भाई पर बिजलियां - ब...
 

भाई पर बिजलियां - बहन भाई स्पेशल  

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भाई पर बिजलियां यूं गिराती रहती थी
मेरे जीजू और दीदी नासिक में नई नौकरी लगने के कारण मेरे पास ही आ गये थे। मैंने यहां पर एक छोटा सा घर किराये पर ले रखा था। मेरी दीदी मुझसे कोई दो साल बड़ी थी। मेरे मामले में वो बड़ी लापरवाह थी। मेरे सामने वो कपड़े वगैरह या स्नान करने बाद यूँ आ जाती थी जैसे कि मैं कोई छोटा बच्चा या नासमझ हूँ।
शादी के बाद तो दीदी और सेक्सी लगने लगी थी। उसकी चूंचियां भारी हो गई थी, बदन और गुदाज सा हो गया था। चेहरे में लुनाई सी आ गई थी। उसके चूतड़ और भर कर मस्त लचीले और गोल गोल से हो गये थे जो कमर के नीचे उसके कूल्हे मटकी से लगते थे। जब वो चलती थी तो उसके यही गोल गोल चूतड़ अलग अलग ऊपर नीचे यूँ चलते थे कि मानो… हाय ! लण्ड जोर मारने लगता था। जब वो झुकती थी तो बस उसकी मस्त गोलाईयां देख कर लण्ड टनटना जाता था। पर वो थी कि इस नामुराद भाई पर बिजलियां यूं गिराती रहती थी कि दिल फ़ड़फ़ड़ा कर रह जाता था।
बहन जो लगती थी ना, मन मसोस कर रह जाता था। मेरे लण्ड की तो कभी कभी यह हालत हो जाती थी कि मैं बाथरूम में जा कर उकड़ू बैठ कर लण्ड को घिस घिसकर मुठ मारता था और माल निकलने के बाद ही चैन आता था।
मैंने एक बार जाने अनजाने में दीदी से यूं ही मजाक में पूछ लिया। मैं बिस्तर पर बैठा हुआ था और वो मेरे पास ही कपड़े समेट रही थी। उसके झुकने से उसकी चूंचियां उसके ढीले ढाले कुरते में से यूं हिल रही थी कि बस मेरा मुन्ना टन्न से खड़ा हो गया। वो तो जालिम तो थी ही, फिर से मेरे प्यासे दिल को झकझोर दिया।

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Posted : 24/04/2013 5:37 am
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“कम्मो दीदी, मुझे मामा कब बनाओगी…?”
“अरे अभी कहां भैया, अभी तो मेरे खाने-खेलने के दिन हैं !” उसने खाने शब्द पर जोर दे कर कहा और बड़े ठसके से खिलखिलाई।
“अच्छा, भला क्या खाती हो ?” मेरा अन्दाज कुछ अलग सा था, दिल एक बार फिर आशा से भर गया। दीदी अब सेक्सी ठिठोली पर जो आ गई थी।
“धत्त, दीदी से ऐसे कहते हैं…? अभी तो हम फ़ेमिली प्लानिंग कर रहे हैं !” दीदी ने मुस्करा कर तिरछी नजर से देखा, फिर हम दोनों ही हंस पड़े। कैसी कन्टीली हंसी थी दीदी की।
“फ़ेमिली प्लानिंग में क्या करते हैं ?” मैंने अनजान बनते हुये कहा। मेर दिल जैसे धड़क उठा। मै धीरे धीरे आगे बढ़ने की कोशिश में लगा था।
“इसमें घर की स्थिति को देखते हुये बच्चा पैदा करते हैं, इसमें कण्डोम, पिल्स वगैरह काम में लेते हैं, मैं तो पिल्स लेती हूँ… और फिर धमाधम चुद … , हाय राम !” शब्द चुदाई अधूरा रह गया था पर दिल में मीठी सी गुदगुदी कर गया। लण्ड फ़ड़क उठा। लगता था कि वो ही मुझे लाईन पर ला रही थी।
“हां … हां … कहो धमाधम क्या…?” मैंने जानकर शरारत की। उसका चेहरा लाल हो उठा। दीदी ने मुझे फिर तिरछी नजर देखा और हंसने लगी।

