आंटी ने सिखाया
 

आंटी ने सिखाया  

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मेरा नाम अमन वर्मा है, दिल्ली में रहता हूँ, 26 साल का लम्बा, स्मार्ट, गोरा और हाई प्रोफाइल का लड़का हूँ।

मैं बचपन से बहुत ही शर्मीले किस्म का लड़का था जो लड़कियों को देख कर घबरा जाया करता है। मैं उन दिनों की कहानी बताने वाला हूँ जब मैं बारहवीं कक्षा में पढ़ता था। मेरी उम्र 18 साल की होगी। मुझे उस समय सेक्स की कोई जानकारी नहीं थी। लेकिन उन दिनों मेरे साथ ऐसा हुआ जिसने मेरी जिंदगी बदल दी।

हुआ यों कि मैं एक दिन स्कूल से वापस आ रहा था, मेरी साइकिल की हवा किसी ने निकल दी थी और स्कूल के पास कोई साइकिल ठीक करने वाला नहीं था इसलिए मैं पैदल ही साइकिल लेकर आ रहा था। तभी मुझे रास्ते में एक पत्रिका नजर आई। उसके मुख पृष्ट पर एक खूबसूरत और बहुत ही कम कपड़ों में एक लड़की की तस्वीर थी।

मैं रुक गया और देखने लगा। फिर ना जाने मेरे मन में क्या आया और मैंने उसे उठा लिया और अपने बैग में डाल लिया। मैं घर वापस आ गया। घर पहुँच कर मैंने हाथ-मुँह धोकर खाना खाया और फिर पढ़ाई करने अपने कमरे में चला गया। अचानक मेरे दिमाग में उस पत्रिका का ख्याल आया तो मैंने उसे बैग से निकाला और उसके पन्ने पलटने लगा। उसमे कई सारी नंगी लडकियों की तस्वीरें थी और कुछ सेक्सी कहानियाँ भी थी।जैसे-जैसे मैं पत्रिका के पन्ने पलट रहा था, मुझे कुछ महसूस हुआ कि मेरी नीचे कुछ हो रहा था। मुझे मेरे लिंग में कुछ खिंचाव सा महसूस हुआ। पहले मुझे समझ में नहीं आया कि यह क्या हो रहा है फिर बाद में मुझे समझ आया कि मेरा लिंग कड़ा हो रहा है। उस पत्रिका में एक कहानी थी जिसमे आंटी और भतीजे के बीच सेक्स होता है। अब तक मेरे लिंग में उफान आ गया था और मैंने उसे बाहर निकाल लिया और देखने लगा। मैं उसे हाथ से हिलाने लगा तो मुझे मजा आने लगा। कुछ देर तक हिलाने के बाद उसमें से कुछ चिपचिपा सा निकल गया। मैं एकदम से घबरा गया कि यह क्या हो गया। बाद में मुझे पता चला था कि इसे वीर्य कहते हैं।

फिर तो अक्सर ही मैं अकेले में पत्रिका को निकाल कर पढ़ता था और हिलाता था। मुझे कसम से बहुत मजा आता था। इस तरह धीरे धीरे मैं मुठ मारना भी सीख गया। मैं अक्सर बाथरूम में जाकर मुठ मार लिया करता था।

फिर एक दिन मैं स्कूल से बंक मारकर एक ब्लू फिल्म देखने चला गया। सेक्स के सीन देख कर मुझे इतना जोश आ गया कि मैं एक घंटे की फिल्म में तीन बार मुठ मार आया। अब मेरा भी मन करता था कि मैं सेक्स करूँ पर मैं मुठ मार कर ही काम चला रहा था।

