मेरा पहला प्यार-मेर...
 

मेरा पहला प्यार-मेरी पड़ोसन  

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 Anonymous
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यह खूबसूरत घटना जो में आज आप सब से शेर कर रहा हू यह मेरी और मेरी एक सुंदर पड़ोसन रंजिनी के बारे में है.मेरी आयु तब 19 की और वो 39 की थी जब हमने प्यार किया.रंजिनी के 2 बच्चे थे.उसकी बहूत ही चमकदार गोरी स्किन,नशेले आँके और बाल इतने लंबे के कमर तक आते थे.उसके छाती 36 के और गांद 38 के.जैसे के आम पड़ोसी होते हैं,हम भी वैसे ही थे.रंजिनी और उसके बच्चो का हमारे घर आना जाना होता रहा. मैं रंजिनी को मैं एक बार चॉड्ना चाहता था .अपने ख़यालो में कही बार चोद भी दिया .
मैं हमेशा से रंजिनी से सिर्फ़ एक बार प्यार करना चाहता थ. मूज़े ना ही कभी मोखा मिला ना ही मैं आपने तरफ़ से कोई कदम बड़ा पाया.सोचा की किसी को पता चला तो मेरा नाम करब होगा ही दोनो फॅमिलीस के रिश्ते भी करब होंगे.हमेशा से एक बड़े फॅमिली जैसे रहते और बात चिट करते थे.रंजिनी से बात किए बिना मेरा दिन नही कटता था.

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Posted : 10/12/2012 1:02 am
 Anonymous
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जब मैने कॉलेज जाय्न किया तब लड़को ज्यादा लड़कियो से दोस्ती की.यह आर्ट्स स्टूडेंट्स में कामन था.हमेशा कॉलेज में पदाई और आपने दोस्तो में बिज़ी रहने से रंजिनी से कई दिन मिल नही पाया बात तो दूर की बात थी.एक दिन जब मैं आपने दोस्तो से मिलने जाने के लिए
त्य्यर हो रहा था तब घर की कॉल बेल बाजी.मेने जब डोर खोला तो रंजिनी बाहर कड़ी थी.
मैं – (एक मुस्कुराहट के साथ) हाई
रंजिनी – (बड़ी अजीब तरीके से) हाई
मूज़े ऐसा लगा जैसे उसे मुजसे बात करने में दिलचस्पी नही है.
मैं -आज आपका मूड ऑफ का क्यूँ है.
रंजिनी - तूमे इस से क्या?कॉलेज जाने के बाद तुम मूज़े भूल ही गाहे हो.
रंजिनी – आज कल तो ना ही ना बाइ.
मैं – ऐसा नही है,सिर्फ़ दोस्तो और कॉलेज में बिज़ी रहता हू.
मैं – में इस बारे में आपसे बाद में बात करता हू,अब ज़रा जल्दी में हू,कहीं बाहर जा रहा हू.

अगले दिन दोपयर को टाइम निकल के मैं रंजिनी के घर गया.रंजिनी ने एक बड़ी मुस्कान के साथ दरवाजा खोला.मूज़े देक कर वो बड़ी कुश लग रही थी.वह काले सलवाल में बिजली गिरा रही थी.हम किचन में खड़े रह करके बातें करने लगे.रंजिनी घर में अक्सर सलवार कमीज़ या गाउन में रहती थी.खाने की तय्यरी करके उसने दोनो के लिए लिम्बू शरबत बनाया .हमने लिविंग रूम में बैठ कर शरबत की चुस्की लेके बातें फिर से शुरू की.
रंजिनी – अच्छा कल शाम को जल्दी जल्दी में कहा जा रहे थे?
मैं – कल मैं आपने एक दोस्त के साथ …………पार्क गये थे.(यह पार्क हमारे शायर की एक माशूर कपल पार्क है,इस पार्क में बहूत बड़े बड़े झाड़िया हैं, वहा कपल्स चुप चुपके प्यार करते पाए जाते)यह सुनके रंजिनी की एक प्यारी स्माइल दी और बोली
रंजिनी – (शरारती अंदाज में) तो तुम कल तुमरि गर्ल फ्रेंड के साथ थे?
मेरे बोलने के पहले फिर से
रंजिनी – मूज़े लगता है सर्दी की मौसोमे में बहूत मस्ती की तुम दोनो ने,क्यूँ?क्यूँ सही कह रही हू ना?
मैं – बिल्कुल ग़लत.वैसे मेरी कोई गर्ल फ्रेंड ही नही बनी है मस्ती तो बाद की बात है.
रंजिनी को यकीन नही हुवा के मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नही है.
मैं – (मुस्कुराते हुवे) मैं सच कह रहा हू,क्यूँ ना तुम ही मेरी गर्ल फ्रेंड बनो.
रंजिनी – ( एक मादक मुस्कान के साथ) मैं इस बारे में सोचूंगी .
(मूज़े मेरे नसीब पर यकीन नही हुवा और उसके मेरी गर्ल फ्रेंड बनने की ख्वाब देकने लग गया)

मैं – एक बार तुम मेरी गर्ल फ्रेंड बनके देखो में तूमे कैसे खुश रखता हू.
(एन सब बतो से मेरा शेर कड़क बनके खड़ा हो गया था लेकिन जीन्स पहने से उसे शायद देखा नही )
कुछ देर आम बात करने के बाद में आपने घर गया.उस रात रंजिनी के बारे में सोच कर दो बार मास्टरबेट किया.