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Posted : 24/04/2013 5:37 am
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“बता दूँ… बुरा तो नहीं मानोगे…?” दीदी भी शरमाती हुई शरारत पर उतर आई थी। मेरा दिल धड़क उठा। दीदी की अदायें मुझे भाने लगी थी। उसकी चूंचियां भी मुझे अब उत्तेजक लगने लगी थी। वो अब ग्रीन सिग्नल देने लगी थी। मैं उत्साह से भर गया।
“दीदी बता दो ना…” मैंने उतावलेपन से कहा। मेरे लण्ड में तरावट आने लगी थी। मेरे दिल में तीर घुसे जा रहे थे। मैं घायल की तरह जैसे कराहने लगा था।
“तेरे जीजू मुझे फिर धमाधम चोदते हैं…” कुछ सकुचाती हुई सी बोली। फिर एकदम शरमा गई। मेरे दिल के टांके जैसे चट चट करके टूटने लगे। घाव बहने लगा। बहना खुलने लगी थी, अब मुझे यकीन हो गया कि दीदी के भी मन में मेरे लिये भावना पैदा हो गई है।
“कैसे चोदते हैं दीदी…?” मेरी आवाज में कसक भर गई थी। मुझे दीदी की चूत मन में नजर आने लगी थी… लगा मेरी प्यारी बहन तो पहले से ही चालू है … बड़ी मर्द-मार… नहीं मर्द-मार नहीं … भैया मार बहना है। उसे भी अब मेरा उठा हुआ लण्ड नजर आने लगा था।

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Posted : 24/04/2013 5:37 am
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“चल साले… अब ये भी बताना पड़ेगा?” उसने मेरे लण्ड के उठान पर अपनी नजर डाली और वो खिलखिला कर हंस पड़ी। उसकी नजर लण्ड पर पड़ते ही मैंने उसकी बांह पकड़ पर एक झटके में मेरे ऊपर उसे गिरा लिया। उसकी सांसें जैसे ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गई और फिर उसकी छाती धड़क उठी। वो मेरी छाती पर थी।
मेरा छः इन्च का लण्ड अब सात इन्च का हो गया था। भला कैसे छिपा रह सकता था।
“दीदी बता दो ना…” उसकी गर्म सांसे मेरे चेहरे से टकराने लगी। हमारी सांसें तेज हो गई।
“भैया, मुझे जाने क्या हो रहा है…!”
“बहना … पता नहीं … पर तेरा दिल बड़ी जोर से धड़क रहा है … तू चुदाई के बारे में बता रही थी ना … एक बार कर के बता दे … ये सब कैसे करते हैं…?”
“कैसे बताऊँ … उसके लिये तो कपड़े उतारने होंगे… फिर … हाय भैया…” और वो मुझसे लिपट गई। उसकी दिल की धड़कन चूंचियों के रास्ते मुझे महसूस होने लगी थी।
“दीदी… फिर… उतारें कपड़े…? चुदाई में कैसा लगता है?” मारे तनाव के मेरा लण्ड फ़ूल उठा था। हाय… कैसे काबू में रखूँ !
मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। लण्ड उछाले मारने लगा। दीदी ने मेरे बाल पकड़ लिये और अपनी चूंचियां मेरी छाती पर दबा दी… उसकी सांसें तेज होने लगी।

