मारवाड़ की मस्त मला...
 

मारवाड़ की मस्त मलाई  

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मेरा नाम नसीम राजा है और लोग मुझे राजा या राज भी कहते है. अब मेरी उमर 24 साल की है. मैं एक मारवाड़ी सेठ कांति लाल के घर के पड़ोस मे रहता हू और मेरा उनके घर हमेशा का आना जाना लगा रहता है. मैं अपने घर मे कम और उनके घर मे ज़ियादा रहता हू और अब तो मैं मारवाड़ी लॅंग्वेज भी अछी तरह से समझ और बोल सकता हू. लकिन मैं जो आपको कहानी सुनाने जा रहा हू वो कुछ साल पहले की है.
सेठ कांतिलाल का एक बेटा है, शांति लाल, तकरीबन मेरी ही उमर का है और हम एक ही कॉलेज मे पढ़ते हैं और आपस मे आछे ख़ासे दोस्त भी हैं. हम एग्ज़ॅम्स के नज़दीक कंबाइंड स्टडीस भी करते हैं और जब कंबाइंड स्टडीस करते है तो मेरी रात उनके ही घर मैं गुज़रती है. हम दोनो साइन्स के स्टूडेंट्स हैं. कभी कभी तो हम एक ही बाइक पर कॉलेज चले जाते है. मे कॉलेज की क्रिकेट टीम का मेंबर हू और जब प्रॅक्टीस सेशन होता है तो मुझे घर वापस लोटने मे देरी हो जाती है और उस टाइम पे शाँतिलाल मेरा वेट करता रहता है और हम साथ ही वापस जाते हैं.
सेठ कांति लाल की एक बेटी भी है जिसका उसका नाम पूनम है. घर वाले और जानने वाले उसको प्यार से पिंकी कह कर पुकारते है. वो हम से उमर मे तकरीबन 2 साल छोटी है. पूनम एक बोहोत ही सुंदर, थोड़ी सी दुबली पतली और बोहोत ही नाज़ुक लड़की है. थोड़ी बोहोत चंचल भी है और मा बाप की लाडली बेटी है इसी लिए थोड़ी सी ज़िद्दी भी है. वो जब किसी बात की ज़िद्द करने लगती है तो उसके पूरा होने तक खामोश नही बैठ ती. ऐसा भी नही है कि हर बात मे ज़िद्द ही करने बैठ जाए, कभी कभी समझाने पर मान भी जाती है.
बड़ी होने के बाद वो ज़िद्द ख़तम हो चुकी थी लैकिन फिर भी कभी कभी वो पुरानी ज़िद्द वापस आ ही जाती थी. वो इंटरनेट की दीवानी है रात रात भर इंटरनेट पर अपने फ्रेंड्स के साथ चाटिंग करती रहती है और पता नही क्या क्या देख लेती होगी
क्यॉंके उसका कमरा अलग है और वो जब भी इंटरनेट यूज़ करती है तो मोस्ट्ली अपना कमरा अंदर से लॉक कर लेती है. शाँतिलाल का और पिंकी का बेडरूम फर्स्ट फ्लोर पे है पर अलग अलग है विद अटॅच्ड बाथरूम. दोनो के कमरो के बीचे मे एक बोहोत बड़ा सा हॉल है जहा 2 बड़े सोफा सेट रखे हुए है जब दोनो मे से किसी के पास कोई फ्रेंड्स आ जाते है तो वो हॉल उसे मे ले आता है.
