गहरी चाल - हिन्दी स...
 

गहरी चाल - हिन्दी सेक्स कहानी  

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तमाम सबूतो और गवाहॉ के बयानात को मद्देनज़र रखते हुए ये अदालत इस नतीजे पे पहुँची है कि मुलज़िम मिस्टर.डी.के.जायसवाल बेकसूर हैं & असली मुजरिम है शाम लाल जो कि मरहूम राम लाल का भाई है,इसीलिए ये अदालत शाम लाल को मुजरिम करार देते हुए उसे 14 साल की उम्र क़ैद की सज़ा सुनाती है.",पंचमहल हाइ कोर्ट के जज के इस फ़ैसले के साथ मशहूर आड्वोकेट कामिनी शरण ने 1 और केस जीत लिया था. "मेडम,मैं आपका कैसे शुक्रिया अदा करू,मेरी समझ मे नही आता!आप तो मेरे लिए साक्षात भगवान हैं,कामिनी जी.",अदालत के बाहर जायसवाल हाथ जोड़े कामिनी के सामने खड़ा था.पंचमहल का ही नही बल्कि राज्य का 1 इतना रईस बिज़्नेसमॅन उसके सामने हाथ जोड़े खड़ा था पर कामिनी के चेहरे पे गुरूर की 1 झलक भी नही थी. "ये क्या कर रहे हैं जायसवाल जी!मैने तो केवल अपना फ़र्ज़ निभाया है.फिर आप बेगुनाह थे,वो शाम लाल आपको फँसा रहा था & गुनेहगर को हमेशा सज़ा मिलती है.चलिए,घर जाइए & अपने परिवार को ये खुशख़बरी सुनाए.",कामिनी उस से विदा ले अपने ऑफीस चेंबर जाने के लाइ अपनी कार की ओर बढ़ गयी जिसका दरवाज़ा खोले उसका ड्राइवर खड़ा था.

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Posted : 02/10/2010 8:25 pm
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.तभी उसके कानो मे विकास के कॅबिन से कुच्छ अजीब सी आवाज़े आती सुनाई दी तो वो ठिठक गयी.फिर दबे पाँव वो दरवाज़े तक पहुँची & बहुत धीरे से उसे खोला.दरवाज़ा खोलते ही सामने का नज़ारा देख कर उसके होश उड़ गये & वो जैसे बुत बन गयी. उसकी तरफ पीठ किए खड़ा विकास अपनी असिस्टेंट सीमी को चोद रहा था.सीमी डेस्क को पकड़ कर खड़ी थी,उसकी स्कर्ट को कमर तक उठाए उसका पति पीछे से उसकी चूत मे अपना लंड अंदर-बाहर कर रहा था.विकास की पॅंट उसके टख़नो के पास मूडी पड़ी थी & वो सीमी को पकड़ कर बड़े तेज़ धक्के लगा रहा था.सीमी भी आहे भर रही थी.तभी सीमी थोड़ा सीधी हुई & 1 हाथ पीछे ले जाकर उसने विकास के गले मे डाल दिया & उसके होठ से अपने होठ सटा दिए.विकास ने भी 1 हाथ उसकी कमर से उठाया & उसकी चूचियो पे रख दिया. थोड़ी देर के बाद कामिनी जैसे नींद से जागी & उसकी आँखो मे आँसू छल्छला आए.वो मूडी & वाहा से सीधा अपने घर आ गयी.वो चाहती तो दोनो को बीच मे रोक सकती थी पर ऐसा करना उसकी गैरत के खिलाफ होता.उस रात विकास घर लौटा तो उसने उसे बता दिया कि शाम को उसने क्या देखा था. "ओह्ह,तो तुम्हे पता चल ही गया.मैं तुम्हे बताना चाहता था पर...खैर,चलो." "मुझे तलाक़ चाहिए,विकास." "ओके.",विकास कुच्छ पल उसे देखता रहा & फिर कमरे से बाहर चला गया. 1 वकील के ऑफीस मे ही कामिनी का प्यार पुख़्ता हुआ था & आज 1 वकील के ऑफीस मे ही उस प्यार के टुकड़े-2 हो गये थे.तलाक़ के वक़्त विकास ने उसे उनका बंगला & ऑफीस रखने को कहा था पर उन जगहो से जुड़ी यादें उसे चैन से जीने नही देती.उसने मना कर दिया & अपने दूसरे बंगल शिफ्ट हो गयी & अपना 1 अलग ऑफीस भी ले लिया. ड्राइवर ने ब्रेक लगाया तो कामिनी यादो से बाहर आई,कार 1 ट्रॅफिक सिग्नल पे खड़ी थी.उसने शीशे से बाहर देखा तो सड़क के बगल की पार्किंग मे 1 जानी-पहचानी सी कार रुकती दिखी...ये तो विकास की कार थी.कार का दरवाज़ा खुला & विकास सीमी के साथ बाहर आया.दोनो सामने वाले रेस्टोरेंट मे जा रहे थे.विकास का हाथ सीमी की कमर से चिपका हुआ था.तभी उसने सड़क पे खड़े लोगो की नज़र बचा कर टाइट पॅंट मे कसी सीमी की गंद पे चिकोटी काट ली.सीमी ने बनावटी गुस्से से उसे 1 मुक्का मारा & फिर दोनो 1 दूसरे की बाँह थामे रेस्टोरेंट के अंदर चले गये.कामिनी ने उड़ती-2 खबर सुनी थी की आजकल दोनो बिना शादी किए 1 साथ रह रहे हैं,पर डाइवोर्स के बाद आज पहली बार उसने दोनो को देखा था. कामिनी का मिज़ाज थोडा और खराब हो गया.बत्ती हरी हुई तो कार आगे बढ़ गयी.