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Posted : 24/04/2013 5:37 am
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मेरे माथे पर भी पसीने की बूंदें उभर आई थी। उसका चेहरा मेरे चेहरे के पास आ गया। उसकी सांसों की खुशबू मेरे नथुने में समाने लगी। मेरे हाथ उसके चूतड़ों पर कस गये। उसका गाऊन ऊपर खींच लिया। मेरे होंठों से दीदी के होंठ चिपक गये। उसकी चूत मेरे तन्नाये हुये लण्ड पर जोर मारने लगी। उसकी चूत का दबाव मुझे बहुत ही सुकून दे रहा था।
आखिर दीदी ने मेरे मन की सुन ही ली। मैंने दीदी का गाऊन सामने से खोल दिया। उसकी बड़ी-बड़ी कठोर चूंचियाँ ब्रा में से बाहर उबल पड़ी। मेरा लण्ड कपड़ों में ही उसकी चूत पर दबाव डालने लगा। लगता था कि पैन्ट को फ़ाड़ डालेगा।
उसकी काली पैन्टी में चूत का गीलापन उभर आया था। मेरी अँडरवियर और उसकी पैन्टी के अन्दर ही अन्दर लण्ड और चूत टकरा उठे। एक मीठी सी लहर हम दोनों को तड़पा गई। मैंने उसकी पैन्टी उतारने के लिये उसे नीचे खींचा। उसकी प्यारी सी चूत मेरे लण्ड से टकरा ही गई। उसकी चूत लप-लप कर रही थी। मेरे लण्ड का सुपाड़ा उसकी गीली चूत में अन्दर सरक गया। उसके मुख से आह्ह्ह सी निकल गई। अचानक दीदी ने अपने होंठ अलग कर लिये और तड़प कर मेरे ऊपर से धीरे से हट गई।
“नहीं भैया ये तो पाप है… हम ये क्या करने लगे थे !” मैं भी उठ कर बैठ गया

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Posted : 24/04/2013 5:37 am
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जल्दबाज़ी में और वासना के बहाव में हम दोनों भटक गये थे। उसने अपना चेहरा दोनों हाथों से छुपा लिया। मुझे भी शर्म आ गई। उसके मुख की लालिमा उसकी शर्म बता रही रही थी। उसने मुँह छुपाये हुये अपनी दो अंगुलियों के बीच से मुझे निहारा और मेरी प्रतिक्रिया देखने लगी। उसके मुस्कराते ही मेरा सर नीचे झुक गया।
“सॉरी दीदी… मुझे जाने क्या हो गया था…” मेरा सर अभी भी झुका हुआ था।
“आं हां… नहीं भैया, सॉरी मुझे कहना चहिये था !” हम दोनों की नजरे झुकी हुई थी। दीदी ने मेरी छाती पर सर रख दिया।
“सॉरी बहना… सॉरी…” मैंने उसके माथे पर एक हल्का सा चुम्मा लिया और कमरे से बाहर आ गया। मैं तुरंत तैयार हो कर कॉलेज चला गया। मन ग्लानि से भर गया था। जाने दीदी के मन में क्या था। वह अब जाने क्या सोच रही होगी। दिन भर पढ़ाई में मन नहीं लगा। शाम को जीजाजी फ़ेक्टरी से घर आये, खाना खा कर उन्हें किसी स्टाफ़ के छुट्टी पर होने से नाईट शिफ़्ट में भी काम करना था। वो रात के नौ बजे वापस चले गये।

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Posted : 24/04/2013 5:37 am
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रात गहराने लगी। शैतान के साये फिर से अपने पंजे फ़ैलाने लगे। लेटे हुये मेरे दिल में वासना ने फिर करवट ली। काजल का सेक्सी बदन कांटे बन कर मेरे दिल में चुभने लगा। मेरा दिल फिर से दीदी के तन को याद करके कसकने लगा।
मेरा लण्ड दिन की घटना को याद करके खड़ा होने लगा था। सुपाड़े का चूत से मोहक स्पर्श रह रह कर लण्ड में गर्मी भर रहा था। रात गहराने लगी थी। लण्ड तन्ना कर हवा में लहरा उठा था। मैं जैसे तड़प उठा। मैंने लण्ड को थाम लिया और दबा डाला। मेरे मुख से एक वासनायुक्त सिसकारी निकल पड़ी। अचानक ही काजल ने दरवाजा खोला। मुझे नंगा देख कर वापस जाने लगी। मेरा हाथ मेरे लण्ड पर था और लाल सुपाड़ा बाहर जैसे चुनौती दे रहा था। मेरे कड़क लण्ड ने शायद बहना का दिल बींध दिया था। उसने फिर से ललचाई नजर से लण्ड को निहारा और जैसे अपने मन में कैद कर लिया