ऑन दा होल पूनम एक बोहोत ही अछी और फ्रेंड्ली लड़की है. हमेशा मुस्कुराती रहती है और जब मुस्कुराती है तो उसके गालो मे दो छोटे से डिंपल पड़ते है. वो पढ़ाई मे उतनी तेज़ नही है कभी कभी किसी ना किसी सब्जेक्ट मे फैल भी हो जाती है. हाइट होगी तकरीबन 5’ रंग इतना गोरा है के उसके हाथो पे खून की नीले रंग की रगें ( वेन्स ) सॉफ दिखाई देती है. लाइट ब्राउन कलर की उसकी बड़ी बड़ी आँखें और लाइट ब्राउन कलर के ही उसके रेशम जैसे बाल उसकी कमर तक झूलते बोहोत आछे लगते हैं. उसका फिगर होगा कोई 28-24-30. पिंकी एक बे इंतेहा खूबसूरत लड़की है. पिंकी से भी मेरी अछी ख़ासी दोस्ती है. हम एक दूसरे के साथ जोकिंग भी करते है और खेलते भी हैं और बिंदास एक दूसरे के बदन पे इधर उधर हाथ भी लगा लेते है और कभी एक दूसरे के गाल पे या चूतड़ पे चुटकी भी काट लेते है. रोमॅंटिक और डबल मीनिंग वाले सेक्सी जोक्स भी शेर कर लेते हैं और कभी कभी तो उसको अपनी बाँहो मे भी भर लेता हू और जब उसका बदन मेरे लंड से लगने लगता है तो वो अपने बदन को मेरे बदन से और ज़ियादा चिपका लेती है ताकि मेरे लंड को अछी तरह से फील कर सके और फिर मुझे अजीब नज़रो से देखती हुई मुस्कुरा देती. और एस्पेशली हम जब होली खेलते है तो मे उसके बूब्स को भी अछी तरह से मसल देता हू जिस्मै मुझे बोहोत ही मज़ा आता है उसके छोटे कड़क बूब्स एक दम से मस्त है और होली खेलते समय जब वो हंसते हुए झुक जाती तो मे उसको पीछे से पकड़ लेता जिसकी वजह से मेरा लंड अकड़ जाता और उसकी गंद मे लगता रहता और मैं उसके बूब्स को मसलता रहता और वो भी मेरे इतने करीब हो के रंग लगाती है के उसके बूब्स मेरे बदन से टच करते रहते है और कभी तो मेरा लंड उसके बदन से भी लग जाता है और कभी वो ऐसे हाथ फिराती है के मेरे लंड से उसका हाथ भी टच होता है और ऐसे टाइम पे वो बड़ी ज़ोर से खिल खिला कर हंस देती . मतलब के हम दोनो एक दूसरे के साथ बोहोत ही फ्री रहते हैं और इस बात को सब घर वाले भी जानते हैं वो सब भी यही सोचते है के हम एक आछे दोस्त और साथी है और फ्रेंड्स जैसा ही रहते है. वो मुझे राजा कह कर पुकरती है तो मैं शरारत से कहता हू के अरे कभी तो “मेरे राजा” कह के बुला लिया करो ना मेरी जान तो वो अपनी ज़ुबान बाहर निकाल के मुझे चिढ़ाती हुई मुस्कुराती और बोलती के जब तुम मेरे राजा बनॉगे तब पुकारूँगी तो मैं भी हंस देता और
कहता के चलो ठीक है देखते है वो दिन कब आता है तो वो भी हंस देती इसी तरह से हसी मज़ाक मे मस्ती मे दिन गुज़रते रहे और मैं जैसे उनके घर के एक सदस्य ही बन गया था उनके घर मे ही खाना भी खा लेता था और कभी कभी तो शाँतिलाल या पिंकी के कमरे मे सो भी जाता था.

