प्रोग्राम काफ़ी अच्...
 

प्रोग्राम काफ़ी अच्छा रहा !  

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 Anonymous
(@Anonymous)
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तो दोस्तो एक बार फ़िर हाजिर है आपका दोस्त जतन गाँव जुलाना जिला जीन्द हरियाणा से आप सब के सामने अपनी जिन्दगी का एक और पन्ना लेकर। मैं थोड़ा देर से आप लोगों के साथ रु-ब-रु हो पाया उसके लिये मैं माफ़ी चाहूँगा।

तो दोस्तो मुझे आप सबके मेल तो बहुत मिले पर जितनी मैं उम्मीद करता था उतने नहीं।

मुझे कुछ भाभियों और आन्टियों के भी मेल मिले हैं।

सबसे बडी बात, मैं आप लोगों से एक वादा करता हूँ कि मैं जो कुछ भी लिखूँगा वो मेरी जिन्दगी की सच्चाई होगी। हो सकता है जो हालात और नाम मैं लिखूं, वो काल्पनिक हों क्योंकि जिसने मुझे इतने विश्वास के साथ अपना सब कुछ सौपं दिया उसका नाम आप लोगों के सामने बताकर मैं उसे बदनाम नहीं कर सकता पर उसमें जो लड़की होगी, वो सच्ची होगी और मैंने जो कुछ उसके साथ किया वो भी सच होगा।

तो आज की कहानी शुरु करते हैं !

अभी कुछ दिन पहले की बात है मैं कुछ काम से नरवाना गया हुआ था तो मैं अपने एक दोस्त के घर पे रुका हुआ था। मेरे दोस्त का घर जिस कालोनी में था, वहां महिला आयोग वालों का प्रोग्राम हो रहा था वो सब महिलाओं के अधिकारों पर भाषण दे रहे थे तो जैसा कि मैं प्रवृति से थोड़ा जिज्ञासु हूँ तो मैं भी वहां पर चला गया संयोग से मुझे सबसे आगे वाली सीट मिल गई।

स्टेज पर एक अधेड़ उम्र की महिला भाषण दे रही थी। उसके पीछे कुर्सियों पर कुछ और अधेड़ महिलाएँ बैठी थी और उनके पीछे कुछ सुन्दर बालाएं खड़ी थी। उन लड़कियों के बीच में एक लड़की ख़डी थी बिल्कुल गोरी चिट्टी। उसकी लम्बाई तकरीबन ५.५" होगी और फ़िगर तो एकदम बार्बी डोल के जैसी। उसने सफ़ेद रंग की साड़ी पहनी हुई थी और उसमें वो स्वर्ग की किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।

उसे देखते ही मेरी नियत बदलने लगी और मैं उन महिला उद्धार वालों की उस लड़की का उद्धार करने के बारे में सोचने लगा। मैं एक टक उसे ही देखने लगा। उसके उभरे हुये उरोज मुझे आमंत्रित कर रहे थे कि मैं जाऊं और उन्हें जी-जान लगाकर मसलूं। उसकी नजरें सामने बैठे सब लोगों में घूम रही थी। जैसे ही उसकी नजर मुझसे टकराई, मेरे शरीर में ४४० वोल्ट का करंट सा लगा और शायद कुछ फ़र्क उसे भी पड़ा था क्योंकि उसने एक बैचेनी के साथ बहुत जल्दी से अपना मुँह दूसरी तरफ़ घुमा लिया, पर मैं अपनी नजर उसके सेब जैसे गालों से न हटा सका।

अबकी बार मुझे काफ़ी देर हो गई थी कि वो कब मेरी आँखों में देखे। वो शायद जानबूझ कर ऐसा कर रही थी। लेकिन उसके चेहरे की बैचनी साफ़ देखी जा सकती थी। काफ़ी देर के बाद फ़िर उसने कुछ पल के लिये मेरी तरफ़ देखा लेकिन अबकी बार वो कुछ सामान्य थी और इस तरह हमारी एक दूसरे से लगातार नजरें मिलने लगी और हम अब एक दूसरे को स्माईल भी दे रहे थे।