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Posted : 02/10/2010 8:32 pm
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तभी उसका मोबाइल बजा,"हेलो." "नमस्कार,मेडम.मैं जायसवाल बोल रहा हू." "नमस्कार,जायसवाल साहब.कहिए क्या बात है?" "मेडम,कल शाम 8 बजे मेजेसटिक होटेल मे मैं 1 पार्टी दे रहा हू & आपको वाहा ज़रूर आना है." "जायसवाल साहब,बुरा मत मानीएगा पर मैं..-" "मेडम,आप नही आएँगी तो पार्टी कॅन्सल कर दी जाएगी.ये पार्टी मैं अपने केस जीतने की नही बल्कि आपके सम्मान मे दे रहा हू.आपको कल आना ही पड़ेगा!",जायसवाल ने उसकी बात बीच मे ही काट दी. "आप मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं.मैं किसी सम्मान की हक़दार नही हू." "बिल्कुल हैं.आप ना होती तो माइन तो इस बुढ़ापे मे बेगुनाह होते हुए भी जैल की सलाखो के पीच्चे होता.प्लीज़ मेडम,मैं हाथ जोड़ कर आपसे गुज़ारिश करता हू..-" "प्लीज़,जायसवाल साहब अबके आपने मुझे सचमुच शर्मिंदा कर दिया.आप मेरे पिता की उम्र के हैं,इसीलिए ऐसी बाते ना करे.मैं कल ज़रूर आऊँगी." "शुक्रिया,मेडम.बहुत-2 शुक्रिया!",उसका पार्टी मे जाने का बिल्कुल भी मन नही था पर जायसवाल साहब ने ऐसी बात कह दी थी कल अब उसे बेमान से ही जाना ही पड़ेगा. कार उसके क्लाइव रोड के बंगल मे दाखिल हो चुकी थी.

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Posted : 02/10/2010 8:32 pm
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कामिनी नहा कर बाथरूम से निकली,उसने अपने जिस्म पे लपेटा तौलिया उतारा & अपने कपबोर्ड से कपड़े निकालने के लिए उसे खोला कि अचानक कपबोर्ड पे लगे आदम कद शीशे मे अपने अक्स को देख ठिठक गयी.उसने कपबोर्ड का दरवाज़ा बंद किया & शीशे मे अपने नंगे बदन को निहारने लगी. क्या कमी थी उसमे?आख़िर क्यू विकास ने उसे छ्चोड़ दिया...वो भी...वो भी..उस सीमी के लिए जोकि खूबसूरती के मामले मे कामिनी के पैर की छ्होटी उंगली के नाख़ून के बराबर भी नही थी!उसने अपनी 38डी साइज़ की छातियो को दबाया,बिना ब्रा के भी कैसी तनी हुई खड़ी थी,अभी तक ज़रा भी नही झूली थी उसकी चूचियाँ...& उसका सपाट पेट....28 इंच की कमर के नीचे 36 इंच की भरी मगर पुष्ट गंद तो लोगो को दीवाना कर देती थी.1 भरा शरीर होने के बावजूद कही से भी माँस की कोई परत झूलती नही दिखाई दे रही थी-ऐसी कसी,गदराई जवानी को छ्चोड़ विकास उस सुखी सी सीमी के पास कैसे चला गया? उसने आज तक ये सवाल विकास से नही पुचछा था.वो 1 बहुत स्वाभिमानी लड़की थी-वो उसके सामने रो कर गिड़गिदकर उसके सामने कमज़ोर नही पड़ना चाहती थी.कमर को मोड़ उसने शीशे मे अपनी गंद को निहारा & जैसे उसे जवाब मिल गया...विकास सीमी की गंद के पीछे पागल हो गया था.सीमी छ्होटे कद की पतली-दुबली लड़की थी मगर उसकी गंद बहुत मस्त थी...उस दिन ऑफीस मे विकास उसे पीछे से चोद रहा था,आज भी उसकी गंद पे उसके हाथ पागलो की तरह मचल रहे थे.... हुन्ह..!तो बस 1 गंद के लिए उसने अपनी बीवी से बेवफ़ाई की!वो नंगी ही अपने बिस्तर पे लेट गयी..क्या यही गहराई थी उनके प्यार मे?