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Posted : 13/02/2011 3:37 am
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पूनम की माताजी जिनका नाम पूजा है सब लोग उनको सेठानी मा या माताजी कह कर बुलाते है पर मैं उन्हे आंटी कह कर बुलाता हू और वो भी मुझे राजा ही कह कर पुकारती है लैकिन सेठ कांतिलाल और उनका बेटा शाँतिलाल मुझे राजू, राजा या राज ही कह कर बुलाते है. पूजा माताजी की एज होगी कोई 36-37 साल की लैकिन वो किसी 20 साल की लड़की से ज़ियादा नही लगती और वो भी एक बोहोत ही सुंदर औरत हैं. हाइट होगी कोई 5’ 5” के करीब. दुबली पतली, गोरे रंग की. बड़ी बड़ी आँखें, फिगर होगा कोई 36-32-36. वो हमेशा सारी ही पेहेन्ति है और बटक्स पे सारी उनकी थोड़ी टाइट होती है जिस से चलते समय उनके चूतड़ बड़े सेक्सी स्टाइल मे हिलते हैं और रात मे नाइटी पेहेन्ति है. कभी नाइटी पतली हो तो उनकी ब्रस्सिएर और पॅंटी भी दिखाई देती है और अगर कभी ब्रस्सिएर नही पहनी हो तो उनके गोरे गोरे बूब्स और गुलाबी निपल भी सॉफ दिखाई देते है ऐसा मुझे देखने का दो तीन टाइम मोका मिला जब मैं रात को किसी काम से उनके घर गया था. उनके बूब्स भी टाइट ही लगते है शाएद ब्रस्सिएर टाइट पेहेन्ति हैं या उन्हे ज़ियादा दबाया और चूसा नही गया होगा इसी लिए टाइट होंगे. आँखों पे गोलडेन फ्रेम की नाज़ुक ऐनक उनके चेहरे पे बोहोत ही अछी लगती है. हमेशा ही अछी ड्रेसिंग मे रहती है ऐसा लगता है जैसे कही बाहर जाने के लिए रेडी हुई हो. मैं उनकी बोहोत इज़्ज़त करता हूँ और वो भी मुझे बोहोत ही चाहती है एक फॅमिली मेंबर की तरह से ट्रीट करती है और हमेशा मुझे कुछ ना कुछ गिफ्ट्स भी देती ही रहती हैं.
सेठ कांति लाल तकरीबन 60 साल के बोहोत ही पैसे वाले बिज़्नेस मॅन हैं. मार्केट मे उनका बोहोत नाम है. वो सावले रंग के और आछे ख़ासे मोटे इंसान हैं उनकी तोंद भी बोहोत बड़ी है. चलना फिरना मुश्किल है. नीचे फ्लोर पे बैठ जाएँ तो उतना मुश्किल होता है इसी लिए वो हमेशा चेअर पे ही बैठे रहते हैं. टिपिकल सफेद कलर की धोती और कुर्ते मे रहते हैं. मोटे शीशे का चश्मा उनकी मोटी नाक पे हमेशा ही टिका रहता है. बिज़्नेस बोहोत ही अछा चलता है उनके और उनकी वाइफ मे कोई अंतर नही दिखाई देता. कहाँ वो खूबसूरत, दुबली पतली, नाज़ुक और अभी भी जवान लगने वाली पूजा सेठानी और कहा यह मोटे भ्हद्दे सेठ कांटी लाल. लगता है सेठानी मा के घर वालो ने पैसा देख के सेठ कांति लाल से उनकी शादी कर दी है.
साइट कांति लाल जी की एक तो गोल्ड ज्यूयलरी की दुकान है दूसरी रेडी मेड गारमेंट्स की होल सेल की दुकान है. ज्यूयलरी की शॉप मैं वो खुद बैठ ते है और रेडी मेड गारमेंट्स की दुकान मे उनका बेटा शांति लाल कॉलेज का टाइम ख़तम होने के बाद शाम के टाइम बैठ ता है तब तक उनका एक मॅनेजर है वोही दुकान की देख भाल करता है.
रेडीमेड गारमेंट्स का होल्सेल बिज़्नेस होने की वजह से परचेसिंग भी कुछ ज़ियादा ही होती है और हर थोड़े दीनो बाद माल ख़तम हो है और फिर तुरंत ही परचेसिंग के लिए जाना पड़ता है. परचेसिंग के लिए पहले तो वो खुद ही चले जाते थे पर अब वो खुद तो नही जा पा ते इसी लिए अपने बेटे शांति लाल को भेजते है और कभी कभी मैं भी उसके साथ पूना, बोम्बे, देल्ही, चेन्नई या कोलकाता चला जाता हू और ऐसे ही आने जाने से थोड़े ही महीनो मे मुझे भी परचेसिंग का काफ़ी एक्सपीरियेन्स हो गया है और इतना कॉन्फिडेन्स आ गया है के अगर कभी शांति लाल भी किसी वजह से ना जा सके तो वो मुझे अकेले ही भेज देते है और मैं बॉम्बे, पूना, देल्ही, चेन्नई या कोलकाता जा कर उनके लिए परचेसिंग कर के आता हू. जब सेठ कांतिलाल और सेठानी पूजा किसी शहेर को जाते है तो 5 स्टार होटेल मे ही ठहर ते हैं और उतने दीनो तक होटेल की ही रेंट एक कार विद ड्राइवर ले लेते है. अपने ऊपेर वो अछा ख़ासा पैसा खरच करते है अपने लिए परचेसिंग भी भारी कीमत की करते हैं. मैं ने देखा के पूजा माताजी की कोई भी सारी 12 या 15 हज़ार रुपीज़ से कम की नही होती. इसी लिए तो इतनी शानदार नज़र आती है वो अपनी ड्रेसिंग मे.