अब मुझसे बर्दाशत करना मुश्किल होता जा रहा था। लण्ड पैंट को फ़ाड़कर बाहर आने के लिये बेताब था। तो इतनी देर में ही वो कहीं चली गई तो मैंने भी सोचा जब तक शो दोबारा शुरु हो तब तक मैं भी जाकर सूसू करके आऊं और मैं उठ कर पंडाल से बाहर आ गया जहां पे सामने ही जेन्ट्स और लेडिज बाथरुम साथ साथ बने हुए थे मैं सीधा जेन्टस बाथरुम में गया और अपने खड़े हुए लण्ड को पकड़ कर दीवारों पे धार मारते हुए सूसू करने का मजा लेने लगा……………

मैं जैसे ही बाहर निकला वही लड़की जो अन्दर स्टेज पर थी, बिल्कुल मेरे सामने दरवाजे के साथ कूश्ती कर रही थी, शायद उससे बाथरुम का दरवाजा नहीं खुल रहा था। उसे मैंने पहली बार इतनी नजदीक से देखा था उसका रंग धूप में समुन्दर के किनारे पड़ी रेत की तरह चमक रहा था, उसकी कमर मेरी तरफ़ थी वो दरवाजे की कुण्डी को पकड़ के थोड़ा झुकी हुई थी जिससे उसके चूतड़ों के उभार बाहर की ओर निकले हुए थे। उसके कूल्हों की गोलाईयां कमाल की थी। उसकी कमर से लेकर कूल्हों तक देखने में वो ऐसी लग रही थी जैसे अजन्ता की गुफ़ाओं में मूर्तियां बनाने वाले मूर्तिकार ने उसे अपने हाथों से बनाया हो। उसकी नंगी दिख रही कमर पे कुछ पसीने की बूंदें जो उसके गोरे बदन पे मोतियों की तरह चमक रही थी। दिल कर रहा था कि उसे अभी दबोच लूँ।

लेकिन मैं एक शरीफ़ आदमी हूँ। मैंने ना तो कभी किसी लड़की के साथ कोई जबरदस्ती की है और ना ही किसी लड़की का कभी फ़ायदा उठाने की कोशिश की है। अगर वो खुश है तो मैं अपने लण्ड का प्रयोग करता हूँ नहीं तो चक्षु चोदन करके ही खुश रहता हूँ।

तो मैं उसे देख ही रहा था कि वो कुण्डी छोड़ कर वापस मुड़ी। मैं उसके कुछ ज्यादा ही नजदीक खड़ा था जिससे वो मुड़ते ही एकदम मुझसे टकरा गई और उसकी छातियां मेरे सीने से आ चिपकी। जिससे मेरे शरीर में सनसनाहट सी दौड़ गई। वो जल्दी से मुझसे दूर हटी और मुझे बार बार सॉरी कहने लगी। मैंने जब ओ के कहा तो उसने थोड़ा सामान्य होते हुये मुझसे कहा- दरअसल दरवाजा नहीं खुल रहा है। क्या आप जरा !

मैंने उसकी बात खत्म होने से पहले ही ' हां जरुर ' कहा और दरवाजे को जोर से झटका मारा दरवाजा बहुत धीरे से बंद था और जरुरत से ज्यादा जोर लगाने के कारण एक झट्के में ही खुल गया जिससे मैं उस लड़की के उपर जा गिरा वैसे तो लड़की की तरफ़ मेरी पीठ थी लेकिन जैसे ही मुझे लगा कि मैं गिरने वाला हूँ मैंने एकदम से अपना मुँह घुमा लिया और अपनी दोनों हथेलियां सीधी करके इसलिए आगे निकाल ली कि अगर मैं गिरुँ तो हाथों को जमीन पर लगा कर खुद को गिरने से रोक सकूँ जिससे मेरे मुँह पर चोट लगने से बच सके, जैसा कि आमतौर पर मनुष्य करता है।

