जा क्यों नहीं रहा ह...
 

जा क्यों नहीं रहा है ?  

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 Anonymous
(@Anonymous)
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दोस्तो, मैं अनल्पाई.नेट का पुराना पाठक हूँ। मैंने अनल्पाई.नेट पर बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं और चूत या मुठ मारकर पानी निकला है। आज मैं अपनी पहली कहानी लिख रहा हूँ, आशा करता हूँ कि गुरूजी की कृपा से प्रकाशित हो जाएगी तो आप सब भी मेरी सेक्स कथा के साथी बन जायेंगे।

बात उन दिनों की है जब मैं अपनी पढ़ाई पूरी करके जॉब की तलाश में दिल्ली की तरफ निकला। मेरे एक चचेरे भाई गाजियाबाद में रहते हैं, जिनके पास मुझे कुछ दिनों तक रहना था। वो बहुत ही शरीफ और ईमानदार आदमी हैं। उनकी पत्नी उतनी ही तेज़ और सेक्सी है।

एक दिन जब भैया अपने काम के सिलसिले में बाहर गए थे, तब घर पर केवल मैं और भाभी ही बचे थे। भाभी एक तो हैं ही बला क़ी खूबसूरत ! उस दिन काली साड़ी में और भी मस्त लग रही थी, उनके मस्त गोरे स्तन ब्लाउज़ से बाहर कूदने को तैयार थे।

मैं कामुक प्रवृति का आदमी हूँ पर शुरू में खुल नहीं पाता, इसलिए भाभी को चोर निगाहों से ही देखता था। मैंने मज़ाक में गाना शुरू किया- काले लिबास में बदन गोरा यूँ लगे ईमान से, जैसे हीरा निकल रहा हो कोयले की खान से !

बस इतना सुनना था कि भाभी फट से मेरे पास आ गई और मुझसे चिपक गई, बोली- राजेश, मैंने जब से तुम्हें देखा है, तबसे बस तुम्हारे ही बारे में सोचती हूँ, हर समय बस तुम्हारा ही ख्याल दिल में रहता है, जब से तुम यहाँ आये हो तब से मैं सोच रही हूँ कि कब हम अकेले मिलेंगे ! आज मौका मिला है इसे खो मत !

यह सब सुनकर मैं तो बस पागल ही हो गया था, मैं कब से ख्यालों में उसको चोद रहा था, कब से उसके बारे में सोचकर मुठ मार रहा था, विश्वास नहीं हो रहा था कि आज वो चूत सचमुच मेरे लंड को नसीब होगी।

आखिर सारा दिन इंतज़ार करने के बाद रात आ ही गई। भाभी तैयार थी पर मेरा किसी की चुदाई करने का यह पहला अनुभव था इसलिए डर लग रहा था। मुझे किसी ने बताया था कि चूत मारने से पहले मुठ मार लो तो देर से झड़ता है, इसलिए मैंने सोने से पहले मुठ मार ली थी और अब चूत मारने के लिए तैयार था।

भाभी पुरानी खिलाडी थी, वो समझ गई थी कि मैं मुठ मारकर आया हूँ। जाने से पहले उसने मेरा खड़ा लंड देख लिया था। रात को सारे कामों से निबट कर हम लोग बिस्तर पर आये।

मैंने भाभी को बोला- मेरा पहला अनुभव है, मुझे नहीं पता कि कैसे करते हैं।

वो बोली- तुम बस वो करो जो मैं कहती हूँ !

गर्मी की रात थी, हम लोग छत पर थे, चांदनी रात में भाभी गुलाबी नाइटी में और भी खूबसूरत लग रही थी, वो मुझसे प्यार की बातें कर रही थी और मैं सोच रहा था कि कब इसको चोदूंगा। खैर मेरा समय भी आया और भाभी ने कहा- राज, आज मैं तुम्हारी हूँ, मेरे साथ जो करना चाहते हो कर लो।

मैंने कहा- आज आप करो, मैं कल करूँगा !

फिर क्या था, भाभी खुश और मुझे तो खुश होना ही था।

भाभी मेरे बिलकुल करीब आकर लेट गई, मेरा लंड उनके पेट को छू रहा था फिर उसने मेरी टी-शर्ट उतार दी और मुझे चूमने लगी। मेरा तो बुरा हल था और मेरे लंड का तो पूछो मत, वो मुझे चूमे जा रही थी और मेरा लंड बढ़ता जा रहा था। उसने लोअर के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ लिया और बोली- बताओ कैसे चोदोगे मुझे?

मैंने कहा- कपड़े उतारो !

उसने कहा- जो करना है, तुम करो सब मुझसे ही करवाओगे क्या ?

मैंने भी अपना रंग दिखाना शुरू किया। उसकी नाइटी खोल दी, उसका गुलाबी बदन चांदनी रात में और भी खूबसूरत लग रहा था। बड़े-बड़े स्तन ब्रा से बाहर आने को मचल रहे थे, गोरी गोरी चूत भी पैंटी के अंदर से झाँक रही थी। मैंने भी समय न गंवाते हुए उसकी ब्रा के हुक खोल दिए। मैं वक्ष को मसलने लगा तो उसने कहा- जोर से मत करो, दर्द होता है, धीरे धीरे करोगे तो तुम्हें भी मज़ा आएगा और मुझे भी !