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Posted : 10/12/2012 1:02 am
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कुछ दिन बाद 14 फ़रवरी के वॅलिंटाइन गिफ्ट के तौर पर एक लाल गुलाब और एक छोटा हार्ट लिए जिस पर मेरा और रंजिनी का नाम बुना गया था. फ़रवरी 13 को जब मैं उससे मिला तो रंजिनी ने मूज़े छेड़ने की लिया कहा की कल तो तुम आपनी कॉलेज की गर्ल्स में बिज़ी रहोगे,तो मैने भी उसे छेड़ने की लिए हा कह दिया . मेरी इस बात को सुन कर रंजिनी बुरी तरह से झांप गहि.वह बहुत उदास लग रही थी जब मैं आपने घर के लिए निकला.
मैने उसे गिफ्ट के बारे कुछ नही कहा और उसे 14त फेब को सर्प्राइज़ देने मैं रंजिनी के घर दोपहर को चला गया जब उसके बच्चे स्कूल में और हज़्बेंड ऑफीस में आम तोर पर रहते थे.जब मेरे घर में सब सो गाहे ,तब मैने उसके घर की बेल बजाई.रंजिनी ने जब डोर खोला और मूज़े देखा तो उसे विश्वास ही नही हुवा. मैं तो उसे देखता ही रह गया.उसने सफेद सलवार कमीज़ पहनी हुवी थी जिस में बहूत बारीक एमब्राय्डरी बने थे.वो मूज़े किसी पारी से कम नही लगी.
जैसे हमेशा से है घर में वो दुपट्टा नही लेती थी,वैसे ही आज भी उसने नही लिया था.मैने अंदर आके डोर बंद करके मैने बात छेड़ी.
मैं – आप आँख बंद करके हाथ आगे बदाओ.
रंजिनी – (स्माइल के साथ) क्यूँ?क्या करने वाले हो मेरी आँख बंद करके?
मैं – पहले आप आँख बंद करो मुज पर विश्वास करके.
मैं – आपको मैं कुछ नुकसान नही पहुचौँगा यह मेरा वाडा है आपसे.
रंजिनी ने आँख बंद करने के बाद आपना हाथ आगे बदाया .मैने लाल हार्ट जिस में मेरा और उसका नाम बुना था उसे आपने जेब से निकलके रंजिनी के हाथ में रख दिया और गुलाब को भी उसे दिया.उसने आँख कोल कर गिफ्ट को देखा और एक बड़ी मुस्कान के साथ मेरा हाथ पकड़ के मूज़े आपने बेडरूम लेजके बेड पे बिताया और दो कॉफी बनके तोड़े देर में ले आई और बोली-
रंजिनी – शुक्रिया इतना स्पेशल फील करने के लिए.
मैं – आपनी गर्ल फ्रेंड को गिफ्ट देने के लिए शुक्रिया क्यू?
रंजिनी – मैने अभी तक तुमरि गर्ल फ्रेंड बनने के लिए हा नही कहा.
मैं – वैसे तो ना भी नही काया है.
रंजिनी – हा,उस दिन हा नही कहा पर आच हा करती हो पर यह बात हम दोनो के बीच में रहनी चाहिए.
मैं – टिक है डियर,अब मेरा गिफ्ट कब डोगी मूज़े?
रंजिनी – अब मेरे पास तूमे देने के लिए कुछ नही है,सॉरी फ्रेंड.
मैं – इट इस ओक डियर,पर क्या मैं तूमे डार्लिंग कह सकता हू जब हम अकेले हो तो?
रंजिनी – टिक है पर द्यान रकना की सिर्फ़ अकेले मैं,ओके?
मैं - हा डार्लिंग ओके .
कुछ दिन ऐसे ही बीते और इस बीच हम ज़्यादा नस्दीक़ हो गये.कुछ बार तो इनडाइरेक्ट यानी डबल मीनिंग में बात भी होती रही.यह सब मेरे रंजिनी को छोड़ने करने का कवाब बहूत जल्दी पूरा होता दिखा.

पर इस बीच कुछ ऐसा हुवा जिससे मेरी जिंदगी बदल दी.

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Posted : 10/12/2012 1:03 am
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एक दिन कॉलेज फेस्ट में मधु नाम की लड़की से मेरा पहचान हुव. मधु से अकचे दोस्ती बनी. मधु देल्ही से आही हुवी थी. हॉस्टिल में रह कर पढाही कर रही थी. सुंदर गोल चेहरा,हमेशा एक मुस्कान के साथ बात करती थी. खूबसूरत नशीली बुरे आँखो से देखती तो कोई भी मार मिठने को तहार हो जाए.32 या 34 के रासपुरी आम के जैसी मोम्मे थे मधु के. आम तौर पर पंजाबी सूट ही पहनती थि. होंठ के नीचे एक सुंदर सा तिल उसको ऐश्वर्या राई जैसा लुक देता था. बहूत सर लड़के उस पर मरते थे. कमर 28 के,गांद 34 के लगते थे. हमेश हम कॉलेज में ही मिलते थे.