वो एकदम मेरे पीछे खड़ी थी जिससे मैं उसी के उपर जा गिरा और जो मेरे हाथ आगे की ओर निकले हुये थे वो उसके सीने पे जा टिके और हम दोनों जमीन पर जा गिरे। शायद उसे जमीन पर गिरने से ज्यादा चोट नहीं आई थी क्योंकि उसके चेहरे पर कोई दर्द के भाव नहीं थे। वो मेरे बिल्कुल नीचे पड़ी थी और मैं उसके गुदाज बदन के ऊपर लेटा हुआ था। उसके सीने के दोनों मोटे-२ उभार जिनका साईज एक बड़े अनार के जितना था, मेरे दोनों हाथों में कैद थे जो कुछ ज्यादा ही सख्त लग रहे थे। मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं किसी मखमल के गद्दे के उपर लेटा हुआ हूँ और मेरे हाथों में दो मुलायम पत्थर पकड़ा दिये गये हैं। हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे। ना तो वो मुझे उठने के लिये कह रही थी और ना ही उसके चेहरे पे कोई नाराजगी नजर आई और मुझे तो होश ही नहीं था।

फ़िर भी मैंने अपने आप को संभाला और उसके उपर से उठते हुये सॉरी बोला तो उसने मुझे ओ के कहते हुए कहा- वैसे आपको जगह देख के गिरना नहीं आता अगर आप बाथरुम के अन्दर मेरे ऊपर गिरते तो आप को सॉरी नहीं कहना पड़ता। वैसे मेरा नाम मुस्कान है।

यह सब कहते हुए उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी, एक तो ये सब उसने बहुत तेजी से कहा और दूसरे उसकी आवाज कुछ ज्यादा ही मीठी थी, जिससे मैं कुछ बोल ही नहीं पाया

लेकिन फ़िर भी मैंने अपने आप को सम्भालते हुये कहा- गिरना तो सीख लेते लेकिन कोई सिखाने वाला भी तो हो ! वैसे मेरा नाम जतन है !

मैंने भी उसकी दोनों बातों का जवाब एक साथ देते हुए कहा।

वो कुछ ज्यादा ही फ़्रेंक थी, उसने जल्दी से मुझसे हाथ मिलाते हुये हाय कहा।

मैंने कहा- तो चले फ़िर?

कहां ?

गिरना सीखने के लिये !

अभी ?

कल करे सो आज कर आज करे सो अब !

तुम बहुत शरारती हो वो हसंते हुये बोली जिससे उसके सफ़ेद दांत दिखाई दिये जो अनार के दानों के जैसे थे।

और मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे उसी लेडीज बाथरुम के अन्दर खींच लिया और वो भी बिना कोई जोर जबरदस्ती किये अन्दर आ गई। मैंने अन्दर जाते ही बाथरुम का दरवाजा अन्दर से बदं कर लिया और उसको अपनी बाहों में भरते हुये उसके चेहरे पे पागलों की तरह किस करने लगा, उसके नरम गुलाबी होठों को बेदर्दी से चूसने लगा तो उसने मुझे थोड़ा पीछे धकेलतेहुये कहा- इतनी बेसब्री क्यों दिखा रहे हो ? मैं कहीं भागी थोड़े ही जा रही हूँ !

और मेरे दोनो हाथों की अगुंलियों को अपने हाथों की उंगलियों में फ़ंसाते हुये कहा- अब तुम अपने हाथ पैर नहीं चलाओगे, आराम से खड़े रहो !

मैं सीधे होकर खड़ा हो गया। उसने बहुत ही प्यार से मेरे होठों पर अपने होंठ टिकाते हुये मुझे धीरे-२ किस करना शुरु कर दिया। वो कभी ऊपर वाले होंठ को चूस रही थी तो कभी नीचे वाले होंठ को ! उसके चूमने का अदांज इतना मादक था कि मेरे तो होश ही उड़ रहे थे। मैंने अपने हाथ उसकी नाजुक उंगलियों से आजाद करके उसकी पतली कमर थाम ली जिसे छूने की मैं कब से कल्पना कर रहा था। मेरे हाथ उसके दोनों कूल्हों की तरफ़ से उसके बदन को सहलाते हुए उसके कंधों तक आ रहे थे। उसके कूल्हों की गोलाईयां बहुत ही मुलायम मगर सख्त थी। मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं दो तरबूजों पर हाथ फ़िरा रहा हूँ। उसके ब्लाउज का पीछे का कट बहुत बड़ा था, उसकी पूरी पीठ नंगी थी जो उसने अब तक अपनी साड़ी से छुपा रखी थी। ब्लाउज को संभालने के लिये बस एक पतली सी स्ट्रीप थी जो पीछे पीठ पर बंधी हुई थी।