मेरे परिवार में मेरी मम्मी-पापा, दादाजी और दादीजी रहते थे। साथ ही एक कमरे में एक आंटी भी रहती थी जो हमारे बीच परिवार के सदस्य की तरह रहती थी। मेरे दादाजी और दादीजी निचली मंजिल पर रहते हैं, मैं मम्मी और डैड के साथ पहली मंजिल पर और आंटी दूसरी मंजिल पर रहती हैं। आंटी की उम्र करीब 32-33 साल की थी, वो देखने में बहुत सुन्दर लगती थी। उनका फिगर भी आकर्षक था। आंटी बहुत ही गोरी थी। उनको देखने के बाद किसी की भी नियत ख़राब हो सकती थी। यह सब मुझे तब नहीं पता था।

एक दिन मैंने आंटी को नहाते देख लिया तो मेरा दिमाग ख़राब हो गया। मैंने तो पहली बार किसी औरत को नंगा देखा था, मुझे कामवासना सताने लगी और मैं बेकाबू सा होगया। हालांकि आंटी निर्वस्त्र नहीं थी, उनके बदन पर पेटीकोट था मगर उनके स्तन निर्वस्त्र थे। काफी बड़े बड़े और गोरे गोरे गोल गोल स्तन थे उनके। उन पर भूरे रंग के चुचूक थे। मुझसे अब सहन करना मुश्किल हो गया और मैंने तभी मुठ मार ली। उसके बाद से मैं उनके नाम पर ही मुठ मारने लगा। मेरे मन में उनको पाने की प्यास जग गई और इसमें सारा दोष उस पत्रिका का था जिसमे मैंने आंटी और भतीजे के बीच की सेक्स कहानी पढ़ी थी।

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Posted : 12/01/2012 7:04 am
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Posted : 12/01/2012 7:05 am
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इस घटना को कई दिन बीत गए। फिर मेरी मम्मी कुछ दिनों के लिए नानी के घर चली गई। मेरे डैड सारा दिन बाहर ही रहते हैं और काफी लेट से घर आते हैं। मैं मम्मी के जाने के बाद बिंदास आंटी को छुप छुप कर देखता था।

दो दिनों के बाद आंटी ने मुझसे कहा कि आज की रात मैं उनके कमरे में ही सो जाऊँ क्योंकि उन्हें अकेले डर लगता है। मेरी तो मन की मुराद पूरी हो गई। मैं उनके पास सोने चला गया। रात को उनके कमरे में जाकर उनके पलंग पर सो गया। थोड़ी देर बाद आंटी भी आकर बगल में सो गई।

सर्दियों का मौसम था और ठण्ड ज्यादा थी। हम एक ही रजाई में थे। मैं आँख बंद कर लेटा था मगर नींद कोसों दूर थी। आंटी सो चुकी थी। थोड़ी देर बाद आंटी ने करवट बदली और मेरे बिल्कुल करीब आ गई। उनको इतने करीब देख कर मेरी सांसें गर्म होने लगी और मैं बेचैन होने लगा। उनके स्तन उनके चोली से झांक रहे थे। मेरा पैर उनके पैर से सट रहा था और मेरा लण्ड फुफकार उठा। मैं अपना हाथ उनके करीब ले गया और उनकी कमर पर रख दिया। धीरे धीरे उनके स्तनों के पास पहुँच गया और उनको ऊपर से ही सहलाने लगा।

मेरे लण्ड की हालत ख़राब हो गई और थोड़ी देर में मुझे बाथरूम जाना पड़ा। बाथरूम जाकर मैंने अपना लावा उगला और फिर आकर बगल में आंटी से थोड़ा चिपक कर सो गया। थोड़ी देर में मुझे महसूस हुआ कि आंटी मुझसे कुछ ज्यादा ही चिपकी हैं। मैंने चुपके से आँख खोली और देखा कि आंटी के स्तन ब्लाऊज़ से बाहर हैं और मुझसे चिपक रहे हैं। फिर आंटी के हाथ मेरे बदन पर फिसलने लगे। फिर आंटी ने मुझे कस कर बाहों में भर लिया और मेरे होंठों को चूम लिया। फिर उनका हाथ मेरी टांगों की ओर चला गया और थोड़ी ही देर में उनके हाथ में मेरा लण्ड था। वो उसे धीरे धीरे प्यार कर रही थी। मेरा लण्ड फुफकारने लगा। फिर वो लण्ड को आगे पीछे करने लगी।