एक दिन मधु ने मूज़े एक रेस्टोरेंट में मिलने बुलय. मैं इस बात से अंजान के यह मुलाकात मेरी जिंदगी बदल के रख देगी मैं मधु से मिलने उस रेस्टोरेंट को निर्दरिथ समय पर पौंचा. मधु ने आज पीला पंजाबी सूट पहना हुवी थी. मूज़े उसने फॅमिली रूम में एक कॉर्नर सीट पर बुलाया. जब मैं वाहा पौंचा तो मूज़े देखते ही मधु ने मूज़े ज़ोर से हग करा. मैं उसके इस कदम को एक्सपेक्ट नही किया था. मूज़े एक जटका सा लगा,मूज़े किसी लड़की ने पहले बार आपने आगोश में लिया थ. मैं किसी जादूई दुनिया में खो गया. मूज़े मेरी छाती में कुछ मुलायम मुलायम चीस लगि. वह चीस मधु के मोम्मे थे. मेरा पप्पू कड़क होने लग. जीन्स में आधे कड़क पप्पू का मधु को कुछ मालूम पड़ा होगा . मूज़े कुछ होश ही नही रह. हम ऐसे ही 5-10 मिनिट तक रहे. किसी की कदमो के आहाट ने मूज़े जगाया. मैने झट से मधु को आपने से आलग किया और सीट में बैट कर मधु के आँखो को देखा तो उसके आँखो में आसू थे . मैने कहा.
मैं - सॉरी मधु अगर बुरा लगा तो.
मधु - सॉरी ! किस लिए ?
मैने उसकी आँखो के तरफ़ इशारा किया तो
मधु - सॉरी तो मूज़े कहना चाहिए,मेरी प्राब्लम को तुम पर लद दी.
मैं - वैसे ऐसा क्या हुवा जो तुम रो रही थी .
मधु - मुझे अनिल ने दोखा दिया ,अनिल मुझसे नहीं अनीता को प्यार करता है .अनीता को जलने के लिए मेरे करीब गुम रहा था जब मैंने इ लव यू कहा तोह बोलता है तुमे मैंने तो बस अनीता को जलने के लिए इ लव यू कहा था .(अनिल और अनीता दोनों मेरे क्लास्स्मतेस है ,दोनों का प्यार करना मुझे मालूम था ,पर मधु का अनिल को प्यार करने की बात मुझे अभी उसीसे अभी मुझे मालूम पड़ी )मैं तोह दांग रह गया जब उसने अनिल से अपना महोबत की बारे में बताया )
मधु लगातार रोई जा री थी. अब मैं उसे कैसे दिलासा देता यह मैने पहले कभी नही किया था फिर भी तोड़ा हिम्मत करके मैने कहा.
मैं - मधु अनिल और अनिता के बारे में मूज़े पता था पर तुम अनिल कोई चाहती हो यह मूज़े क्यू नही बताया और अब मूज़े यह सब क्यूँ कह रही हो?
मधु - मैं तुमरे और अनिल के बीच अनिल को तोड़ा ज़्यादा चाहती थी पर अब नही.
मैं - अब मुजसे क्या चाहती हो?
मधु - अब मैं सिर्फ़ तुमसे प्यार करती हू . इस बात को तूमे बताने के लिए ही तूमे कॉलेज से बाहर बुलाया ताकि कोई डिस्टर्ब ना कर सके.
मधु - ई लव योउ सन्जय.तुम मूज़े प्यार करो यही मैं तुमसे चाहती हू.
मेरे तो मु बंद हो गहा. सारे लड़के जिसके एक नज़र के लिए तरसते हैं, वह कूद मुशसे प्यार करती है.
यह जानके मैं एक तरफ खुश था पर रंजिनी का ख़याल करके मैं कन्फ्यूज़ हो गया.
मधु से कुछ कहे बिना मैं आपने घर चला गया. मधु मूज़े तरसती आँखो से देखती रह गाही.
आगे का हाल बहाल कल.

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Posted : 10/12/2012 1:03 am
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वाहा से निकल कर मैं सीधा अपने घर पहुँचा. आपने रूम में अपने आप को बंद करके मैं मधु और रंजिनी के बारे में सोचने लग. बहूत देर सोचने के बाद भी कुछ तय नही कर पाया. ऐसे ही रात भी होगी मैं खाना ख़ाके सो गय . आगले सुबह जब उटा तो कुछ फ्रेश फील कर रहा था. त्यहार हो कर कॉलेज के लिए जैसे ही निकला रंजिनी रास्ते में मिली और हमने कुछ नॉर्मल बाते की . कॉलेज पौंचा तो मधु गाते पर ही मेरा इंतेज़ार कर रही थी.