मैंने उसकी पीठ पर हाथ फ़िराते हुए वो स्ट्रीप खोल दी जिसके बाद उसके ब्लाउज में खोलने के लिये कुछ बाकी नहीं रहा। वो अब भी मुझे किस करने में मगन थी पर मेरा पूरा का पूरा ध्यान मुस्कान के कपड़े उतारने में लगा हुआ था। मैंने उसके ब्लाउज को उतार कर एक तरफ़ फ़ैंक दिया, उसने कुछ नहीं कहा। मुझे तो जैसे स्वर्ग का आनन्द आ रहा था। उसने काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी जो उसके बदन के गोरे रगं को और भी कातिल बना रही थी।

मैं उसकी सीने के उभारों को दबाने लगा, मुझे बहुत ज्यादा आनन्द आ रहा था। उसके बड़े-२ चुचे मेरे हाथों में नहीं समा रहे थे। मैं अपने होश खोता जा रहा था। मैंने उसकी ब्रा भी उतार कर एक तरफ़ उछाल दी। वो अब भी किस करने मैं मगन थी। मैं उसके नंगे चुचों को बेदर्दी से मसल रहा था, वो सिसकियां ले रही थी। मैंने अपने होठों को उसके होठों से आजाद करवाया और एक नजर उसकी नंगी छाती पर डाली क्या खतरनाक नजारा था मेरे आँखों के सामने उसके दो सफ़ेद उभार झूल रहे थे जिन्हें देख कर मेरा हलक सूख रहा था। वो कतिल नजारा किसी भी जवान मर्द की जान लेने के लिये काफ़ी था। उसके हल्के गुलाबी रंग के निप्पल सुई की नोक की तरह तने हुए थे।

अब ज्यादा देर तक मुझसे उसे इस हालत मैं नहीं देखा जा रहा था। मैंने उसे अपने सीने से लगाकर जोर से भींच लिया जिससे उसके चुचे मेरे सीने में दब गये। वो इतने सख्त थे कि मुझे ऐसा लग रहा था कि वो मेरे सीने के पार ही ना निकल जायें। वो बहुत जोर-२ से सिसक रही थी। शायद वो भी अब बेकाबू होती जा रही थी। उसने मेरी पीठ पर जहां उसके हाथ थे, अपने नाखूनों से जोर से नोच दिया, मुझे बहुत ज्यादा दर्द का अहसास हुआ पर मैं जाने क्या सोचकर सब बर्दाश्त कर गया। मैंने उसे अपने आप से अलग किया और दीवार के साथ खड़ा करके उसके मस्त उभारों पर टूट पड़ा। उसके चुचों को जोर से मसलते उए उसके निप्पलों को चूसने लगा।

ऐसा करते हुए मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। वो सेक्स में मस्त होते हुये मेरे बालों को नोच रही थी मैंने उसकी छाती को चूस-२ कर और ज्यादा लाल और बड़ा बना दिया। अब मैं दोबारा जैसे ही उसके होठों के पास होंठ ले गया, वो मुझ पर पागल की तरह टूट पड़ी और वो मेरी शर्ट के बटन खोलने की कोशिश करने लगी लेकिन उसकी बौखलाहट के कारण वो बटन नहीं खोल पा रही थी जिससे उसने गुस्से में शर्ट को ही फ़ाड़ डाला। मुझे शर्ट फ़टने के कारण गुस्सा तो आया लेकिन उस वक्त गुस्से पे उन्माद हावी हो चुका था जिस कारण मैं कुछ बोलने की हालत में नहीं था। उसने मेरी फ़टी हुई शर्ट को उतारकर एक तरफ़ फ़ैंक दिया।