उसने विकास के अलावा कभी किसी और के बारे मे नही सोचा...उसे अपने तन,मन से पूरी तरह टूट कर चाहा & विकास..लेकिन क्या सिला मिला इस अच्छाई का,इस वफ़ा का उसे?जिसने ग़लती की थी वो तो आज भी मज़े से गुलच्छर्रे उड़ा रहा था & वो यहा विधवाओं जैसा जीवन बिता रही थी. पर अब ऐसा नही होगा.वो भी अपनी ज़िंदगी का पूरा मज़ा उठाएगी.अब वो ऐसे उदास नही रहेगी.1 विकास चला गया तो क्या हुआ?कल कोई और आएगा जोकि फिर से उसका अकेलापन दूर करेगा...& ऐसा क्यू नही होगा-वो खूबसूरत थी,जवान थी....पर इस बार वो प्यार & रिश्तो के पचदे मे नही पड़ेगी,केवल अपने जिस्म की ज़रूरतो को पूरा करेगी.....अगर कोई मर्द स्वार्थी हो केवल अपने मज़े के बारे मे सोच सकता है तो 1 औरत क्यू नही?...आज 4 महीनो मे पहली बार उसे 1 मर्द के बदन की ज़रूरत महसूस हुई थी,लेकिन ऐसा भी नही था कि वो जिस किसी के भी साथ सो जाने को तैय्यार हो गयी थी,उसने तय कर लिया था की वो केवल उस मर्द के साथ हमबिस्तर होगी जो उसकी कद्र करेगा & जिसमे उसे अपने बिस्तर तक ले जाने का हौसला होगा,हिम्मत होगी. पहले तो उसे कल की पार्टी मे जाने का दिल नही था पर अब उसने सोच लिया कि कल वो ज़रूर जाएगी & पार्टी को पूरी तरह से एंजाय करेगी.वो पहले वाली,आत्मा-विश्वास से भारी,ज़िंदाडिल कामिनी लौट आई थी & इस बार उसके दिल मे ज़िंदगी का लुत्फ़ उठाने की उमंग और भी ज़्यादा थी.

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Posted : 02/10/2010 8:33 pm
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नीले रंग की सारी & स्लीव्ले ब्लाउस मे खुले बालो वाली कामिनी शायद पार्टी मे सबसे खूबसूरत लग रही थी.पार्टी बड़ी शानदार थी,ऐसा लगता था जैसे जायसवाल ने पूरे पंचमहल को बुला रखा था. "..ये मिस्टर.शर्मा हैं,मेडम & शर्मा जी,कामिनी जी को तो आप जानते ही हैं.ये नही होती तो मैं तो लूट ही गया था,साहब!",जब केस जीतने के बाद जायसवाल ने पहली बार ये बात कही थी तो कामिनी को अच्छा लगा था,कल फोन पे पार्टी का इन्विटेशन देते वक़्त उसने ये बात कुच्छ ऐसे दोहराई थी कि कामिनी को शर्मिंदगी महसूस हुई पर आज शायद ये पचसवाँ मेहमान था जिस से वो ये बात कह रहा था & अब कामिनी को कोफ़्त होने लगी थी.वो बहाने से दोनो के पास से हटी & 1 गुज़रते हुए वेटर की ट्रे से मोकक्थाइल का ग्लास उठा कर 1 कोने मे खड़ी हो पीने लगी. "आपका मुँह दर्द कर रहा होगा ना?",कामिनी ने चौंक कर गर्दन घुमाई तो पाया कि लगभग उसी की उम्र का एक 6 फ्ट का लंबा,गोरा,क्लीन-शेवन,हॅंडसम शख्स खड़ा है & उसके चेहरे पे 1 शरारत भरी पर भली मुस्कान सजी है. "जी?!" "मैं काफ़ी देर से देख रहा हू,मिस्टर.जायसवाल आपको हर गेस्ट से 1 ही बात कह के इंट्रोड्यूस करवा रहे हैं & आपको ज़बरदस्ती मुस्कुराना पड़ रहा है.अब ऐसे मे मुँह तो दुखेगा ही ना!",उसने आख़िरी लाइन कुच्छ इस अंदाज़ मे कही की कामिनी को हँसी आ गयी,"आपकी तारीफ?" "करण मेहरा",उसने अपना हाथ कामिनी की तरफ बढ़ाया,"..