चोद दूँगा तुझे
 

चोद दूँगा तुझे  

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चिलचिलाती गर्मी , कॉलेज में एडमिसन फॉर्म जमा की आख़िरी तारीख, हज़ारो लड़के लड़कियाँ काउंटर पर ऐसे चिपके हुए थे जैसे किसी मरे हुए डंगर को खाने के लिए चील कव्वे. पहले मेरा लेलो , पहले मेरी ले लो, कि कांव कांव से पूरा कॉलेज गूँज रहा था. कोई लाइन तोड़ कर पहले अपना फॉर्म पकड़ाने की कोशिश करता तो बाकी लोग उसे उठा कर पीछे फेंक देते. कोई लाइन में खड़े लोगो की टाँगो के बीच से सबके लंड को छूते हुए अपना हाथ निकालकर फॉर्म देने की ना काम कोशिश कर रहा था तो कोई अपने जान पहचान वाले से मिलकर लाइन के बीच में घुसने का जुगाड़ लगा रहा था. कोई अपने सड़े हुए पाद छोड़कर लोगो को बेहोश कर रहा था तो किसी के बगल से आती पसीने की बदबू से लोग चक्कर खा कर गिर रहे थे. बाकी बची कुची कसर गर्मी और धूंप ने पूरी कर रखी थी. उसी लाइन में सबसे पीछे एक पतला दुबला, बंदर सा मूह लिए, 23-24 साल का एक भोन्दु सा दिखने वाला लड़का खड़ा था. पीले रंग की पेंट के उपर हरे रंग की टी-शर्ट साफ साफ बता रही थी की वो कितना बड़ा चूतिया है. पैरो में सफेद रंग के कपड़ो वाले जूते इस तरह इतरा रहे थे मानो इनसे सुंदर पूरे कॉलेज में कोई नहीं. हाथ में लटकी काले रंग की पन्नी ( पोलिथीन) ऐसे शर्मा रही थी जैसे उसमे वो सॅनिटरी नॅपकिन छुपाकर लाया हो. दूसरी बाजू में लटका नीले रंग की धारियों वाला भूरे रंग का थैला साफ साफ बता रहा था कि ये ज़रूर उसकी किसी पुरानी पतलून के टुकड़ो की निशानी है. दोडा और उपर नज़र डाली तो आँखों से चिपका गोल शीशो वाला भारी भरकम चस्मा नाक को ऐसे पिचका रहा था मानो किसी बिल्ली ने किसी चूहे को दबोच रखा हो. सरसो के तेल से चिपके उसके टेड़े मेडे बॉल उसके भोन्दुपन में चार चाँद लगा रहे थे. तभी किसी ने उसकी पिचकी हुई गांड पर हाथ मारा और कहा “चल बे ,लोडू, जल्दी जल्दी आगे बढ़, पैरो में मेहंदी भी लगा कर आया है क्या” और वहाँ खड़ी बेरहम जनता ठहाके लगा कर हंस रही थी. वो पलटा और जैसे ही कुछ बोलने के लिए उसने अपना मुह खोला तो जो नज़ारा सामने आया उसने तो उसे सर्टिफाइड चूतिया बना दिया . नीचे के 4 दाँत इतने बड़े थे मानो ताजमहल के बगल में खड़ी वो चार मीनारे एक साथ चिपका दी हों. “ धक्का क्यूँ देते हो, आगे वाले बढ़ेंगे तभी तो मैं चलूँगा” वो भोन्दु अपना कंकाल रूपी सीना तानते हुए बोला.

इधर ये सब चल ही रहा था की तभी एक सोने की तरह चमचमाती कार कॉलेज के अंदर आकर रुकी, देखने से ही लग रहा था की उसमे से उतरने वाला इंसान किसी करोड़पति से कम नहीं होगा, और था भी कुछ ऐसा ही. टाइट जीन्स और उससे भी टाइट शर्ट पहने, आँखों पे काला चस्मा लगाए एक बहुत ही खूबसूरत लड़की उस कार से बाहर निकली. धूप से भी तेज चमकता रंग, खरबूजे जैसे बूब्स, तरबूज जैसी गांड और उस टाइट शर्ट का उपर का खुला हुआ बटन किसी का भी लंड खड़ा करने के लिए काफ़ी था. और ये बात तब सच साबित हो गयी जब उस लड़की को देखते ही लाइन में लगे लड़को के लंड एक दूसरे की गांड में चुभने लगे. सब एक दूसरे को घूर कर यही बताना चाह रहे थे की थोड़ी दूरी बनाकर खड़े रहें. पर एक लंड था जो अभी भी सूखे हुए छुआरे की तरह मुरझाया हुआ उस भोन्दु के कच्छे में लटक रहा था. पूरा कॉलेज उस लड़की को आँखें फाड़ फाड़ कर देख रहा था और हमारे भोन्दु जी ने तो उसकी तरफ एक नज़र भी नहीं डाली. उन गोरे चिट्टे हाथो में नीले रंग की फाइल अपने मखमली बूब्स से दबाए जब वो लड़की एडमिसन काउंटर की तरफ आई तो जैसे वहाँ खड़े लड़को की लॉटरी लग गयी. कोई उसे देख कर लार टपका रहा था, तो कोई बाहर से ही अपने लंड पर हाथ फेर कर उसे शांत करने की कोशिश कर रहा था. कोई उस लड़की को छुने भर को तरस रहा था तो कोई उससे बात करने को मरा जा रहा था. कुल मिलाकर सभी लड़को का ध्यान एडमिसन फॉर्म से हटकर बस उस लड़की की तरफ ही चला गया था. ना तो किसी को गर्मी की परवाह रही और ना ही उस ज्वालामुखी रूपी धूंप की. तभी एक मनचले लड़के ने जानबूझ कर उस लड़की को धक्का मारा और उसकी फाइल उसके हाथ से छूट कर नीचे गिर गयी . जैसे ही फाइल उठाने के लिए वो नीचे झुकी तो सारे लड़के लाइन छोड़कर उसके बूब्स की एक झलक पाने के लिए उसके सामने खड़े हो गये, और घंटो से अपनी बारी का इंतज़ार करने वाले ये भी भूल गये की अब उन्हे फिर से पीछे जाकर लाइन में लगना पड़ेगा. पर ग़लती उनकी नहीं उस लड़की की खूबसूरती की थी, उसे देख कर अपने आप को रोक पाना नामुमकिन था. जिस वक़्त सारे लड़के लाइन छोड़ कर उसके बूब्स देखने लग गये उस वक़्त हमारे भोन्दु जी ने अपना दिमाग़ लगाया और पहुँच गये लाइन में सबसे आगे अपना फॉर्म जमा करने. जैसे ही वो लड़की वापिस उठी, सारे लड़के हड़बड़ा कर एक दूसरे की और देखने लगे की कौन किसके पीछे खड़ा था, अब किससे कहें की लाइन में कौन आगे था, और जिस लड़की के चक्कर में उन्होने अपने दिन भर की मेहनत खो दी वो तो बिना किसी रोक टोक के एडमिसन ऑफीस के अंदर चली गयी.

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Posted : 25/04/2013 1:20 pm
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उस लड़की के अंदर जाते ही सारे खड़े लंड इस तरह झुक गये मानो किसी ने उनके साथ मज़ाक किया हो. भोन्दु जी सबसे आगे थे तो ज़ाहिर सी बात है कि अपना एडमिसन फॉर्म देने में उन्होने ज़रा भी देरी नहीं की, अंदर जो महिला फॉर्म ले रही थी वो भी कम चालू नहीं थी, एक हाथ से वो फॉर्म ले रही थी और दूसरे हाथ से अपनी सलवार के ठीक बीचो बीच खुजाए जा रही थी. नये नये लंड लेने का शौक था उसे. जो लड़का उसे पसंद आता उसका फॉर्म लेते वक़्त वो उसे अपनी चूत में लगी आग का इशारा कर दिया करती थी. पर चुदने की आग में वो इतनी मस्त हो गयी कि ग़लती से उसने हमारे भोन्दु जी का हाथ पकड़ लिया, भोन्दु जी का फॉर्म और हाथ दोनो ही उनके सर में लगे सरसो के तेल से तरर बतर थे, तेल भी इतना बेशर्म था की भोन्दु जी के फॉर्म पर इस तरह समाया की भारत का मानचित्र बन गया. जैसे ही वो चिपचिपा हाथ उस महिला के हाथ में आया वो बिदक उठी और बोली “ क्या है ये सब, खड़े खड़े ही निकाल दिया क्या, छी, सत्यानाश कर दिया मेरे दिमाग़ का, और ये फॉर्म की क्या हालत करके लाया है, इसी से पोंछ दिया क्या”. भोन्दू जी बड़े प्यार से बोले “मेडम जी, सरसो का तेल है, यकीन ना हो तो चाट लो”. इतना कहने की देर थी, मेडम की गांड में आग लग गयी , कुर्सी से उठी और झिल्लाते हुए बोली “ ये पकड़ अपना फॉर्म, और बाहर जाकर चाट ले अपना सर-सो-का-तेल , मुझसे मज़े लेता है, देखती हूँ कौन करवाता है तेरा एडमिसन , दोबारा काउंटर पे आया तो चप्पल फेंक कर मारूँगी, शक्ल बंदर सी और अक्ल गधे से भी बदतर्र”. भोन्दू जी का मानो मूत ही निकल गया, पिछ्ले 3 साल से जिस कोर्स में एडमिसन लेने के लिए वो बार बार एक ही क्लास के पेपर देते रहे कि एक बार 95% मार्क्स आ जाए तो इस कॉलेज में एडमिसन हो जाए, क्यूंकी इस कॉलेज में या तो 95% मार्क्स वालो को ही लेते हैं या फिर रहीसजादो को. जैसे ही मेडम जी ने फॉर्म उठा कर भोन्दु जी के मुह पर मारा, भोन्दु जी नर्वस हो गये और नर्वस होते ही उनका वो रूप सामने आया जो अभी तक उन्होने रोक रखा था, डरने की बात नहीं, भोन्दु जी ने कोई ऐसा काम नहीं किया जिससे आपको डर लगे, वो बस नर्वस होते ही “हकलाना” शुरू कर देते हैं. “ म म म म मेडम जी, म म म म मैने तो सच बोला था, आप गु गु गु गुस्सा क्यूँ हो रही हैं, ती ती तीन साल बाद म म म म मौका मिला है, मेरा फ फ फ फॉर्म ले लीजिए”. पर उस लंड की भूखी मेडम को भला भोन्दु जी पर क्यूँ तरस आता, उन्हे तो बस हट्टे कट्टे मर्दो के लंड चाहिए थे.

गांड सा मुह लटकाए भोन्दु जी उस लड़की कि कार पर अपना थैला रख कर रोने लगे, आँसुओं की स्पीड 360 किलोमीटर प्रति घंटा से कम नहीं थी और ऐसा लग रहा थी अगर ये बादल कुछ देर और बरसे तो कॉलेज में बाढ़ आ जाएगी. तभी उंगली में कार की चाबी को घुमाते हुए वो हसीन चूत एडमिसन ऑफीस से बाहर निकली और जैसे ही अपनी कार पर रखे भोन्दु जी के थैले को देखा ,वो बोली “छी, हटाओ इसे, किस चूतिए ने रखा ये कबाड़ा मेरी कार के उपर,”. भोन्दु जी ने अपनी मोर जैसी गर्दन उस लड़की की तरफ घुमाई, वो डर गयी और मन ही मन बोली ‘ ये तो सच में ही कोई चूतिया है’. भोन्दु जी ने चुप चाप अपने थैले को धनुष की तरह बाजू पर टाँग लिया, और अपने एडमिसन फॉर्म को किसी महबूबा के प्रेम पत्र की तरह देखते रहे, वो लड़की अपनी कार लेकर वापिस जाने लगी पर उसकी कार स्टार्ट नहीं हो रही थी, किसी लंडू ने उसकी कार के साइलेनसर में एक केला फँसा दिया था, सोचा होगा साइलेनसर से केला निकालने के लिए जब वो झुकेगी तो आगे से उसके रसीले बूब्स दिखेंगे और पीछे से जीन्स भी सरक कर गोरी चिट्टी गांड की हल्की सी झलक दिखा देगी. मुट्ठ्लों को इतना ही बहुत होता है लंड झाड़ने के लिए . काफ़ी देर कार के सेल्फ़ की गांड मारने के बाद वो लड़की कार से बाहर निकली और दरवाजे में अपनी लात मारते हुए बोली ‘अब इसकी गांड किसने मार ली, अच्छी भली तो छोड़ कर गयी थी, अब क्या करूँ’. भोन्दु जी बोले, “इतनी महँगी कार भी खराब हो जाती है क्या, चलिए आप आगे बैठिए, मैं पीछे से धक्का मार देता हूँ, आपको तकलीफ़ भी नहीं होगी’ उस लड़की ने सोचा की चलो ये चूतिया किसी काम तो आया. भोन्दु जी ने अपना थैला और एडमिसन फॉर्म ड्राइवर सीट के सामने रख दिया और पीछे जाकर धक्का लगाने लगे, कुछ देर मेहनत करने के बाद भी जब कार ने हिलने से माना कर दिया तो पास खड़े कुछ लड़को ने भोन्दु जी को साइलेनसर की तरफ इशारा किया और वहाँ से चले गये. भोन्दु जी ने केला निकाला और बिना देखे ही पीछे फेंक दिया जो एक ऐसे इंसान को जाकर लगा जो बहुत जल्द उससे प्रेम मिलाप करने वाला था. साइलेनसर की गांड से केला निकलते ही कार फट से स्टार्ट हो गयी और यूयेसेस लड़की ने भोन्दु जी को उनका थैला पकड़ाते हुए “थैंक यू” बोल दिया. भोंडू जी अपना थैला लेकर कॉलेज से बाहर जाने लगे तभी उस लड़की की नज़र तेल से लथपथ एक एडमिसन फॉर्म पर पड़ी, वो उसे रददी पेपर समझ कर फेकने ही वाली थी कि तभी उसमे बड़े बड़े शब्दो में लिखा ’मार्क्स 95.7%’ दिखाई दिया तो वो उस फॉर्म को बड़े ध्यान से पढ़ने लगी ...