इससे पहले कि वो बनियान भी फ़ाड़ डाले, मैंने खुद बनियान उतारकर एक तरफ़ रख दी। अब हमारे ऊपर से नंगे बदन एक दूसरे से चिपके हुए थे और हम दोनों ही एक दूसरे के बदन को बेदर्दी से मसल रहे थे जिससे दर्द तो हो रहा था पर दर्द से ज्यादा मजा आ रहा था। उसके हाथ जैसे ही मेरी पैंट के ऊपर गये, मुझे डर था कि कहीं ये मेरी पैंट भी ना फ़ाड़ दे और मुझे नंगे ही घर जाना पड़े। मैंने फ़ट से पैंट शरीर से अलग कर दी। उसने लपक कर अडंरवियर में हाथ डाल कर मेरे खड़े लण्ड को पकड़ लिया और अपने घुटनों के बल बैठ कर लिंग को मुँह में डाल लिया और लॉलिपोप की तरह चूसने लगी। वो लंड को जड़ से लेकर टोपी तक आईस्क्रीम की तरह चाट रही थी। मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था लेकिन जब भी वो टोपी की खाल पीछे खींचकर अपनी जीभ वहां फ़िरा रही थी तो मुझे अपनी जान निकलने का अहसास हो रहा था।

उसका इस तरह से लंड और अंडकोश को चाटना असहनीय था, जिससे जल्दी ही स्खलन तक पहुँच गया। मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ, मैंने अपने लण्ड को पकड़ा और पीछे से उसके बाल पकड़ कर एक झटके में ही जड़ तक लंड उसके मुँह में डाल दिया। वो उसके गले में जाकर अटक गया। मुस्कान के मुँह से घूं घूं की आवाज आ रही थी जिससे मुझे लगा कि उसे सांस लेने में तकलीफ़ हो रही है, पर मैं झड़ने वाला था और खुद को रोक नहीं सकता था, मैं लंड को पूरी गति से आगे पीछे करने लगा जिससे लंड ने जल्दी ही पिचकारियां छोड़नी शुरु कर दी। मैंने उसके मुँह को जोर से पकड़ रखा था और पूरा लंड उसके मुँह के अन्दर था जो उसके गले में चिपका हुआ था, लंड से वीर्य निकल कर उसके गले की दीवारों पर बह रहा था, उसकी आँखों में आँसू छलक आये थे।

लेकिन शायद उसे मजा भी आ रहा था क्योंकि उसने एक बार भी मुँह को पीछे खींचंने की कोशिश नहीं की थी। जब मैं पूरी तरह से झड़ चुका तो मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और उससे सॉरी बोला पर उसने मेरी बात पर कोई प्रतिक्रिया करने की बजाय वापस लंड को पकड़ा और उस पर लगे वीर्य को चाट-२ कर साफ़ करने लगी।

उस वक्त वो मुझे इतनी प्यारी लगी कि दिल कर रहा था अपनी पूरी जिन्दगी उस पर वार दूं मैंने उसे बहुत ही प्यार से खड़ा किया और उसकी साड़ी को उससे अलग़ कर दिया उसका पेटिकोट उतार कर चड्डी भी उतार दी।

अब मेरे सामने पहले से भी भयानक नजारा था। आपने कभी संगमरमर की बनी हुई एक निर्वस्त्र लड़की की मूर्ति देखी होगी ! कितना मस्त फ़िगर होता है उसका ! अब कल्पना कीजिये कि वो लड़की आपके सामने जिन्दा बनकर आ जाये तो क्या हालत होगी आपकी !

कुछ ऐसी ही हालत मेरी भी थी, उसकी गोरी-२ सुडौल जांघों पर हाथ फ़िराते हुए मैंने जैसे ही उसकी बिना बालों वाली चूत पर अपना हाथ रखा उसने हल्की सी सिसकी ली। मैंने उसकी चूत की फ़ाड़ों को अपने हाथ की दो उंगलियों से अलग करके देखा तो उसकी चूत का मुँह थोड़ा सा खुल गया लेकिन छेद ज्यादा बड़ा नहीं था। उसके छेद का रंग गहरा गुलाबी था।

मैंने अपनी एक अगुंली को अपने मुँह में डालकर थूक में गीला किया और धीरे से उसकी चूत में सरका दिया और अन्दर बाहर करने लगा। मैं जिस स्पीड से उंगली को चला रहा था उसी स्पीड से उसका शरीर थिरक रहा था। मैंने अपनी रफ़्तार तेज कर दी तो उसके शरीर की रफ़्तार भी बढ गई। शायद मेरी ये हरकत उसे कुछ ज्यादा ही आनन्दित कर रही थी क्योंकि उसके मुँह की सिसकियां चीखों में बदल रही थी।