मैंने उनका हाथ पकड़ लिया। आंटी घबरा गई, उन्हें लगा नहीं था कि मैं जग जाऊंगा, पर मैं तो जगा हुआ ही था। उन्होंने झट से हाथ खींच लिया और अपने कपड़े ठीक कर लिए। फिर वो करवट बदल कर सो गई। मेरा मूड ख़राब हो गया। मैं पीछे से ही उनसे चिपक गया।इस बार उनके मस्त नितम्बों से मेरा लण्ड रगड़ खा रह था। मैं बेकाबू हो रहा था और शायद आंटी भी। मैं उनकी तेज तेज सांसों को महसूस कर रहा था। मैं आंटी के तरफ से पहल का इंतजार कर रहा था और शायद आंटी मेरे पहल का। किसी ने पहल ना करी और मैं मन मारकर सो गया।

अगले दिन जब मैं स्कूल से वापिस आया तो आंटी मेरे कमरे में आ गई। पता नहीं कैसे उन्हें वो पत्रिका दिख गई जिसे मैं रोज पढ़ कर मुठ मारता था। वो पत्रिका के पन्ने पलट कर देखने लगी तो आंटी को पत्रिका पढ़ते देख कर मेरे होश उड़ गए। आंटी मेरी तरफ़ देख कर बोली- तुम यह सब पढ़ते हो?

"नहीं, आंटी !"

"फिर यह कहाँ से आई?"

"मुझे सड़क पर पड़ी मिली थी।"

"और तुमने उठा ली?"

"जी !"

"और फिर इसी की पढ़ाई करने में लग गए?"

"नहीं आंटी !"

"क्या नहीं?"

"सॉरी आंटी !"

"रात को तुम्हारे पापा को दिखाती हूँ !"

"सॉरी आंटी, अब दुबारा से ऐसी गलती नहीं करुँगा, प्लीज़ पापा को मत बताना !"

आंटी ने मेरी बात अनसुनी कर दी और पत्रिका को लेकर चली गई। थोड़ी देर बाद मैं उनके कमरे में गया तो वो वही पत्रिका को पढ़ रही थी। मैंने उनके पास जाकर उन्हें सॉरी बोला। उन्होंने मुझे बैठने को कहा।

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Posted : 12/01/2012 7:05 am
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"तो कब से इसकी पढ़ाई चल रही है?"

"एक महीने से !"

"अच्छा तो एक महीने से इसे पढ़ रहे हो ?"

"सॉरी आंटी !"

"क्या-क्या सीखा है?"

"सॉरी आंटी !"

"मैंने पूछा ( www.indiansexstories.mobi ) कि क्या क्या सीखा है? कुछ सीखा या नहीं सीखा अभी तक?"

"नहीं !" मैंने झूठ बोल दिया।

"चलो कोई बात नहीं !" उन्होंने पत्रिका को बंद करके रख दिया और मेरे करीब आकर बैठ गई।

फिर बोली,"कुछ सीखना चाहते हो?"

मुझे तो मुँह मांगी मुराद मिल गई। मैंने हाँ में सर हिला दिया।

उन्होंने कहा- ठीक है, मैं तुम्हें सिखा दूंगी मगर एक शर्त पर ! मैं जैसे जैसे कहूँगी वैसे करना होगा। मेरी हर बात माननी होगी।

मैंने हां में सर हिला दिया। फिर आंटी उठ कर दरवाजे की कुण्डी लगा दी। मैं चुपचाप खड़ा होकर देख रहा था कि आंटी क्या करती हैं।

फिर उन्होंने मुझे अपने करीब बुलाया और बोली- तुम्हें कुछ आता है या नहीं?