& मेरा भी हाल कुच्छ-2 आप ही के जैसा है." "वो कैसे?",कामिनी ने उस से हाथ मिलाया. "मैं प्लेक्ट्रॉनिक्ष कंपनी के सेल्स & मार्केटिंग डिविषन का रीजनल मॅनेजर हू & जायसवाल साहब 8हमारे बड़े डीलर्स मे से 1 हैं.अब उनको नाराज़ करना तो अपने पैरो पे खुद कुल्हाड़ी मारने जैसा होता तो मुझे इस पार्टी मे आना पड़ा.आपकी तरह मैं भी यहा आए काफ़ी लोगो को नही जानता हू.आपको ज़बरदस्ती मुस्कुराना पड़ रहा है & मुझे अकेले बोर होना पड़ रहा है!",दोनो हंस पड़े. "मैं कामिनी शरण हू." "अब आपके बारे मे कौन नही जानता-आप नही होती तो जायसवाल साहब तो लुट गये होते!",दोनो 1 बार फिर खिलखिला उठे.तभी कारण ने हँसी रोक कर संजीदा शक्ल बना ली,"लीजिए,आपका शुक्रगुज़ार फिर से आपको ढूंढता चला आ रहा है.",कामिनी ने परेशानी से आँखे उपर की & फिर मुस्कुराते हुए घूमी. "मेडम,आइए आपको अपंहे सबसे खास मेहमान से मिलवाऊं." "एक्सक्यूस मी.",कामिनी ने करण से कहा & जायसवाल के साथ चली गयी.

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Posted : 02/10/2010 8:33 pm
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"इनसे मिलिए,मेडम मिस्टर.शत्रुजीत सिंग & उनकी पत्नी.",सामने 6'3" का 1 कसरती बदन वाला सांवला सा हॅंडसम शख्स खड़ा था...तो ये था शत्रुजीत सिंग,अमरजीत सिंग का बेटा.अमरजीत सिंग पंचमहल के एंपी थे & त्रिवेणी ग्रूप के मालिक & अभी 3 महीने पहले ही उनका देहांत हुआ था.त्रिवेणी ग्रूप कन्स्ट्रक्षन,आइरन ओर एक्सपोर्ट,ऑटो पार्ट्स,सेमेंट मॅन्यूफॅक्चरिंग के बिज़्नेस से जुड़ा 1 काफ़ी बड़ा नाम था.शत्रुजीत सिंग की तस्वीरे कामिनी को हुमेशा अख़बारो के पेज 3 मे छप्ने वाली हाइ प्रोफाइल पार्टीस की तस्वीरो मे नज़र आती रहती थी.उसकी इमेज 1 प्लेबाय की थी. "..ये नही होती तो मैं तो लुट ही गया था!",जायसवाल फिर से वही बात कह रहा था. "आपने ऐसा कैसे सोच लिया था,जायसवाल साहब?ये संतोष चंद्रा साहब की शागिर्द हैं.जब इन्होने आपका मुक़दमा लड़ने की हामी भरी थी,आपको तो तभी निश्चिंत हो जाना चाहिए था कि अब आप केस ज़रूर जीतेंगे.",उसने कामिनी की तरफ हाथ बढ़ाया. "आपको कैसे पता कि मैं चंद्रा सर की असिस्टेंट थी?",कामिनी ने हाथ मिलाया,शत्रुजीत की बड़ी सी हथेली मे उसका नाज़ुक सा कोमल हाथ जैसे खो सा गया.शत्रुजित ने उसके हाथ को हल्के से दबाया तो कामिनी के बदन मे झुरजुरी सी दौड़ गयी.वो बेबाक निगाहो से उसकी आँखो मे झाँक रहा था.रीमा को उसका हाथ दबाना 1 प्लेबाय की हरकत लगी पर उसकी आँखो मे कही भी छिछोरपन नही था. "चंद्रा साहब हुमारे ग्रूप के लीगल आड्वाइज़र थे & हमारे सारे केसस वही हॅंडल करते थे.अब उनकी तबीयत कुच्छ ठीक नही रहती सो उन्होने काम करना कम कर दिया है & अब वो हमारे केस नही देखते.",कामिनी को थोड़ी शर्म आई की वो अभी तक अपने गुरु का हाल पुच्छने 1 बार भी नही गयी थी.उसने उसकी पत्नी की तरफ हाथ बढ़ाया,"हेलो!आइ'एम कामिनी शरण." "हाई!आइ'एम नंदिता.",उस खूबसूरत महिला ने उस का बढ़ा हाथ थाम लिया.दोनो मिया-बीवी की उम्र 35 के करीब होगी पर दोनो 29-30 बरस से ज़्यादा के नही लगते थे. "चलिए,खाना खाते हैं.",जायसवाल सबको खाने की टेबल की तरफ ले गया.