मैने मधु को नॉर्मल तरीके से हाई काया तो मधु मूज़े देख कर बहुत खुश लग रही थी. मधु मूज़े आशा की नज़रो से देख कर एक मुस्कान के साथ कहा-
मधु - तुम कल क्यूँ ऐसे अजीब तरीके से उट के चले गये?
मैं - पर वो.......
मधु ने मूज़े बीच में टोकते हुवे बोल पड़ी-
मधु - अच्छा वो सब छोड़ो पहले यह बताओ मेरे प्रपोज़ल का क्या हुवा?
मैं - मैं तुमसे अकेले में शाम को बात करता हू. अच्छा अब में क्लास अटेंड करता हू,वैसे भी अटेंडेन्स बहूत कम है इस महीने की . बाइ. बाड़मे पूरे डीटेल में बात करेंगे ठीक है?
मधु - ओक बाइ,शाम को पक्का ना?
मैं - हा मधु बिल्कुल पक्का.
मधु को अब यह आशा थी की मैं उससे नाराज़ नही हू और अपनी बात आगे बढ़ सकती है. मधु किल्किलते हुवे आपनी क्लास रूम चली गयी और मैं अपने. मैं अब मधु से शाम के मुलाकात के बारे मैं सोचता रह. सोचा के कैसे बात शुरू करू? कैसे उससे अपनी बात रखू? क्या उसे रंजिनी के बारे में बता दू? मधु क्या का क्या रिक्षन होगा? सारा दिन पदाई पर द्या?न ना दे कर मैं मधु के बारे में सोचता रहा और आपने आप पर बहूत नाज़ फील करता रह.बहूत सोचने बाद यह तय किया की मधु को रंजिनी के बारे में नही बताना है और रंजिनी से सिर्फ़ एक बार ही सही शारीरिक सम्बंध बनना है. मधु को आज प्यार का एहलान करना है.
जब श्याम हुवी तो मधु को मैने पास वेल पार्क मैं बुलाया ठीक 5 बजे.
5 बजे हम दोनो पार्क में मिले. जैसे ही मधु ने मूज़े देखा उसने एक शरारती मुस्कान के साथ मेरा स्वागत किय.
मधु ने आज लाइट नीले रंग के पंजाबी सूट पहने हुवी किसी बॉलीवुड आक्ट्रेस से कम नही देख रही थी. आँखो में काजल,पॅव में चाँदी की पायल, लंबी बिंदी,सोने का जम्की,हाथो में 5-6 कंगन पहने जैसे ही मेरे पास बढ़ी मैं उसे देखता रह गया.
मधु की सुरीली आवाज़ ने मूज़े नींद से जगाया.
मधु - ऐसे क्या देख रहे हो? कभी लढ़की नही देखी क्या?
मैं - लड़की तो बहूत देखी है पर तुम सी अप्सरा नही देखी आज तक.
मेरी बात पर मधु शर्म से लाल हो गाही. मधु ने कहा-
मधु - मैं कहाँ से तूमे अप्सरा देखती हू?
मैं - तुम अप्सरा नही तो क्या, जिसके पीछे सारा कॉलेज के लड़के पढ़े है, जिसके एक एक नज़र आपने को देखने के लिए कही लड़के किसी भी हद पर कर सकते है, जिससे एक बार बात करने को अनेक लड़के तरसते है, वो आज मेरे सामने है, मूज़े मिलने और मुजसे बात करने अकेले में आई है. मैं आपने आप को अब किसी सूपरहीरो से कब नही समजता.
मधु - (शरमाते हुवे) बस बस अब मेरी तारीफ करना बाँध करो और कल के मेरे प्रपोसल का आन्सर दो.
मैं - हा हा ठीक है.'
मैं - मैने कल रात बहूत सोचा इस बारे में और..........
मधु - (बीच में ही) और क्या, जल्दी बोलो मुजसे अब रहा नही जाता. कल से दिमाग़ का ढही बना हुवा है. प्लीज़ संजय जल्दी कहो ना.
मैं - मैं कही दीनो से तुमसे एक अलग लगाव रख रहा था इसे मैं दोस्ती ही समाज रहा था. कल रत बहूत बार सोचने के बात मूज़े लगा की मैं भी अब तुमसे प्यार करने लगा हू.
मैं - ई लव यू मधु.(यह बात मैं मधु की आँखो में देख कर कह रहा था)
यह बात सुनके मधु को कुछ द्यांन नही रहा के हम पब्लिक प्लेस में हैं, उसने मूज़े बे-इंतिहे चूमना शुरू कर दिय. मधु पहले गाल पर चूमती रही फिर होंटो को बहूत इंटेन्सिटी के साथ चूम कर मेरा होंटो को चूसने में लग गयी. मैं शॉक्ड था मधु के इस बिहेवियर पर. मेरा पप्पू कड़क होकर खड़ा हो रहा थ. पांत में तंबू बना हुवा था.

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Posted : 10/12/2012 1:03 am
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अब मैने कुछ कदमो की आहत सुनी तो परिस्तिति का एहसास मूज़े हुवा. फॉरन मैं मधु से अगाल हुवा तो पाया एक जोड़ा हमारे पास कड़े हुवे हमे ही निहार रहा है. मधु ने तो शर्म से आपनी आँखे जुका लिया था. मैने जल्दी से मधु का हाथ पकड़ कर हम दोनो पार्क से बाहर आए. घड़ी देखते ही मधु ने कहा -
मधु - अरे 5.30 बजने वाला ही है. चलो मैं चलती हू. कल ....... रेस्टोरेंट में ठीक 4.30 बजे मिलते हैं.
मैं - अरे क्या हुवा 5.30 बजे तो?कहा जाने की जल्दी है?
मैं - शाम को क्यूँ सुबह कॉलेज नही आ रहे हो क्या?
मधु - नही कल हम घरवाले नानी मा के घर फंक्षन के लिए जा रहे है.
मैं - फिर श्याम को 4.30 बजे कैसे मिलॉगी?
मधु - अरे बुद्धू दोपहर को ही मैं कुछ बहाना बनके आ जाऊंगी.
मधु - अभी तुमसे वादा जो किया है.
मधु - संजय मैं पिछले 3 महीने से तुशन जा रही हू. आज लेट हो जाउंगी यार.
मधु - कुछ करो डियर मेरा वाहा जाना बहूत ज़रूरी है.
मैं - कोई प्रॉब्लम नहीं मैं तुमे तुइशन तक छोड़ देता हु अपनी बाइक पर .
मैने मधु को आपने बाइक पर उसके तुशन क्लास तक छोड़ आया. मधु ने बाइक पर मुजसे चिपके बैठी हुवी थी. मधु के मोम्मे मूज़े मेरी पीट पर चुब रहे थे. मैं बार बार ब्रेक मार कर मधु मोम्मो की मूलमियत को महसूज करता रहा.
मधु भी इस बाइक राइड का पूरा मज़ा ले रहै थी. मधु का एक हाथ मेरे पप्पू के पास पॉंच गया तो मैने सोचा की काश यह पल हमेशा के लिए रुक जाए. पर जैसे की होनी को कुछ और ही मंजूर था, कुछ ही पॅलो में मधु का तुशन सेंटर आ गया. मूज़े बहूत बुरा लगा मधु से बिछड़ कर. मधु बाइक से उतार कर एक मनमोहन मुस्कान के साथ आपने तुशन सेंटर की और चली गाही. मैं बस मधु को जाते हुवे देखता रहा. मधु ने मोड़ कर देखा तो मूज़े आपने पर देखता पाया. मधु 2 मिनिट बात दौड़ कर वापस मेरे पास लौट आई मूज़े हग करके थॅंक्स कहा और मेरे हाथो में एक पर्ची थमा कर चली गयी. मैं आशर्या चकित हो कर उसे देखता रहा.
मेरे हाथो में जो पर्ची थी उसे मैने आपनी शर्ट के जेब में डाल कर बयके को आपने घर की ओर रुख़ किया.
कुछ ही देर में मैं आपने घर पौंचा. हाथ मु धोहकर मैने खाना ख़ाकर आपने रूम गया.
अब मूज़े मधु की दी हुवी पर्ची का याद आया तो भाग कर शर्ट से पर्ची बाहर निकली.
जैसे ही मैने पर्ची पूरी तारह पद ली तो मेरे खुशी का टिकाना ना रहा.