मैं उनका मतलब समझ ना पाया और उनसे पूछ लिया तो वो हंसने लगी और मुझे अपने करीब खीच कर मेरे गालों पर चूमने लगी। मैं भी उन्हें चूमने लगा।

फिर आंटी ने अपने होंठ मेरे होंठों से चिपका दिया तो मैं उन्हें चूमने लगा। फिर उन्होंने मेरे ऊपरी होंठ को अपने होंठों से भींच लिया और अपना निचला होंठ मेरे होंठों के बीच घुसा दिया। मैं उन्हें चूसने लगा। अब मुझे मजा आने लगा था। मैं उनको बेतहाशा चूम रहा था। मैंने आंटी को अपने बाहों के दायरे में कस लिया और मेरे हाथ उनकी पीठ पर फिसलने लगे।

तभी आंटी ने मेरे गले और गर्दन पर चूमना शुरु कर दिया। मेरा भी मन मचलने लगा और लण्ड उफान मारने लगा। मेरा मन हो रहा था कि सीधा उनको लिटा कर चोद दूँ। मैं भी उनके गले और गर्दन पर चूमने लगा। अब मैं वासना के मारे पागल होने लगा और उनको लिटाने की कोशिश करने लगा।

तभी आंटी बोल पड़ी,"हड़बड़ी नहीं करो, जैसे मैं कहूँगी वैसे ही करना है।"

मैंने हां में सर हिलाया।

अब आंटी ने मेरे शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए और फिर अपना कमीज़ उतारा। उनको इस हाल में अपने इतने करीब देख कर मैं बेकाबू होने लगा। मैं उन पर टूट पड़ा। उनके गर्दन और गले पर चूमते हुए मैं नीचे की ओर बढ़ने लगा।

आंटी ने गुलाबी रंग की ब्रा पहन रखी थी जिससे उनके स्तन बाहर झांक रहे थे। मैं उनके स्तनों को ऊपर से ही दबाने लगा। मैंने उनके स्तनों को जोर से दबा दिया तो वो चीख पड़ी, बोली," आराम से कर।"

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Posted : 12/01/2012 7:05 am
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मैं फिर धीरे धीरे सहलाने लगा। उनके दोनों स्तनों के बीच की घाटी में मेरा चेहरा आ गया और मेरे हाथ उनकी चिकनी पीठ पर चले गए और उनकी ब्रा को खोलने में लग गए। काफी मशक्कत के बाद किसी तरह मैंने उनकी ब्रा पर फतह हासिल कर ली और उनको स्तनों को आजाद करा दिया।

उनके बड़े बड़े अनार झलक कर बाहर आ गए। अब मैं दीवाना सा हो गया और मदहोश हो गया। मेरे लण्ड से स्राव होने लगा। मैंने उनके उन्नत स्तनों को दबाना शुरू कर दिया। जैसे जैसे मैंने स्तनों को दबाना शुरु किया वैसे वैसे वो कड़े होते जा रहे थे, मैंने उन पर मुंह लगा दिया।

और तभी आंटी बोल पड़ी,"चूस इसे, चूस, जोर जोर से चूस।"

मैं उन्हें चूसे जा रहा था। फिर उनके चुचूक को हाथ से दबा कर चूसने लगा।

आंटी ने कहा- मुँह में लेकर दांतों के बीच में दबा, मगर काटना नहीं।

उनके भूरे चुचूक एकदम गुलाबी हो गए थे। वो एक इंच के पूरे खड़े थे। अब मैंने उनके स्तनों पर अपना चेहरा रगड़ना शुरु कर दिया और उनके स्तनों को मसलने लगा। इतना सब करने के बाद मैं अब बर्दाश्त के काबिल नहीं रहा और मेरे लण्ड ने पानी उगल दिया और मैं खलास हो गया।

मैंने देखा कि आंटी की सलवार भी गीली हो गई थी। मैंने अपने आप को फिर काबू में किया और फिर शुरु करने की सोचने लगा।