मैंने अपने हाथ को चलाना बदं कर दिया ताकि बाहर कोई आवाज ना सुन ले। तो वो खुद मेरी उंगली पर उपर नीचे होने लगी। मैंने जल्दी से उंगली बाहर निकाली और खड़े होकर उसे नीचे बिठाया और अपना लंड दोबारा उसके मुँह में डाल दिया। वो नरम पड़े लंड को रबड़ की तरह खींच-२ कर ऐसे चूसने लगी जैसे कोई बछ्ड़ा गाय के थन को खींचता है और गाँव के लोगों ने बछ्ड़े को ऐसा करते हुये जरुर देखा होगा।

जल्दी ही उसने लंड को दोबारा खड़ा करके पत्थर की तरह सख्त कर दिया। मैंने खड़े होकर उसका मुँह दीवार की तरफ़ घुमाया और सामने लगे वाश बेशिन पर उसके हाथ रखवाकर उसे झुका दिया। अब उसकी गाण्ड उभर कर सामने आ गई और गाण्ड के नीचे टागों के बीच से उसकी चूत बाहर झांक रही थी। मैंने अपने लंड पर वाश बेशिन के उपर पड़ा साबुन लगा कर बहुत सारे झाग बनाये और और उसकी चूत के मुँह पर रख कर धीरे से अदंर सरका दिया। वो उसकी चूत की दिवारों को खोलता हुआ आराम से अन्दर समा गया। अन्दर से उसकी चूत काफ़ी चिकनी और नरम थी। मेरा लंड उसकी चूत में कुछ इस तरह से फ़िट था कि जैसे उसकी चूत को स्पेशल मेरे लंड के लिये ही बनाया हो।

मैंने उसे जोर से वाश बेशिन को पकड़ने के लिये कहा और खुद उसके चूतड़ पकड़ कर जोर जोर से उसे चोदना शुरु कर दिया। वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। जैसे ही मैं लंड को आगे की तरफ़ धकेलता, वो अपने चूतड़ों को पीछे की तरफ़ धकेलती और जैसे ही मैं लंड को पीछे की तरफ़ खींचंता वो खुद को आगे की तरफ़ खींचंती। मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। जब भी मेरा लंड उसकी चूत में जड़ तक घुसता और उसके कूल्हे मेरी जाघों से टकराते तो बहुत ज्यादा पट-पट की आवाज आ रही थी और मैं इसी पट पटा पट के साथ उसे चोदे जा रहा था।

मैंने अपने दांत बहुत जोर से भींच रखे थे और सांस रोक कर शॉट पर शॉट लगा रहा था और मुस्कान, अब की बार वो अपनी चीखों को नहीं रोक पा रही थी और मस्त हो कर बड़बड़ा रही थी- ओ ह ह ह आ ह ह ह हाँऽऽ अं आ ह ह ह कर ! आह ह ह ह ओह यस और जोर से !

मुझे डर था कि कहीं कोई उसकी चीखों को न सुन ले, पर मैं अभी उसको चुप कराने की हालत में नहीं था। एक दम से उसका शरीर अकड़ने लगा और अपनी चूत में मेरे लंड को भींच कर जोर से चिल्लाई और उसकी चूत ने फ़ूलना पिचकना शरू कर दिया। उसकी चूत से उसका पानी निकलकर उसकी जांघों पर और मेरे लंड से होते हुये मेरी टांगों पर बह रहा था।

मैं अब अपने लंड को नहीं हिला पा रहा था क्योंकि जैसे ही उसकी चूत थोड़ी ढीली पड़ती तो मैं लंड को हिलाने की कोशिश करता तो दोबारा वो चूत को भीच कर लंड को जकड़ लेती। उसका पूरा पानी निकल चुका था लेकिन मेरा दूसरा रांउड होने के कारण अभी नहीं हुआ था तो मैंने दोबारा अपने धक्के लगाने शरू कर दिये पर उसने मुझे रुकने के लिये कहा। जैसे ही मैं रुका तो उसने सीधे खड़े होकर लंड बाहर निकाल दिया जिससे मुझे बहुत ज्यादा गुस्सा आया और मैंने उसे डाटंते हुए दोबारा झुकने के लिये कहा पर उसने प्यार से मेरी आँखों में देखते हुये कहा- प्लीज डीयर ! अब मैं अन्दर बर्दाशत नहीं कर पा रही हूँ ! मैं तुम्हारा हाथ से हिलाकर या मुँह से चूसकर निकाल देती हूँ !