मधु ने ऐसा क्या लिखा था उस पर्ची में जो संजय इतना खुश था?
जानने के लिए कल फिर मिलएगा.
तब तक के शुभ रात्रि आंड स्वीट ड्रीम्स.

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Posted : 10/12/2012 1:03 am
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जब मैने मधु की दी हुवी पर्ची पढ़ी,मेरे खुशी का टिकाना ना रहा I पर्ची में मधु ने मूज़े कल आपने घर पर अकेले 4.30 बजे आने को कहा था I
यह भी लिखा था की "आज जो अधूरा रह गया,उसे पूरा करने की मेरी ख्वाइश है"
मैने फिर से पार्की को ध्यान से पढ़ा और यह निष्कश पर पौंचा की मधु मुजसे सेक्स करना चाहती है I
पर अगले ही पल रंजिनी की ख़याल ने मूज़े कन्फ्यूज़ कर दिया के मैं मधु से सेक्स करू या नहीं?
बहूत सोच के मैने यह निर्णय लिए की यदि मधु मूज़े सेक्स के लिए उतावला करेगी तो मैं सेक्स करूँगा, वरना सिर्फ़ चुम्मा चठी से ही खुश रहुन्ग I रंजिनी के लिए अभी और समय लगेगा I
ऐसे ही रात बीत गयी I जब सुबह मैं उठा तो बहूत खुश नज़र आ रहा था I
जॉगिंग करते हुवे मैं बहूत उत्साहित हो रहा था I प्रकृति का आनंद लेने लगा I
पंचियों की चयल पयल, मदिर की पूजा के मंत्रोने मूज़े एक और ही लोक में ले जा रहे थे I
मेरे चेहरे पर मुस्कान छह गयि. मैं गाना गुन-गुनने लगा I श्याम का बेसब्री से इंतेज़ार करने लगा I
श्याम का सोच कर अपने बारे में कही शंखाए आने लगी I
सोचा- यदि मधु को मेरा लंड छोटा लगे तो ?
यदि मधु को मेरा 7.5'' का कला लंड पसंद ना आए तो?
यदि मधु को मेरा किस करना पसंद ना आए तो?(क्यूँ की मैं पहली बार मधु को ही किस किया था)
यदि मधु ने पहले किसी और के साथ सेक्स किया हुवा तो?
यदि मधु कोचोद्ते समय ज़्यादा दर्द हुवा तो ?
यदि कोई हमे रंगे हाथो (नंगे बदन )पकड़ लिया तो?

ऐसे ही सवालो में उलजा में घर से कॉलेज के लिए निकला I
पूरा दिन मधु के बारे में सोचता रहा I
आज समय भी जल्दी से नही बीत रहा था I
मैं श्याम के इंतेज़ार में था और अब तक दोपहर भी नही हुवा था I
जैसे ही अगला पेरीओड ख़तम हु मैं घर के लिए निकल गया I अब सहन करना मेरी बस की बात नहीं थी I
जैसे तैसे दिन बिता और श्याम हवी मैं बहूत दुविधा के साथ मधु के घर पौंचा I
मैंने जैसे ही मधु के घर के गेट के सामने पौंचा मधु ने दरवाजा खोला I
मधु मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी I
मधु ने बड़े गले का एक हरा सुइट पहना हुवा था I कानो में बलि, आँखों में काजल, कदमो में जन्झार, लाइट मके उप के साथ मुझे मरने के इरादे से कड़ी हवी थी I
मैं मधु के सुब्सुरती में खोया हुवा वहा सिर्फ खड़े उसे निहारता रहा I
मधु ने जब देखा के मैं फ्रीज़ हो गया हु तो मुझे मेरा हाथ पकड़ कर अंदर ले गयी I

मधु के घर में क्या क्या हुवा जानने के लिए कल जरूर आएगाI
तब तक के लिए शुभ रात्री एंड स्वीट ड्रीम्स I

