पिंकी की बेटी सोनिय...
 

पिंकी की बेटी सोनिया  

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जो हुआ, सही हुआ !

उसने कपड़े पहन लिए। मैंने उसको बाँहों में ले लिया और कहा- जान, मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ। तुम नहीं जानती कि कब से मैं तुझे चाहता था लेकिन रिश्ते की मर्यादा नहीं लांघना चाहता था, पर यह सारी मर्यादा नशे के सामने घुटने टेक गई। चलो नशे ने हमें एक तो किया।

ऐसे जिंदगी चलने लगी, मौका देख हम एक होने लगे। दो साल ऐसे ही बीत गए, मैं भी एक बेटे का बाप बन गया और उसकी देख-रेख के लिए मेरी साली आती जाती रहती।

मौका मिलता तो हम आउट हाउस में मिल कर मजे लूटते।

बेटा एक साल का हुआ, जश्न मनाया गया, उसका पहला जन्मदिन मनाया गया।

मेरी साली की बेटी जिसका मेरे पत्नी से बहुत प्यार था वो अक्सर छुट्टी वाले दिन हमारे यहाँ रहने आ जाती। फिर मेरी पत्नी दूसरी बार गर्भवती हो गई।

उधर अचानक से मेरी साली का अपने पति के साथ काफी बड़ा बवाल हो गया, काफी झगड़ा हुआ, बेटा उसने अपने पास रख लिया और मेरी साली बेटी को लेकर मायके रहने लगी।

इस बार लड़ाई काफी बड़ी हुई लगती थी, हम बीच-बचाव में आये भी, सुलह-सफाई करवाई मगर कुछ दिन असर रहता फिर से दोनों अलग !

वजह थी कि उसकी नौकरी छूट गई क्यूंकि वो कहता था कि उसकी पत्नी बदचलन है, अय्याश है, उसके यारों के नीचे लेटती है, वजह भी बताई जिससे उसको शक हुआ, कहता कि मैं एक महीना घर नहीं था, लेकिन जिस दिन घर आया, घर के पीछे वाले लॉन में ताज़ा बरता हुआ कंडोम देखा, एक नहीं और भी देखे।

लड़ाई अब ज्यादा थी, साली को मेरा लौड़ा भी मिलता था, शायद औरों का भी मिलता था। वो मस्त थी, मायके बैठी रहती, कभी हमारे यहाँ रहने आती, सोनिया को हमारे घर के पास वाले स्कूल में डाल दिया और वो हमारे यहाँ रहने लगी। तब तक भी उस पर मेरी गंदी नज़र नहीं थी। मेरी पत्नी के साथ काम-वाम भी करती, उस पर जवानी एकदम से आने लगी, उसके उभार बहुत तेज़ी से विकसित हो रहे थे। यह मुझे उस दिन एहसास हुआ जब मैं बाथरूम में नहा रहा था, मुझे पीछे ब्रा टंगी हुई दिखी। वो मेरी पत्नी की नहीं हो सकती थी, उसके तो मम्मे बड़े थे, फिर मुझे याद आई सोनिया, सोचा- इतनी बड़ी हो गई है कि ब्रा पहनने लगी है?

मुझे तो एहसास नहीं था, मैंने बात दिमाग से निकालने की काफी कोशिश की, वो मेरे बेटे के साथ जब खेलती तो जब भागती तो उसकी चूचियाँ हिलती।

यह मैं तब देखने लगा जब से उसकी ब्रा देखी। मेरा भी दिल बासी खा खा कर उब चुका था, काफी देर से कोई कुंवारी नहीं ठोकी थी।

था तो पाप ! मगर क्या करता? लौड़ा है कि मानता नहीं।

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Posted : 13/01/2012 4:08 pm
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Posted : 13/01/2012 4:08 pm
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मुझे यह इल्म नहीं था कि सच में एक दिन वो मेरे से चुद भी जायेगी।

एक दिन मैं एक दुकान पर खड़ा था, उसी वक़्त स्कूल से छुट्टी हुई। सोनिया घर के लिए निकली। कुछ लड़के बाईक पर उसके आसपास धीरे धीरे चलते हुए फ़िकरे कस रहे थे।