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Posted : 24/04/2013 5:37 am
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“क्या हुआ दीदी…?” मैंने चादर ओढ़ ली।
“कुछ नहीं, बस मुझे अकेले डर लग रहा था… बाहर तेज बरसात हो रही है ना !” उसने मजबूरी में कहा। उसका मन मेरे तन्नाये हुये खूबसूरत लण्ड में अटक गया था। मैंने मौके का फ़ायदा उठाया। चादर एक तरफ़ कर दी और खड़े लण्ड के साथ एक किनारे सरक गया।
“आजा दीदी, मेरे साथ सो जा, यहीं पर…पर पलंग छोटा है !” मैंने उसे बताया।
मेरे मन के शैतान ने काजल को चिपक कर सोने का लालच दिया। उसे शायद मेरा लण्ड अपने जिस्म में घुसता सा लगा होगा। उसकी निगाहें मेरे कठोर लण्ड पर टिकी हुई थी। उसका मन पिघल गया… उसका दिल लण्ड लेने को जैसे मचल उठा।
“सच… आ जाऊँ तेरे पास… तू तौलिया ही लपेट ले !” उसकी दिल जैसे धड़क उठा। दीदी ने पास पड़ा तौलिया मुझे दे दिया। मैंने उसे एक तरफ़ रख लिया। वो मेरे पास आकर लेट गई।

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Posted : 24/04/2013 5:37 am
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“लाईट बन्द कर दे काजल…” मेरा मन सुलगने लगा था।
“नहीं मुझे डर लगता है भैया…” शायद मेरे तन की आंच उस तक पहुंच रही थी।
मैंने दूसरी तरफ़ करवट ले ली। पर अब तो और मुश्किल हो गया। मेरे मन को कैसे कंट्रोल करूँ, और यह लण्ड तो कड़क हो कर लोहा हो गया था। मेरा हाथ पर फिर से लण्ड पर आ गया था और लण्ड को हाथ से दबा लिया। तभी दीदी का तन मेरे तन से चिपक गया। मुझे महसूस हुआ कि वो नंगी थी। उसकी नंगी चूंचियां मेरी पीठ को गुदगुदा रही थी। उसके चूचक का स्पर्श मुझे साफ़ महसूस हो रहा था। मुझे महसूस हुआ कि वो भी अब वासना की आग में झुलस रही थी… यानी सवेरे का भैया अब सैंया बनने जा रहा था। मैंने हौले से करवट बदली… और उसकी ओर घूम गया।
काजल अपनी बड़ी बड़ी आंखों से मुझे देख रही थी। उसकी आंखों में वासना भरी हुई थी, पर प्यार भी उमड़ रहा था। लगता था कि उसे अब मेरा मोटा लण्ड चाहिये था। वो मुझे से चिपकने की पुरजोर कोशिश कर रही थी। मेरा कड़ा लण्ड भी उस पर न्योछावर होने के लिये मरा जा रहा था।

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Posted : 24/04/2013 5:38 am
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“दिन को बुरा मान गये थे ना…” उसकी आवाज में बेचैनी थी।
“नहीं मेरी बहना … ऐसे मत बोल… हम तो हैं ही एक दूजे के लिये !” मैंने अपना लण्ड उसके दोनों पांवों के बीच घुसा दिया था। चूत तो बस निकट ही थी।
“तू तो मेरा प्यारा भाई है… शरमा मत रे !” उसने अपना हाथ मेरी गरदन पर लपेट लिया। मेरा लण्ड अपनी दोनों टांगों के बीच उसने दबा लिया था और उसकी मोटाई महसूस कर रही थी। उसने अपना गाऊन का फ़ीता खोल रखा था। आह्ह … मेरी बहना अन्दर से पूरी नंगी थी। मुझे अब तो लण्ड पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था। उसने अपनी चूत मेरे लण्ड से चिपका दी। जैसे लण्ड को अब शांति मिली। मेरा मन फिर से उसे चोदने के लिये मचल उठा। मैंने भी उसे कस लिया और कुत्ते की तरह से लण्ड को सही स्थान पर घुसाने की कोशिश करने लगा।

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Posted : 24/04/2013 5:38 am
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