उनका घर भी बोहोत ही बड़ा है. घर मे लोगो से ज़ियादा कमरे है जो अक्सर खाली ही पड़े रहते है. कभी किसी तेओहार के टाइम पे या शादी के टाइम पे कोई उनका गेस्ट या और कोई रिलेटिव आजाता है तो वो रूम्स इस्तेमाल मे आते है नही तो बंद ही पड़े रहते हैं. क्लीनिंग के लिए कुछ नोकरानिया रखी है जो डेली एंप्टी रूम्स की सफाई करती है और फिर बंद कर देती हैं. थोड़े कमरे एज ए स्टोर रूम भी इस्तेमाल मे आते है.

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Posted : 13/02/2011 3:38 am
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आक्च्युयली कयी साल पहले सेठ कांतिलाल मारवाड जो के राजस्थान का ही एक शहेर है वाहा रहते थे और मारवाड़ी कम्यूनिटी के थे अब हयदेराबाद मे रहने लगे थे. आप सब को पता ही होगा के मारवाड़ी लड़कियाँ और औरतें कितनी खूबसूरत होती है एक दम से मक्खन मलाई जैसी. हयदेराबाद शिफ्ट होने से पहले सेठ कांति लाल हयदेराबाद से करीब एक दूसरे टाउन सिड्डिपेट मे रहते थे जो के हयदेराबाद
से तकरीबन 80 – 85 किलोमेटेर की दूरी पर है. वाहा उनका बोहोत ही बड़ा अंगूर ( ग्रेप्स ) का बाग है जिस्मै एक बोहोत ही बड़ा घर भी है. उनके सिड्डिपेट का घर सिड्डिपेट टाउन से तकरीबन 8 – 10 किलोमेटेर दूर टाउन के आउटस्कर्ट्स मे है और वही पर उनकी ही प्रॉपर्टी मे एक प्राइवेट तालाब भी है जहा उनके फॅमिली मेंबर्ज़ के सिवा और कोई नही आता जाता जिस्मै कभी कभी वो सब स्विम्मिंग भी करते है. मेन रोड से फार्महाउस के अंदर आने तक एक प्राइवेट कच्ची सड़क जैसी बनी हुई है और इस रास्ते के दोनो तरफ ग्रीन ग्रीन अंगूर की बेले मंडवो पे फैली हुई बोहोत अछी लगती है. साल मे एक टाइम वो अंगूर तोड़ने के लिए किसी भी फ्रूट वाले को कांट्रॅक्ट पे दे देते है. मेन रोड पे फार्महाउस का मेन गेट है जहा से घर तकरीबन आधे पौना किलोमेटेर की दूरी पर है इसी लिए मेन गेट से घर नज़र भी नही आता. देखने वाले यही समझते है के यह बस एक अंगूर का बाग है.