नाम – राजा पेंचोद
पिता का नाम – श्री सम्राट पेंचोद
माता का नाम - श्रीमती गांड हरी पेंचोद ( असल में नाम गंधारी था पर प्रिंटिंग मिस्टेक की वजह से गांड हरी छप गया था)
पता : ग्राम व पोस्ट – मरवाना, उत्तर प्रदेश.
मार्क्स : 95.7%

फॉर्म पढ़कर उस लड़की की आँखें आगे पीछे हो रही थी, शकल से एक नंबर का गांडू और मार्क्स 95%, उसने गाड़ी का शीशा उतार कर भोन्दु जी को आवाज़ दी “ राजा पेन...छ्चोड़” . भोन्दु जी रुके और पीछे मुड़े, लड़की ने उसे अपनी तरफ बुलाया और कहा “ तुम्हारा नाम राजा है ना, ये तुम्हारा ही एडमिसन फॉर्म है” . भोन्दु जी ने 3 बार हाँ में सर हिलाया. उस लड़की ने पूछा “तो इसे यहाँ क्यूँ छोड़ कर जा रहे हो, काउंटर पर क्यूँ नहीं देते”. भोंडू जी दबी आवाज़ में बोले “ मेडम जी ने मना कर दिया मेरा लेने से” . लड़की बोली “क्या लेने से मना कर दिया, मेरा मतलब, क्यूँ लेने से मना कर दिया, चलो मेरे साथ”. और वो तूफान एक्सप्रेस की तरह भागती हुई सीधे उस काउंटर पे पहुँची जहाँ वो महिला अपनी सलवार पर हाथ फेर कर लड़को का मन बहला रही थी. काउंटर पर आते ही उस लड़की ने भोन्दु जी का अड्मिशन फॉर्म उस महिला के मुह में घुसाते हुए कहा “ज़्यादा खुजली रहती है तो इलाज क्यूँ नहीं करा लेती, मैं भेज दूं असली डॉक्टर को, कर देगा तुम्हारा परमाणेंट इलाज, ये अड्मिशन फॉर्म दोबारा वापिस करने की ग़लती ना करना, श्रीमती खुजली”. चौंकिए नहीं उस महिला का नाम खुजली नहीं श्रीमती खुसबू उत्तरंजलि था, हर वक़्त चूत को खुजलाने की उसकी आदत के चलते सबने उसके नाम को छोटा करके खु-जली रख दिया था. इतना कहकर वो तो कॉलेज से बाहर चली गयी पर वहाँ खड़ा एक एक लड़का हमारे भोन्दु जी को इस तरह देख रहा था जैसे भोन्दु जी सच में कहीं के राजा हों. अंदर से श्रीमती खुजली खुजाते हुए बोली “कैसे जानता है रे तू इस लड़की को, तेरे जैसो से तो बात भी ना करे, फिर कैसे जुगाड़ निकाल लिया”. भोन्दु जी ने भी मौके का फायदा उठाते हुए कहा “ दोबारा बुलाउ या फॉर्म जमा करती हो मेरा”. अड्मिशन फॉर्म जमा होते ही मानो भोन्दु जी के अंदर कोई आत्मा घुस गयी, उन्होने बन्दरो की तरह इधर उधर उछलना शुरू कर दिया, खुशी से इतने पागल हो गये की सामने से आती वाइस- प्रिन्सिपल श्रीमती रेणु को ही गले लगा लिया. फिर क्या था एक तो पहले ही किसी ने उनके मूह पे केला फेंक कर मार दिया उपर से ये चूतिया अपना चिपचिपा शरीर लिए श्रीमती रेणु से प्रेम-मिलाप कर रहा था. श्रीमती रेणु ने खींच के थप्पड़ भोन्दु जी के गाल पर दिया और बोली...

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Posted : 25/04/2013 1:20 pm
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“नालायक, दिखाई नहीं देता क्या, कोई जवान औरत देखी नहीं और लगे लिपटने, खूब जानती हूँ मैं तुम जैसे निकम्मो को, अड्मिशन के टाइम पर भीड़ में लड़कियों और औरतो को छेड़ने के बहाने यहाँ घुस आते हो, अभी अकल ठिकाने लगाती हूँ तुम्हारी , सेक्यूरिटी ....सेक्यूरिटी.. बाहर फेंको इस नमूने को और दोबारा अंदर दिखाई दे तो पुलिस के हवाले कर देना, जब टाँगो के बीच में पुलिस के डंडे पड़ेंगे तो सारी जवानी निकल जाएगी इस लफंडर की ”. श्रीमती रेणु ने अपने एके-47 रूपी मुह से निकली ताबड़तोड़ गालियों की बौछार से हमारे भोन्दु जी का सीना छलनी छलनी कर दिया और फिर एक बार नर्वस हो गये हमारे भोन्दु जी “ म म म माफ़ कर दीजिए म म म मेडम जी, म म म मैं तो फ फ फ फॉर्म जमा होने की ख ख ख खुशी में ग ग ग़लती से आपको प प पकड़ लिया, जा जा जा जानबूझ कर नहीं”. श्रीमती रेणु ने भोन्दु जी को इस तरह उपर से नीचे तक देखा जैसे वो उनका सीटी स्केन कर रही हों और अपने मोटे मोटे बूब्स पर हाथ मारते हुए ज़ोर से हँसती हुई बोली “ तू पढ़ेगा यहाँ, शक्ल देखी है तूने अपनी, जा जाकर किसी सर्कस में बंदर की एक्टिंग कर, तेरे जैसे नमूने नहीं पढ़ते यहाँ, बड़े बड़े टॉपर्स और रहीसजादे ही आते हैं यहाँ, और ना तो तू कहीं से भी रहीस लगता है और तेरे ढंग देखकर मुझे नहीं लगता तू कभी स्कूल भी गया होगा”. भोन्दु जी कुछ बोल पाते उससे पहले ही अंदर से श्रीमती खुजली की आवाज़ आई “रेणु मेडम, ये मुझे भी गंदे गंदे इशारे कर रहा था और मैने इसे यहाँ से भगा भी दिया था, पर वो वर्षा है ना, अपनी धोंस दिखा कर इसका अड्मिशन फॉर्म दे गयी मुझे”. श्रीमती रेणु तिलमिलाई हुए बोली “ तुझे तो सारी दुनिया ही गंदे इशारे करती है, तू ही तो विश्व-सुंदरी है ना यहाँ, और वर्षा की कैसी धोंस , 95% से कम वालो का अड्मिशन फॉर्म तूने लिया ही क्यूँ, नौकरी से निवालाउंगी तुझे, जो काम करना होता है वो तो करती नहीं और जो जो तू करती है वो मैं यहाँ बोल नहीं सकती.” श्रीमती खुजली घूरते हुए बोली “ 95.7% मार्क्स हैं इस कार्टून के, वरना मुझे क्या पागल कुत्ते ने चो, मेरा मतलब काटा है , जो मैं इसका फॉर्म लेती, कुछ दिखता है इसमे इसका लेने लायक” श्रीमती खुजली ने फिर अपनी हवस का परिचय देने की कोशिश की और अपनी गोल मटोल गांड को कुर्सी पर ज़ोर से पटक कर बैठ गयी. श्रीमती रेणु ने भोन्दु जी की तरफ आँखे चौड़ी करते हुए देखा और बोली “अभी तो फॉर्म जमा हुआ है, सिलेक्शन तो नहीं ना, देखती हूँ कैसे अंदर आता है तू”. भोन्दु जी बड़े प्यार से बोले “ जैसे लाइन में सबसे पीछे लगने के बावजूद , सबसे आगे आकर फॉर्म दे दिया”. श्रीमती रेणु अपनी जली फूँकी गांड हिलाते हुए अपने कॅबिन की ओर चली गयी.

एक तरफ हमारे भोन्दु जी का कॉमेडी शो चल रहा था और दूसरी और एक लंबा चौड़ा शरीर, ये बड़े बड़े मसल्स, माथे के उपर चढ़ाया हुआ ब्रांडेड़ काला चस्मा, दिखने में किसी फिल्मी हीरो जैसा, शहर के सबसे बड़े बिज़्नेसमॅन का बेटा वरुण अपनी टोली के साथ कॅंटीन की सीढ़ियो पर बैठा लड़कियों से मज़े ले रहा था. छोटी छोटी स्कर्ट और निक्कर पहने, चिकनी चिकनी टाँगो वाली, गोरी चिट्टी लड़कियाँ वरुण के दोनो ओर बैठी थी. वो कभी इस लड़की के गाल चूमता तो कभी उस लड़की की गुलाबी जाँघो पर हाथ फेरता, कोई लड़की उसके बालों में हाथ फेर रही थी तो कोई अपने हाथो से उसे चिप्स खिला रही थी. कुल मिलकर साहबजादे ऐसे लग रहे थे मानो किसी रियासत के राजकुमार. पूरा रौब था उसका कॉलेज में, कॉलेज क्या कॉलेज के बाहर भी वरुण किसी पहुँची हुई चीज़ से कम नहीं था. ना तो उसे किसी कॉलेज स्टाफ का डर था और ना ही फेल होने का. जैसा हट्टा कट्टा वो खुद था वैसे ही उसे साथी भी थे. तभी वहाँ एक और हसीन लड़की आई जिसने इतने कम कपड़े पहने हुए थे की अगर कोई पास जाकर गौर से देखे तो उसकी झाटों रहित चूत के साक्षात दर्शन हो जायें. अपनी गदराई गांड को आगे पीछे हिलाते हुए वो वरुण से बोली हाय वरुण, कैसी लग रही हूँ मैं”. वरुण पेप्सी की घूँट लेते हुए बोला “ एक नंबर की रंडी, जो अभी अभी चुदने को तैयार खड़ी है”. सारी टोली ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी . उसका नाम पूजा था जो कहने को तो वरुण की गर्लफ्रेंड थी पर उसने कभी वरुण को अपनी चूत चाटने तक का मौका नहीं दिया था. वो कॉलेज में सिर्फ़ लड़को के लंड खड़े करने आती थी पर चुदी आजतक किसी से भी नहीं थी. पूजा ने वरुण को धमकाते हुए कहा “ सबके सामने मुझे रंडी बोलता है, कितनी बार चोदा है तूने मुझे, और कितनो के साथ चुद्ते देखा है तूने”. वरुण आँख मारते हुए बोला “ गुस्सा क्यूँ होती है मेरी जान, अभी तेरी चूत इस लायक नहीं जो मेरा लंड झेल सके, एक झटके में बेहोश हो जाएगी और बेहोश चूत को क्या चोदना”. सारे लड़के लड़की फिर हँसने लगे और पूजा वरुण को उंगली दिखा कर अंदर कॅंटीन में चली गयी.

