नजदीकियाँ
 

नजदीकियाँ  

  RSS
 Anonymous
(@Anonymous)
Guest

दोस्तो, मेरा नाम राजेश शर्मा है। यह मेरी पहली कहानी है अगर आप हौंसला बढ़ायेंगे तो मैं फिर लिखूँगा।

मस्ती करने की उम्र होती है 17-18 से 21 साल तक। चाहे लड़का हो या लड़की इस उम्र में सेक्स की तरफ इतने ज्यादा आकर्षित होते हैं कि पूछो मत। मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल था। आज मेरी उम्र 38 साल हैं। जब मैं 18 साल का था तब मुझे भी कुछ कुछ होता था। अक्सर रात को मेरा हाथ भी मेरे अंडरवियर के अंदर चला जाता था। मैं अनजाने में ही काफी काफी देर अपना हथियार (लंड) सहलाता रहता था। जवान लड़कियों को देख कर अक्सर तन जाता। फिर रात को उन्हें याद करके अपना लंड सहलाता।

जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। इन्हीं उतार-चढ़ाव के बीच जिन्दगी चल रही थी कि एक दिन मेरी जिंदगी में भी सेक्स भरा तूफ़ान आया जिसने मुझे पल भर में जवान बना दिया।

शादी की रात थी। मेरे चाचा के बेटे की शादी थी। वो भी आई थी बहुत बन-ठन के। उम्र उसकी भी 18 या 19 साल की ही थी। पर वो मुझ से एक क्लास आगे थी। नाम था किरण। उसकी खूबसूरती का वर्णन करना लिख कर बताना मुश्किल है- एक दम गोरा रंग, कसा हुआ शरीर, तनी हुई चूचियाँ ज्यादा बड़ी नहीं थी पर इतनी आकर्षक थी कि मेरा लंड उसे देखते ही सलामी देने लगता था।

मैं उसे अपने दिल का हाल बता चुका था पर वो मेरी बात का कोई जवाब नहीं देती थी।

मेरे चाचा की लड़की है सुमन। मैंने सुमन को किरण से बात करने को कहा। सुमन मेरी हम-उम्र थी। हम दोनों एक दूसरे से खुल कर बात करते थे। कोई भी बात नहीं छुपाते थे। इस लिए मैंने किरण को लेकर अपने दिल की बात सुमन को बता दी। और उससे मदद भी मांग ली।

शादी की रात नाच-गाना खत्म होने के बाद सब सोने की तैयारी कर रहे थे। जिसको जहाँ जगह मिली, वो वहीं लेट गया। पर मेरी नजर तो किरण का पीछा कर रही थी।

तभी सुमन मेरे पास आई और कहा- मैं और किरण ऊपर वाले स्टोर-रूम में सोने जा रहे हैं, तुम भी वहीं आ जाना।

मुझे मेरा काम बनता नजर आ रहा था। मैं उनसे पहले ही स्टोर में जा कर लेट गया। तभी खनकती आवाज के साथ किरण और सुमन स्टोर में आई। दोनों किसी बात पर जोर-जोर से हंस रही थी।

आपको बता दूँ कि सुमन किरण से भी ज्यादा सेक्सी थी। वो ज्यादा गोरी तो नहीं थी पर उसका फिगर बहुत मस्त था। एक दम तनी हुई किरण से बड़ी चूचियाँ थी सुमन की। पर क्योंकि वो मेरी चचेरी बहन थी तो कभी उसके बारे में नहीं सोचा था।

कमरे में आते ही दोनों बातें करने लगी। स्टोर में लाइट तो थी पर मैंने ऑन नहीं की थी। सुमन किरण को कह रही थी कि तुमने तो राज (मैं) पर जादू कर दिया है तुम्हारा दीवाना बना फिरता हैं। तुम हो कि उसे घास ही नहीं डालती।

किरण बोली- यार, राज पसंद तो मुझे भी है पर एक समस्या है, वो मुझ से उम्र में छोटा है। कल जब शादी की बात आयेगी तो सब मना कर देंगे।

सुमन : यार तू भी कहाँ शादी तक पहुँच गई, अभी तो प्यार करने की उम्र है शादी में तो बहुत समय बाकी है। अभी तो तुम सिर्फ प्यार करो और जिंदगी के मजे लो। एक बात बता, अगर राज तुम्हें चूमना चाहे तो तुम करने दोगी?

