बिस्तर पर रख कर पैर नीचे रखे थी मैं धीरे धीरे अपना लण्ड उनके अन्दर सरकाने की कोशिश कर रहा था कि वो अचानक पीछे को धक्का देकर मेरे लंड पर चिपक गई और जोर से चीख पड़ी।

मेरा पूरा लण्ड उनकी गाण्ड में घुस चुका था।

मैं रुक गया।

थोड़ी देर बाद वो सामान्य हुई तब मैंने धक्के लगाने शुरु कर दिया।

अब हम दोनों को मजा आने लगा था।

मैं धक्के पे धक्के लगा रहा था, मेरी सांसें बहुत तेज हो चुकी थीं, हम दोनों के जिस्म एकदम गर्म हो चुके थे, मेरे गले में थूक अटकने लगा था। मैंने उनके मुँह को पकड़ कर चूमने की कोशिश की।

जब हमारे मुँह और सांसें मिली तो दिल की धड़कनें रुकने लगीं।

शायद इसी को मजे की अंतिम सीमा कहते हैं।

उनकी गाण्ड का छेद बड़ा हो गया था। दस-पंद्रह मिनट तक धक्के लगाने के बाद मेरे लंड देव ने आंटी की गाण्ड में मधुर रस निकाल दिया।

अब आंटी और मैं दोनों थक चुके थे।

मैं अपने कपड़े पहन कर अपने घर आ गया।

जब अगले दिन उनसे मिला तो मुझे बोली- कल मजा तो बहुत आया पर मेरी गाण्ड फट गई !

दोस्तो, इंदौर की फिजा भी अब बहुत सेक्सी हो गई है ! कड़कियों का वो तंग जींस पहन कर निकलना, उनकी गाण्ड के दोनों पाटों का हिलना दिल हिला कर रख देता है।

उस दिन का मजा आ आह !

जब भी याद करता हूँ मेरा लंड देव हिलौरें मारने लगता है।

तो दोस्तो, इस प्रकार मेरी छुट्टी बीती ..

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Posted : 11/01/2012 10:24 am