तभी नीचे से दादाजी की आवाज आई। वो मुझे बुला रहे थे। उनकी आवाज सुन कर हम घबरा गए।

आंटी घबरा कर अलग हुई और अपने कपड़े पहनने लगी।

फिर बोली," अभी तुम जाओ, बाकी का आज रात को सिखा दूंगी।"

मैं मन मार कर चला आया। दादाजी को कुछ दवाइयाँ मंगवानी थी, मैं केमिस्ट की दुकान से ले आया।

आज मैं रात होने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था और रात हो ही नहीं रही थी। मुझे इंतज़ार के पल काटने मुश्किल लग रहे थे। खैर, किसी तरह से रात हुई और मैं खाना खाकर आंटी के कमरे में गया। मैंने देखा कि आंटी ने एक झीनी नाइटी पहन रखी थी, जिसमें से उनकी ब्रा और पैंटी झलक रही थी। मेरा लण्ड तुरंत ही खड़ा हो गया।

मैंने बेडरूम का दरवाज़ा अंदर से बन्द किया और आंटी के करीब पहुँचा। फिर उन्हें बाहों के दायरे में लेकर चूमने लगा। आंटी भी खुल कर मेरा साथ दे रही थी। मैंने धीरे धीरे उनकी नाइटी को उतार दिया। वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में हो गई। काले रंग की ब्रा और पैंटी में उनका गोरा जिस्म ऐसा कहर ढा रहा था कि मानो स्वर्ग से कोई अप्सरा जमीं पर उतर आई हो और मेरी किस्मत में लग गई।

मैंने तुरंत ही उनके स्तनों को आजाद किया और उनके स्तनों पर भूखे शेर की तरह टूट पड़ा। उनके स्तनों को जी भर कर मैंने चूसा। इसके आगे मुझे पता ही नहीं लगा कि अब क्या करूँ?

फिर मैंने उनकी पैंटी के ऊपर से हाथ रख दिया। उनकी मुनिया तो इतनी गर्म हो रही थी कि उसका एहसास मुझे पैंटी के बाहर से ही हो रहा था। मैंने उसे बाहर से ही हाथ से मसल दिया। आंटी आह कर उठी। उनकी पैंटी गीली हो चुकी थी।

तभी उन्होंने मेरा हाथ हटा दिया और बोली,"मैंने तुमसे कहा था ना कि जैसे मैं बताऊँगी, वैसे ही करना है।"

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Posted : 12/01/2012 7:06 am
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Posted : 12/01/2012 7:06 am
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"लेकिन आंटी अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है !"

"बर्दाश्त करो, तभी तो पूरा मजा आएगा।"

फिर आंटी ने मेरा हाथ अपनी कमर में डाल दिया और दूसरा हाथ उनकी पीठ पर था। मैं उनकी चिकनी गोरी पीठ पर हाथ फिसला रहा था। फिर उन्होंने मेरा चेहरा अपने हाथो में लिया और चूमने लगी। फिर मेरा चेहरा अपने स्तनों के नीचे कर दिया और सीत्कार भरते हुए बोली,"किस मी !"

मैं उनकी चूचियों पर चूमने लगा पागलों की तरह ! फ़िर उनके पेट पर पहुँच गया, उनकी नाभि तक पहुँचा और नाभि में जीभ डाल दी।

वो बेकाबू हो रही थी।

फिर मैंने उनकी करवट बदल दी और उनकी पीठ पर चूमने लगा। अब मेरे हाथ उनके नितम्बों पर आ पहुँचे। क्या सेक्सी गांड थी उनकी। बड़ी फुर्सत से बनाया गया फिगर था उनका। अब मैं उनकी जांघों को चूम रहा था। वो लगातार सीत्कार भर रही थी। मैं भी अब बेकाबू हो गया था। मैंने उनकी पैंटी उतार डाली, और उनके नितम्बों को देख कर पागल होने लगा।

मैंने अपना अंडरवीयर भी उतार फेंका और मेरा पप्पू पूरी तरह से खड़ा था। मैं अब समय बर्बाद किये बिना चोदना चाहता था लेकिन आंटी पता नहीं क्या कर रही थी।