मुझे गुस्सा आया, सोचा कि सरफिरों की माँ ही चोद दूंगा, आसपास मेरी बल्ले बल्ले है।

लेकिन जब मेरा ध्यान सोनिया के चेहरे पर गया तो मैं हैरान रह गया, वो मुस्कुरा कर मुंह नीचे कर लेती।

उस दिन शाम की बात है, मैं जब घर आया मेरी पत्नी डॉक्टर के पास गई हुई थी, सोनिया अकेली घर थी। जब मैंने दरवाज़े पत घण्टी बजाई, वो अंदर से भागी भागी ( www.indiansexstories.mobi ) आई, उसकी उछलती चूचियाँ देख मैं फिर से सोचने पर मजबूर हो गया।

मुझे शरारत सूझी।

वो रसोई में खड़ी थी, मैं जाकर उसकी बगलों में हाथ डाल उसको गुदगुदी करने लगा।

अह ! मौसा जी, बहुत गुदगुदी होती है !

अच्छा जी !

वो निकल भागी, मैं पीछे भागा, वो जाकर दीवान पर गिर गई। मैंने उसको दबोच लिया और गुदगुदी के बहाने से मैंने उसके दोनों मम्मो को पकड़ लिया और दबाने लगा।

मौसा जी, छोड़ो ना ! बहुत गुदगुदी होती है !

मैंने बहाने से उसके मम्मों का जायजा लिया, उसके मुंह से सिसकी भी निकल आई थी, लेकिन उसने खुद को कण्ट्रोल किया। मैंने उसकी टीशर्ट में ही हाथ घुसा कर दबा दिए, शायद उसको मजा आने लगा था।

तभी गेट खटका, मैंने उसको छोड़ा, हमने अलग हुए।

मैंने देखा- मेरा सांडू था।

सोनिया को लेने आया हूँ ! हमारा कनाडा का फॅमिली वीसा आ गया है, मैंने टिकट भी करवा लिए हैं और अब मैं भी अपने परिवार के साथ रहूँगा।

मैं बहुत उदास हो गया। क्या कर सकता था मैं !

वो उसको अपने साथ ले गया। मैं बहुत उदास हो गया कि कबूतरी हाथ लगी थी, कुछ दिनों की मेहनत के बाद में उसको चोद भी लेता जिस तरह मैंने उसको लड़कों को मुस्कुरा के दिखाना देखा था।

ऊपर से दोहरी उदासी थी कि पिंकी, मेरी साली भी हाथ से जा रही थी।

वो लोग चले गए, समय निकला, वहाँ जाकर वो सात महीने तो आराम से रहे लेकिन फिर से वहाँ दोनों का झगड़ा हो गया और फिर अलग हुए।

सोनिया माँ के साथ ही रही, वो पिंकी को बहुत परेशान करता था, उधर पिंकी का फ़ोन आया कि बच्चे वहाँ रह कर हाथ से फिसल रहे हैं।

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Posted : 13/01/2012 4:09 pm
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इधर मैं अब दो बच्चों का बाप बन गया था, उसने वहाँ से आ रहे एक बुजुर्ग जोड़े के साथ सोनिया को भेज दिया। मैं उसको दिल्ली एअरपोर्ट लेने गया। उसके रंग ढंग सब ही बदले पड़े थे। कैपरी और नाभि से ऊपर तक ही कसा हुआ मस्त टॉप ! उसके तो मम्मे और भी सेक्सी हो गये थे। इतनी जल्दी वो इतनी बदली सिर्फ सात महीनों में !

वो अपने साथ अपना लैपटॉप खरीद कर लाई थी उस में लगी रहती। उसके कपड़े देखने वाले थे लेकिन मेरी पत्नी उसको सुधारना चाहती थी, उसको दुबारा स्कूल में डाला, उसका लैपटॉप कब्ज़े में लिया, उसका मोबाइल फ़ोन कब्ज़े में लिया, जिस पर लड़कों के कनाडा से फ़ोन आते थे।

एक दिन साली का फ़ोन आ रहा था, पत्नी दूसरे कमरे में बैठ बात करने लगी, इधर का फ़ोन मैंने उठा लिया।

कह रही थी- मोना, इसको तू ही सुधार ! यहाँ तो यह हाथ से फिसल रही थी।

वो कैसे हुआ? क्या था? क्या किया था इसने?