किरण : सोचना पड़ेगा। अगर तू उसकी इतनी सिफारिश कर रही है तो कल सोचती हूँ उसके बारे में, अब तो सोने दे। नाच-नाच कर बदन टूट रहा है। एक काम कर, मेरा बदन ही दबा दे।

इतना सुनते ही सुमन किरण से लिपट गई और दोनों एक दूसरे का बदन दबाने लगी। जिसे देख कर मेरा बुरा हाल हो रहा था। मैं भी अपने अंडरवियर में हाथ डाल कर अपना लंड हिलाने लगा।

थोड़ी देर बाद वो दोनो सो गई।

कमरे में बहुत अंधेरा था। हम तीनों की अलावा कमरे में कोई नहीं था। जब लगा कि वो सो गई हैं तो मैं उनके बगल में जाकर लेट गया। दोनों लिपट कर सो रही थी। अँधेरे के कारण पता ही नहीं चल रहा था कि कौन किरण है और कौन सुमन है। दोनों एक उम्र की और लगभग एक ही फिगर की थी और आज दोनों ने कपड़े भी एक जैसे पहने हुए थे। मैं काफी देर लेटा सोचता रहा, मैं क्या करूँ क्या ना करूँ !

फिर मैंने हिम्मत करके दोनों में से एक की चूचियों पर हाथ रख दिया। मुझे कुछ नंगापन सा महसूस हुआ जब हाथ को पूरा सरका के देखा तो पता लगा कि पूरी चूची बाहर थी। जीवन में पहली बार किसी की नंगी चूची को छुआ था। मेरी तो हालत खराब हो रही थी। पर हिम्मत करके मैंने उस नंगी चूची को सहलाना शुरु कर दिया।

वो थोड़ा सा कसमसाई पर मैंने चूची को सहलाना चालू रखा क्योंकि मैं अपने पर काबू नहीं रख पा रहा था। थोड़ा और नजदीक जाकर मैंने उसके होठों पर उंगली फेरना शुरू कर दिया। अचानक उसने मेरी ऊँगली अपने मुँह में ले ली। पहले तो मैं थोड़ा घबराया पर जब वो मेरी उंगली को चूसने लगी तो मेरा डर निकल गया। मैंने उसकी चूची जोर जोर से दबानी शुरू कर दी। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी।

मैं पूरी मस्ती में था, मैंने आवाज पहचानने की कोशिश भी नहीं की। अगर करता तो पता चल जाता कि वो किरण नहीं सुमन थी। पर मैं तो मस्ती में उसकी चूचियाँ दबा रहा था, वो भी तो मस्त हो कर दबवा रही थी। मेरी हिम्मत बढ़ी तो मैंने उसकी चूची को मुँह में ले लिया और चूसने लगा। वो मस्त हुई जा रही थी और मैं भी मदहोश था, पहली बार किसी की चूची मसल और चूस कर।

अचानक किरण ने अंगडाई ली तो मुझे पता लगा कि जिसे किरण समझ कर में मस्ती कर रहा था वो मेरी अपनी चचेरी बहन थी। मुझे बहुत शर्म आई और मैं वहाँ से भाग लिया।

अगली सुबह मुझे बहुत ग्लानि और शर्मिन्दगी महसूस हो रही थी कि मैं अपनी बहन के साथ ही मस्ती कर रहा था। रह रह कर मुझे उसकी मस्त चूचियों की चुसाई भी याद आती।

तभी सुमन मेरे पास आई तो मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था। सुमन मेरे पास बैठ गई। मैं उठ कर जाने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बैठने के लिए कहा।