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Posted : 02/10/2010 8:33 pm
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रात बिस्तर पे कामिनी नंगी पड़ी हुई थी.आज वो पार्टी मे कयि लोगो से मिली पर 2 ही लोग ऐसे थे जिन्होने उसके उपर कोई असर किया था.पहला था करण जिसका अच्छे बर्ताव & खुशदील मिज़ाज उसे बहुत पसंद आया था,उसने 1 बार भी उसके साथ फ्लर्ट करने की कोशिश नही की थी. और दूसरा शख्स था शत्रुजीत सिंग.वो 1 अय्याश के रूप मे मशहूर था..तो क्या उसकी पत्नी को उस बात से कोई परेशानी नही होती थी?वो तो अपने पति की बेवफ़ाई ज़रा भी बर्दाश्त नही कर पाई थी,फिर नंदिता कैसे उसके साथ रह लेती थी?शत्रुजीत के हाथो की छुअन याद आते ही उसके नंगे बदन मे झुरजुरी दौड़ गयी & उसका हाथ उसकी चूत से सॅट गया.कैसी बेबाक नज़रे थी शत्रुजीत की,लगता था जैसे उसके अंदर तक झाँक रही हो. दोनो ही मर्द हॅंडसम थे पर स्वाभाव कितना अलग था दोनो का!कामिनी का दूसरा हाथ उसके सीने को दबाने लगा.दोनो मर्दो की याद से उसके बदन मे कसक सी उठने लगी थी.कामिनी अपनी उंगली से अपने चूत के दाने को रगड़ती हुई उस कसक को शांत करने की कोशिश करने लगी.वो जानती थी कि थोड़ी देर मे वो झाड़ जाएगी & फिर उसे नींद आ जाएगी पर उसके दिल को वो सुकून नही मिल पाएगा जिसकी उसे तलाश थी.वो सुकून तो केवल 1 मर्द की बाहो मे ही उसे मिल सकता था. पर जब तक कोई मर्द उसकी ज़िंदगी मे नही आता,उसे खुद ही अपनी प्यास बुझानी होगी.उसने करवट ली & अपने हाथ को अपनी जाँघो मे भींच अपने हाथ की रफ़्तार तेज़ कर अपनी मंज़िल की ओर बढ़ने लगी.