वो या उनके फॅमिली मेंबर्ज़ अक्सर वाहा टाइम पास करने या सम्मर हॉलिडेज़ मे छुट्टियाँ गुज़ारने चले जाते हैं. वो घर एक फार्महाउस के जैसा यूज़ मे आता है. देख भाल करने के लिए एक कपल हज़्बेंड और वाइफ गंगू बाई और उसके हज़्बेंड रामू को रखा है जो वाहा एक पोर्षन मे रहते भी है उनको दो रूम्स, किचन और बाथरूम का एक घर मेन गेट के करीब ही बना के दिया हुआ है जहा वो रहते है और घर की देख भाल और सफाई वाघहैरा भी करते हैं. उनकी एक बेटी लक्ष्मी है (उनको लक्ष्मी बोलना तो नही आता इसी लिए उसको लॅक्मी कह कर पुकारते है ) लक्ष्मी पिंकी से शाएद 2 या 3 साल की छोटी होगी पर देखने मे एक ही उमर के लगते है दोनो. लक्ष्मी एक साँवली सी लड़की है बदन भी मेहनत करने से अछा सख़्त घाटीला हो गया है. नयी नयी जवानी आने लगी है और उसके बूब्स भी थोड़े थोड़े आने लगे हैं. वो मीडियम बिल्ट की लड़की है. अभी वो छोटी ही है लैकिन शकल से बोहोत ही सेक्सी लगती है बड़ी बड़ी काली आँखें मटका के जब बात करती है तो लंड पॅंट के अंदर ही फड़कने लगता है, काले बाल हाइट भी होगी यही कोई 4’ 8 – 9” पिंकी से भी कम हाइट और मेरे से तो बोहोत ही कम और मेरे सामने खड़ी हो जाए तो मेरे सीने और पेट के बीच मे उसका सर लगता होगा वो मोस्ट्ली हाफ स्कर्ट और हाफ स्लीव्ड ब्लाउस टाइप पेहेन्ति थी और अगर कभी वाइट कलर का पतला ब्लाउस पहेन लेती तो उसको छोटे छोटे बूब्स और निपल्स नज़र आते थे. उनके पास अंदर टाउन तक आने जाने के लिए एक बंदी ( बैल गाड़ी या बुलक कार्ट ) है जिसे दो बैल ( बुल्ल्स ) चलते है. वीक मे एक या दो टाइम वेजिटेबल्स या खाने पीने का समान लाने के लिए शहेर चले जाते है या फिर कभी हॉस्पिटल वाघहैरा जाना हो तो भी दिन मे चले जाते है और शाम तक वापस आ जाते है. ऐसा कम ही होता है के तीनो
एक साथ ही चले जाएँ, तीनो मे से कोई ना कोई घर मे मौजूद रहता ही है. घर को कभी खाली नही छोड़ते.
घर मे डेली यूज़ की सारी चीज़ीं मौजूद हैं. टीवी, फ्रिड्ज और वॉशिंग मशीन जैसी हर चीज़ है. तीन कमरो मे तो एर कंडीशन भी लगे हुए है. ज़बरदस्त डबल बेड्स भी है. एमर्जेन्सी यूज़ मे आने वाले कपड़े, बेडशीट्स और टवल्ज़ वाघहैरा सब हैं.

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Posted : 13/02/2011 4:06 am
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मैं और शाँतिलाल बचपन से ही एक दूसरे के साथ हैं और हम एक दूसरे के साथ अपनी सीक्रेट्स भी शेर करते हैं. मेरे फादर गवर्नमेंट सर्वेंट है और हम अप्पर मीडियम क्लास के फॅमिली वाले लोग हैं. ऊपेर वाले ने मुझे पैसे की धन दौलत तो नही दी पर जिस्मानी धन दौलत बुहोट दी है. मेरी हाइट 5’ 8” है गोरा रंग, एक्सर्साइज़्ड मस्क्युलर बॉडी, ब्रॉड शोल्डर्स और मेरे सारे जिस्म पर बाल है और चेस्ट पे भी बोहोत बाल है. और लंड का तो क्या पूछना एक दम से मस्त फुल्ली एरेक्ट लंड 8” लंबा मूसल जैसा मोटा और लोहे जैसा सख़्त एक दम से शानदार जिसका सूपड़ा एक दम से चिकना और उसपे बड़ा सा सुराख किसी लड़की के हाथ लग जाए तो मेरे लंड को सीधे पकड़ के अपनी चूत मैं डाल ले. और वही शाँतिलाल आक्ची सूरत का हॅंडसम लड़का है पर दुबला पतला कमज़ोर टाइप का है जिसके अंदर सेल्फ़ कॉन्फिडेन्स भी नही है और मोस्ट्ली वो मेरे डिसिशन पर ही निर्भर रहता है.
