मिनी मेरी बन गई
 

मिनी मेरी बन गई  

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 Anonymous
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एक बार मैं फिर आपके सामने अपनी नई कहानी के साथ हाजिर हूँ। मैं अपना परिचय अपनी पिछली कहानी “तनु- मेरा पहला प्यार” और “मेरा प्यारा प्यार” में दे ही चुका हूँ।

मेरी यह कहानी एकदम सच्ची है जो आप लोगो को एकदम अपने करीब लगेगी। मेरा अगला सैक्सपिरियन्स चाँद के साथ था। फिर नीना, फिर शैलजा, फिर कल्पना और फिर मिनी के साथ मेरा सैक्सपिरियन्स हुआ। पर आज ना जाने क्यों मुझे मिनी बहुत याद आ रही है। इसलिये मैं चाँद, नीना, शैलजा और कल्पना को साईड करते हुए पहले मिनी के साथ हुए सैक्सपिरियन्स को आप लोगो के साथ शेयर करता हूँ। उस वक़्त मैं 20 साल का और मिनी 19 साल की थी।

मेरे माता-पिता दोनों टीचर थे। मेरी एक बडी बहन है। जो मेरे से लगभग दो साल बड़ी है। मेरी बहन की शादी बनारस में हुई। मेरे जीजाजी एक मल्टी-नैशनल कम्पनी में परचेज़ मैनेजर हैं। बी.एस सी के बाद मैंने बनारस हिन्दू युनिवर्सिटी में बी.फ़ार्मेसी में प्रवेश लिया। मैं होस्टल में रहने लगा। फिर दीदी ने अकेले होने की वजह से मुझे अपने साथ ही रहने को कहा। मैं होस्टल छोड़ कर दीदी-जीजाजी के साथ में रहने लगा।

दीदी के पड़ोस में एक दुमंज़िला मकान था। जहाँ दो बहनें रहा करती थी। ऊपर बड़ी बहन जो कि मकान मालकिन भी थी और नीचे यानी ग्राउंड-फलौर पर छोटी बहन। बड़ी बहन लगभग 55 साल की थी और छोटी बहन लगभग 50 साल की थी। हम उन्हें ऊपर वाली आन्टी और नीचे वाली आन्टी कहते थे। ऊपर वाली आन्टी के तीन बच्चे थे। दो लड़के और एक लड़की। लड़की सबसे बड़ी थी। तीनों बच्चों की शादी हो चुकी थी और सभी बाहर रहते थे। इसलिये उपर वाली आन्टी-अकल ने अपनी सबसे बड़ी लड़की की लड़की को अपने साथ रखा हुआ था। उसका नाम लीनू था। लीनू लगभग 16 साल की थी और बनारस महिला कॉलेज़ में बी.ए. प्रथम वर्ष में पढ़ती थी। लीनू बहुत ही ख़ूबसूरत थी। खैर वो बाद में……

नीचे वाली आन्टी के भी तीन ही बच्चे थे। दो लड़के और एक लड़की। लड़की सबसे बड़ी थी। तीनों बच्चे पढ़ रहे थे। लड़की का नाम मीनाक्षी था। घर में सब उसे मिनी कहते थे। मिनी लगभग 19 साल की थी और बनारस महिला कॉलेज़ में ही बी. एस सी. (बायो) अन्तिम वर्ष में पढ़ती थी।

मिनी भी बहुत ही ख़ूबसूरत थी मगर लीनू से कुछ कम। मेरी बहन ने भी बी.एस सी. (बायो) की थी। इसलिये मिनी मेरी बहन से कभी-कभी पढ़ने आती थी। जब मैं दीदी-जीजाजी के साथ में रहने लगा तो दीदी मिनी को मेरे से पढ़ने के लिये कह देती। मिनी को मेरा समझाना अच्छा लगता था, इसलिये वो अकसर मेरे से पढ़ने आने लगी।

धीरे-धीरे मैं और मिनी एक दूसरे को बहुत पसन्द करने लगे। मिनी से मेरी मुलाक़ातें बढ़ने लगी। ये मुलाक़ातें धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। फिर एक दूसरे को बाँहो में भरना, किस करना, फिर एक दूसरे के अंगों को छूना भी शुरु हो गया। मैं मिनी के स्तनों को दबाने और सलवार के उपर से उसकी चूत को दबाने और फिर सलवार के अन्दर हाथ डाल कर चूत पर हाथ फिराने तक पहुँच गया। मिनी भी मेरी पैंट की ज़िप खोल कर मेरा लण्ड निकालने और दबाने तक पहुँच गई।

एक दिन मिनी घर आई। उसे मुझ से केमिस्ट्री में कुछ पढ़ना था। हम दोनों ड्राइंगरूम में पढ़ने लगे। हमें पढ़ते देख कर मेरी बहन बोली कि तुम लोग पढ़ाई करो और मैं मार्केट हो कर आती हूँ। दो-तीन घंटे तक आ जाउँगी। कह कर वो चली गई। बहन के जाते ही मैं मिनी को छेड़ने लगा।

मिनी ने कहा- क्या कर रहे हो।

मैं बोला- मौके का फायदा उठा रहा हूँ।

मैंने मिनी को खींच कर अपनी गोद में लिटा लिया।

मैं मिनी के बालों में हाथ फिराने लगा। फिर मैं उसके गालों पर हाथ फिराने लगा। मैं उसके कुरते के ऊपर से उसके स्तन दबाने लगा। मिनी ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी। फिर मैं उसके कुरते के गले के अन्दर से हाथ डाल कर उसके सख्त हो चुके स्तनों को दबाने लगा। फिर मैं उसके कुरते को उतारने लगा।