मैं चुपचाप किसी चोर के तरह सिर झुका कर बैठ गया।

Quote
Posted : 15/02/2011 6:45 am
 Anonymous
(@Anonymous)
Guest

अगली सुबह मुझे बहुत ग्लानि और शर्मिन्दगी महसूस हो रही थी कि मैं अपनी बहन के साथ ही मस्ती कर रहा था। रह रह कर मुझे उसकी मस्त चूचियों की चुसाई भी याद आती।

तभी सुमन मेरे पास आई तो मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था। सुमन मेरे पास बैठ गई। मैं उठ कर जाने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बैठने के लिए कहा।

मैं चुपचाप किसी चोर के तरह सिर झुका कर बैठ गया।

अचानक वो हुआ कि मैं सोच भी नहीं सकता था सुमन मेरे नजदीक आई और मेरे होठों पर होंठ रख दिए। कहाँ तो मैं शर्म से मरा जा रहा था पर अचानक हुए यह हमला मेरी शर्म पर भारी पड़ गया और मैं भी सुमन के होंठ चूसने लगा। कोई पांच मिनट एक दूसरे के होंठ चूसने के बाद सुमन मुझ से दूर हुई और बोली- राज तुम्हें किसी बात पर शर्मिंदा होने की कोई जरूरत नहीं है। मैं खुद यही चाहती थी।

सुमन के मुँह से यह बात सुनने के बाद रही सही शर्मिन्दगी और झिझक भी खत्म हो गई।

मैंने सुमन को पकड़ा और उसकी चूचियाँ दबाते हुए उसके होठों पे होंठ रख दिए। अगर किसी के आ जाने का डर नहीं होता हो शायद मैं उसे वही नंगी कर लेता, पर शादी वाला घर था, कोई भी आ सकता था।

खैर किसी तरह शादी निपट गई।

इस दौरान जब भी मौका मिला सुमन और मैं लिपट लिपट कर प्यार करते रहे। रात को बड़ी देर तक सुमन की चूचियाँ चूसी, होंठ चूसे, बस चूत नहीं मारी। किरण आज हमारे साथ नहीं आई थी। कमरे में हम दोनों अकेले थे।

दो दिन ऐसे ही निकल गए।

तीसरे दिन भाभी (चाचा के लड़के की बीवी) के मायके में जागरण का कार्यक्रम था। सब लोग वहाँ जा रहे थे कि अचानक सुमन के पेट में दर्द होने लगा। उसने जाने से मना कर दिया। उसे अकेले नहीं छोड़ सकते थे इस लिये मैं भी रुक गया। बाकी सब लोग चले गए। अब घर में मैं ओर सुमन अकेले थे। उन लोगो को गए अभी पांच मिनट भी नहीं हुए थे कि सुमन के पेट का दर्द गायब हो गया। मुझे समझते देर नहीं लगी के सुमन ने नाटक किया था।

मैं सुमन के पास गया तो वो मुझ से लिपट गई और बोली- मेरी जान राज ! मैं कई दिनों से एक अजीब सी आग में जल रही हूँ। प्लीज मेरी आग को ठंडा कर दो।

कहते ही उसने अपने गर्म गर्म होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। मैं खुद भी तो एक आग में जल रहा था। मैं भी उसके होंठ चूसने लगा। आज पूरी रात थी हमारे पास अकेले रहने के लिए क्यूंकि सब सुबह ही आने वाले थे।

मैंने सुमन को गोद में उठाया और भैया के कमरे में ले गया।

कमरे में मैंने सुमन को भैया की शादी वाले नए बेड पर लिटा दिया। इसी बेड पर भैया अपनी नई बीवी के साथ सुहागरात मना चुके थे। आज मेरी सुहागरात थी अपनी बहन के साथ।