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Posted : 10/12/2012 1:04 am
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मैं मधु केसुब्सुरती मेंखोयाहुवा वहा सिर्फ खड़े उसे निहारता रहा I
मधु ने जब देखा के मैं फ्रीज़ हो गया हु तो मुझे मेरा हाथ पकड़ कर अंदर ले गयी I
मधु ने मूज़े आपने घर के हाल् में एक सोफे पर बिठाया I मैं मधु के मधुर आवाज़ से इस दुनिया में लौट आया I मधु मूज़े देख कर मुस्कुरा रही थी I मैने मधु से माफी माँगी तो मधु ने कहा-
मधु - ऐसा क्या देख रहे थे मू पढ़ कर ?
मैं - आज अगर तुम और ऐश्वर्या राई दोनो अगाल बगल में कढ़े होते तो वो भी तुमारे सामने पानी बरती I
मधु - क्या मैं इतनी सुंदर लगती तू तुमे ?
मैं - और नही तो क्या? तुम क्या समजती हो की युह ही सारे कॉलेज के लड़के तुमारे ईर्द गिर्द मदराते हैं?
मधु - क्यूँ मूज़े चने के झढ़ पर चढ़ा रहे हो? मूज़े पता है की मैं सुंदर हू पर इतना नही जितना तुम कह रहे हो I
मैं - अच्छा अब कहो क्यूँ बुलाया मूज़े यहा पर जब तुम अकेली हो?
मधु - तूमे नही पता ? एक लड़की एक लड़के को अकेली में क्यूँ बुलाती है?
मैं - पता है पर तुमारे मु से सुन ना चाहता हू I कहो ना मधुI
मधु - तूमे मैने अकेले में इस लिए बुलाया की पिछली बार की तरह इस बार कोई बात बाकी ना रहे, सम्जे ?
मैं - पिछली बार कोई बात बाकी रह गाही थी?(शररती आंदाज में)
मधु - हा, रह गाही थी I तुम सम्जे नही संजय? में फिर से याद दिला दू?
मैं - (ना समाज होने की आक्टिंग करते हुवे) कोन सी बात?
मधु ने आचनक मूज़े आपने और किछ कर मेरे होंठो पर आपने होंठो की रशीद झाड़ दी I कितने सॉफ्ट होंठ थे मधु के मैं मधु में खोता जा रा था, अचानक डोर बेल ने मेरी होश उड़ा दिया I
मधु ने मूज़े बातरूम में छुपने को कहा I मैने वैसा ही किया I मधु ने आपने को जल्दी से ठीक किया और जा कर दरवाजा खोला I तोड़ी देर बाद मधु ने मूज़े बातरूम से बाहर आने को कहा तो मैने कहा-
मैं - कौन था ? चला गया क्या?
मधु - करियर वाला आया था, दीदी के लिए कोई पार्सल देके चला गया I
मैं - थॅंक गोद I बाल बाल बचे I
मैं - अच्छा मैं अब चलता हू, नही तो तुमारे घर वाले आ जाएँगे I
मधु - आज कोई नहीं आएगा, घरवाले नानी के घर में आज रात बिताने वाले हैं I मूज़े भी कहा की मैं भी वहीं राहु I मैने कुछ बहाना बनके इनकार कर दिया I आज नही जाने धूंगी तूमे I
ई लव यू संजय कह कर मधु ने फिर से मूज़े चूमना शुरू कर दिया I
मैं मधु की इस जवाब को सुनकर आचांबित रह गया I
मैने भी मधु को जोरे से किस करने में लग गया I
हम दोनो इस दुनिया से आंजन बने एक दूसरे को जोरो शॉरो से चूमते चाटते जा रह थे I
मैने मधु को 5-6मिनिट तक किस करता रहा I मैने मधु से जरा अलग होकर मधु के कानो में आपने साँसे छोड़ने लगा I मधु की लेफ्ट कानो के निचले हिस्से को चूमता चट्टा रहा, फिर धीरे धीरे नीचे गया और मधु के गर्दन पर चुम्मो की बोछर कर दी I
मधु मेरे ऐसा करने के बे-हाल हो गयी I
मूज़े मधु की सिसकिया सुनाही देने लगी I
जब मैं और नीचे आने लगा तो मधु ने आपने दोनो हाथो को उप्पर उटा के मूज़े आपनी ड्रेस उतरनेका ईशारा किया I
मैने मधु की सूट को उप्पर उटा के उसके शरीर से अलग किया तो मधु की 34की मोम्मे मेरे सामने आ गयी I
मैने मधु के ब्रा से बारह आते मोम्मो को देख कर उन पर टूट पड़ा I ज़ोर से दबने लगा जब मधु ने मूज़े धीर से दबने को कहा तब मूज़े आपने ग़लती का एहसास हुवा I
मैने मधु के आँखो में देख कर ब्रा खोलने का पर्मिशन माँगा तो मधु ने भी गर्दन हिला के मूज़े सहमति दी I
मैने धीर से मधु के उप्पर होके उसके ब्रा के हुक्स निकले (नौ-सिकिया होने से मूज़े कुछ परेशानी ज़रूर हुवी, कुछ समय भी लगा)I
मैने धीरे धीरे मधु के मोम्मो को चूमा I गोरे रंगे के मोम्मो पर हल्का पिंक निपल राज कर रहा था मूज़े आपने और कीछ रहा था I34 के होने पर भी मधु के मोममे बड़े सख़्त थे I मैने हल्के से पूरा मॉमा चूमा फिर मु में लेके चूस्ता रहा I ऐसे ही दूसरे मोम्मे की भी बरी आई ई ऐसे ही 15 मिनिट बीत गये I
मधु मेरे किए से बे-हाल हो कर अह्ह्ह अह्ह्ह कर रही थी I
फिर मैं नीचे गया मधु के नाभि को चूमा फिर चाटते हुवे उस में अपनी जिब गुसा दी I मधु इसे बरदाश ना कर सके एक बार अकड़ कर झाड़ गयी I
आज मेरा पॉर्न वीडियोस देखना सार्तक बन गया I मैं इन वीडियोस से बहूत कुछ सीखा और आज उसे इस्तेमाल में ला दिया I
आगे जैसे में बड़ा सलवार से जा तक रहा I मधु ने मेरी दिक्कत समाज कर सलवार का नडा खोला I में इससे मदहोश हो गया I मधु ने मेरे कंधे पर हाथ रख कर मूज़े फिर से नींद से जगाया Iमधु के जंघे सुडोल और सुंदर थी I सफदी की चमकरसे राज कर रहे थे I मैने मधु के सलवार को पूरा निकाल के पास में रखा और पाव शुर कर जाँघो तक चूमता चट्टा हुवा पौंचा I
मधु की सिसकिया पूरे कमरे में गूँज रही थी I मधु का हाल बहूत बुरा था I एक बार झाड़ के फिर से गरम गो गाही थी ई मधु की पॅंटी पूरी गीली होकर लाइट पिंक से अब कुछ डार्क पिंक लग रही थी I जैसे ही मैने अंदुरिनी झंगो से हो कर पॅंटी के उपर से ही चूत पर किस करा मधु का सिसकिया आसमान को छूने लगी I मैने जाट से मधु की पॅंटी किंचीतो कुल्लो पर आ कर अटक गयी I
मधु ने शायद आज ही आपने निचले बाल बनेए थे I मधु ने तोड़ा आपने कुल्लो को उठया पॅंटी को मैने पूरा उतार कर नीचे पेंक दिया I अब जैसे ही मैने मधु के बिना बालो के चूत देखी मधु शर्मा के मारे लाल हो गयी और अपने दोनो हाथो से चूत को ढकने लगी तो मैने उसके हाथो को जटका और चूत के निहारता रहा I