उन्होंने मेरा पप्पू हाथ में ले लिया, मुझे तो मानो करेंट लग गया। जब मैंने उनकी चूत देखी तो पागल सा हो गया।

गुलाबी रंग की चूत थी उनकी। इतनी नर्म और डबल रोटी की तरह फूली हुई ! गुलाबी रंग की चूत इतनी सेक्सी लग रही थी कि जी कर रहा था कि इसी में समां जाऊँ। वहाँ पर घुंघराले बाल थे जिन्होंने उनकी मुनिया को ढक रखा था।

आंटी ने मेरे लण्ड को आजाद कर दिया। अब तक वो सांप के फन की तरह नाच रहा था। अब मैं उनको चोदने चाहता था।

आज काफी देर तक मैं झडा नहीं था पर शायद आंटी झड़ गई थी। आंटी ने मुझे चोदने नहीं दिया, बोली,"आज नहीं .....यह कल सिखाऊँगी।"

"नहीं आंटी, आज !"

"बोला ना कल !"

"प्लीज़ आंटी !"

"देखो हड़बड़ी करने से कुछ नहीं होता, कल करेंगे, ओके ?"

"ओके आंटी, पर मैं इसका क्या करूँ?" मैं अपना लंड हिलाते हुए कहा।

"कुछ नहीं, लाओ इसका इलाज मैं कर देती हूँ।"

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Posted : 12/01/2012 7:06 am
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आंटी ने मेरा लंड हाथ में लिया और जोर जोर से हिलाने लगी। थोड़ी देर में मैं झड़ गया। फिर हम सो गए।

अगले दिन स्कूल से वापस आकर सीधा आंटी के पास गया और उन्हें बाहों में भर कर चूमने लगा।

आंटी ने कहा- आज की रात हमारी मिलन की रात होगी ! इसलिए मुझे तैयार होने दो, अभी तुम जाओ ....रात को ही मेरे कमरे में आना !

मैं अपने कमरे में चला आया और रात के ख्वाबों में डूब गया।

कब शाम हो गई पता ही नहीं चला। रात को मैं जब आंटी के कमरे में पहुँचा तो दंग रह गया। पूरे कमरे में खुशबू फ़ैली हुई थी। गुलाब की खुशबू वाला रूम फ्रेशनर छिड़का हुआ था। बिस्तर पर गुलाब के फ़ूल बिखरे पड़े थे और सफ़ेद रंग की चादर बिछी हुई थी।

मैंने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद किया और उनके पास गया। वो मुझे देखकर मुस्कुरा पड़ी। फिर मैं उन्हें बाहों में भर कर चूमने लगा। वो भी मुझसे लिपट गई और मुझे चूमने लगी। हम दोनों तुरंत ही गर्म हो गए। फिर मैंने उन्हें खड़ा किया और उनके कपड़े उतारने लगा। उन्होंने भी मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। अब मेरे जिस्म पर केवल एक अंडरवियर बचा था और आंटी के जिस्म पर ब्रा और पैंटी। आज आंटी ने सफ़ेद रंग की पैंटी और ब्रा पहनी थी।

मैं उनको बिस्तर तक ले गया और लिटा कर बेतहाशा चूमने लगा। आंटी भी मुझे प्यार कर रही थी। अब मैंने उनकी ब्रा खोल कर उनके कबूतरों को आजाद कर दिया और मुँह से चूसने लगा। उनके स्तन इतने कड़े कड़े थे कि मैं उन्हें पूरी ताकत से मसल रहा था। मैंने अपना सीना उनके वक्ष पर रख कर मसलना शुरु कर दिया। आंटी का हाथ मेरे लण्ड पर चला गया जो विकराल रूप में आ चुका था और उनके हाथ लगते ही एकदम से फुफकार उठा।