बोली- हम शिफ्ट पर थे, वहाँ काम से इधर-उधर का नहीं हो सकता इसलिए यह अपने हिसाब से सोच कर यह फायदा उठाने लगी थी। इसको किसी ने बीच पर एक गोरे लड़के के साथ बिकनी पहने उससे लिपटे हुए देखा। यह बात मुझे नीचे फ़्लैट में रहने वाली मेरी पाकिस्तानी आंटी जिससे मेरा काफी मेलजोल है, उसने मुझे बताई थी। मोना इसी लिए मैंने इसको यहाँ से निकाला है, अब तुम और जीजा जी को इसको ठीक करना है।

मेरा तो लौड़ा खड़ा हो गया सुनकर, मैंने धीरे से तार निकाली और फ़ोन रख दुबारा तार लगा दी।

समझ गया। मुझे मालूम था मुझे क्या करना है।

जिस दिन से उससे लैपटॉप और मोबाइल छीना था, वो अपसेट थी, अपनी मौसी से बहुत खिझी हुई थी।

मेरी पत्नी भी जॉब करती है, मैं दोपहर को घर आता हूँ। एक दिन मैंने उसको फिर से गुदगुदी की, वो भागी, मैंने फिर से पकड़ा और उसके मम्मे दबाये। इस बार वो खीज गई, समझ गया कि क्या हुआ। सोनिया, तुम इतनी खिझी कब से हो गई?

सब कुछ छीन लिया मौसी ने ! इतनी पाबंदी लगा दी है, इतना मजा आता था कनाडा में लाइफ जीने का !

ओह हो ! मुझे बता ना ! चल मौसी घर नहीं है !

मैंने उसको अपना लैपटॉप दिया, बहुत खुश हुई।

लगता है काफी बॉय फ्रेंड बनाएँ हैं तुमने फेसबुक पर !

वो बहुत खुश थी, मैं जानता था कि उसको क्या चाहिए - आजादी !

वो बहुत खुश हुई। मैंने उसको गुदगुदी निकाली, वो भागी और आज बेडरूम की तरफ भागी, जाकर बैड पर गिर गई।

मैंने उस पर छलांग लगाई और उसकी जांघों पर बैठ गया और उसकी बगलों में हाथ घुसा कर गुदगुदी करने लगा। मैं अपने हाथ उसके मम्मों पर ले जाकर दबाने लगा।

छोड़ो-छोड़ो करते उसने मुझे पलटा दिया। अब मैं नीचे था, वो ऊपर मुझे गुदगुदी करने लगी।

मैंने उसको अपने ऊपर खींच लिया वो मुझे लेकर रोल हुई और वो मेरी बाँहों में कसी पड़ी थी।

मैंने उसके मम्मे खूब दबाये।

तो बोली- मौसा जी, क्या यह गुदगुदी है?

उसके चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान थी।

क्यूँ? तुझे क्या लगा? बता दे !

नहीं, ठीक है ! कुछ नहीं ! गुदगुदी ही है ! मुझे छोड़ोगे भी? या अपने ही नीचे डाले रखोगे? अगर गुदगुदी ख़त्म हुई हो तो?

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Posted : 13/01/2012 4:09 pm
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क्यूँ? तुझे क्या लगा? बता दे !

नहीं, ठीक है ! कुछ नहीं ! गुदगुदी ही है ! मुझे छोड़ोगे भी? या अपने ही नीचे डाले रखोगे? अगर गुदगुदी ख़त्म हुई हो तो?

बहुत कुछ सीख कर आई है वहाँ से?

मौसा जी, मौसी ने तो मेरे हाथ-पैर दोनों काट दिए हैं !