उधर हमारे भोन्दु जी भूख से परेशान थे उनके हाथ में जो काली पन्नी लटक रही थी उसमे उनका बेशक़ीमती लंच बॉक्स छुपा हुआ था. आस पास देखा तो वहाँ कहीं भी बैठकर खाने की जगह नहीं मिली, तो वो बिना किसी बात की शर्म किए सेक्यूरिटी गार्ड्स के पास बिछि एक बेंच पर अख़बार बिछाकर बैठ गये. जैसे ही भोन्दु जी ने अपना लंच खोलकर पहला टुकड़ा तोड़ा, बड़ी बड़ी मूच्छो वाले रावण रूपी एक सेक्यूरिटी गार्ड ने भोन्दु जी को डंडा दिखाते हुए कहा “ये तुम्हे खाने पीने की जगह दिखाई देती है, उठो यहाँ से और पीछे कॅंटीन में जाकर चरो”. भोन्दु जी ने गार्ड की तरफ देखा और मुस्कुरकर अपने चारमीनार रूपी दाँत दिखा दिए. गार्ड की झाँटे सुलग गयी और उसने भोन्दु जी को धमका कर भगा दिया. भोन्दु जी अपने पकवान लेकर कॅंटीन के पास पहुँचे तो बाहर बैठे वरुण ने उसे रोक लिया. “ओये, घन्टू इधर सुन, अंदर क्या करने जा रहा है बे”. भोंडू जी ने वरुण की खिल्ली उड़ाते हुए कहा “कॅंटीन के अंदर लोग क्या करने जाते हैं, वही करने जा रहा हूँ”. वरुण चिड गया और बोला “ज़्यादा श्याना बनता है बे, गांड तोड़ के हाथ में दे दूँगा, फिर लिए घूमना कॅंटीन में अपना पिछवाड़ा”. भोन्दु जी ने बड़े प्यार से कहा “ गांड तोड़ के हाथ में दे दोगे तो फिर खाना खा कर क्या करूँगा, निकलेगा कहाँ से”. इतना कहने भर की देर थी की वरुण की टोली ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी और वरुण के टटटे लाल होने लगे, वरुण ने भोन्दु जी की पतलून खींची और जैसे ही उसकी तरफ हाथ उठाने को हुआ वहाँ श्रीमती रेणु आ गयी और भोन्दु जी की गांड तुड़ने से बच गयी, श्रीमती रेणु ने भोन्दु जी की ओर देखा और बोली “तू गया नहीं यहाँ से, बोला ना तेरा अड्मिशन नहीं होगा, आ जाते हैं मुह उठा के” और इतना कहकर श्रीमती रेणु भी कॅंटीन का राउंड लेने चली गयी. वरुण ने भोन्दु जी का लंच छीना और बोला “क्या है बे इसमे”. भोंडू जी ने सीना तानकर कहा “इसमे मेरी मा के हाथ से बने लड्डू और परांठे हैं”. वरुण ने बिना खोले ही लंच उसे वापिस कर दिया और ज़ोर से हंसते हुए बोला “अबे लोडू , लंच में कोई लड्डू खाता है क्या, कहाँ से आया है बे तू”. भोन्दु जी को गुस्सा आ गया और बोले “तुमसे मतलब, मेरी मा ने मेरे लिए बनाए हैं, मैं खा लूँगा, तुम अपने काम से काम रखो वरना प्रिन्सिपल से शिकायत कर दूँगा”. इतना सुनते ही वरुण बोखला गया और भोन्दु जी के टटटे दबाते हुए बोला “ज़्यादा ज़बान चलाई तो काट के रख दूँगा”. भोन्दु जी की पेंट गीली होने ही वाली थी की तभी वरुण के मोबाइल की घंटी बाजी और उसने भोन्दु जी की जान बक्श दी. फोन उसके पापा का था “ या डॅड, बोलिए क्यूँ फोन किया, हाँ मैं कॉलेज में ही हूँ, नहीं वो तो यहाँ नहीं दिखाई दी, हो सकता है आई हो, मैं तो लाइब्ररी में पढ़ाई कर रहा हूँ अपने दोस्तो के साथ, जी डॅड, ओक डॅड, बाय डॅड”. फोन रखते ही वरुण से अपने दोस्तो से पूछा “सुनो बे, वर्षा आई थी क्या यहाँ, देखी किसी ने”. बिल्कुल सही पहचाना आपने ये वही वर्षा है जिन्होने भोन्दु जी के लिए श्रीमती खुजली की गांड मारी थी, वरुण की छोटी बहन और शहर के सबसे बड़े बिज़्नेसमॅन सुरेश चंद धींगरा की बेटी, जिसके नाम से वर्षा इंस्टीट्यूट, वर्षा ग्रूप ऑफ कंपनीज़, वर्षा होटेल्स, माल्स और ना जाने कितनी बड़ी बड़ी कंपनी देश विदेश में चल रही थी. वर्षा का नाम सुनते ही भोंडू जी इतराए और बोले “वो मेरे साथ ही थी, वो आगे थी और मैं पीछे से धक्का लगा रहा था”.

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Posted : 25/04/2013 1:21 pm
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वर्षा का नाम सुनते ही भोंडू जी इतराए और बोले “वो मेरे साथ ही थी, वो आगे थी और मैं पीछे से धक्का लगा रहा था”. इतना कहने की देर थी और वरुण ने खींच कर भोन्दु जी के मुह पर एक जोरदार तमाचा रख दिया और भोन्दु जी 50 फीट दूर जाकर गिरे, इससे पहले कि भोन्दु जी को अपनी ग़लती समझ आती वरुण के दोस्तो ने भोन्दु जी की टांगे हवा में उल्टी कर दी, वरुण ने भोन्दु जी के तेल से लथपथ बालो को पकड़ने की कोशिश की पर नाकाम रहा, भोंडू जी के मुह पर वरुण एक जोरदार लात मारने ही वाला था की पीछे से आवाज़ आई “ भाई, रुक जाओ”. सही समझा आपने, वो वर्षा ही थी, वरुण पीछे मुड़ा और बोला “ये साला, कुत्ता, तेरे बारे में उल्टा सीधा बोल रहा था, आज इसकी अकल ठिकाने लगता हूँ”. वर्षा अपने भाई के पास आई और बोली “ भाई, इसे तो मेरा नाम तक नहीं पता, उल्टा सीधा कैसे बोलेगा मेरे बारे में”. वरुण बोला “खुद ही पूछ ले इस हरामखोर से”. वर्षा ने भोन्दु जी की तरफ हाथ हिला कर इशारा किया और पूछा “ राजा, क्या उल्टा सीधा बोला तुमने मेरे बारे में मेरे भाई से”. चेहरे पर छपी 5 उंगलियाँ और हवा में उल्टे लटके हमारे भोन्दु जी की ट्यूबलाईट जली और वो हकलाते हुए बोले “ म म म मैने तो ब ब बस इतना बो बो बोला की , तुम कार में आगे ब ब बैठी थी और म म म मैं पीछी से धा धा धक्का लगा रहा था”. वरुण ने अपने दोस्तो को भोन्दु जी को सीधा खड़ा करने का इशारा किया और इससे पहले की वरुण कुछ बोल पता , वर्षा ने वरुण की और हैरान होते हुए पूछा “ इसमे उल्टा सीधा क्या था भाई, मेरी कार स्टार्ट नहीं हो रही थी, इसने धक्का लगाया और स्टार्ट हो गयी, मैने सोचा की कहीं दोबारा खराब ना हो जाए इसलिए वापिस घर जा कर दूसरी कार ले आई. इसमे राजा को इस तरह मारने की क्या बात थी”. अब वरुण कैसे बताए की हमारे भोन्दु जी ने पहले क्या बोला था और अब क्या बोल रहे हैं. कैसे बताए की हर लड़का चाहता है दुनिया की सारी लड़कियाँ उसका लंड चूसें, पर जब अपनी बहन के बारे में कोई ज़रा भी कुछ कह दे तो कैसे खून खौल जाता है. वरुण अपने दोस्तो के साथ वहाँ से चला गया, और हमारे भोन्दु जी अपना रंग बिरंगा मुह लिए वहीं सीडीयों पर बैठ गये.

वर्षा ने भोन्दु जी से कहा “ भाई से दूर ही रहना , वो ऐसे ही हैं, बिना मतलब किसी से भी लड़ना शुरू कर देते हैं, उनकी तरफ से मैं तुम्हे सॉरी बोलती हूँ, अब सोचना छोड़ो “. भोंडू जी अपने गाल पर हाथ फेरते हुए बोले “ सुबह से कुछ खाने को नहीं मिला, सिवाए थप्पड़ और गालियों के, और हर बार आपने ही आकर मेरी मदद की , वरना मैं आज अपने गाँव जा कर पिताजी से बोल देता की अब मेरी शादी करा दो”. वर्षा ने शादी वाली बात पर तो ध्यान नहीं दिया पर खाने की बात सुनकर वो बोली चलो कॅंटीन में मैं तुम्हे खाना खिलवाती हूँ. भोंडू जी के चेहरे पर तो मानो खुशी के दीए जल गये, इतने सेक्सी माल के साथ लड्डू और परांठे खाने की सोच कर ही भोन्दु जी हवा में उड़ने लगे. कॅंटीन में अंदर जाते ही वर्षा ने कैश काउंटर पर खड़ी लड़की से कहा “ अनु सुन, ये राजा है, जो भी खाए , मेरे अकाउंट में डाल देना, ट्रीट है मेरी तरफ से”. अनु ने भोन्दु जी को उपर से नीचे तक देखा और बोली “ किस कार्टून को पकड़ लाई हो आज”. वर्षा ने अनु की और घूरते हुए कहा “तुझे पसंद है तो भेज दूं आज रात तेरे कमरे में, सुना है आजकल सीनियर्स बहुत आते हैं तेरे रूम पे”. इसकी मा का साकी नाका, अनु की तो सिट्टी पिटी गुल, सबकी न्यूज़ छापने वाली की आज खुद की न्यूज़ लीक हो गयी. वर्षा ने अनु की और आँख मारी और कहा “ चलती हूँ मैं, ज़्यादा हीरोइन ना बना कर मेरे सामने”. अनु चुप खड़ी रही और वर्षा के जाते ही दौड़ कर भोन्दु जी के पास आई और बोली “ वर्षा को कब से जानते हो तुम”. भोंडू जी ने बड़ी स्टाइल में जवाब दिया “ कब से क्या, आज ही मुलाकात हुई थी, किसी ने केला घुसा दिया था, मैने निकाल दिया तो खुश हो कर कॅंटीन में दावत देने ले आई”. अनु मन ही मन बोली ‘ये चूतिया क्या बोल रहा है, किसी ने सुन लिया तो इसकी गांड तोड़ देगा’. अनु ने बात घुमाई और पूछा “ क्या खाओगे बताओ, आज जो मांगोगे मिल जाएगा,फ्री फ्री फ्री”. भोन्दु जी ने बड़े प्यार से कहा “ एक ग्लास पानी दे दो बस, लंच तो मैं लेकर आया हूँ”. अनु फिर हैरान हो गयी और सोचने लगी की ‘क्या नमूना पकड़ के लाई है वर्षा’. अनु बोली “ पानी तो यहाँ वैसे ही फ्री मिलता है, सामने वॉटर कूलर लगा है, वहीं डिस्पोज़ेबल ग्लास भी रखे हैं, जितना मर्ज़ी पी लो”. भोन्दु जी ने अनु का धन्यवाद किया और 2-3 ग्लास पानी लेकर बैठ गये अपना लंच शुरू करने. डिब्बा खोलते ही पूरी कॅंटीन में मूली के परांठे और देसी घी के लड्डू की मिक्स और दर्दनाक खुश्बू फैल गयी. इससे पहले की कोई बेहोश हो अनु दौड़ते हुए आई और बोली “ ये क्या कर रहे हो तुम, आज कॅंटीन का बना खाना खा लो , वर्षा बोलकर गयी है ना, इसे घर जा कर खा लेना”. भोन्दु जी बोले “ वर्षा बोलकर गयी कि उसके अकाउंट में लिख लेना, पैसे मेरे लगे या किसी और के , पैसे तो लगेंगे ना, और जब मेरी मा ने इतने प्यार से मेरे लिए परांठे और लड्डू बनाए हैं तो मैं किसी के पैसे क्यूँ लगवाउँ”. अनु चाहती तो भोन्दु जी को बाहर निकाल सकती थी पर वर्षा अभी अभी उसकी गांड फाड़ कर गयी थी तो वो कैसे भोन्दु जी को कुछ बोल सकती थी.