मैंने झट से उनकी पैंटी उतार दी और अपना अंडरवियर भी निकाल फेंका। उनकी चूत पर जैसे ही मेरी नजर गई तो वहाँ एक भी बाल नहीं था। मैंने हाथ से सहलाया तो एकदम चिकनी चूत थी। मैंने आंटी से पूछा तो उन्होंने बताया कि आज शाम को ही बाल हटाए हैं।

उनकी गुलाबी चूत पूरी गीली थी। मुझसे रहा ना गया। मैंने उन्हें चूम लिया। फिर उनके चूत के होंठों पर अपने होंठ टिका दिए और उन्हें चूसने लगा। उसके अंदर का पानी इतना नशीला था कि मुझ पर नशा छा गया। मैंने अपनी जीभ उसके अंदर डाल दी और इधर-उधर घुमाने लगा

आंटी ने मेरा सर अपनी जांघों के बीच दबा लिया और अपने दोनों हाथों से मेरे सर को पकड़ लिया। मैं अपनी जीभ उसके अंदर घुमा रहा था, आंटी बेचैन हो रही थी। थोड़ी देर में वो मुझे ऊपर की ओर खींचने लगी। मैं फिर भी लगा हुआ था।

तभी वो बोली,"अब देर ना करो अमन .... अब डाल दो अंदर ..."

पर मैं लगा हुआ था।

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Posted : 12/01/2012 7:06 am
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तभी आंटी ने अपने जिस्म को एक झटका दिया और फिर शांत हो गई।

उनकी चूत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया और मैं उसका स्वाद लेने लगा। मुझे वो एकदम नमकीन लगा। मैंने उनकी चूत का सारा पानी साफ़ कर दिया। फिर अपनी जीभ बाहर निकाल ली। उसके बाद आंटी के बगल में लेट कर उनको चूमने लगा। आंटी के स्तनों को धीरे-धीरे सहला रहा था और उनके चुचूकों को दांतों के बीच दबाने लगा। आंटी तुरंत ही गर्म हो उठी। फिर उन्होंने मेरे लण्ड को हाथ में लिया और सहलाने लगी। फिर झुक कर उसको चूम लिया। फिर उन्होंने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

मैं पूरी तरह से बेचैन हो उठा। वो तेजी से लण्ड को मुँह में अंदर-बाहर कर रही थी। थोड़ी देर में मेरे लण्ड ने पानी उगल दिया और ढेर सारा वीर्य उनके मुँह में चला गया। आंटी ने मेरे लण्ड को अपनी जीभ से ही साफ किया। उन्होंने मेरे किये अहसान का बदला चुका दिया। मैं निढाल सा उनके बगल में लेट गया। फिर वो भी बगल में लेट गई।

मैं उदास हो गया। आंटी ने मुझसे पूछा "क्या हुआ? क्या तुम खुश नहीं हो? इस तरह उदास क्यों हो गए?"

"आंटी, मैं तो कुछ करने के पहले ही खलास हो गया !"

"ओह ! तो तुम इसलिए उदास हो ! तो क्या हुआ?"

"अब मैं आपका साथ कैसे दूंगा?"

"अरे पगले, ऐसे थोड़े ना घबराते हैं! मैं भी तो झड़ गई ना !"

"हाँ !"

"तो क्या हुआ? हम फिर से तैयार हो जायेंगे ना !"

"हाँ लेकिन?"

"लेकिन क्या? यह तो अच्छी बात है ! अब दुबारा काफी देर तक हम नहीं झड़ेंगे।"

"सच में आंटी !?"

"हाँ .... ऐसे ही होता है पगले ! अब हम काफी देर तक एक दूसरे का साथ दे पाएंगे।"

"पर यह तो सो गया आंटी?"

"मेरे हाथ लगते ही जग जायेगा !"