कोई बात नहीं ! मेरा लैपटॉप यूज़ कर लिया कर तू ! मस्त मस्त चीज़ें ऍफ़ ड्राइव में लोड हैं ! और कल स्कूल जाना, जैसे तेरी मौसी ऑफिस जाएगी, मैं तुझे स्कूल से छुट्टी दिलवा कर अपने साथ मूवी दिखाने और फिर अपना फार्महाउस दिखाने ले चलूंगा।

वो बहुत उछली- सच?

लेकिन ये सब बातें हम दोनों के बीच हैं। वरना पाबंदी लगी रहेगी।

हां, मैं कभी नहीं बताऊँगी किसी को !

उसी दिन शाम को मेरी बीवी ने घर आकर बताया कि उसको कल सुबह अपनी ऑफिस कोलीग्स के साथ ट्रेनिंग कैंप में कोआडीनेटर बन ट्रेनिंग देने दो दिन के लिए नोयडा जाना है।

मैं बहुत खुश हुआ।

सुबह सात बजे मैं उसको छोड़ने उसके ऑफिस गया जहाँ एक बस बुक की गई थी। वापस आकर मैंने देखा कि सोनिया सोई पड़ी थी।

उसकी मौसी उसको उठाने की जिम्मेदारी मुझे देकर गई थी, मेरे दोनों बच्चे उन दिनों अपनी दादी के पास गाँव में थे। सोनिया की स्कर्ट काफी उठी हुई थी, उसकी लाल रंग की पैंटी देख मेरा लौड़ा उठ खड़ा हुआ।

मैं उसको उठाने उसके पास गया। बगल में बैठ उसकी पिंडलियाँ देखने लगा, दूध जैसी गोरी टाँगें देख मेरा तो खड़ा हो गया। मैंने धीरे से स्कर्ट को और ऊपर कर दिया अब उसकी चूत लाल चड्डी में कयामत लग रही थी। उसकी जांघें और भी ज्यादा गोरी थी मानो मखमल हो, रेशम हो !

मैं तो बस निहारता रह गया।

उसकी टीशर्ट भी ऊपर उठी थी उसका सपाट पेट देख यारो क्या बताऊँ कि मेरा क्या हाल हुआ !

एक हाथ उसके सर पर रखते हुए दूसरा उसके पेट पर फेरते हुए बोला- सोनिया, उठो ! सुबह हो गई है !

मौसी सोने दो ना !

मैं मौसा हूँ !

उसने जल्दी से आँखें खोल दी।

आप? मौसी कहाँ है?

वो तो गई !

लेकिन कहाँ?

बस तू दो दिन के लिए आज़ाद कबूतरी है, वो गई नोयडा ! ट्रेनिंग देने गई है !

ओह !

चलो, स्कूल नहीं जाना?

आप तो मुझे आज घुमाने लेकर जाने वाले थे ना?

अच्छा याद है तुझे?

कैसे भूल सकती हूँ?

उसने देखा कि उसकी स्कर्ट काफी ऊपर उठी पड़ी थी, उसने मेरी नज़र वहाँ पड़ते देख ली, जल्दी से ठीक किया, अपनी टीशर्ट भी ठीक कर ली।

चल रहे हैं ना मौसा जी?

हाँ हाँ चल ! जाऊँगा तेरे साथ ! लेकिन मुझे क्या मिलेगा?

जो आप चाहो !

चल उठ, फ्रेश हो जा ! तेरे लिए तेरी मौसी तेरा पसंदीदा भुजिया बना कर गई है !

वैसे तुम सोई हुई बहुत मस्त लग रही थी !

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Posted : 13/01/2012 4:10 pm
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मुझे शैतानी सूझी।

इस वक़्त वो बहुत कम कपड़ों में थी, मैंने उसको गुदगुदी करनी चालू की।

मौसा जी ! क्या ना ? आपको हर पल मस्ती आई रहती है !

तू है ही इतनी मस्त कि मस्ती करने को दिल होता है, जब से कनाडा होकर आई हो, कुछ ज्यादा मस्त होकर आई हो ! मैंने गुदगुदी चालू रखी, उसकी बगलों में हाथ घुसा लिया और फिर टीशर्ट के अन्दर घुसा उसकी चूची पकड़ दबाने लगा, एक हाथ उसकी स्कर्ट में घुसा दिया- आज तेरी जांघों पर करूँगा ! देख कितना उछ्लेगी !