भोन्दु जी ने आराम से अपना लंच ख़तम किया और भूकंप समान डकार लेते हुए कॅंटीन को हिला कर चल दिए. बाहर आए और सीधे वहीं पहुँचे जहाँ वो सुबह से अपने करतब दिखा रहे थे, जी हाँ अड्मिशन काउंटर. भीड़ ख़तम हो चुकी थी, फॉर्म जमा हो चुके थे, अब बस सिलेक्सन होना बाकी था, जिसका पता 8 दिन बाद चलना था. पर हमारे भोन्दु जी को कहाँ चैन था, अड्मिशन ऑफीस के बाहर बैठे एक चपरासी से भोन्दु जी बोले “पता करके बताओ ना, मेरा सिलेक्सन हो जाएगा क्या, मैं तुम्हे 100 रुपये दूँगा”. चपरासी भी समझ गया कि ये कोई पक्का चूतिया है, 2 घंटे हुए नहीं फॉर्म जमा किए , आ गया सिलेक्सन का पता करवाने. चपरासी ने भी दिमाग़ लगाया और बोला “ 100 रुपये में तो सब पूछ लेते कि सिलेक्सन हुआ या नहीं, 1000 रुपये हों तो बात करो”. भोंडू जी ने अपने लंड के पास बनी चोर जेब में हाथ डाला और देखा उसमे तो सिर्फ़ 500 रुपये बचे हैं और वापिस घर भी जाना है. भोन्दु जी बोले, 1000 रुपये तो नहीं हैं मेरे पास ,आप 200 रूपये ले लो और मुझे बता दो की सिलेक्सन हो जाएगा या नहीं”. चपरासी ने 200 रुपये लिए, भोन्दु जी की फॉर्म की रसीद ली , अंदर गया और 5 मिनिट बाद वापिस आया और बोला, “ये लो अपनी रसीद, पता कर आया हूँ की तुम्हारा सिलेक्सन होगा या नहीं”. भोंडू जी खुशी से उछल पड़े और बोले “ तो जल्दी बताओ ना, अब तो 200 रुपये भी ले लिए”. चपरासी अपनी बनावटी अकड़ दिखाते हुए बोला “ 800 रुपये और दो तो बताऊँ, वरना 5 दिन बाद आना, बाकियो से 2 दिन पहले पता चल जाएगा तुम्हे 200 रुपये में”. भोन्दु जी उदास हो गये और बोले “नहीं नहीं, ऐसा मत करो, मुझे अभी बता दो, मेरे पास 800 रुपये होते तो मैं कब का दे देता तुम्हे, पर मेरे पास ना तो पैसे हैं और ना ही कुछ और तुम्हे देने के लिए”. भोन्दु जी रोनी सूरत बनाए खड़े थे तभी चपरासी ने भोन्दु जी की गांड की ओर इशारा किया और बोला “800 की तो होगी”. भोन्दु जी समझ गये की चपरासी के इरादे नेक नहीं और बिना कुछ बोले सीधे कॉलेज के बाहर आ गये.

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Posted : 25/04/2013 1:21 pm
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भोन्दु जी घर पहुँचे तो उनके हिट्लर रूपी पिताजी दरवाजे के पास बैठे हुक्का फूँक रहे थे, गुड गुड करता हुआ उनका हुक्का भोन्दु जी को इशारा कर रहा था की गांड मज़बूत कर लो, ढोल बजने वाला है, हुक्के की नल्की को अपने मुह में घुसाए ‘श्री सम्राट पेंचोद’ बोले, “ अरी ओ गंधारी, आ गया तेरा सपूत , पैसो में आग लगा कर, आरती उतार ले इसकी”. भोन्दु जी चुप चाप दबे पाँव अपने कमरे की और चल दिए तभी ‘श्रीमती गंधारी पेंचोद’ बोली “ राजा बेटा, आ गया तू, लड्डू और परांठे खा लिए थे ना, कालीज़ में नंबर आ गया तेरा या नहीं”. एक तो पहले ही भोन्दु जी की गांड चपरासी ने जला दी थी, उपर से माता जी ने उसमे घी डाल दिया और रही सही कसर पिता जी ने ये कहकर पूरी कर दी “ नहीं आया होगा तो आज से इसकी पढ़ाई लिखाई बंद, कल से डंगरों को पानी पिलाएगा और खेत में जाकर फसल की रखवाली करेगा, वैसे बसकी तो ये भी नहीं इसके”. भोन्दु जी ने अपनी मा की और देखा और बोले “इस बार फॉर्म ले लिया है, 5-7 दिन में बताएँगे की नंबर आएगा या नहीं”. इतना कह कर भोन्दु जी अपनी सुलगती झांटों को शांत करने के लिए अपने कमरे में चले गये. पीछे से पिता जी अपने मुह से धुआँ उड़ाते हुए बोले “इसका मतलब 5-7 दिन और निठल्ला पड़ा खाएगा क्या, अपने भाई को देख रात को भी खेतो पर ही सोता है, 4 महीने नहीं हुए हैं उसकी शादी को अभी, फिर भी कितनी मेहनत करता है 2 पैसे कमाने के लिए, तेरी भाभी ने उसका खाना बाँध दिया है , ले जा और दे आ अपने भाई को, और हाँ वो रोके तो वहीं रुक जाना, वैसे भी 5-7 दिन बाद भी तो तुझे वहीं सोना है , आदत डाल ले”. भोन्दु जी की गांड फुंक कर लाल हो गयी, तिलमिलाते हुए अपनी भाभी के पास गये और बोले “ लाओ दो जल्दी, जो भी देना चाहती हो, ये काम भी निबटा देता हूँ”. भाभी जी बोली “क्या मतलब है रे तेरा जो भी देना चाहती हूँ, ये थैले में उनके लिए रोटी सब्ज़ी बाँध दी है और इस डिब्बे में गरम दूध है, संभाल के ले जाना, कहीं कुत्तो से डर के वहीं फेंक कर भाग आए”. भाभी जी ने भी अपने पति की भड़ास भोन्दु जी पर उतार दी, रात भर पतिदेव खेतो में सोते हैं, दिन में बुड्ढ़ा यहीं बैठा हुक्का फूंकता रहता है, नयी नयी शादी हुई है और चूत में आग लगी रहती है, भाभी जी की ग़लती भी क्या है. भोन्दु जी ने थैला उठाया और हाथ में दूध का डिब्बा लटकाए चल पड़े खेतो की ओर.

खेत के पास पहुँचने वाले ही थे कि गाँव के सबसे ख़तरनाक, सबसे नामी, सबसे डरावने कुत्तो ने भोन्दु जी को घेर लिया. सारे कुत्ते भोन्दु जी को ऐसे घूर रहे थे जैसे फिल्मी गुंडे किसी हीरोइन को लपकने को तैयार रहते हैं. तभी उन कुत्तो के मुखिया की नज़र भोन्दु जी के हाथ में लटके थैले पर पड़ी, उसने अपने साथी कुत्तो को थैला छीन्ने का इशारा किया, तभी उनमे से कालू नाम का सबसे हट्टा कट्टा कुत्ता, अपने बड़े बड़े डरावने दांतो के बीच से लटकती हुई सुर्ख लाल जीभ और दिल दहला देने वाली भूरी भूरी आँखों से भोन्दु जी के थैले की ओर निशाना लगते हुए जैसे ही उछ्ला, भोन्दु जी ने गरम गरम दूध उस कुत्ते के मुह पर फेंक कर मारा, कालू जी अपना जला मुह लेकर मिट्टी में लुटलुटी मारने लगे, बाकी कुत्ते कालू जी का ये हाल देख कर ऐसे गायब हुए जैसे गधे के सर से सींग. भोन्दु जी ने कालू में एक ज़ोर दार लात मारी और कालू जी ‘आउन आउन आउन’ करते हुए वहाँ से नौ दौ ग्यारह हो गये. भोन्दु जी आगे बढ़े और खेत में बनी झोपड़ी जहाँ उनका भाई सो रहा था, पहुँच गये खाना देने. जैसे ही झोपड़ी के नज़दीक पहुँचे पास से अजीब सी आवाज़े सुनाई देने लगी “ आ आ...ऊन ओन्न...घच घच ..फच फच .... ऊई मैया...मर् गयी.....धीरे कर ना...हाँ हाँ .... फाड़ेगा क्या...मर् जाउंगी ...रुक मेरी गुलाबो.... बस थोड़ी देर और झेल ले...होने वाला है... 2 मिनिट..और...हाँ हाँ हाँ”. प्रताप जी अपनी लैला को झोपड़ी के पीछे बने भुस के कोठरे में लिए पड़े थे और इतनी ज़ोर से चुदाई कर रहे थी कि 100 मीटर दूर तक उनकी आवाज़े सुनाई दे रही थी. भोन्दु जी ने पहले झोपड़ी में देखा और फिर ज़ोर से चिल्लाए “ प्रताप भैया, कहाँ हो तुम, और ये किसकी आवाज़ आ रही है”. प्रताप का झड़ने ही वाला था और भोन्दु जी की आवाज़ ने उसका मूत निकाल दिया. वो फटाफट उठा और अपनी लैला को खेतो में ले जा कर छुपा दिया और बोला “ सुन री चमेली, यहीं रुक, मैं यूँ गया और उस गधे को वापिस घर भेज कर यूँ आया, भागना मत , अभी और करना है मुझे”. प्रताप दौड़ते हुए झोपड़ी में आया और बोला “ राजा, तू यहाँ , तू तो शहर गया था ना, एडमिसन करवाने, भगा दिया क्या तुझे वापिस”. भोन्दु जी बोले “ खाना भेजा है भाभी ने, और ये किससे बाते कर रहे थे तुम इतनी ज़ोर ज़ोर से, कौन थी वहाँ”. प्रताप इधर उधर बात घुमाते हुए बोला “ क्या बक रहा है बे, मैं तो सामने ट्यूबवेल पे मोटर के तार लगा रहा था, कोई रेडियो लेकर जा रहा होगा पास से”. भोन्दु जी बोले “पर आवाज़ तो झोपड़ी के पीछे से आ रही थी, इसका मतलब वहाँ कोई है, आप खाना खाओ मैं ज़रा देख कर आता हूँ”. प्रताप की गांड फट गयी, ये चूतिया आजतक कुत्तो के दर से खेत मे नहीं आया और आज इतना शेर कैसे बन रहा है, पीछे चमेली छुपी बैठी है, इसने देख ली तो जा कर घरवालो के सामने सब पोल खोल देगा. प्रताप बोला तू रुक मैं देख कर आता हूँ. भोन्दु जी बोले “नहीं भैया आप भी मत जाओ, क्या पता कोई चोर लूटेरे लड़की की आवाज़ से हमे बेवकूफ़ बना कर हमे लूटना चाहते हों, हथियार भी हो सकते हैं उनके पास, ऐसा करते हैं मैं भी यहीं सो जाता हूँ,कोई आएगा तो देख लेंगे. प्रताप की गांड में तो जैसे भोन्दु जी ने हरी मिर्च डाल दी, अब कैसे बताए की एक जवान लड़की को खेत में छुपा कर आया है, थोड़ी देर में घर ना पहुँची तो घरवाले ढूँढना शुरू कर देंगे. पर मरता क्या ना करता, प्रताप वहीं बैठ कर चुप चाप खाना खाने लगा और भोन्दु जी वहाँ से टस से मस ना हुए.

इधर प्रताप और भोन्दु जी झोपड़ी में बैठे एक दूसरे का मुह देख रहे थे, उधर हमारे कालू जी घूमते फिरते चमेली के पास पहुँच गये. जैसे ही कालू और चमेली की नज़रे एक दूसरे से टकराई, कालू ने चमेली का घाघरा पकड़ लिया, चमेली चिल्लाई और दौड़ते हुए सीधा झोपड़ी में आ गयी. चमेली को देखते ही प्रताप के मुह में रोटी अटक गयी, वो हिच हिच करता हुआ चमेली और भोन्दु जी की और देख रहा था. भोन्दु जी भी हैरान होकर उन दोनो को देख रहे थे, तभी वहाँ कालू जी की एंट्री हुई और जैसे ही कालू ने भोन्दु जी को देखा, वो बिना कुछ सोचे समझे वहाँ से भाग लिया. भोन्दु जी ने चमेली से पूछा “तुम मास्टर जी की बेटी हो ना, सबसे बड़ी वाली”. चमेली घबराते हुए बोली “ हाँ, मैं बाबा को खाना देकर लौट रही थी, ये कुत्ता मेरे पीछे पड़ गया तो मैं इधर दौड़ी चली आई, पर एक बात तो बता, ये कुत्ता तुझे देखकर कैसे भाग गया”. भोन्दु जी भूल गये कि उन्हे क्या शक़ करना था, जब उन्होने सुना की कालू उनसे डर कर भाग गया तो वो सीना तानते हुए बोले “ अभी थोड़ी देर पहले ही इसका मुह जला कर आया हूँ मैं, देखा नहीं रंग काला और मुह सफेद हो गया है”. प्रताप बोला “ मूह जला कर आया है, कैसे”. भोन्दु जी बोले “ भाभी ने एक दम खौलता हुआ दूध दिया था, मैने इसके मूह पर फेंक कर मारा, जल गया साला”. प्रताप ने दूध का डिब्बा खोला और जब उसमे एक बूँद भी दूध नज़र नहीं आया तो भोन्दु जी को धमकाते हुए बोला “ वो दूध मेरे लिए दिया था गधे, तू कुत्तो को पिला आया, भाग जा यहाँ से और दोबारा मेरे लिए खाना लेकर आया तो तेरी टाँग तोड़ दूँगा, कल से मैं खुद लेकर आया करूँगा अपना खाना, तू जा यहाँ से”. भोन्दु जी अपना मुह लटकाए वहाँ से अपने घर चले आए.