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Posted : 12/01/2012 7:06 am
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फिर हम दोनों ने एक दूसरे को चूमना शुरु कर दिया। आंटी ने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और मैं किसी आज्ञाकारी छात्र की तरह उसे चूसने लगा। यह अनुभव मेरे लिए बेहद रोमांचकारी था। मेरा लण्ड तुरंत ही खड़ा हो गया। मैं बड़े मजे से उनके जीभ को चूस रहा रहा था और उनके बड़े बड़े स्तनों को सहला रहा था। आंटी भी तुरत ही जोश में आ गई और मुझे बेतहाशा चूमने लगी। अब कमरे का माहौल एक बार फिर वासनामय हो गया। फिर आंटी ने झुक कर मेरे लण्ड को मुँह में भरा और जीभ फेरने लगी। दो मिनट में ही वो फुफकार उठा। उन्होंने अपने मुँह से मेरा लण्ड बाहर निकाला और खुद ही मेरा लण्ड अपने चूत की ओर खींचने लगी।

मैंने उन्हें बिस्तर पर पीठ के बल सीधा लिटा दिया और उनकी दोनों जांघो के बीच अपने लिए जगह बनाई। मैंने अपने लण्ड को उनकी चूत पट सटाया तो वो अपनी कमर ऊपर की ओर उचका दी। मैं समझ गया कि वो अब मेरे लण्ड को लेने के लिए बेकरार है। मैंने अपने लण्ड को उनके स्वर्ग के द्वार पर रगड़ा और योनि मुख पर टिका दिया। मेरा लण्ड फुफकार रहा था।

अब आंटी से भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था, वो सीत्कार भर उठी और बोली, "प्लीज़ अब देर ना करो...... डाल दो जल्दी से अमन !"

मैंने अब अपने लण्ड को उनकी चूत के होंठों पर रखा और थोड़ा सा रगड़ा। मेरा लण्ड उनकी योनि रस से भीग गया। अब मैंने भी देर करना उचित ना समझा और अंदर की ओर एक धक्का लगाया। चूत इतनी गीली थी कि मेरे लण्ड आसानी से अंदर जाने लगा।

अभी मेरा लण्ड आधा भी अंदर नहीं गया था कि आंटी अपने जिस्म को ऐंठने लगी। वो आह ओह्ह कर रही थी।

मुझे बड़ा अजीब सा लगा क्योंकि मुझे लग रहा था कि कुछ गड़बड़ हो गई।

मैंने आंटी से पूछा कि उन्हें दर्द हो रहा है क्या?

उन्होंने कहा- तुम लगे रहो, क्योंकि यह तो होगा ही।

मैंने फिर एक जोर का धक्का मार दिया और आंटी के मुख से चीख निकल पड़ी। मेरा लण्ड आधा अंदर चला गया। मैंने फिर थोड़ा रुक कर धक्का मारा और मेरा लण्ड थोड़ा और अंदर चला गया।

अब आंटी कराह उठी और बोली,"थोड़ा धीरे धीरे डालो ना, बहुत साल हो गए हैं, मैंने अंदर नहीं लिया।"

मैं धीरे से अंदर की ओर धकेलने लगा। तभी मैंने जोश में आकर एक जोर का धक्का मार दिया और वो उबल पड़ी। वो कराह कर बोली,"अब बस करो.... अब नहीं जायेगा.... मेरी चूत फट जाएगी.....।"

मैं थोड़ा रुक गया और फिर एक बार अपनी सांसों को खींचा और पूरी ताकत से जोर का धक्का मारा...... आंटी बुरी तरह से चीख उठी।

गनीमत थी कि आंटी ऊपरी मंजिल पर रहती थी और वहाँ कोई नहीं होता था ! नहीं तो आंटी की इस चीख से सबको पता चल जाता।

उनकी आँखों में आंसू आ गए। मैंने उन्हें सॉरी बोला। मेरा लण्ड उनकी चूत में पूरा समां गया था। पर आंटी लगातार कराह रही थी, उनके मुँह से ओह्ह्ह..... आह..... उई माँ..... आह..... लगातार निकल रहा था।

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Posted : 12/01/2012 7:07 am
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