मैंने भी उसकी बात मानी और चूचियों को धीरे धीरे सहलाने लगा। मैं एक हाथ से चुचूक रगड़ रहा था और दूसरे हाथ से पैंटी के अंदर चूत में ऊँगली डाल रहा था, वो मुझे चूमे जा रही थी।

मैंने उसकी पैंटी उतारी और चूत में ऊँगली डालकर अंदर बाहर करने लगा, उसको मज़ा आने लगा था। उसने मेरा लंड पकड़ लिया और चूत की तरफ इशारा करने लगी। मैं भी समझ गया था कि लोहा गरम है, मैंने सीधा उसके ऊपर आकर अपना लंड उसकी चूत पर लगाया लेकिन लंड अंदर नहीं जा रहा था। उसने मुझे ऊपर आने को कहा, मैं थोड़ा ऊपर आया तो उसने मेरा लंड अपने मुँह में डाला और चाटने लगी मुझे बड़ा अजीब सा लग रहा था। फिर जब उसने मुझे छोड़ा तो मैंने अपना लंड उसकी चूत पर लगाया, पर चूत में जा नहीं रहा था।

मैंने कहा- ये जा क्यों नहीं रहा है ? तुम्हारी चूत तो पहले से चुद रही है, आज क्या हुआ ?

वो बोली- चूत तो चुद रही है पर इतना मोटा लंड अभी इसमें नहीं गया। अब तुम डालो अपना लंड इसमें, ज्यादा तडपाओ मत !

मैंने भी पूरा जोर लगाकर लंड को चूत पर रखा और जोर का धक्का दिया, आधा लंड चूत के अन्दर समां गया।

वो बोली- पूरा डालो, आज फाड़ दो मेरी चूत को !

मैंने दूसरा धक्का दिया और पूरा लंड चूत में समां गया। मेरा लंड उसकी चूत में था, दोनों हाथ स्तनों पर और होंठ उसके होंठों से चिपके थे। मैं धीरे धीरे धक्के मार रहा था, वो सिसकी लिए जा रही थी। उसकी सिसकी से मज़ा बढ़ता जा रहा था, फिर अचानक उसने मुझे कसके पकड़ लिया, वो झड़ चुकी थी। मेरे लंड पर कुछ गीला गीला महसूस हो रहा था। पर मैं तो चुदाई से पहले मुठ मार चुका था इसलिए झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।

इसी बीच मेरी उत्तेजना भी अपने चरम पर पहुंची और मेरे लंड से गरमा गरम तेल की फुहार उसकी चूत में छूट पड़ी। इस बीच वो भी दोबारा झड़ चुकी थी।

वो बोली- राज आज मेरा सपना पूरा हो गया, तुम्हारे भाई जब मुझे चोदते हैं तो मैं आँख बाद करके तुम्हारे बारे में ही सोचती हूँ तब कही मेरी चूत का पानी निकलता है, आज भी विश्वास नहीं होता कि मेरी चूत में सचमुच तुम्हारा लंड गया है और मैं तुम्हारे लंड से चुदी हूँ।

मैंने कहा- मैं भी कब से तुम्हें सोच कर मुठ मारता रहा हूँ, आज तुम्हारी चूत चोदकर मेरा सपना पूरा हो गया है।

इसी तरह बातें करते करते काफी समय बीत गया, चूत पास में पड़ी हो तो लंड कब तक चुप रह सकता है?

थोड़ी ही देर में लंड ने फिर से फुफकारना शुरू कर दिया, उसने मेरे लंड को महसूस किया तो चौंक गई, बोली- यह क्या है?

मैंने कहा- लंड है ! भूल गई क्या? अभी अभी इसी ने फाड़ा है तुम्हारी चूत को !

वो बोली- फिर से चोदना है क्या?

मैंने कहा- जब चूत साथ में है तो क्यों नहीं ?

उसने कहा- मेरा मन करता है कि मैं ऊपर आकर चोदूँ, पर मेरी यह इच्छा कभी पूरी नहीं हो सकी।

मैंने कहा- तुम्हारी मर्ज़ी है, अगर तुम्हें ऐसे ही मज़ा आता है तो ऐसे ही कर लो !

अबकी बार वो मेरे ऊपर आ गई, मेरा लंड अपनी चूत में डाला और मुझको चोदने लगी। वो मुझे चोद रही थी जैसे थोड़ी देर पहले मैंने उसे चोदा था। मैं भी नीचे से चालू था, मैं उसके स्तन दबा रहा था और वो गांड उठा उठा कर चोद रही थी, उसके धक्के धीरे धीरे तेज़ होने लगे और 10-12 जोर के धक्कों के साथ वो झड़ गई। फिर मैंने उसे नीचे लिया और अपनी स्पीड बढ़ा दी, पर मेरा लंड अब झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।

वो भी परेशान थी, उसने मेरा लंड चूत से निकाला और मुँह में डालकर जोर से चूसने लगी। करीब 15 मिनट के बाद मेरे लंड ने उसके मुँह में पिचकारी छोड़ दी और वो पूरा माल पी गई। उस रात मैंने तीन बार उसको चोदा, वो इतने में 5 बार झड़ी होगी।

फिर हम दोनों बाथरूम में गए, एक दूसरे के चूत, लंड, गांड और वक्ष को रगड़ रगड़ कर साफ किये और फिर ऊपर आकर नंगे ही चिपक कर सो गए।

उसके बाद हम लोगो को जब भी मौका मिलता हम चोदम-चुदाई का खेल खेलते।

अब मेरी शादी हो गई है और मैं सैटल हो चुका हूँ। शादी के बाद मैंने कभी किसी दूसरी को नहीं चोदा। मन करता है किसी की सील तोड़ूँ पर कोई चूत मिले तो बात बने।

आशा करता हूँ कि आपको मेरी कहानी पसंद आएगी और आप मुझे मेल करेंगे।

आपके मेल के इंतजार में आपका

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Posted : 16/11/2010 8:49 am
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