हम हमेशा स्कूल को साथ ही जाते और जब कभी पिशाब करने का टाइम आता तो भी हम एक दूसरे के करीब ही ठहर के पिशाब करते और एक दूसरे की नुनु देखते और देखते के किसके पिशाब की धार कितनी दूर तक जाती है जिस्मै हमेशा मेरी पिशाब की धार ही भोत दूर तक जाती थी. . मेरी नुन्नि शाँतिलाल की नुन्नि से बोहोत ही बड़ी थी और वो हमेशा मुझ से बोलता था के अबे राजू ( यहा यह बता दू के सब लोग मुझे राजा, राज्ज या राजू कह कर बुलाते थे ) तेरी नुन्नि इतनी बड़ी कैसे है और मेरी इतनी छोटी कैसे तो मैं कहता मुझे क्या मालूम शाएद इस लिए के मैं चिकन और मीट ख़ाता हू और तू सिर्फ़ वेजिटेबल्स और दाल ही ख़ाता है तो वो कहता हा हो सकता है. कभी कभी बोलता के राजू मुझे भी कभी चिकन खिला यार तो मैं बोलता के तेरी माताजी मुझे मारेगी तो वो खामोश हो जाता पर चिकन खाने का वो मंन बना चुका था. कभी कभी हम एक दूसरे की नुन्नि को अपने हाथो मे पकड़ के दबाते भी थे इसी तरह से हमारे दिन गुज़रते गये और हम छ्होटे से बड़े होते गये.
जब हम 6थ या 7थ क्लास मे थे तब तक मेरी नुन्नि बोहोत ही बड़ी और मोटी हो चुकी थी और दिन भर मे कम से कम 25 – 30 टाइम एरेक्ट भी हो जाती थी और अब वो किसी बड़े आदमी के लोड्*े या लंड से कम नही थी हम दोनो अभी भी एक दूसरे के सामने ही अपने लोड्*े निकाल के पिशाब करते थे और एक दूसरे के लोड्*े देखते रहते थे. शांति लाल की नुन्नि अभी भी उतनी ही छोटी थी जितनी बचपन मे थी या शाएद थोड़ी सी बड़ी होगआई होगी पर लगती थी जैसे उतनी ही है. होगी शायद कोई 3 इंच की और उसकी नुन्नि के हेड के ऊपेर का अन वांटेड स्किन भी लटका रहता था जिस्मै से पिशाब की धार निकलती थी और उसके पैरो के पास ही गिरती थी लैकिन मेरे लोड का अनवॉंटेड स्किन कटा हुआ था और लंड का सूपड़ा गोल किसी बाइक के हेल्मेट या मशरूम जैसा था और और लंड किसी मूसल की तरह मोटा और लोहे जैसा सख़्त हो गया था . लंड के सूपदे के ऊपेर मोटा सुराख भी था जिस्मै से पिशाब की मोटी सी धार निकलती थी जिसे देख के शाँतिलाल कहता अबे राजू तेरा लोड्*ा मुझे दे दे और मेरा तू लेले तो मैं मुस्कुरा के मज़ाक से कहता यह समझ के मेरा लौदा आज से तेरा ही है जब चाहे ले ले तो वो भी मुस्कुरा के कहता देख लेलुँगा तो मैं कहता कोई बात नही यार तेरे से बढ़ के है क्या, ले ले जब मर्ज़ी आए. जब पिशाब करने के लिए एक दूसरे के करीब खड़े होते तो शाँतिलाल मेरा लौदा पकड़ लेता और उसके हाथ लगते ही मेरा लोड्*ा एक दम से खड़ा हो जाता जिसे शाँतिलाल दबा देता और पिशाब ख़तम होने के बाद भी मेरे लौदे को हिला हिला के लास्ट ड्रॉप्स भी नीचे गिरा देता फिर हम अपने अपने लौदो को अपने पॅंट या चड्डी के अंदर रख लेते.