आगे क्या हुवा ? क्या संजय मधु को चोद पाया ? जानने के लिए कल ज़रूर आना I
तब तक के लिए शुभ रात्रि और स्वीट ड्रीम्स I

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Posted : 10/12/2012 1:04 am
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अब संजय की आँखो के सामने मधु की चूत थी जो की उसकी टाँगो के बीच क्लियर दिखाई दे रही थीI संजय की उम्मिदो से भी ज़्यादा सुंदर थी उसकी चूत I

संजय ने टाइम वेस्ट ना करते हुए अपने लिप्स उसकी टाँगो के बीच मे से होते हुए उसकी चूत पर पहुँचा दिएI मधु ने अपनी टांगे और भी फैला की जिससे की संजय को आसानी होI
आआहह....... म्*म्म्ममममममममममम...........ओह..................." मधु की मोनिंग फिर से स्टार्ट हो चुकी थीI

संजयने अपनी जीभ को ठीक चूत के पांकुदियो पर ले जाकर घूमने लगता हैI. मधु का तो जैसे बुरा ही हाल था और उसकी चूत नधी जैसे पानी छोद रही थी I
म्*म्म्मममममह......... सन्ज्जाय.य य य .......... ई........ लव.......... यू..........." मधु ने अपनी गान्द उछाल कर और संजय के जीभ के करीब ला रही जिससे की संजय और आसानी से उसकी चूत को चाट सकेI
संजय ने भी जैसे उसे जीभ से ही चॉड्ना शुरू कर दिया था I अपनी जीभ को वो गोल घूमकर बार बार उसकी उसकी चूत के तोड़ा सा अंदर ले जाकर बाहर ला रहा था जैसे कई पॉर्न मूवीस में उसने देखा था I

" आई माआआअ...... म्*म्म्मममममममम...... लव........... मी प्लीज़............. प्लीज़ संजय और......... प्लीज़..... मधु ना जाने क्या क्या बड़बड़ा रही थी I

संजय ने अपनी एक फिंगर को भी मधु की चूत मे घुसा दिया- " आआहह...... आराम से करो प्लीज़........." संजय की उंगली और भी ज़्यादा कमाल कर रही थी I अब संजय को मधु के वर्जिन होने का फुल कन्फर्मेशन मिल गया था I

मैं मधु से बोला की चलो अब मेरे कपड़े तुम उत्तरो I वो घुटनो के बाल खड़ी हुई और शरमाते हुए अपने हाथ को मेरे पैंट की हुक को खोलने लगी I मेरा लंड तो मेरे पैंट को पहले ही टेंट बना चुका था I उसने हुक खोलने के बाद जैसे ही जीप को नीचे किया मेरा लंड एक दम उच्छल कर बाहर आ गया I मैने आज अंडरवेर नही पहना हुआ था यह भी क़िस्स्मत की बात थी, जैसे पिंजरे से किसी शेर ने च्चालाँग मारी हो, और उच्छालकर एक दम उसके मुँह के सामने आ गया I मधु ऐक दम डर कर पीछे की तरफ हटी तो मैं बोला की डर गयी मेरे शेर से, तो वो बोली की बाप रे इतना मोटा ओर इतना लंबा !!! डरने की तो बात है मैं बोला की डरने की कोई ज़रूरत नही है यह तो दोस्तों का दोस्त है यह कहते हुए मैने अपना लंड मधु के हाथ में पकड़ा दिया I मधु ने लंड हाथ में पकड़ लिया ओर बोली यह तो बहुत सख़्त है ओर बहुत गरम भी हो रहा है, यह कहते हुए वो अपने हाथ को मेरे लंड पर उप्पर से नीचे फेरने लगी I

अब मधु बेड पर नंगी लेट गाही I लेट हुई बहुत खूबशुरआत लग रही थी I उसके बॉल तकिये पर फैले हुए थे I उसकी टाँगें फैली हुई थी I उसकी चूत चूसने से और झड़ने से बहुत अच्छी चमकदार लग रही थी I कुछ लाल भी होगआई थी I क्लितोरिस चूसने के कारण कुछ बाहर की तरफ निकल आया था I ओर उसकी चूत की पंखुड़ियाँ भी कुछ सूज गयी थी I