नहीं नहीं ! सच में बहुत होती है !

मैंने इधर उधर हार फेरते हुए उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को छुआ।

वो मचल गई।

उसकी शरारत वाली मस्ती उड़ने लगी और जवानी की मस्ती आने लगी।

अब मेरी बारी कह वो मेरे ऊपर चढ़ने लगी। वो मेरे वस्तिस्थल (लौड़े वाली जगह) पर बैठ गई।

मेरा तो खड़ा था, वो अनजान बनने लगी, मुझे गुदगुदी करने लगी।

उसने अपनी छाती का भार मेरे छाती डाला, जब झुकी तो टीशर्ट के अंदर से उसकी चूचियाँ दिखने लगी।

वो मेरे लौड़े को दबा रही थी आज वो बहाने से मेरा इम्तिहान ले रही थी।

मैंने कहा- अब तैयार हो जा घूमने जाने के लिए !

पहले हमने काफी पी, फिर सिनेमा गए। वहाँ रोमांटिक सीन आया, इमरान हाश्मी का बोल्ड सीन देख वो मेरे साथ सटने लगी। मैंने भी अपनी बाजू उसके कंधों पर डाल दी उसकी चूची दबाने लगा।

वो और करीब आने लगी, मैंने हाथ अंदर घुसा दिया, उसने विरोध नहीं किया। मैंने भी उसके चेहरे को अपनी तरफ किया और उसके होंठ चूम लिए तो वो शर्माने लगी।

आज खुलकर पहली बार मैंने उसके होंठ चूसे।

चल सोनिया ! यहाँ से चलते हैं ! तुझे अपनी नईं एंडेवर गाड़ी से लौंग डराईव पर ले चलता हूँ, वहाँ फार्म हाउस दिखाता हूँ। वैसे सोनिया, वहाँ जाकर तेरी सोच बदल गई है।

मौसा जी, अगर मौसी जान गई कुछ भी तो तूफ़ान ला देंगी।

उसको कहाँ पता चलेगा? मुझे तेरे ऊपर दया आई, उदास नहीं देख सका !

उसको लेकर फार्महाउस गया, सीधा अपने कमरे में ले गया। नौकर पानी लेकर आया, मैंने उसको जाने का इशारा मारा और सोनिया को बाँहों में उठा लिया।

ले खुश हो जा ! अब हंस के दिखा !

मैंने उसको नर्म गद्दे पर फेंका और खुद भी उस पर चढ़ गया। मैंने उसकी टॉप उतार फेंकी, लाल रंग की ब्रा से मेरा दिल डोल गया, मैंने जल्दी से उसकी स्ट्रिप खोली, उसके मम्मे आज पहली बार सरेआम खुले देखे। क्या आकर्षक थे !

मेरा हाथ लगा तो तन गए, चुचूक सख्त होने लगा, मैंने उसको मुंह में लिया और चूसा।

अह, मौसा जी, बहुत मजा आता है !

मैंने एक एक कर उसके दोनों चुचूकों को जम कर चूसा, उसके मम्मों को दबाने लगा, वो आंखें मूंदने लगी।

कैसा लगा रहा है सोनिया मेरी जान? तू बिलकुल अपनी माँ पर गई है, तेरे मम्मे तो समय से पहले सेक्सी हो गये हैं !

मैंने धीरे से उसकी जींस का बटन खोला और नीचे खिसका दी, अलग ही कर दी और लाल चड्डी में वो आग के शोले की तरह जल रही थी।

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Posted : 13/01/2012 4:10 pm
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उसने भी मेरी जींस उतारी, मेरा अंडरवीयर तंबू बनकर फटने को आया था, उसका हाथ पकड़ा और अपने अंडी में घुसवा दिया। मेरा लौड़ा पकड़ते वो एकदम से हिल गई- इतना बड़ा मौसा जी ?

क्यूँ तुझे छोटे पसंद आते हैं?

उह !