पर मैं अन्दर डालना चाहता था लेकिन मैंने उसकी बात मानते हुए उसकी चूत में डालने का विचार त्याग दिया पर अन्दर डालने का नहीं। तो मैंने उसे दोबारा झुकने के लिये कहा- मुझे तुम्हारी गाण्ड मारनी है !

तो उसने कहा- मैंने कभी मरवाई नहीं है लेकिन तुमने मुझे आज इतना मजा दिया है कि मैं मना नहीं कर सकती, पर कोशिश करना कि दर्द कम से कम हो !

तो मैंने प्रोमिस कर दिया और उसे वापस झुका दिया और साबुन उठा कर अच्छी तरह से उसकी गाण्ड के छेद पर घिसाया और बहुत सारे झाग उठने के बाद उसकी गाण्ड के छेद पर लण्ड को रख कर एक जोर का धक्का लगाया। लण्ड सट से आधा उसकी गाण्ड में जा घुसा वो जोर से चिल्लाई और बाहर निकलवाने की कोशिश करने लगी। पर मैंने उसे जोर से पकड़ रखा था वो जिस कारण हिल नहीं पाई तो उसने कहा- तुमने वादा किया था कि तुम ज्यादा दर्द नहीं करोगे ?

तो मैंने कहा- अगर मैं धीरे धीरे अन्दर डालता तो तुम मुझे कभी डालने ही नहीं देती। इसलिये मुझे ऐसा करना पड़ा लेकिन अब ज्यादा दर्द नहीं होने दूंगा और लण्ड को धीरे से बाहर खींचा और धीरे-२ ही वापस अन्दर डाल दिया। मैं ऐसे ही धीरे-२ करने लगा थोड़ी देर में ही वो नार्मल गई तो मैंने अपनी स्पीड बढा दी और हर धक्के के साथ थोड़ा-२ लंड अन्दर बढ़ाता रहा। थोड़ी ही देर में मेरा पूरा लंड उसकी गाण्ड में था जो बहुत ज्यादा टाईट थी।

मेरा लंड बिल्कुल फ़ंसा हुआ था लेकिन मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैंने तूफ़ानी गति से धक्के लगाने शुरु कर दिये जिससे कभी-२ उसका सर वास बेशिन के ऊपर लगे आईने से टकरा जाता था लेकिन कुल मिलाकर उसे भी मजा आ रहा था। मेरे धक्कों के कारण उसके बड़े-२ चूचे आईने में हिलते हुए ऐसे लग रहे थे जैसे उनमें जलजला आ गया हो। वो आँखें बंद करके मेरे धक्कों को सह रही थी और मैं आँखें खोले उसे आईने में देखते हुए चोदने का आनन्द ले रहा था। मुझे लगा कि मैं अब झड़ने वाला हूँ तो मैंने अपने धक्कों की स्पीड और बढ़ा दी

जिससे उसका सर लगातार दीवार से टकराने लगा तो उसने अपनी छाती को वाश बेसिन पर टिकाते हुए सर को दीवार के साथ सटा लिया ताकि उसका सर फ़ूटने से बच जाये।

मेरा पानी बस अभी निकलने ही वाला था। मेरे शरीर की नसें खिंच गई और मैंने सबसे ज्यादा जोर के धक्के लगाते हुए लंड उसकी गाण्ड पर पटकना जारी रखा। उसी वक्त मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया और मेरे मुँह से अजीब सी आवाज निकली और मैंने अपने शरीर का पूरा जोर लगाते हुए उसके अन्दर झड़ना शुरू कर दिया। लण्ड से जैसे ज्वालामुखी फ़ट पड़ा था, आज पता नहीं इतना वीर्य कहां से आ गया था कि निकलता ही जा रहा था और मेरा आनन्द उसकी तो बस पूछो मत जिन्दगी में ऐसा पहली बार महसूस हो रहा था।