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Posted : 25/04/2013 1:21 pm
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भोन्दु जी के जाते ही प्रताप ने फटाफट अपना पजामा उतरा और चेमेली के हाथ में अपना झूलता हुआ लंड पकड़ा कर बोला, “चल अब जल्दी से इसे खड़ा कर दे, बहुत मन कर रहा है”. प्रताप को चुदाई करने की पड़ी थी और चमेली को घर जाने के लिए देर हो रही थी, प्रताप के लंड को झटकते हुए चमेली बोली “ बात मत कर मुझसे, तुझे लंड घुसाने की पड़ी है वहाँ मेरे घरवाले मुझे ढूँढ रहे होंगे, जाने दे मुझे, फिर कभी कर लेना”. एक तो पहले ही भोंडू जी ने प्रताप का झड़ने से पहले ही रुकवा दिया था, अब चमेली ने देने से मना कर दिया, प्रताप को गुस्सा आ गया और उसने चमेली का लहंगा खींच कर झोपड़ी के पीछे फेंक दिया और चमेली की झांटोदार चूत पर अपना हाथ फिराते हुए बोला “ जा चली जा अपने घर, इतनी ही गांड फट रही है तो आती क्यूँ है चुदने, तेरे चक्कर में मैं अपनी नयी नवेली लुगाई को नहीं चोदने जाता और तू अब नखरे दिखा रही है”. चमेली बोली “ देख प्रताप,जब तेरा भाई आया था तब तू इस चूत पर ही चढ़ा हुआ था ना, समझने की कोशिश कर, देर हो रही है , किसी को शक़ हो गया तो मैं तो मुह भी नहीं दिखा पाउंगी किसी को ”. प्रताप बोला “ बातो में वक़्त बर्बाद ना कर, 10 मिनिट की बात है, फटाफट चूस कर खड़ा कर दे, फिर तेरी चूत की भी आग बुझा दूँगा, और रही बात तेरे घरवालो की तो उन्हे मैं संभाल लूँगा, मास्टर जी की सारी करतूत पता हैं मुझे, कुछ नहीं बोलेंगे अगर उन्होने हमे देख भी लिया “. चमेली ने सोचा ये बिना चोदे नहीं मानेगा, उसने अपना ब्लाउस उतारा और नंगी होकर प्रताप का लंड चूसने लगी, एक दम गोरा बदन और उस पर लटके भारी भरकम बूब्स जब हिल रहे थे तो वे प्रताप के टट्टो पर भारी पड़ रहे थे, लंड चूसने में चमेली इतनी माहिर थी कि कोई रंडी भी ऐसे ना चूस पाए, चूस चूस कर उसने प्रताप के लंड को एक दम सख़्त कर दिया, प्रताप ने झट से चमेली को चारपाई पर लिटाया और उसके बूब्स को अपने मुह में भर लिया, एक एक करके वो चमेली के बूब्स इस तरह चूस रहा था मानो उसके हाथो में 2 दशहरी आम हों. प्रताप ने धीरे से अपनी उंगली चमेली की चूत में डाली और तेज़ी से अपनी उंगली उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा. चमेली आँहे भरने लगी ‘आँह..उन्ह.. अम्म्म्म...ओह्ह्ह’ की आवाज़े फिर खेतो में गूंजने लगी. उंगली से चमेली की चूत को गीला करने के बाद प्रताप ने अपना लंड चमेली की चूत में इतनी ज़ोर से डाला की चमेली की चींख निकल गयी ‘आयई...मई...या’. प्रताप ने अपने हाथ से चमेली का मुह भींच लिया और लगा अपने लंड से चमेली की चूत की चुदाई करने , थोड़ी देर बाद चमेली की आँहे बंद हो गयी और पूरी झोपड़ी में सिर्फ़ चारपाई की ‘चूं...चूं...चर्ररर...चर्ररर’ के सिवा कोई आवाज़ नहीं आ रही थी. प्रताप ने अपने धक्के बढ़ाने शुरू किए, जितनी ज़ोर से प्रताप धक्के लगाता उतनी ज़ोर से ही चारपाई की आवाज़े बढ़ने लगती, रश्मि की चूत पानी छोड़ चुकी थी और प्रताप भी अब किसी पल झड़ने ही वाला था, जैसे ही प्रताप अपने आख़िरी मुकाम पर पहुँचने वाला था अचानक चारपाई टूट गयी, और चमेली की गांड धडाम से ज़मीन पर जाकर लगी और उपर से गिरते प्रताप के लंड ने उसकी चूत में भूकंप मचा दिया, चमेली की गांड टूटी, चूत थूक गयी और प्रताप के लंड से भी आँसू निकल गये, एक बार फिर प्रताप झड़ते झड़ते रह गया. प्रताप के लंड और टट्टो में इतनी ज़ोर की चोट लगी की वो उठ भी नहीं पा रहा था. चमेली ने जैसे तैसे करके प्रताप का लंड अपनी चूत से बाहर निकाला और उठकर खड़ी हो गयी, मटके में रखा पानी प्रताप के मुह पर फेंकती हुई बोली “ आज का दिन ही मनहूस है, अब तेरा पेट भर गया हो तो मेरा लहंगा मुझे ला कर देदे और मुझे घर जाने दे”. प्रताप अपने टटटे पकड़ कर हिम्मत करके झोपड़ी के पीछे गया जहाँ उसने चमेली का लहंगा फेंका था. इधर उधर देखा तो लहंगा वहाँ नहीं था. प्रताप की गांड फट गयी , वो सोचने लगा की अब चमेली कैसे घर जाएगी. ना तो नंगी जा सकती है और ना ही यहाँ रुक सकती है. प्रताप झोपड़ी में वापिस आया और बोला “चमेली, तेरा लहंगा तो वहाँ नहीं है, अब क्या करें”.

नंगी खड़ी चमेली अपनी टूटी हुई गांड को मसलते हुए बोली “दोबारा चोदने का बहाना मत बना, चुप चाप मेरा लहंगा दे दे वरना आज के बाद कभी नहीं आउंगी तेरे पास”. प्रताप अपने लंड पे हाथ लगाते हुए बोला “ इसकी कसम, लहंगा वहाँ नहीं है , पता नहीं कहाँ उड़ गया, हो सकता है कोई कुत्ता ले गया हो”. जी हाँ, हमारा शक़ भी कालू जी पर ही था, पर कालू जी तो वहाँ से दुम दबा कर भाग चुके थे, फिर लहंगा गया तो गया कहाँ. चमेली की सूरत अब रोने जैसी हो गयी वो प्रताप के हाथ जोड़ती हुई बोली “देख प्रताप, मेरे साथ ऐसा मत कर, मैं इस हालत में घर कैसे जाउंगी बता”. प्रताप बोला “ देख चमेली, ऐसी बातो का मज़ाक करूँगा क्या मैं तेरे साथ, तेरी चूत से ज़्यादा प्यारी तो मुझे मेरी लुगाई भी नहीं, तुझे नाराज़ करके मुझे क्या मिलेगा, इतनी मस्त चूत को कोई खोना चाहेगा क्या. लहंगा सच में वहाँ नहीं है, मैं आस पास भी देख कर आया हूँ, कहीं नहीं है”. चमेली बोली “ तो अब कैसे घर जाऊं , कुछ तो सोच, कुछ तो दिमाग़ लगा”. प्रताप ने कुछ देर सोचा और बोला “ एक तरीका है मेरे पास तुझे घर पहुँचने ना, शायद काम कर जाए”. चमेली बोली “ कुछ भी कर, मेरी इज़्ज़त का सवाल है, कैसे भी करके मुझे सही सलामत घर पहुँचा दे”. झोपड़ी के साथ में खपरैल के नीचे गाय भैंस बँधी थी, और वहीं रखी 4-5 जूट की बोरियों में खल-बिनोले भरे हुए थे, प्रताप ने सारी बोरियों खाली की और उन्हे बीच में से फाड़ कर एक लंबा चौड़ा पेटिकोट जैसा लहंगा बना दिया, उस पेटिकोट को चमेली की मखमली कमर पर लपेट कर रस्सी से कसकर बाँध दिया. वहीं खेत में एक छोटा सा गढ्ढा खोद कर उसमे पानी डाल दिया और चमेली को बोला “कूद जा इसमे और अपना पेटिकोट पूरा कीचड़ से गंदा कर ले, थोड़ी सी कीचड़ अपने हाथ और मूह पर भी लगा ले, बाहर साइकल खड़ी है, मैं तुझे तेरे घर के पास छोड़ दूँगा, जब कोई पूछे तो बोल देना कि एक ‘कुत्ता’ पीछे पड़ गया था उसी के चक्कर में कीचड़ में गिर गयी, किसी को पता नहीं चलेगा की तूने घाघरा पहना है या बोरी”. चमेली बेचारी और करती भी क्या, कूद गयी अपनी टूटी हुई गांड लेकर उस कीचड़ में. प्रताप ने साइकल निकाली और चमेली को उसके घर से थोड़ा दूर छोड़ आया. चमेली घर पहुँची और जैसा प्रताप ने समझाया था ठीक वैसा ही बहाना बना कर, नहाने चली गयी.