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Posted : 13/02/2011 4:13 am
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शान्ती लाल की एक पड़ोसन थी उसका नाम पायल था वो भी मारवाड़ी ही थी और वो शाँतिलाल को लाइन मारती थी. पायल भी एक बोहोत ही खूबसूरत और सेक्सी लड़की थी गोरा रंग और मीडियम बिल्ट बॉडी जो बोहोत मोटी भी नही बोहोत दुबली पतली भी नही वो एक दम से मारवाड की मलाई लगती थी. पायल उसको बचपन से लाइन मारती थी और शांति लाल से बोहोत मोहब्बत करती थी और शाँतिलाल भी उसको बोहोत चाहता था. वो भी शाँतिलाल के घर आती जाती रहती थी और पिंकी से भी उसकी गहरी दोस्ती थी. जवान हो जाने के बाद पायल कुछ ज़ियादा ही खूबसूरत और ज़ियादा ही सेक्सी हो गयी थी. तकरीबन 5’ 3-4” की हाइट होगी और उसके बूब्स भी बड़े मस्त छोटे अमरूद जैसे थे और कभी बिना ब्रस्सिएर के शर्ट या टॉप पेहेन्ति तो उस मे से उसके पिंक कलर के निपल्स दिखाई देते थे जिसे देखते ही मेरा लंड तो एक दम से खड़ा हो ही जाता था पर शाँतिलाल का शाएद खड़ा नही होता था. मोस्ट्ली स्कर्ट और टॉप पेहेन्ति थी या कभी बर्म्यूडा टाइप की चड्डी और टॉप भी पेहेन्ति थी. पायल के पिताजी का भी बिज़्नेस था और वो भी बोहोत पैसे वाले थे. शाँतिलाल के पिताजी से पायल के पिताजी की फ्रेंडशिप भी थी पर आजकल दोनो बिज़्नेस मे बिज़ी थे इसी लिए कभी कभार ही उनकी मुलाकात हो पाती थी.
पायल और शाँतिलाल एक दूसरे से प्यार करने लगे जिसकी मुझे जानकारी थी. शाँतिलाल मेरे से कोई बात नही छुपाता था और अपने प्यार के किस्से सुनाता रहता था. दोनो कभी अकेले मे मिलते तो पायल ही शाँतिलाल को पकड़ के किस करती और उसके हाथ अपने हाथो से पकड़ के अपने बूब्स पे रख लेती और खुद ही नीचे हाथ डाल के उसके छोटे से लौदे को अपने हाथो से पकड़ के मसल भी देती थी और पायल का हाथ उसकी नूनी पे लगते ही उसके लोदे से पानी निकल आता था और उसका पॅंट गीला हो जाता था. पायल एक बोहोत ही सेक्सी लड़की थी वो भी इंटरनेट की दीवानी थी और वो भी रात रात भर चाटिंग करती और सेक्सी फोटोस भी देखती और सेक्सी वीडियो क्लिप्स भी देख देख के कुछ ज़ियादा ही सेक्सी हो गयी थी. वो जब शाँतिलाल से मिलती तो वो उसको अपनी बाँहो मे भर लेती आनी ज़ुबान उसके मूह के अंदर डाल के उसको फ्रेंच किस किया करती और शाँतिलाल अपनी तरफ से कोई पहेल नही करता और मुझ से बोलता के यार राजू क्या करू मेरा लंड साला उठ ता ही नही और पायल है के मेरे लौदे को ही पकड़े रहती है तो मैं मज़ाक करता के चल तू पायल से प्यार कर और मैं उसके हाथ मे अपना लंड दे देता हू तो वो मुझे अजीब सी नज़रो से देखता रहता जिसका मैं मतलब नही समझ पाता था. पता नही वो क्या सोचता था. खैर ऐसे ही मस्ती मे दिन गुज़रते रहे.