हम फिर एक दूसरे के होठ चूसने लगे मेरे हाथ सुमन की चूचियाँ टटोल रहे थे।

तभी सुमन उठी और दो मिनट में आने का कह कर चली गई।

दस मिनट के बाद सुमन आई।

मैं सुमन को देखता ही रह गया। उसने नई भाभी की साड़ी पहन रखी थी और घूंघट भी निकला हुआ था। मैं उसके नजदीक गया तो वो झुक कर मेरे पाँव छूने लगी और बोली- सुहागरात पर यही सब करना होता है।

मैंने उसे फिर से गोद में उठाया और बेड पर ले आया। आते ही मैंने उसका घूंघट उठाया और उसके रसीले होंठ चूम लिए। वो मुझ से लिपट गई और मैं उसकी चूचियाँ दबाने लगा। फिर शुरू हुआ कपड़े उतारने का सिलसिला।

पहले मैंने उसकी साड़ी उतारी। पेटीकोट और ब्लाउज में सुमन बहुत सेक्सी लग रही थी। मैंने उसके चुचूक ब्लाउज के ऊपर से ही चूम लिए। सुमन के मुँह से सिसकारी निकल गई। मैं समझ गया कि सुमन इस समय पूरी गर्म हो चुकी है। दिक्कत यह भी थी कि ना तो सुमन ने और ना ही मैंने पहले कभी सेक्स किया था। पर मैंने एक बार ब्लू फिल्म देखी थी। उसी अनुभव के दम पर मैंने सुमन के सारे कपड़े उतार दिए। सुमन मेरे सामने बिलकुल नंगी खड़ी थी।

मैंने सुमन की टाँगें खोल कर देखा तो पहली बार एक कुँवारी चूत मेरे सामने थी। जिंदगी में आज पहली बार चूत के दर्शन कर रहा था। छोटा सा छेद जिसे रेशम की तार जैसे झांटों ने ढक रखा था। मैं झुक गया और अपने होंठ सुमन की चूत पर रख दिए। सिसकारी और आहें कमरे में गूंजने लगी। मैं कुछ देर उसकी चूत चाटता रहा। सुमन इतनी गर्म हो चुकी थी कि वो मेरी जीभ की चुदाई से ही झड़ गई। उसका गर्म गर्म पानी मेरे मुँह में घुल गया। नमकीन और कसैला सा स्वाद था।

सुमन ठंडी हो चुकी थी।

सुमन उठी और मेरे कपड़े उतारने लगी। कुछ ही देर में मैं ही अपने छ: इंच के लंड के साथ सुमन के सामने नंगा खड़ा था। सुमन मेरे तन कर खड़े छ: इंच के लंड को बड़ी उत्सुकता से देख रही थी। मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया तो सुमन उसे धीरे धीरे सहलाने लगी। लंड इतना कड़क हो गया था कि मुझे दर्द होने लगा था। मैंने सुमन को लंड चूसने के लिए कहा तो वो बिना कुछ बोले मेरे लंड को मुँह में ले कर चूसने लगी। क्योंकि मैंने पहले कभी सेक्स नहीं किया था और प्रेशर भी ज्यादा हो रहा था मैं काबू नहीं रख पाया और एक मोटी धार सुमन के मुँह पर मार दी।

हम दोनों उठे और बाथरूम में जा कर शावर के नीचे खड़े हो गए और एक दूसरे को चूमने लगे। मेरे हाथ उसके बदन पर और उसके हाथ मेरे बदन पर अपनी-अपनी पसंद के अंग ढूंढ रहे थे। दोनों बदन फिर से सेक्स की गर्मी में जलने लगे। लंड खड़ा हो चुका था। मैंने सुमन के गीले बदन को अपनी गोद में उठाया और फिर से बेड पर लिटा दिया।