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Posted : 25/04/2013 1:21 pm
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इधर चमेली अपने घर पहुँची, उधर भोन्दु जी भी अपना मुह लटकाए घर पहुँच गये. घर पहुँचते ही हिट्लर पिता जी ने पूछा “ नहीं सोया खेत पर, कितना भी भोंक लो पर तेरे कान पर जूँ भी नहीं रेंगती”. भोन्दु जी बोले “ मैं तो वहीं रुक रहा था, भैया ने गाली देकर भगा दिया और बोले क़ि आज के बाद कभी खेत पर मत आना”. पिता जी बोले “ तूने काम ही गाली खाने लायक किया होगा तो प्रताप को गुस्सा तो आना ही था, वो खेतो में दिन रात मेहनत करता है और तूने जाकर उसका कोई काम बिगाड़ दिया होगा”. भोन्दु जी बोले “मैने कुछ काम नहीं बिगाड़ा, मैं तो उल्टा उन्हे चोर लुटेरो से बचाने के लिए वहीं रुक रहा था, पर उन्हे तो सिर्फ़ दूध से मतलब है, दूध नहीं मिला इसलिए गुस्सा हो कर भगा दिया”. पास में खड़ी भाभी जी सब सुन रही थी, उन्होने भोन्दु जी को इशारे से अपने पास बुलाया और बोली “मैने दूध दिया था ना, खराब था क्या जो पसंद नहीं आया, या और माँग रहे थे”. भोन्दु जी बोले “ डिब्बा खाली था इसलिए गुस्सा हो गये”. भाभी जी चौंकते हुए बोली “खाली था, मैने तो खुद उसमे गरम गरम दूध डाल कर दिया था, झूठ क्यूँ बोल रहा है”. भोन्दु जी बोले “ जब दिया था तब भरा हुआ था, वहाँ पहुँचते पहुँचते खाली हो गया, मेरी जान बचा ली आज तुम्हारे गरम गरम दूध ने”. भाभी जी कुछ समझ नहीं पा रही थी और चिढ़ते हुए बोली “ तेरी बाते मेरी समझ नहीं आती, मैने खाना बना दिया है तुझे खाना हो तो खा लेना, मैं उपर सोने जा रही हूँ, इतनी गर्मी में यहाँ नहीं सोया जाता मुझसे”. भोन्दु जी बोले “ छत पर अकेली सोओगी तो पिताजी गुस्सा करेंगे, मा को साथ ले जाना, सो जाएँगी तुम्हारे साथ”. भाभी जी सड़ा सा मुह बनाते हुए बोली “उनके साथ सोना होता तो शादी ही क्यूँ करती, जिसके साथ सोना है वो तो खेत पर पड़े रहते हैं”. भोन्दु जी बोले “ भैया के साथ सोने के लिए ही शादी की थी क्या, इतने लोग है घर में किसी के भी साथ सो जाओ, वैसे भी भैया तो इतनी ज़ोर से खर्राटे लेते हैं, तुम्हे नींद भी नहीं आएगी”. इतना सुनते ही भाभी जी की झाँटे सुलग गयी और भोन्दु जी पर चिल्लाते हुए बोली “ अकेली ना सौऊँ , मा जी के साथ ना सौऊँ , तेरे भैया के साथ ना सौऊँ तो क्या तेरे साथ सोने जाऊँ उपर, नालायक”. भोन्दु जी बोले “मेरे साथ सो जाओ, वैसे भी इतनी बड़ी छत पर अकेली डर जाओगी”. भाभी जी को लगा की शायद देवर जी के लंड में आज सुर्सुरी हो रही है, चूतिया ही सही , लंड तो है ना इसके पास, क्या पता शक्ल से जितना गांडू लगता है चोदने में उतना ही होशियार हो. भाभी जी ने एक गद्दा और चादर उठाई और बोली “ मैं सोने जेया रही हूँ, तू खाना खा कर उपर आ जा, बरामदे में बिस्तर रखा है लेते आना”. इतना कहकर भाभी जी छ्ट पर सोने चली गयी और भोन्दु जी नीचे चरने बैठ गये. थोड़ी देर में माता जी अंदर आई और भोन्दु जी से बोली “ भाभी कहाँ है तेरी, खाना किसने दिया तुझे”. भोन्दु जी बोले “भाभी को नींद आ रही थी, उपर गयी हैं सोने”. माता जी बोली “ हाए, अकेले ही चली गयी वो पागल, उसे पता नहीं अकेली औरत का उपर सोना ठीक नहीं”. भोन्दु जी बोले “ खाना खा कर मैं उन्ही के पास सोने जा रहा हूँ, बिस्तर बाहर रखा है, मैं उनके साथ सो जाऊँगा , तुम चिंता मत करो”. माता जी ने भोन्दु जी के सर पर एक तमाचा मारा और बोली “ शर्म नहीं आती तुझे, क्या बकता रहता है, तू सोएगा अपनी भाभी की साथ, कुछ पता भी है क्या बक रहा है तू, खाना खा और अपने कमरे में जा कर मर, दोबारा ऐसा बोला तो तेरी टांगे तोड़ दूँगी, मैं जाती हूँ उपर उसके पास सोने”. भोन्दु जी बोले “ आपके साथ सोने से मना कर रही थी, बोली थी सिर्फ़ मेरे साथ ही सोना है”. माता जी ने फिर एक थप्पड़ जड़ दिया और भूंभूनाते हुए बरामदे से बिस्तर उठा कर उपर सोने चली गयी.

उपर जाकर देखा तो भाभी जी पूरी नींद में सोई पड़ी थी, माता जी ने भी चुपचाप उनके बगल में अपना बिस्तर बिछाया और वहीं सो गयी. थोड़ी देर बाद माता जी को ऐसा लगा जैसे कोई उनसे चिपकने की कोशिश कर रहा है, जी हाँ भाभी जी की प्यासी चूत उन्हे भोन्दु जी समझ कर अपना काम शुरू कर चुकी थी. माता जी ने जैसे ही भाभी जी का हाथ पकड़ कर झटका, भाभी जी उठ कर बैठ गयी “मा जी आप, यहाँ, उपर”. माता जी बोली “ सो जा चुप चाप और अपने हाथ पैरो को संभाल कर रखा कर, मैं समझती हूँ तू क्यूँ परेशान है, पर तू भी ये समझ ले की एक औरत को बहुत कुछ सहना पड़ता है. कुछ दिन की बात है, फसल काट जाने दे, फिर तेरी परेशानी दूर हो जाएगी”. इतना कहकर माता जी सो गयी और भाभी जी अपनी चूत पर उंगली फिरा कर रह गयी. सुबह जब भोन्दु जी तैयार हो कर अपनी भाभी से खाना माँगने गये तो भाभी जी उनसे बात नहीं कर रही थी. भोन्दु जी परेशान हो गये और भाभी से उनकी नाराज़गी पूछ्ने लगे. भाभी जी बोली “जब तुझे उपर आना ही नहीं था तो मुझे क्यूँ भेजा था, बोला था ना मैं अकेली ही सो जाउंगी , फिर क्यूँ इशारा किया मुझे कि मेरे साथ सोने वाला है, खुद तो आया नहीं और मा जी को भेज दिया मेरी ऐसी तैसी करने, पूरी रात भाषण सुनने पड़े उनके, खुद तो आज भी पिता जी के कमरे में सोती हैं, और मुझे सब्र करना सीखा रही थी”. भोन्दु जी को कुछ समझ नहीं आया की भाभी कहना क्या चाहती है, उन्हे मा के साथ सोने में दिक्कत है, या भोन्दु जी के उपर ना आने से नाराज़ हैं, या उन्हे पिताजी का कमरा पसंद है और वो वहीं सोना चाहती हैं. भोन्दु ने कुछ देर अपना सर खुज़ाया और बोले “ पिताजी के कमरे में ऐसी क्या ख़ास बात है, मा भी वहीं सोने जाती है और अब आप भी उसी कमरे में सोना चाहती हो. नींद अच्छी आती है क्या उस कमरे में, मुझे तो ऐसा कुछ नहीं लगता”. भाभी जी की गांड फिर से लाल हो गयी, उन्होने गरम गरम चीम्टा उठाया और भोन्दु जी की गांड पर चिपकाते हुए बोली “ तेरे दिमाग़ में गोबर भरा है क्या, इतना बड़ा हो गया और अकल गधे बराबर भी नहीं. मेरे पास मत आया कर, खुद तो बेवकूफ़ है और साथ में मुझे भी पागल कर देगा”. भोन्दु जी ने अपनी गांड पर हाथ फेरा और बोले “ जिसे देखो, इसके ही पीछे पड़ा रहता है, और कोई जगह नहीं मिलती हाथ लगाने को, अगर मैने भी वहीं मार दिया तो रोती हुई जाओगी भैया और पिता जी के पास”. भाभी जी ज़ोर से हंस पड़ी और बोली “ तू मारेगा वहाँ, पहले उस लायक तो हो जा कि इस जगह पर हाथ लगा सके”. भोन्दु जी ने पास में रखा डंडा उठाया और खींच कर भाभी की गांड पर इतनी ज़ोर से मारा कि भाभी जी कूदती हुई ऐसे भागी जैसे किसी ने गली में भौंकते हुए कुत्ते की टाँग तोड़ दी हो और वो ‘आउन...आउन..आउन’ करता हुआ बिलख रहा हो. भोन्दु जी डंडा फेंकते हुए बोले “ जिसे देखो मेरे इधर उधर हाथ लगता रहता है, आज के बाद दोबारा वहाँ पर चीम्टा मारा तो इससे भी ज़ोर से खींच कर मारूँगा”. भोन्दु जी चिढ़ते हुए घर से बाहर चले गये और भाभी जी बेचारी अपनी गांड मलती हुई चारपाई पर लेट गयी. इतनी ज़ोर से डंडा पड़ा था की पिछवाड़ा सूज गया और उनकी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो एक कदम भी चल पायें.

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Posted : 25/04/2013 1:22 pm
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भाभी जी कमरे में पड़ी अपनी गांड पकड़ कर रो रही थी, तभी मा जी अंदर आई और बोली “ क्यूँ री रज्जो, अभी नींद पूरी नहीं हुई क्या, कुछ काम धाम नहीं करना तुझे, तेरे बाबू जी खाना माँग रहे हैं, चल उठ जल्दी और खाना परोस दे, मैं दे आउंगी ”. भाभी जी का नाम राजबाला था पर ‘प्यार’ से सब उन्हे रज्जो ही बुलाते थे. भाभी जी ने अपनी गांड से हाथ हटाया और बोली “ वो, मा जी, मेरी तबीयत ठीक नहीं है”. मा जी ने सोचा काम ना करना पड़े इसलिए बहाने बना रही है, मा जी ने घूरते हुए पूछा “ क्या हुआ तेरी तबीयत को, थोड़ी देर पहले तो बिल्कुल ठीक थी”. भाभी जी बोली “ पैर फिसल गया, कमर में चोट लग गयी है, दर्द हो रहा है”. मा जी बोली “दिखा मुझे कहाँ चोट लगी है, मैं बॉम लगा देती हूँ”. अब भाभी जी कैसे दिखायें की असल में चोट कमर पे नहीं गांड के बीचो बीच लगी है”. भाभी जी बोली “ आप रहने दीजिए, मैं खुद लगा लूँगी”. मा जी ने अंदर से बॉम की शीशी लाकर भाभी जी को दी और पिता जी के लिए खाना लेकर चली गयी. तभी भोन्दु जी वापिस आ गये, ना जाने किस सोच में थे, सीधे भाभी जी के पास गये और बोले “ ज़्यादा ज़ोर से लग गया ना, आपने वहाँ पर चीम्टा लगाया तो मुझे गुस्सा आ गया था, अब पिता जी और भैया से मत कहना , वरना वो दोनो मुझे पीट पीट कर मेरी जान ले लेंगे. आप चाहो तो मुझे एक डंडा मार कर हिसाब बराबर कर लो”. भोन्दु जी की इतनी भोली भाली बाते सुनकर भाभी जी को उन पर तरस आ गया और बॉम की शीशी भोन्दु जी को दिखाते हुई बोली “ मा जी बॉम दे गयी हैं,लगा लूँगी तो आराम पड़ जाएगा”. तभी भोन्दु जी ने अपने चूतिया दिमाग़ से फिर गांडूगिरी कर दी “लाओ मुझे दो, बॉम मैं लगा देता हूँ”. अब तो भाभी जी सोच में पड़ गयी कि इस उल्लू के पट्ठे को उनकी गांड पर हाथ फेरना है या सिर्फ़ बॉम लगाना चाहता है. फिर अंदर से उनकी प्यासी चूत ने आवाज़ दी की लगवा लो बॉम, क्या पता इसी बहाने कुछ बात बन जाए. भाभी जी ने थोड़ी देर सोचा और भोन्दु जी की ओर हंसते हुए बोली “ पागल हो गया है, मेरे वहाँ पर कैसे बॉम लगाएगा तू, शर्म नहीं आती तुझे, क्या बक रहा है”. भोन्दु जी बोले “डंडा मैने मारा तो बॉम भी मुझे ही लगाना चाहिए ना, आपने भी तो चीम्टा मारा है मेरे वहाँ पर, थोडा सा जल भी गया है शायद, आप हल्दी लगा देना, मैं बॉम लगा देता हूँ”. भाभी जी ने अपने मन में सोचा “ ये इतना चूतिया नहीं जितना दिख रहा है, मेरी गांड पर बॉम लगाने के बहाने ये आज ज़रूर कुछ करने का मन बनाकर आया है”. भाभी जी मन ही मन बहुत खुश हो रही थी पर जैसे ही उन्हे याद आया की घर में तो मा और पिता जी भी हैं, किसी ने देख लिया तो हंगामा हो जाएगा. उन्होने फिर अपना दिमाग़ दौड़ाया और भोन्दु जी से बोली “ मा जी पूछ रही थी की चोट कैसे लगी, मैने तुझे बचा लिया और बोल दिया कि मैं गिर गयी थी, अब तू मेरे वहाँ बॉम लगाएगा और किसी को पता चल गया तो फिर सोच ले तेरा क्या हाल होगा”. भोन्दु जी बोले “जब तक आप बताओगी नहीं तो किसी को कैसे पता चलेगा कि मैने आपको डंडा मारा और फिर बॉम भी लगाया”. भाभी जी बोली “ अबे गधे, जब तू बॉम लगा रहा होगा और तभी कोई आ गया तो, सोच क्या हाल होगा तेरा”. भोन्दु जी सोच में पड़ गये और बोले “ हाँ, ये बात तो सही है, जब बॉम लगते देखेंगे तो ज़रूर पूछेंगे की चोट कैसे लग गयी, तो फिर ये बॉम आप अपने आप ही लगा लो, मैं भी खुद ही हल्दी लगा लूँगा, बाथरूम में जा कर”.