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Posted : 13/02/2011 4:14 am
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सेठ कांती लाल के घर मे एक वाइट कलर की नयी एर कंडीशंड इंनोवा कार थी और दूसरी रेड कलर की मारुति एस्टीम जो थोड़ी पुरानी थी. मैं और शाँतिलाल दोनो ही कार चलाना जानते थे और अक्सर आउटिंग के लिए लोंग ड्राइव पे चले जाते थे और लेट नाइट ही वापस आते. एक टाइम ऐसा हुआ के हम आउटिंग के लिए शहेर से दूर चले गये और वापसी मे देर हो गयी और उस दिन अच्छी ख़ासी ठंड पड़ रही थी. कार के ग्लासस बंद थे फिर भी हमे ठंडी लग रही थी. ऐसी ठंड मे मेरा लंड एक दम से अकड़ गया और पॅंट मे मुझे अड्जस्ट नही हो रहा था उस टाइम मैं कार चला रहा था और शाँतिलाल मेरे बाज़ू मे बैठा हुआ था. मैं बार बार अपने लंड को अपने पॅंट मे अड्जस्ट करने की कोशिश कर रहा था तो उसने पूछा के क्या हुआ तो मैं ने बोला के यह साला मेरा लंड पॅंट के अंदर अकड़ गया है और तकलीफ़ दे रहा है तो उसने कहा ऐसी क्या बात है ले मैं खोल देता हू और उसने अपने हाथो से मेरे पॅंट की ज़िप खोल दी और मेरे आकड़े हुए लंड को बाहर निकाल दिया. उसका हाथ लगते ही मेरा लंड कुछ और ज़ोर से अकड़ने लगा वो लोहे जैसा सख़्त हो चुका था और आज फ़र्स्ट टाइम मेरे लंड पे शाँतिलाल का हाथ लगने से मुझे मज़ा आया था. मेरे मूसल जैसे लंड को देख के उसके मूह से वाउ निकल गया और बोला के यार राजू तेरा लौदा तो बड़ा मस्त है और अगर यह मोटा लोहे जैसा लंड पिंकी की चूतमे घुस जाए तो वो तो मर ही जाएगी
तो मैं ने बोला के यार कैसी बाते करता है तू अपनी बहेन के बारे मे और पिंकी को मैं क्यों चोदने लगा तो वो मुस्कुरा के बोला के मैं देख रहा हू आजकल पिंकी तुझे बोहोत मीठी नज़रो से देख रही है. (अब मैं उसे क्या बता सकता हू के मैं ने पिंकी को क्या करते देखा है और मैं और पिंकी क्या कुछ नही कर चुके है अब तक) मैं ने बोला के चल यार ऐसी बातें नही करते तो फिर वो बोला के खैर पिंकी को छोड़ तू जिस लड़की को चोदेगा वो बही लकी होगी यार जब यह मुझे ही इतना मस्त लगता है तो लड़कियाँ तो तेरे लंड पे मर मिटेंगी तो मैं ने बोला के तेरा लौदा कैसा है उसे भी निकाल तो सही बाहर तो उसने भी अपनी पॅंट की ज़िप खोल दी और अपनी छोटी सी नूनी बाहर निकाल दी तो मैं ने उसको अपने हाथ से पकड़ा और अपनी उंगलिओ से पकड़ के दबाया तो दो या तीन ही टाइम आगे पीछे किया के उसकी ज़ुबान से एक उूुुुुुउऊहह की आवाज़ निकली और उसकी बिना एरेक्ट हुई छोटी सी नूनी मे से पतला पानी निकल आया और वो गहरी गहरी साँसें लेता हुआ अपनी सीट पे ढेर हो गया. थोड़ी देर के बाद उसने कहा के यार मेरा पानी इतनी जल्दी निकल जाता है मैं क्या करू तो मैं ने कहा के चल किसी डॉक्टर से कन्सल्ट करते है तो उसने बोला के नही बाबा मैं डॉक्टर के पास नही जाउन्गा नही तो सारे खानदान मैं मेरी बदनामी हो जाएगी कोई और उपाए सोच तो मैं ने बोला के ठीक है देखते है बाद मे.

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Posted : 13/02/2011 4:15 am