कभी पहले लिया है? सच बताना? बीच पर जिसके साथ जाती थी, उसने कभी तेरी ली है क्या?

दो बार कर चुकी हूँ ! उसका आप जितना बड़ा नहीं था, तब तो दर्द में ही समय निकल गया था।

चल मुंह में डाल इसको !

वो नीचे झुकी और लौड़ा चूसने लगी।

वाह ! क्या तुझे मजा आता है चूस कर?

मौसा जी, उसने मुझे लौड़ा चूसने की आदत डाल दी है, उसका मैंने चूसा कई बार है लेकिन सेक्स सिर्फ दो बार किया है।

वाह, तू तो मस्त कली है !

अठरह बरस की मदहोश जवानी नंगी मेरे नीचे लेटी थी, उसकी माँ ने उसे यहाँ भेज दिया कि बिगड़ने से बच जायेगी, यह कबूतरी तो मेरा ही शिकार हो गई।

मैंने उसको लिटाया उसकी लाल चड्डी उतारी और पहले उसकी महक ली।

वाह ! क्या मस्त गुलाबी चिकनी चूत !

मैंने उसी पल होंठ लगा दिए, जुबां निकाल कर चाटने लगा। प्यारी सी बच्ची की प्यारी सी चूत ! जिसका अपना ही रस था !

वो मेरे बालों में हाथ फेरती जा रही थी और मैं था कि चूत ही चाटे जा रहा था। इतनी प्यारी चूत थी कि बता नहीं सकता, हल्के भूरे रंग के बाल थे, कसी चूत !

मौसा जी और चाटो ना ! बहुत आनंद आता है !

वाह मेरी जान ! आगे चलकर क्या निकलेगी !

बोली- एक साथ करते हैं दोनों एक दूसरे के अंगों को !

मैंने अनजान बनते हुए कह दिया- एक साथ? वो क्या? और कैसे?

क्या मौसा जी? बनिए मत ! आप मेरी पूसी लिक करो और मैं आपका डिक सक करुँगी !

क्या पूसी-पूसी लगाई है? साली सिर्फ आठ महीने वहाँ रही है ! चूत है ! बोल मौसा जी मेरी चूत चाटो !

ओ के मौसा जी, आप मेरी चूत चाटो, मुझे साथ साथ अपना लौड़ा चुसवाओ !

इसका मतलब है तुमने सब कुछ पहले किया है?

सच बताऊं मौसा जी?

बता ना !

वहाँ मैंने ओरल का काफी मजा लिया है वहाँ बीच पर ! बच्ची जैसी से वो खेलता ज्यादा था !

कितने लौड़े चूसे हैं? सच बताना !

सिर्फ एक का चूसा है !

चल मेरा चूस !

वाह, अह ! बहुत टेस्टी लौड़ा है मौसा जी आपका !

एक बात बताओ मौसा जी, आठ महीने पहले जब मैं यहाँ थी और उस आखरी दिन जब मुझे पापा लेने आ गए थे?

हाँ हाँ बोलो क्या पूछना है?

उस दिन आप मूड बना चुके थे ना? उस दिन मैंने भी सोचा था कि अगर मौसा जी आगे कदम बढ़ाते हैं तो मैं रोकूंगी नहीं ! बताना आप सच?

हाँ उस दिन खेल नहीं रहा था, तुझे उकसा रहा था कि तू गर्म हो जाए और तेरी चूत मारूँ !

आपने ही मेरे अन्दर यह सब जगाया ! एक समय था जब आप गुदगुदी किया करते थे, मुझे अजीब सा मजा आता था ! जब आपका हाथ मेरे मम्मों पर जाता था तब दो साल पहले मेरे छोटे छोटे थे लेकिन आप अपना ठरक तब भी नहीं छोड़ते थे।

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Posted : 13/01/2012 4:11 pm
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हां सच में !

वो चुप होकर चपड़-चपड़ लौड़ा चूसने लगी, कुछ देर मजे लेने के बाद मैंने उसको गोदी में उठाया। छोटी सी प्यारी सी अठरह साल की कामुक जवानी फूल जैसी लग रही थी, दिल करता था जल्दी से घुसा दूँ ! मेरा लौड़ा सच में काफी बड़ा है ! साली के अलावा मैंने आस पास कई भाभी लोगों की प्यास भुजाने का काम किया था, कभी कभी तो आंटी भी मिल जाती, कुंवारी तो थी ही थी ना !