सुमन तड़प रही थी, वो बोली : आजा मेरी जान, अब इस छेद की खुजली मिटा दे।

मैंने अपना टनटनाया हुआ लंड सुमन की चूत प रखा और एक जोरदार धक्का दे दिया। लंड का सुपारा फक की आवाज के साथ चूत में घुस गया। सुमन दर्द के मारे छटपटा उठी। पहले तो मैं डर गया फिर मुझे कुछ याद आया। भैया की शादी से पहले भैया के दोस्त भैया को बता रहे थे कि भाभी कितना मर्जी दर्द से तड़पे, तुम रहम मत करना क्योंकि पहली बार सभी लड़कियों को दर्द होता है। लेकिन अगर तुमने उसके दर्द को देख कर उसे छोड़ दिया तो वो फिर कभी तुम्हारे नीचे नहीं आएगी। सारी उम्र लंड हाथ में लेकर घूमना। यह बात याद आते ही मैंने एक और जोरदार धक्का लगा दिया। लंड करीब दो इंच तक चूत में घुस गया।

सुमन चिल्लाई- राज मैं मर गई.... मुझे बहुत दर्द हो रहा है ! प्लीज अपना लंड बाहर निकालो... आआआआ... ईईईई मररर.... गई।

पर मैंने फिर भी रहम नहीं किया और एक धक्का और लगा दिया। सुमन की आँखों से आँसू निकल रहे थे। धक्का इतना जोरदार था कि लंड सुमन की सील तोड़ता हुआ चूत में अंदर तक घुस गया। अगले ही धक्के में पूरा लंड सुमन की चूत में था। सुमन तड़प रही थी, बेचैन हो रही थी, उसकी आवाज भी नहीं निकल रही थी। उसकी कसी चूत में लंड घुसाते-घुसाते मैं भी थक गया था। मैंने कुछ देर इंतजार किया और फिर धीरे धीरे लंड अंदर-बाहर करने लगा।

सुमन थोड़ी कसमसाई, फिर आहें भरने लगी। धीरे-धीरे सुमन का दर्द कम होता चला गया और वो मुझे अपनी ओर खींचने लगी। मैंने भी धक्कों की गति बढ़ा दी। पांच मिनट की हल्की चुदाई के बाद सुमन ने भी अपने चूतड़ उछालने शुरू कर दिए जो उसके मस्त होने की निशानी थी।

फिर शुरू हुआ घमासान। बेड के नए नए गद्दे नीचे से हमें उछाल रहे थे, मस्त चुदाई हो रही थी। वो सुमन जो दो मिनट पहले दर्द से तड़प रही थी अब मस्ती से गांड उछाल रही थी, पूरा लंड कसी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था।

सुमन जोर जोर से चिल्ला रही थी- आहऽऽ आहऽ मजा आ गयाऽऽ चोदो ! जोर से चोदो !

बीस मिनट की चुदाई के बाद सुमन झड़ गई पर क्योंकि मेरा एक बार पानी निकल चुका था इसलिए मेरा अभी बाकी था। मैं उसे चोदता रहा और करीब तीस मिनट के बाद मैं और सुमन एक साथ झड़ गए। क्या मस्त चुदाई थी। सुमन दो बार झड़ी थी इसलिए वो एकदम सुस्त बेड पर पड़ी थी। मैं भी उसके ऊपर चिपक कर लेटा हुआ था। बीस मिनट के बाद हम दोनों उठे तो चादर पर लगे खून के धब्बे देख कर दोनों की जान निकल गई।

इस मस्त चुदाई के बाद सुमन ने बताया कि उसने भैया-भाभी की सुहागरात देखी थी, तभी से उसे चुदवाने की इच्छा हो रही थी। वो मुझ से चुदवा कर बहुत खुश थी। उसके बाद उस रात हम दोनों ने तीन बार और चुदाई करी। फिर थक कर सो गए।

मेरे दोनों हाथों में लड्डू थे। जिन्दगी मस्त हो गई थी क्योंकि लंड और चूत की नजदीकियां जो बढ़ गई थी।

किरण की चुदाई अगली बार ! आज के लिए सिर्फ इतना ही।

ReplyQuote
Posted : 15/02/2011 6:47 am