मिनी बोली- क्या करते हो ! दीदी आने वाली होंगी।

मैंने कहा- वो दो-तीन घंटे तक नही आँएंगी। कह कर मैं फिर उसके कुरते को उतारने लगा।

मिनी बोली- प्लीज़ ! कोई आ जाएगा।

मैने उठ कर दरवाज़ा बंद कर दिया। फिर मैं मिनी का हाथ पकड़ कर उसे बेडरूम में ले आया। मैंने मिनी को अपनी बाँहो में भर लिया, अपने जलते हुए होंठ मिनी के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा।

मिनी ने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मेरे हाथ मिनी के जिस्म पर फिर रहे थे। कुछ देर बाद मैंने मिनी को बैड पर लिटा दिया। फिर मिनी का कुरता उपर करके उसके चिकने पेट पर अपने जलते हुए होंठ रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे पेट को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। मिनी के मुँह से आह निकलने लगी।

फिर मैं उसके कुरते को उतारने लगा। मिनी ने कोई विरोध नही किया। मैंने उसका कुरता उतार कर फ़ेंक दिया। मिनी के गोरे-गोरे स्तन गुलाबी ब्रा में फँसे थे। फिर मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसके स्तनों को दबाने लगा। मिनी ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी।

कुछ देर बाद मैंने उसकी ब्रा भी उसके तन से जुदा कर दी। फिर मैं उसके गोरे-गोरे सख्त स्तन दबाने लगा। साथ-साथ उसके गुलाबी निप्पल को हल्के-हल्के मसलने लगा। फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे स्तनों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। मिनी के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी।

फिर मैं उसके पेट पर हाथ फिराते हुए उसकी सलवार के अन्दर ले गया। मैं उसकी सलवार का नाड़ा खोलने लगा तो मिनी ने कोई विरोध नही किया। मैंने उसकी सलवार उतार कर फेंक दिया। मिनी ने गुलाबी पैन्टी पहनी हुई थी। फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये और सिर्फ जॉकी में मिनी से लिपट गया। फिर मैं उसकी पैन्टी के ऊपर से पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को दबाने लगा। मिनी ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी। फिर मैं उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चूत के बालों पर हाथ फिराने लगा। कुछ देर बाद मैंने उसकी पैन्टी भी उसके तन से जुदा कर दी।

मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया था और जॉकी को फाड़ कर बाहर आने को हो रहा था। मैंने जॉकी उतार कर फेंक दी। मैं मिनी की चिकनी टांगों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैं मिनी की चूत के बालों में हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराते-फिराते मैनें अपनी उँगलियॉ मिनी की चूत के अन्दर डाल दी।

फिर उंगलियों से मिनी की चूत के फाँको को खोलने और बन्द करने लगा। फिर मैं मिनी की चूत के जी-पॉन्यट को रगड़ने लगा। मिनी के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। मिनी ने मस्त होकर अपनी आंखें बंद कर ली। मेरा लण्ड मिनी की जांघों से रगड़ खा रहा था। मिनी ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी। मेरा लण्ड तन कर सख्त हो गया था। मिनी मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर कर उपर-नीचे और आगे-पीछे करने लगी। मैं मिनी की चूत मारने को बेताब हो रहा था।

मैंने मिनी को कहा- मिनी ! बहुत मन हो रहा है। कर लें क्या !

मिनी कुछ नही बोली। मैंने इसे मिनी की हाँ समझ लिया। मैं मिनी के उपर लेट गया। मिनी का नंगा जिस्म मेरे नीचे दबा हुआ था। मैं अपने लण्ड को मुठ्ठी में भर कर मिनी की चूत के जी-पॉन्यट के उपर-नीचे करके रगड़ने लगा। फिर मैं अपने लण्ड को पकड़ कर मिनी की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा।

मिनी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- हमें डर लगता है। प्लीज़ ! कंडोम के बिना कुछ नहीं करेंगे। प्लीज़ ! कंडोम हो तो लगा लीजिए।

मैने एक बार दीदी के साथ साफ-सफाई में हाथ बँटाते हुए बैड की दराज में कंडोम देखे थे। मैंने फौरन उठ कर बैड की दराज में से कंडोम निकाल कर अपने लण्ड पर लगा लिया। मिनी ध्यान से मुझे कंडोम लगाते देख रही थी। कंडोम लगा कर मैं फिर से मिनी के ऊपर लेट गया। मिनी का नंगा जिस्म मेरे नीचे दब गया।

फिर मिनी मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर अपनी चूत के ऊपर रगड़ने लगी और बोली- प्लीज़ ! ऐसे करते रहिए। अपने आप चला जाएगा।

मिनी की चूत से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था। शायद उसको यह करना अच्छा लग रहा था। वो मेरे लण्ड को अपनी चूत से रगड़े जा रही थी। मुझे बहुत ज्यादा उत्तेजना हो रही थी। इसी उत्तेजना में मैंने मिनी का हाथ पकड़ लिया। इससे पहले मैं कुछ समझ पाता मैं मिनी की चूत के ऊपर झड़ गया।

कंडोम लगे लण्ड को चूत से रगड़ने की वजह से कंडोम फट गया था और मेरा वीर्य मिनी की चूत के बालों में भर गया था। मैं मिनी के बगल में लेट गया। मिनी उठ कर बाथरुम चली गई। कुछ देर बाद वो बाथरुम से अपनी चूत साफ करके आकर मेरी बगल में लेट गई। कुछ देर हम चुपचाप लेटे रहे। थोड़ी देर बाद मिनी ने मेरी तरफ करवट ले कर अपनी टांगों को मेरी टांगों पर रख लिया। मैंने भी करवट ले कर मिनी को अपनी बाँहो में भर लिया।

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Posted : 19/02/2011 10:46 am