मैंने अपना लंड बाहर निकाला और हम दोनों एक दूसरे की तरफ़ देख कर मुस्कराये। हम दोनो ही एक दूसरे से पूरी तरह संतुष्ट थे। हमने एक दूसरे को गले से लगा कर छोटा सा किस किया और अलग होकर कपड़े पहनने लगे।

जब मैं सब कपड़े पहन चुका तो मैंने बनावटी गुस्सा दिखाते हुए उसकी तरफ़ आखें निकाल के देखा और उसे अपनी शर्ट दिखाई जिसे देखकर वो थोड़ा सा मुस्कराई और गले से लगकर सॉरी कहा। अब तक वो भी अपने कपड़े पहन चुकी थी। जब हम बाहर निकलने लगे तो उसने अपने पर्स से ५०० रू निकालकर मेरी तरफ़ बढ़ाये- तुम्हारी शर्ट के लिये !

मैंने लेने से मना कर दिया तो उसने कहा- जानू अगर मैं शर्ट खरीद कर तुम्हें गिफ़्ट करती तो क्या तुम नहीं लेते?

मुझे उसके जानू कहने के स्टाईल में कुछ ज्यादा ही अपनापन लगा और मैंने वो पैसे ले लिये। उसने दोबारा मेरे होठों पर किस किया और बाथरुम का दरवाजा खोला तो हम दोनों ही सहम गये क्योंकि बाहर एक लड़की खड़ी थी जो शायद काफ़ी देर से हमारी बातें सुन रही थी। यह वही लड़की थी जो स्टेज पर मुस्कान के साथ ही खड़ी थी, जो काफ़ी सुन्दर भी थी लेकिन मुस्कान जितनी नहीं। उसने हमारी तरफ़ देख कर आखें नचाते हुए कहा- लगता है प्रोग्राम काफ़ी अच्छा रहा !

मैं तो वैसे ही तुम्हें देखने चली आइ थी, मुझे क्या पता था कि यहां ये सब चल रहा है !

उसकी बात सुन कर मेरे चेहरे पर आये असमंजस के भाव की जगह एक अर्थपूर्ण मुस्कान ने ले ली। जबकि मुस्कान ने शरमाते हुए सिर नीचे झुका लिया।

तो उसने मुस्कान की तरफ़ आँख मारते हुए कहा- घबराओ नहीं, मैं किसी से नहीं कहूंगी। बस तुम्हें मेरा आज से ऐसे मौकों पर मेरा भी ध्यान रखना पड़ेगा।

यह सुन कर मुस्कान की जान में जान आई और उसने मेरी तरफ़ देखते हुए मुझे इशारा किया। जब मैं कुछ नहीं बोला तो उस लड़की ने कहा- क्यों मिस्टर? मेरे बारे में क्या ख्याल है? मेरा नाम शालू है और मैं भी मुस्कान से कम नहीं हूँ !

तो मैंने कहा- जब आप कहे, जहां आप कहे !

तो उसने कहा- तुम दोनों की चूदाई की बातें सुनकर दिल तो अभी करने का कर रहा है पर अभी फ़ंकशन खत्म हो चुका है और हम दोनों को ही वहां पहुँचना पड़ेगा। लेकिन हम लोग कुछ दिन और यहां रहेंगे, मेरा नम्बर ले लो और रात को नौ बजे के बाद फ़ोन करना, हम तब मिलेंगे।

और शालू मुझे अपना नम्बर देकर चल पड़ी। मुस्कान ने भी मुझे गालों पर किस किया और शालू के साथ चल दी और आपके यार अपनी फ़टी हुई शर्ट से बदन छिपाते हुए अपने दोस्त के घर की तरफ़ चल दिये शालू की चूत के बारे में सोचते हुए जो रात को मारनी थी।

जिसके बारे में फ़िर कभी ................ ?

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Posted : 24/11/2010 1:17 pm