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Posted : 02/10/2010 8:35 pm
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पंचमहल स्पोर्ट्स कॉंप्लेक्स के जॉगिंग ट्रॅक पे सवेरे 7 बजे कानो मे इपॉड लगाए कामिनी भागी जा रही थी.उसने काले रंग की टी-शर्ट & ट्रॅक पॅंट पहनी थी,जोकि उसके बदन से चिपकी हुई थी.इस लिबास मे उसके बदन की गोलाइयाँ कुच्छ ज़्यादा उभर रही थी & सवेरे की सैर कर रहे बूढ़े & बाकी जॉगर्स को ललचा रही थी. उनकी निगाहो से बेपरवाह कामिनी जॉगिंग कर रही थी कि तभी उसके बगल मे जॉगिंग करते 1 शख्स ने उसके कंधे पे हाथ रखा,"हेलो!" कामिनी ने भागते हुए गर्दन घुमाई & उसके रसीले होंठो पे मुस्कान खिल उठी,उसने कान से इपॉड के प्लग्स निकाले,"हेलो!मिस्टर.मेहरा.",पार्टी की रात को 1 हफ़्ता बीत चुका था & कामिनी को ये मलाल था कि उसने करण से उस दिन ज़्यादा बातचीत क्यू नही की-हो सकता था ऐसा करने से अगली मुलाकात का कोई रास्ता खुल जाता.इसीलिए करण को देख उसे बहुत खुशी हुई. "प्लीज़,ये मिस्टर.मेहरा मत कहिए केवल करण कहिए,कामिनी जी.लगता है जैसे जॉगिंग नही,ऑफीस मे बैठा कोई मीटिंग कर रहा हू!" "ओके.तो आप भी मुझे कामिनी जी नही,केवल कामिनी कह के पुकारेंगे.",कामिनी हंस पड़ी. "ओके.डन!",उसने अपना हाथ कामिनी की ओर बढ़ाया & कामिनी ने अपना हाथ आगे कर उस से हाथ मिला लिया. "कामिनी,आपको पहले यहा नही देखा?" "मैं कभी-कभार ही आती थी,पर अभी 3 दिन पहले तय किया की रोज़ आऊँगी,कुच्छ वर्ज़िश तो होनी चाहिए ना!वरना तो दिन भर कुर्सी पे बैठे रहो." "बिल्कुल सही सोचा है आपने.अगर बिज़्नेस टूर पे ना राहु,तो मैं तो यहा रोज़ आता हू." "यानी की अब आप से रोज़ मुलाकात होगी ?" "बिल्कुल."

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Posted : 03/10/2010 12:31 am
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आज किसी केस की सुनवाई नही थी,इसीलिए कामिनी अपने ऑफीस जाने के लिए तैय्यार हो रही थी.काली पॅंट पे नीले रंग की धारियो वाली फॉर्मल शर्ट डाल कर वो आईने मे देखती हुई उसके बटन लगा रही थी.उसकी निगाह तो शीशे पे थी पर दिमाग़ मे सवेरे कारण से हुई मुलाकात घूम रही थी. कारण टी-शर्ट & शॉर्ट्स मे जॉगिंग करने आया था & उस से बाते करते वक़्त कामिनी चोर निगाहो से उसकी पुष्ट जंघे & बालो भारी टाँगो को देख रही थी.1 बार जब कारण उस से थोडा आगे हो गया तो उसकी नज़र उसकी कसी गंद पे पड़ी तो उसके दिमाग़ मे अचानक 1 तस्वीर उभरी की वो उसकी चूत मे अपना लंड घुसाए उसके उपर पड़ा है & वो उसकी गंद को अपने हाथो से मसल्ते हुए अपने नाख़ून उसमे गढ़ा रही है. शर्ट का आख़िरी बटन लगाते ही उसका मोबाइल बजा & वो अपने सपने से बाहर आई & उसकी निगाह शीशे मे अपने अक्स से जा मिली & शर्म की लाली उसके चेहरे पे फैल गयी-कैसी,कैसी बाते सोच रही थी वो! अपनेआप पे मुस्कुराते हुए उसने मोबाइल उठा कर देखा,उसकी सेक्रेटरी रश्मि फोन कर रही थी,"हेलो,रश्मि.कहो क्या बात है?" "गुड मॉर्निंग,मॅ'म.अभी मिस्टर.षत्रुजीत सिंग की सेक्रेटरी का फोन आया था,वो अपने बॉस के लिए इम्मीडियेट अपायंटमेंट माँग रही थी.मैने तो कह दिया कि अभी तो 2-3 दीनो तक मुश्किल है पर वो मान ही नही रही.वैसे अगर चाहे,मॅ'म तो आज दोपहर 12 बजे का टाइम मैं उन्हे दे सकती हू.अब बताएँ क्या करना है?" "ह्म्म..ज़रा सोचने दो..",आख़िर ये शत्रुजीत सिंग को उस से क्या काम आन पड़ा?..& वो भी इतनी अर्जेन्सी किस बात की है..?,"..रश्मि.." "जी,मॅ'म." "उन्हे आज 12 बजे का टाइम दे दो." "ओके,मॅ'म." ".. मुकुल आ गया?" "जी,अपनी टेबल पे कुच्छ काम रहा है." "ठीक है.उस से कहना विद्या खन्ना वाले केस की डीटेल्स रेडी रखे.मैं बस आधे घंटे मे पहुँचती हू." "ओके,मॅ'म.मैं अभी कह देती हू."