बाथरूम का नाम सुनते ही भाभी जी की चूत से एक तरकीब निकली और भाभी जी बोली “ एक काम करें, हम दोनो बाथरूम में चलते हैं, अंदर से बंद कर लेंगे, तू मेरे वहाँ पे बॉम लगा दे, मैं तेरे वहाँ पे हल्दी लगा दूँगी”. भोन्दु जी बोले “ और किसी ने तुम्हे आवाज़ दी तो”. भाभी जी बोली “ मुझे तो सिर्फ़ मा जी ही आवाज़ लगा सकती है, मैं अंदर से ही बोल दूँगी कि बॉम लगा रही हूँ, थोड़ी देर लगेगी”. भोन्दु जी फिर सोचते हुए बोले “ और अगर किसी ने मुझे बुलाया तो”. भोन्दु जी के सवालो ने भाभी जी का दिमाग़ खराब कर दिया था, वो गुस्से में बोली “ तो तेरा सर, अरे तुझे कोई आवाज़ देगा तो मैं बोल दूँगी कि तू कहीं बाहर गया है”. भोन्दु जी खुश होकर बोले “वा भाभी जी, तुम तो बहुत तेज हो,कहाँ से सीखा ये सब, पहले भी किसी से बॉम लगवाया है क्या बाथरूम में, भैया तो आते नहीं, फिर किसने लगाया”. भाभी जी की गांड सुलग गयी और बॉम की शीशी नीचे पटक कर बोली “ तुझे लगाना हो तो लगा दे, बे मतलब की बातो से मेरा दिमाग़ तो खराब ना किया कर”. भोन्दु जी ने शीशी उठाई और बाथरूम की ओर इशारा करते हुए बोले “ चलो अंदर, मैं लगा देता हूँ”. भाभी जी के पीछे पीछे भोन्दु जी भी बाथरूम के अंदर घुस गये, उनके घुसते ही भाभी जी ने अंदर से कुण्डी लगा ली और भोन्दु जी को अपनी गांड की तरफ इशारा करते हुए बोली “ ले जल्दी लगा दे, बहुत दर्द हो रहा है, अच्छी तरह मल दे”. भोन्दु जी ने शीशी में से थोडा सा बॉम अपनी 2 उंगलियों पर लगाया और बोले “ बताओ जल्दी कहाँ लगाना है”. भाभी जी नीचे की ओर झुकी और अपनी साड़ी और पेटिकोट उपर करके अपनी मस्त गोरी गोरी गांड भोन्दु जी के सामने पेश कर दी, एक तो पहले से ही दूध जैसा सफेद रंग और उस पर लगी डंडे की चोट से गांड पर बना लाल निशान उनकी गांड को और हसीन बना रहा था, ऐसी गांड देख कर किसी का भी लंड पिचकारी छोड़ दे पर हमारे भोन्दु जी के लंड ने तो जैसे कसम खा रखी थी ‘प्राण जाए, पर माल ना जाए’. भाभी जी की गांड पर बने निसान को देख कर भोन्दु जी हंसते हुए बोले “ इसने तो पूरा लाल कर दिया”. भाभी जी का खून फुंक गया और वो अपनी गांड को हिलाते हुए बोली “ज़्यादा दाँत मत दिखा और आवाज़ मत कर, चुप चाप जल्दी से लगा दे, इतनी देर से झुके झुके मेरी कमर दुखने लगी है”. भोन्दु जी ने उनकी गांड पर बॉम लगते हुए कहा “ कोई बात नहीं, कमर पे भी लगा दूँगा”. भोन्दु जी धीरे धीरे भाभी जी की गांड पर बॉम लगाए जा रहे थे और भाभी जी की चूत में हलचल होनी शुरू हो गयी थी, जैसे ही भोन्दु जी अपनी उंगलियाँ हटाते भाभी जी अपनी मस्ती भारी आवाज़ में बोलती “ थोडा उपर, थोड़ा नीचे, थोड़ा इधर भी, थोड़ा उधर भी”. थोड़ा इधर थोड़ा उधर करते करते भोन्दु जी तंग हो गये थे और शीशी में बॉम भी ख़तम हो गया था, पर भाभी जी की आग अभी कहाँ शांत हुई थी. भोन्दु जी ने पूछा “ बस अब तो लग गया ना सब जगह, और बॉम नहीं है”. भाभी जी ने भोन्दु जी की एक उंगली पकड़ी और उसे लगाऊँ , और नहीं है मेरे पास”. भाभी जी बोली “ मुझे कुछ नहीं पता,मुझे तो बहुत आराम मिल रहा है, बॉम नहीं है तो कुछ और लगा दे, पर जल्दी लगा”. भोन्दु जी ने पहले तो शीशी से बॉम निकालने की कोशिश की,फिर इधर उधर देखा की शायद कुछ रखा हो, तभी उन्हे बाथरूम के रोशनदान में रखी फिनायल की एक बोतल दिखाई दी, उन्होने वो बोतल खोली और थोड़ा सा फिनायल भाभी जी की गांड के बीचो बीच टपका दिया. फिनायल गिरते ही भाभी जी की गांड में 440 वॉल्ट का झटका लगा और उनकी गांड बिलबिला गयी. उन्होने साड़ी नीचे की और गेट खोलकर अपने कमरे की तरफ भागने ही वाली थी कि अचानक माता जी ने आवाज़ लगा दी “ रज्जो, तू अंदर है क्या”.

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Posted : 25/04/2013 1:22 pm
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मा जी की आवाज़ सुनते ही रज्जो भाभी घबरा गयी, उन्होने फट से दरवाजा बंद किया और भोन्दु जी के गाल पर एक थप्पड़ जमा दिया, बाथरूम में रखे पानी से अपनी गांड को धोते हुए वो भोन्दु जी से बोली “ ये क्या लगा दिया तूने, कितनी ज़ोर से जलन हो रही है तुझे पता भी है, मैं भी किस बेवकूफ़ के चक्कर में आ गयी, सत्यानाश हो तेरा ”. तभी मा जी ने फिर आवाज़ लगाई “ रज्जो बोलती क्यूँ नही, तू अंदर है क्या”. भाभी जी अपनी गांड धोते धोते बोली “ जी मा जी, मैं बाथरूम में हूँ, बॉम लगा रही हूँ”. मा जी बाथरूम के दरवाजे के पास खड़ी होकर फिर चिल्लाई “ प्रताप आया है, खाना लेने”. इतना सुनते ही भाभी जी का तो पानी सूख गया , अंदर भोन्दु जी, बाहर मा जी और प्रताप दोनो. अब कैसे बाहर आए और कितनी देर अंदर रहे, पर कहते हैं ना, जब इंसान की गांड पर बन आती है तो रास्ता अपने आप सोच लेता है, और भाभी जी की गांड पर तो सुबह से ही कुछ ना कुछ बन रहा है, उन्होने झट से अपना दिमाग़ लगाया और अंदर से चिल्लाते हुए बोली “ मा जी, उनका खाना तो मैने राजा के हाथ भिजवा दिया, पहुँचने वाला ही होगा”. मा जी बोली “अब प्रताप आ गया है तो यहीं गरम गरम खिला दे, वैसे भी बेचारे को रोज़ ठंडा ही मिलता है”. इतना कहकर मा जी तो वहाँ से चली गयी और प्रताप बाथरूम के दरवाजे के पास आकर बोला “ जल्दी निकल, मुझे नहाना है”. ये लो एक मुसीबत टली नहीं दूसरी उससे पहले आ गयी. पर हमारी रज्जो भाभी का दिमाग़ तो चाचा चौधरी से भी तेज चलता है ना, उन्होने अंदर से आवाज़ दी “ नहा कर क्या पहनोगे, कपड़े तो गीले पड़े हैं, मैने 2 दिन पहले एक कुर्ता पाजामा, भुल्लन धोबी के पास प्रेस करने भिजवाया था, अभी तक देने नहीं आया, मैं ज़रा बॉम लगा रही हूँ आप तब तक भुल्लन से अपना कुर्ता पाजामा ले आओ”.

जैसे ही प्रताप वहाँ से गया, भाभी जी ने फटाक से बाथरूम का दरवाजा खोला और सीधा अपने कमरे में पहुँच गयी, पीछे पीछे भोन्दु जी भी अंदर आ गये. लेकिन अब भाभी जी की गांड इसलिए फट रही थी क्यूँ कि उन्होने बोल दिया था की भोन्दु जी खाना लेकर खेत पर गये हैं और अब प्रताप जब भोन्दु जी को यहाँ देखेगा तो सब गड़बड़ हो जाएगी. भाभी जी ने भोन्दु जी को समझाया की अगर कोई पूछे तो बोल देना की रास्ते में कोई कुत्ता उनका खाना छीन कर भाग गया और भोन्दु जी को उनके कमरे में भेज दिया. प्रताप लोट कर आया और बोला “ ओ री रज्जो, भुल्लन तो बोला की कुर्ता पाजामा तो उसी दिन शाम को दे आया था, कहाँ आग लगा दी मेरे कपड़ो में”. प्रताप गर्मी से मरा जा रहा था, उसने झट से कपड़े उतारे और एक तोलिया लेकर बाथरूम में घुस गया. अंदर वही पानी रखा था जिससे भाभी जी अपनी गांड धो रही थी, प्रताप ने जल्दी जल्दी नहाना शुरू किया और पूरे शरीर पर साबुन मल ली और अंदर से चिल्लाए “ रज्जो, ओ रज्जो, तू सेम्पू वेमपू नहीं लगाती क्या, थोड़ा सा दे तो ज़रा, सुना है बाल एक दम चिकने कर देता है”. भाभी जी दरवाजे के पास आकर बोली “ वहीं चोकी के उपर एक बोतल रखी है, उसी में है”. प्रताप ने अपनी आँख पर साबुन लगा रखी थी और बिना देखे ही बोतल उठा ली ,ढक्कन खोलकर जैसे ही सर में शेम्पू की बूँद टपकाई, प्रताप के सर में आग लग गयी. जी हाँ, बिल्कुल सही सोचा आपने, हमारे भोन्दु जी फिनायल की बोतल चोकी पर रख आए थे, फिनायल डालते ही प्रताप उछल पड़ा, उसने जल्दी जल्दी अपने सर पर पानी डाला और जैसे ही अपने बालो पर हाथ फिराया एक मुट्ठी बाल प्रताप के हाथ में आ गा गये. प्रताप आधा गंजा हो गया था, गुस्से से बिलबिलाकर उसने बाथरूम के दरवाजे में लात मारी और फिनायल की बोतल बरामदे में फेंक कर मारी, भाभी जी दौड़ी दौड़ी आई और देखा ये तो वही फिनायल की बोतल है जिसने अभी तक उनकी गांड में आग लगा रखी थी. रज्जो ने प्रताप की हालत देखी तो उसकी आँखे फटी रह गयी , प्रताप अपने बालो को हाथ में लिए रज्जो को घूर रहा था और तभी रज्जो की हँसी छूट गयी “ हा हा हा, आपने शेम्पू की जगह फिनायल लगा लिया जी”. इसकी मा का साकी नाका प्रताप आग बाबूला हो गया “ यहाँ खड़ी खड़ी दाँत फाड़ रही है, तूने ही तो कहा था की चोकी पर जो बोतल रखी है उसमे सेम्पू है,मैने सारी ज़िंदगी सेम्पू लगाए हैं क्या, बता नहीं सकती थी की कौन सी बोतल उठानी है”. भाभी जी काँपते हुए बोली “ जी, मैने तो फिनायल की बोतल उपर रोशनदान में रखी थी, मुझे नहीं पता चोकी पर किसने रख दी”. प्रताप की झाँटे सुलग रही थी और वो किसी भी वक़्त रज्जो की गांड तोड़ने वाला था, तभी भोन्दु जी वहाँ पधारे और बोले “ भैया,ये बोतल मैने रखी थी”. प्रताप बोखलाया हुआ था, उसने अपने बाल भोन्दु जी के मुह पर फेंक कर मारे और बोला “ इसलिए रखी थी वहाँ, की मैं आऊँ और इसे अपने सर में लगा कर पूरे गाँव में गंजा घूमूं, क्या कर रहा था ये फिनायल की बोतल चोकी पर सज़ा कर”. प्रताप ने इतनी ज़ोर से धमकाया की भोन्दु जी नर्वस हो गये और उनका हकलाना शुरू हो गया “ वो म म म म मैं तो बा बा बॉम....” जैसे जी भोन्दु जी ने बॉम का नाम लिया भाभी जी का मूत निकल गया और उन्होने भोन्दु जी की बात को काटते हुए कहा “ जाने दीजिए ना, आपको पता है ना ये ऐसे ही उल्टे सीधे काम करता है, छोड़िए इसे, आपका कुर्ता पाजामा मिल गया है, कपड़े पहन लो और खाना खा लो”. रज्जो भाभी ने भोन्दु जी की गांड तुड़ने से बचा ली, और भोन्दु जी को बाहर चले जाने का इशारा कर दिया. भोन्दु जी बाहर जा रहे थे तो प्रताप ने उन्हे रोक कर पूछा “ सुन ज़रा, तू तो खेत पर गया था ना मेरा खाना लेकर, इतनी जल्दी वापिस कैसे आ गया”. भोन्दु जी इस बात से ज़रा भी नहीं घबराए क्यूंकी भाभी जी ने इस सवाल का जवाब तो पहले ही भोन्दु जी को रटा दिया था “ कुत्ता छीन कर ले गया”. प्रताप बोला “ पूरे गाँव के कुत्ते सिर्फ़ इसी के पीछे पड़ते है, कुत्तो को भी पता है इससे कुछ नहीं होता”. अब ये तो कोई भाभी जी से पूछे की भोन्दु जी ने बाथरूम में क्या क्या किया है.