मैंने उसको सोफे पर बिठा दिया, खुद नीचे बैठ गया, उसकी टांगें चौड़ी करवा बीच बैठ पहले उसको चाटने लगा, देखा कि क्या फटेगी तो नहीं, देखा कितनी कसी है, पहले ऊँगली घुसी तो वो कसमसाई। मैंने ऊँगली हिलाई तो वो चुप रही। मैंने जल्दी से थूक निकाला, अपने लौड़े पर लगा दिया, कुछ उसकी चूत पर ! उसकी चूत से पानी रिसने लगा था, मैंने कहा- जरा संभाल लेना !

मैंने ठिकाने पर रख झटका दे मारा, मेरा सुपारा पूरा घुस गया और फंस गया, वो रोने लगी, चिल्लाने लगी।

मैंने जल्दी से उसके मुंह पर हाथ रखा और दूसरा झटका लगा डाला। आधा लौड़े बीच में फंस गया था, वो आँसू निकाल कर रोने लगी।

मैंने भी तीसरा झटका दिया, काफी घुस गया, उसकी चूत से खून निकलने लगा। मेरा मर्द जागा, वाह वरिंदर एक और सील तोड़ी तूने ! मसल दे !

उसका दर्द भूल अपनी मर्दानगी पर गुमान करते हुए आखरी झटका दिया, पूरा लौड़ा उसकी चूत को फाड़ कर इतराने लगा।

मैंने पूरा निकाला, उसको रहत मिली। अब मेरा ध्यान उस पर गया, अधमरी सी ! अरे यह क्या किया मर्दानगी के गुमान में अपनी भांजी को रौंद दिया?

उसके मुंह से हाथ उठाया वो रोने लगी- क्या आप ने एक बार भी नहीं देखा?

बस बेबी हो गया !

मैंने पास पड़ी उसकी ही पैंटी से लौड़े को पौंछा, उसकी चूत से खून साफ़ किया और थूक लगा कर झटका मारा। आधा घुस गया, पहले से कम दिक्कत हुई, तीन झटकों में फिर उतार दिया।

अब आगे पीछे करने लगा तो उसको कुछ राहत मिली और बोली- मौसा जी, अब अच्छा फील होने लगा है !

कुछ ही देर में वो कूल्हे उठाने लगी, मैंने स्पीड तेज़ कर दी, उसने भी कूल्हे उठाने तेज़ कर दिए, मानो उसका काम होने वाला हो !

मेरा भी काम होने के करीब था इसी लिए अंधाधुंध झटके लगने लगे। वो हिलकर रह गई और मैंने अपना पूरा माल उसकी चूत के अंदर ही उगल दिया।

बाद में पछताने लगा कहीं उसका ठहर ना जाए।

बोली- बहुत टीसें उठ रही हैं !

ऐसा कर गर्म पानी से साफ़ कर ले ! अभी तेरी मौसी को दो दिन नहीं आना ! मौका ही मौका है !

मैंने भी कंडोम खरीद लिए, दो दिन में मैंने उसकी चूत का भोसड़ा बना दिया और फिर तो दोस्तो, मैंने साली के बाद उसकी बेटी का किला भी फ़तेह कर डाला।

मेरे मुंह पर खून लग गया था, इतने में मेरी दूसरी साली ने भी भारत आने का कार्यक्रम बना लिया और मैंने फ़ोन पर उसकी मोना से बात सुनी, बोली- मोना, यार मैं बहुत परेशान हूँ, तेरे जीजू तो हफ्ता हफ्ता मेरी चूत नहीं मारते, बुरा हाल है ! दिल करता है तलाक दे डालूँ !

मैंने दिल में कहा- तू आ तो सही ! मैं हूँ ना रानी !

दोस्तो, साली और उसकी बेटी चुद गई !

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Posted : 13/01/2012 4:11 pm