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Posted : 03/10/2010 12:31 am
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उधर घड़ी ने 12 बजाए & इधर रश्मि ने कामिनी को इंटरकम पे शत्रुजीत सिंग के आने की खबर दी.आदमी वक़्त का पाबंद था & ये बात कामिनी को बहुत अच्छी लगी.वक़्त की कद्र ना करने वालो से उसे बहुत चिढ़ होती थी. दरवाज़ा खुला & शत्रुजीत सिंग 2 और लोगो के साथ उसके कॅबिन मे दाखिल हुआ,"हेलो,मिस.शरण." "हेलो,मिस्टर.सिंग & यू कॅन कॉल मी कामिनी.प्लीज़ बैठिए.",उसने खड़े होकर उसके साथ आए बाकी 2 लोगो का भी सर हिला के अभि वादन किया & अपने डेस्क के दूसरी तरफ रखी कुर्सियो की तरफ इशारा किया. "थॅंक यू.",शत्रुजीत & उसके साथ आए दो लोगो मे से बुज़ुर्ग सा दिखने वाला शख्स तो बैठ गया पर वो तीसरा आदमी खड़ा ही रहा."ये हैं मिस्टर.जयंत पुराणिक,हमारे ग्रूप को यही चलाते हैं.मैं तो बस नाम का मलिक हू,ग्रूप की असली कमान तो अंकल जे के हाथो मे है." "हेलो,सर.",कामिनी ने पुराणिक की ओर देखा,वो 1 50-55 बरस का शख्स था जिसके बॉल पूरे के पूरे सफेद हो चुके थे.चेहरे पे 1 बहुत सौम्य मुस्कान थी.ग्रे सूट & नीली शर्ट मे बैठे पुराणिक को देख कामिनी को ऐसा लगा जैसे कि वो 1 यूनिवर्सिटी प्रोफेसर के सामने बैठी है.उसे वो 1 निहायत ही शरीफ & समझदार इंसान लगा. "हेलो,मिस.शरण.",जवाब मे पुराणिक मुस्कुराए. "..और ये है पाशा,अब्दुल पाशा,मेरा छ्होटा भाई..",कामिनी चौंकी पर उसने अपने चेहरे पे कोई भी ऐसा भाव आने नही दिया...दोनो अलग-2 मज़हब के थे और भाई!पर खैर उसे क्या करना था इस बात से.. "हेलो,मिस्टर.पाशा.",उसने उस इंसान की तरफ देखा.25-26 साल का बहुत गोरा,खूबसूरत जवान,उसके बॉल गर्दन तक लंबे थे & चेहरे पे हल्की दाढ़ी थी.कद तो शायद शत्रुजीत से भे 2-3 इंच ज़्यादा ही था & बदन भी उसी के जैसा कसरती.उसने सफेद शर्ट & डीप ब्लू जीन्स पहन रखी थी.शर्ट की बाज़ुएँ कोहनियो तक मूडी थी & उसकी मज़बूत बाहे सॉफ दिख रही थी. कामिनी 1 बेहद निडर लड़की थी पर पाशा को देख उसे थोडा डर महसूस हुआ.कारण था पाशा की हरी आँखें-झील के रंग की आँखे.पर किसी बर्फ़ीली झील की तरह बिल्कुल ठंडी थी वो आँखे,लगता था जैसे खून जमा देंगी. "हेलो.",पाशा ने जवाब दिया. "कहिए क्या काम आ पड़ा मुझसे?" "कामिनी जी,मैं आपके पास 1 रिक्वेस्ट करने आया हू." "हां,हां.कहिए.",उसका चपरासी कोल्ड ड्रिंक के ग्लास लाकर टेबल पे रख रहा था.उसने उस खड़े हुए शख्स को भी 1 ग्लास दिया पर उसने सर हिलाकर मना कर दिया. "मैं चाहता हू कि आप हमारे ग्रूप की लीगल आड्वाइज़र बन जाएँ."

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Posted : 03/10/2010 12:32 am
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"पर चंद्रा सर तो ऑलरेडी आपके आड्वाइज़र हैं?" "आपको शायद याद नही,कामिनी.मैने उस दिन पार्टी मे आपसे कहा था कि उनकी तबीयत अब ठीक नही रहती तो वो अब हमारे केसस नही देख पाते.आपका नाम भी उन्होने ही हमे सुझाया है." "अगर सर ने कहा है तब तो मैं मना नही कर सकती पर फिर भी मुझे 2 दिन की मोहलत दीजिए थोड़ा सोचने के लिए." "ज़रूर.टेक युवर टाइम...तो हम चले?आप फ़ैसला लेके मुझे खबर कर दीजिएगा." "ओके,मिस्टर.सिंग & आइ मस्ट से आइ'एम होनोरेड बाइ युवर ऑफर." "थॅंक यू,कामिनी.",शत्रुजीत ने अपना हाथ आगे किया तो कामिनी ने उसे थाम लिया.1 बार फिर उस बड़े से हाथ मे उसका कोमल हाथ खो गया & उसके बदन मे झुरजुरी सी दौड़ गयी.