प्रताप अपना गंजा सर लिए खाना खाने बैठ गया और भाभी जी से बोला “ देख रज्जो, क्या मुह लेकर जाऊं बाहर, आधे बाल उड़ गये, जो देखेगा मुझ पर हँसेगा ”. भाभी जी बोली “कुछ दिन में वापिस आ जाएँगे, गमछा बाँध कर रखना”. प्रताप खाना खा कर बाहर जाने लगा तो भाभी जी ने उसका हाथ पकड़ कर रोक लिया और बोली “ मैं आपको अच्छी नहीं लगती क्या. आप कभी बात तक नहीं करते मुझसे, सब पूछ रहे थे की खुशख़बरी कब दे रही है”. प्रताप उसकी बात को समझ गया, लेकिन प्रताप को तो बस चमेली की चूत से ही प्यार था, उसे कहाँ रज्जो भाभी की सख़्त और गुलाबी चूत की फ़िक्र थी. उसने रज्जो का हाथ हटाया और बोला “ कुछ दिन और रुक जा, फिर आराम से खुशख़बरी दे देंगे, अभी जाने दे, मुझे खेत में पानी लगाना है”. भाभी जी फिर अपनी चूत मल्टी रह गयी और प्रताप उन्हे तड़पता छोड़ कर चला गया. उधर भोन्दु जी को अपने एडमिसन की चिंता सता रही थी, चपरासी को 200 रुपये भी दे आए थे और उसने कहा था की 2-3 दिन बाद आकर अपने सिलेक्सन के बारे में पूछ लेना. शाम हो चली थी भोन्दु जी ने अगले दिन कॉलेज जाने का प्लान बनाया और अपनी मा से बोले “मा, कल मैं शहर जाऊँगा, कॉलेज में कुछ काम है, लड्डू बना देना, मैं साथ लेकर जाऊँगा”. माता जी अंदर से चिल्लाई और बोली “ रात को बना दूँगी बेटा, तू आराम से सो जा अगर सुबह जल्दी उठना है तो”.

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Posted : 25/04/2013 1:22 pm
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प्रताप अपनी चमेली के खेत में पानी लगाने चला गया था और भाभी जी अपने खेत में हल चलवाने के लिए तड़प रही थी, भोन्दु जी ने कल सुबह निकलने के लिए अपना सारा सामान पेक कर लिया था और खाना पीना निबटा कर छत पर जाकर लेट गये थे, नीचे मा जी अपने प्यारे बेटे के लिए लड्डू बना रही थी और भाभी जी उनकी मदद कर रही थी. जब जब भाभी जी अपनी मुट्ठी में चूरमा लेकर लड्डू को गोल करती तो ऐसा लग रहा था जैसे किसी के टटटे मसल रही हों, लड्डू बनाते बनाते उन्हे नींद आने लगी तो मा जी ने उन्हे सोने भेज दिया, लेकिन भाभी जी ने उन्हे बताया नहीं की वो छत्त पर सोने जा रही हैं. उपर जा कर देखा तो भोन्दु जी अपने सारे कपड़े उतार कर एक धारीदार कछ्छे में हाथ और टांगे फैलाए चित्त पड़े थे और उनके कछ्छे का नाडा इस तरह लटक रहा था जैसे कोई नाग किसी पेड़ से उतर रहा हो. भाभी जी की चूत में फिर खुजली उठी लेकिन इस बार वो भोन्दु जी से पंगा लेने की हिम्मत नहीं करने वाली थी, लेकिन एक आख़िरी बार कोशिश करने की सोच कर वो भोन्दु जी के बगल में ही लेट गयी और अपने ब्लाउस के 2 हुक खोल कर भोन्दु जी की तरफ करवट लेकर लेट गयी, सोचा होगा कि नींद में जब भोन्दु जी का हाथ उन मोटे मोटे रसभरे बूब्स पर लगेगा तो शायद भोन्दु जी के लंड में कुछ सनसनाहट हो जाए. काफ़ी देर लेटे रहने के बाद भी जब कुछ होता दिखाई नहीं दिया तो बेचारी इंतज़ार करते करते सो गयी. अचानक आसमान में बदल उमड़ आए और छत पर बिल्कुल अंधेरा हो गया, ठंडी ठंडी हवा चलने लगी, भोन्दु जी ने करवट बदली और भाभी जी से चिपक गये, भाभी जी की ठंडी कमर पर जैसे ही भोन्दु जी का हाथ लगा, भाभी जी की चूत में हलचल शुरू हो गयी, उन्होने अपने आधे खुले हुए बूब्स भोन्दु जी के होटो से लगा दिए और भोन्दु जी का एक हाथ अपने पेटिकोट में घुसा दिया. लेकिन हमारे भोन्दु जी को कहाँ कुछ होने वाला था, वो तो जैसे इस दुनिया के सबसे विचित्र प्राणी थे. जब भाभी जी ने देखा की भोन्दु जी कुछ नहीं कर रहे हैं तो उन्होने अपना एक हाथ भोन्दु जी के कछ्छे में डाल दिया और बहुत देर मेहनत करने के बाद उन्हे एक छोटी सी मूँगफली हाथ लगी. भाभी जी ने सोचा इस लंड से चुदने से तो अच्छा है भोन्दु जी की उंगली ही अपनी चूत में डाल कर काम चला लिया जाए . उन्होने भोन्दु जी की उंगली अपनी चूत में डाली और आगे पीछे करने लगी, अंदर से गरम गरम पानी जब भोन्दु जी की उंगली पर लगा तो भोन्दु जी की नींद खुल गयी और उनकी चूत से अपना हाथ खींचते हुए बोले “ कौन है, क्या है”. भाभी जी ने भोन्दु जी के मूह पर हाथ रखा और धीरे से बोली “धीरे बोल पागल, मैं हूँ तेरी भाभी, तेरी अपनी रज्जो भाभी”. भोन्दु जी बोले “ तो मेरी उंगली से क्या कर रही हो, ये गीला गीला क्या लगा दिया, छी, पेशाब कर दिया , इतनी बड़ी होकर बिस्तर पर मूत देती हो”. भाभी जी ने भोन्दु जी को एक लात मारी और बोली “ पेशाब नहीं गोले का तेल है, तूने बॉम की जगह फिनायल लगा दिया था तो इसे लगाने से जलन भी कम हो जाती है और जले का निसान भी नहीं रहता”. भोन्दु जी बोले “ अच्छा, तो फिर मुझे जगा लेती मैं आराम से लगा देता, लाओ शीशी दो और उल्टी हो जाओ, मैं लगा देता हूँ”. भाभी जी बोली “ नहीं रे पागल, यहाँ आस पास की छतो पर सब सोए रहते हैं और नीचे से भी कोई ना कोई आ सकता है, मैं यहाँ कपड़े नहीं हटा सकती, मैने पेटिकोट में शीशी छुपा रखी है, तू बस वहीं से तेल निकाल कर, पीछे लगा दे”. भोन्दु जी ने पेटिकोट के अंदर हाथ डाला तो उन्हे कोई शीशी नहीं मिली, तभी भाभी जी ने उनकी 2 उंगली पकड़ कर अपनी छूट में डाली और बोली “ यहाँ छुपाई है शीशी , इसके अंदर से तेल निकाल ले और पीछे छेद पर लगा दे”.

भोन्दु जी बेचारे चुप चाप भाभी जी की चूत में उंगली डालते और चूत से निकलते पानी को भाभी जी की गांड के छेद पर लगते, भाभी जी पूरे मज़े ले रही थी और जैसे ही पूरी तरह झड़ने वाली थी, श्रीमती हिट्लर उपर आ गयी और अंधेरे में उनका पैर उपर रखे एक गमले से टकरा गया, और वो सीधी भोन्दु जी के पास जा गिरी. “ हाए रे, मर गयी, ये गमला भी यहीं पटक रखा है कम्बख़तो ने, तोड़ दिए मेरे हाथ पैर”. भाभी जी ने जल्दी से भोन्दु जी का हाथ हटाया और उनके कान में धीरे से बोली “ मैं नीचे भाग रही हूँ, मा जी को मत बताना, वरना हम दोनो को बहुत मार पड़ेगी”. इतना कहकर भाभी जी दबे पाँव नीचे भाग गयी और भोन्दु जी ने अपनी मा को उठाया और बोले “ जब अंधेरे में दिखता नहीं तो उपर क्यूँ आई, मोमबत्ती नहीं जला सकती थी”. मा जी अपने हाथ मसल्ते हुए बोली “ अरे बेटा, मैं तो तेरे लिए लड्डू बना रही थी, सोचा एक लड्डू तुझे चखा दूं, मीठा कम लगे तो और डाल दूँगी. पर यहाँ तो ये गमले सज़ा रखे हैं ना इस महल को सजाने के लिए. अब तो बस बन गये लड्डू”. भोन्दु जी अपनी मा का हाथ पकड़ कर बोले “ भाभी के पास गोले का तेल है, मैं उनसे लाकर मालिश कर दूं”. मा जी बोली “ बेटा गोले के तेल से चोट ठीक नहीं होती, तेरे पिताजी के पास एक ट्यूब है, उसमे से मलहम निकल कर लगा लूँगी, ठीक हो जाएगी, तू कल परांठे और आचार ले जा, अगली बार दिन में ही लड्डू बनाकर रख दूँगी”. भोन्दु जी ने अपनी मा को उठाया और धीरे धीरे नीचे लाकर पिताजी के कमरे में छोड़ आए और वापिस छत पर जा कर सो गये.

सुबह उठे तो भाभी जी उन्हे देख कर मुस्कुरा रही थी, खुश जो इतना थी, बड़े दिनो बाद तो चूत से पानी का टॅंकर बहाया था, उन्होने भोन्दु जी के लिए अपने हाथो से परांठे बनाए और उसमे आचार रख कर बाँध दिया. भोन्दु जी कॉलेज के लिए निकल रहे थे तो भाभी जी ने उन्हे अपने पास बुलाया और बोली “ शाम को जल्दी आ जाना, रात तेल लगाया तो आज काफ़ी आराम मिला है, 2-3 दिन रोज़ लगा दोगे तो बिल्कुल ठीक हो जाएगा”. भोन्दु जी बोले “ ठीक है, मैं आते वक़्त एक बॉम की शीशी भी ले आऊंगा, ख़तम हो गयी थी ना. वैसे मा बता रही थी की पिता जी के पास एक ख़ास मलहम है, उनसे माँग कर लगा दूं”. भाभी जी समझ गयी की मा जी किस मलहम की बात कर रही थी, उन्होने भोन्दु जी की पीठ पर हाथ मारा और बोली “ तू तो एक दम पागल है, पिताजी का मलहम तो सिर्फ़ मा जी ही लगा सकती है, तू वापिस आ जा, मेरा गोले का तेल ही ठीक है मेरे लिए ”. भोन्दु जी अपना वही धनुष रूपी थैला और एक काली पन्नी में अपना लंच लटका कर बस अड्डे की और चल पड़े. चौराहे पर पहुँचे तो कालू जी , उस रात का बदला लेने की पूरी तैयारी के साथ अपने दोस्तो को लेकर, वहाँ भोन्दु जी का इंतज़ार कर रहे थे.

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Posted : 25/04/2013 1:22 pm
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