एक गे दोस्त की कहान...
 

एक गे दोस्त की कहानी  

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 Anonymous
(@Anonymous)
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कुछ दिनोँ से मेरा हाल बहुत ही बोरिँग ना कोई मस्ती ना कुछ
मै शाम को अपनी छत पर बैठा बैठा पोर्न साइड पर कहानिया पड रहा था तभी मेरा दोस्त आ टपका
और मेरे मूड की मदर सिस्टर कर दी
सोनू - यार गौरव क्या कर रहा है
गौरव - अबे काहे हमारे सपनो मेँ आ के आग लगा जाते हो वे

सोनू - यार ये कहने आये थे वो भाभी का फोन आया था
गौरव - अबे कौन सी भाभी
सोनू- बही जो आशू की शादी मे आई थी
और तुझे अपने आपने 52 ईची के हतगोले दिखा रही थी
गौरव - मुद्दे की बात कर
सोनू - अरे यार बडे दिन से गर्मी भरी है जब से मधु की शादी हो गई और बो चली गई तब से आग लगी है चल न देख ते है
यार तेरे को उसका नम्बर किसने दिया
तुझे इससे क्या करना है तो दूध पी दूध मे पकड
चल लगा बे
र्टिन र्टिन
हल्लो कौन
आप कौन
मै सोनू बात कर रहा हूँ
अच्छा अच्छा बोलिये क्या चाहते है
क्या चाहते का क्या मतलब
भाभी - आप ने फोन क्यो किया
सोनू - यार गौरव ये तो मेरी मार रही है
ला फोन ला
गौरव - हाँ जाने मन तेरा आशिक बोल रहा हूँ
भाभी - आप कौन
गौरव - भूल गयी आशू की शादी मेँ
सैम (बदला हुआ नाम ) बोल रहा हूँ
भाभी ओ मेरे राजा तुम हो
और बो कौन था
बो मेरा दोस्त
खैर क्या कर रही हो
कुछ नही बस लेटी थी
कभी हमारे भी लेटो भाभीजी
जरूर बताओ कब मिलते है
गौरव जब तुम कहो जान
बैसे भी मेरा कालिया बडा फूनक रहा है

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Posted : 11/09/2011 2:39 am
 Anonymous
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अबे मैने भाभी को 3 दिन बाद एक होटल मै बुलाया और बो मान गई
3 दिन जब भाभी बो होटल मेँ उस रूम मेँ आई तो उनके चेहरे का नूर एक दम से गायब हो गया
बो देखती है मेरे साथ उनके पति बैठे है अब भाभी की दिल की धडकने बड गई और बो रोने लगी
बिशाल पति का नाम
बिशाल मुझे माफ कर दो मुझे माफ कर दो
बिशाल ने भाभी के ऊपर हाथ उठाया लेकिन मैने उसका हाथ रूका
बिशाल दोस्त आपने मेरा हाथ क्यो रोका
गौरव यार एक बात बताओ तो दिन मै कितनी लडकियो को देखते हो कितनो को सेट करते हो और कितनो के सान अय्याशी करते हो
बिशाल मै तुम्हारे कहने का मतलब नही समझा
गौरब सुनो दोस्त अगर हम गलती करते है तो उन्हे सुधारते है लेकिन कोई अपना गलती करता हो तो उसे माफ करके उसका साथ नही देते
माना के भाभी से गलती हुई है लेकिन इस गलती के जिम्मेदार कही कही तुम भी हो
तुम्हारा पूरा अकाउंट रखा है मेरे पास अगर बोलूगा तो ये ही तुम्हरी बीबी छोड के जायेगी
चलो छोडो अब नई जिन्दगी शुरू करो
बो भाभी मेरी तरफ बडे गौर से देखे जा रही थी तो मैने कहाँ
अपनी जिन्दगी को सम्भालो
भाभीजी मैँ तो कुछ देर का साथी बनता लेकिन तुम्हारा असली जीबन साथी तो बिशाल है

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Posted : 11/09/2011 2:39 am
 Anonymous
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ये बाक्य हो जाने के बाद गौरव अपने घर चला गया
बहाँ सोनू उसके इन्तजार मैँ बैठा था
सोनू यार तूने तो भाभी की बाट लगा दी होगी
क्या मिला आपको
गौरव दोस्त मैने खोया भी नही
और सुना
क्या सुनाऊ
सोनू यार हमारे डाटा टेक कोचिँग मै एक लडका है निखिल उसने कल मुझसे तुम्हारे बारे मेँ पूछ रहा था
गौरव क्या पूछ रहा था
कुछ खास नही कह रहा था कि गौरव कहाँ रहता है क्या करता है गौरव तो तूने क्या कहा
सोनू कुछ नही
चल छोड चल
पार्क चलते है
गौरव ठीक है मै बाइक निकाल ता हूँ
यार पहले पट्रोल भरवा लूँ थोडा ही बचा है पार्क तक जाते जाते खतम हो जायेगा
सोनू ठीक है चल पट्रोल पम्प
सयोग से पट्रोल पम्प पर निखिल मिल जाता है
निखिल ओ हाये सोनू जी
सोनू अरे यार तो यहा कैसे
बो मै पट्रोल भरबाने आया था
और आप
मै तुम्हारी भाभी को लेने आया था
क्या सोनू जी मजाक करते है
गौरव निखिल ने मेरी तरफ देखा ओर कुछ बोलना चाहा पर मै दूसरी तरफ फेस कर लिया
दोस्तो मुझे नही मालूम के निखिल कौन है और उसके दिमाग मै क्या चल रहा था
फिर सोनू ने निखिल से कहाँ की बो हमारे साथ पार्क चले लेकिन निखिल को कही जाना था
और बो सुबह कम्प्यूटर कोचिँग मेँ मिलते है यह कह कर चल गया

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Posted : 11/09/2011 2:40 am
 Anonymous
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वक़्त कैसा भी हो निकल जाता है
संग भी एक रोज पिघल जाता है

सलीके से मिला करो उस से तुम
खुदा भी अपने रंग में ढल जाता है

वो मेरे साथ क्या चल देती है जरा
ये जमाना कमबख्त जल जाता है

हौसला बाजुओं में हो जिनके यहाँ
तूफां भी उनसे रुख बदल जाता है

क्या मिलाएगा अब आँख मुझसे वो
बेवफा है, मुँह छुपा निकल जाता है

बर्क उमर भर नही होती फलक पे
बरसात हुई के सावन टल जाता है

कौन समझेगा कभी वो भी जज्बे
इसी भरोसे पे ही आजकल जाता है.

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Posted : 11/09/2011 2:58 am