"खुश रहो,बेटी.आओ बैठो",कामिनी ने आड्वोकेट संतोष चंद्रा के पाँव च्छुए.षत्रुजीत के जाने के बाद ही उसने फ़ैसला कर लिया था कि आज वो चंद्रा साहब से मिलने उनके घर ज़रूर जाएगी. "आंटी कहा हैं,सर?",कामिनी सोफे पे बैठ गयी. "मैं यहा हूँ,आज याद आई हमारी !",चंद्रा साहब की पत्नी ड्रॉयिंग हॉल मे दाखिल हुई तो कामिनी ने उठ कर उनके भी पाँव च्छुए. "जीती रहो.",उसका हाथ पकड़ उन्होने बड़े सोफे पे उसे अपने साथ बिठा लिया. "सॉरी,आंटी.सोच तो बहुत दीनो से रही थी पर हुमेशा कुच्छ ना कुच्छ काम बीच मे आ जाता था.मुझे भी बहुत बुरा लग रहा था कि मैं अभी तक सर का हाल पुच्छने नही आ सकी." "मेरा हाल क्या पूच्छना,बेटी.बुढ़ापे मे ये सब तो लगा ही रहता है.और अपनी आंटी की बातो पे ज़्यादा ध्यान मत दो,मैं समझता हूँ तुम्हारी परेशानी." "हां भाई.अपनी आंटी की बात पे नही केवल अपने सर की बात पे ध्यान देना!"चंद्रा साहब & कामिनी हँसने लगे. "कामिनी,आज का खाना तुम यही खओगि.",नौकर शरबत & कुच्छ नाश्ता रखा गया था.म्र्स.चंद्रा ने कामिनी लो शरबत का ग्लास बढ़ाया. "नही,आंटी.आप बेकार मे परेशान होंगी." "चुप चाप से बैठी रह!इतने दिन बाद आई है & बस 5 मिनिट मे भागना चाहती है.ज़्यादा नखरे करेगी तो फिर सवेरे के नाश्ते के बाद ही जाने दूँगी.",1 बार फिर ड्रॉयिंग हॉल मे हँसी का शोर गूँज उठा. "तो शत्रुजीत ने तुम्हे ऑफर दे ही दिया?",चंद्रा साहब दोनो औरतो के साथ खाने की मेज़ पे बैठे थे & नौकर सबको खाना परोस रहा था. "..उसने ठीक कहा कामिनी,मैने ही उसे तुम्हारा नाम सुझाया था." "सर,मैने इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी आज तक नही उठाई है.1 पूरे बिज़्नेस हाउस को क़ानूनी मशविरे देना..मुझे नही लगता मैं ये कर पाऊँगी.",रीमा ने 1 नीवाला मुँह मे डाला. "हर बड़े काम के पहले ऐसा ही लगता है,बेटी.पर ये इस बात का इशारा होता है कि हम उस काम को करते वक़्त पूरी तरह से मुस्तैद रहेंगे कि कही हमसे कोई ग़लती ना हो जाए.कुच्छ लोग इस घबराहट के मारे काम को हाथ नही लगाते पर वो चंद लोग जो इस घबराहट के बावजूद काम करने का बीड़ा उठाते हैं,वो ज़रूर कामयाब होते हैं." "सर,मैं आपकी बात मान कर शत्रुजीत सिंग को हाँ तो कर दू,लेकिन मैं उसके बारे मे बिल्कुल नही जानती कि आख़िर वो किस तरह का इंसान है & उसके काम करने का ढंग कैसा है." "मुझे तो वो 1 नंबर का अय्याश लगता है,इतने शरीफ बाप का ऐसा बिगड़ा बेटा!",म्र्स.चंद्रा कामिनी के प्लेट मे थोड़ी सब्ज़ी डालते हुए बोली. "वो उसकी ज़ाति ज़िंदगी है,उस से उसके वकील का क्या लेना-देना,भाई!"

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Posted : 03/10/2010 12:32 am
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