मधु मुजसे कहने लगी -
मधु - संजय अब देर ना करो, अब मुजसे और रहा नही जाता I प्लीज़ अब चोद दो मूज़े और कच्ची काली से फूल बनो दो I
मधु के कहे अनुसार करने की ठान कर मैं मधु की टॅंगो के बीच बैठ गया I अपनी लंड मधु के चूत के करीब लाके चूत पर रगड़ने लगा I मधु को यह सहन ना हुवा उसने अपना हाथ आगे बड़ा के मेरे लंड को पकड़ कर अपने चूत के छेड़ पर रख कर गॅंड उपर करने लगी जैसे मेरी लंड लेने के लिए बहूत बे-तब हो I
मैने कुलो को तोड़ा प्रेस किया तो मेरा लंड तोड़ा अंदर गया I मधु दर्द से चीक पड़ी I इस से मेरा लंड 2 इंच अंदर गुस गया था I मूज़े भी कुछ दर्द हो रहा था पर मधु के दर्द के सामने यह कुछ भी नहीं था I मैं तोड़ी देर रुका और मधु के होंठो को चूमने में जुट गया जब मधु कुछ ठीक लगी तो लंड को तोड़ा बाहर निकल के एक जोरदार जटाके के साथ मेरे लॅंड को आधा अंदर कर दिया I मधु की चिक मेरे मु में ही गुट कर रह गयी I मधु अब कुवारि काली ना रही I मधु की चूत से कुछ रिस्ता हुवा मूज़े एहसास हुवा, मधु की चूत ने मेरे लंड को बहूत जोरो से जाकड़ रखा था जैसे कहीं निकल ना गये I मैं तोड़े देर फिर से रुका और गालो को चूमता, गले को चूमता, कभी मधु की मोम्मो को चूमता चट्टा रह गया I
मधु को इससे कुछ राहत मिलती नज़र आई I मधु अब गॅंड को उठाने लगी तो मैने लंड को तोड़ा बाहर निकल के एक और जोरदार जटका दिया I मेरा पूरा 7.5 इंच लंड पूरा अब मधु के चूत में समा गया I मधु तो दर्द से कहरा रही थी I उसकी आँखे बाहर आने को हुवे थे I मैं इससे तोड़ा डर गया और तोड़ी देर हिला भी नही I मधु 5 मिनिट बाद कुछ सामान्य हुवी और मेरी ओर प्यार से देख कर मूज़े चूमते हुवे बोली अब दर्द नही रहा तो रुक क्यूँ गये? मैने राहत की साँस लेते हुवे छोटे छोटे दक्के देने लगा I 5 मिनिट में ही मैं झाड़ ने के करीब आया तो मैने लॅंड मधु के चूत से बाहर निकल लिया और मधु के चूत के उप्पर ही मैं झाड़ गया Iमधु इस बीच 3 बार झाड़ चुकी थी I
जैसे ही हमारे साँसे नॉर्मल हुवी मैने मधु को देखा I मधु के चेहरे पर संतुष्टि के बाव मूज़े दिखे I मधु मेरे पास आकर मूज़े बे-ईतेहयाः चूमने लगी I मैं चकित हो कर मधु को देखता रहा I 5 मिनिट बाद मधु ने मूज़े छोड़ा तो मैने घड़ी देखी 7 बजने के करीब था I मैने आपने कपड़े जैसे पहने चाहे तो मधु ने रोकते हुवे कहा –

आगे क्या हुवा ? क्या कहा मधु ने? जानने के लिए कल ज़रूर आना I
तब तक के लिए शुभ रात्रि और स्वीट ड्रीम्स I

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Posted : 10/12/2012 1:04 am
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5 मिनिट बाद मधु ने मूज़े छोड़ा तो मैने घड़ी देखी 7 बजने के करीब था I मैने आपने कपड़े जैसे पहने चाहे तो मधु ने रोकते हुवे कहा –
मधु - आज यही रुक क्यूँ नही जाते संजय? वैसे मेरे घरवाले कल सुबह ही आनेवाले हैं I
मैं - बहूत लेट होगय मधु अब मेरा यहा रुकना अच्छा नहीं लगेगा, मैं बाबूजी से पर्मिशन लिए बिना आया हू, वे बहूत गुस्सलु हैं, जल्दी गुस्सा हो जाते हैं I मेरा रात को किसी और के घर रुकना उन्ने पसंद नहीं हैं I
मैं - अब निकलता हू I
यह बोलके मैं जैसे कपड़े पहने जाने निकला मधु ने उट कर मेरा हाथ थमना चाहा, पर जैसे मधु उटी उसके पैरो ने जवाब दे दिया, कंपन और दर्द से मधु फिर से बेट्ना चाह रही थी I
दर्द बरा चेहरा लिया मधु मेरी तरफ बे-बसी से देख रही थी I मूज़े उस पर बहूत प्यार आया, मैने उसे उटा कर बातरूम ले गया.
जिज़र जालु करके पानी गरम किया I मधु का बातरूम अदुनिक सुविधाऊ से लेह्स था I बात टब भी था I मैने बाल्टी में गरम पानी बरके बात टब में डाला और कुछ तांडा पानी मिलाके सेक ने लायक बनाया I बात टब में मधु को बीटा करकहा -
मैं - अब इससे आपना चूत सेको जब तक आराम ना मिले और पानी ठंडा ना हो जाए I
मैं - तब तक में तुमरे लिए खाना लेके आता हू, भूख लगी होगी ना डार्लिंग I
मैं मधु के घर की चाभी लेकर खाना लाने बाहर आयाI
बाहर आके खाना पार्सल करवाके में मधु के घर की तरफ बड़ा I बीच में मेडिकल स्टोर देख कर कुछ पेन किल्लर गोलिया भी ले ली I
( मधु जब वापस बेडरूम आई तो बेडशीट पर इतना खून देख कर फिर से संजय के साथ बिताए लम्हो को याद करके मुस्करा दी )
जैसे ही मैं मधु के कमेरे में पौंचा मधु बिस्तर पर बैठी हुवी मूज़े मिली I मधु के चेहरे पर चमक थी आँखे खुशी का इशार किए जा रही थी I मूज़े देख कर मधु दौड़ कर मुजसे लिपट गयी I मैने कहा –
मैं - अब कैसी हो मधु? दर्द तो नहीं है ना?दर्द है तो यह पेन किल्लर गोलिया खा लेना I
मधु - अब मैं ठीक हू I तुमने आने में इतनी देरी क्यूँ की?
मैं - अब खाना पार्सल कराने में इतनी देरी तो बनती है ना I
मधु - क्या इतना खून निकला था मेरे चूत से?( मूज़े बेडशीट दिखाते हुवे)
मैं - और नहीं तो क्या यह मेरा खून है?मैं तो पहली बार खून देख कर गबरा गया था, पर तुम उस वक़्त मस्ती में थी तो तूमे कुछ बताया नही I
वैसे तुम मूज़े इतना मिस करनी लगी हो की मेरे बिना एक पल भी रह नही सकती?
मधु - आजके इस मिलन के बाद तुम चाहते हो को मैं तुमसे दूर हो जाउ क्यूँ?नहीं रह सकती अब तुमरे बिना I
मैं - मैने ऐसा बिल्कुल नही कहा मधु, मैं तो तूमे बस तोड़ा छिड़ा रहा था, ई रियली लव यू मधु I
अच्छा अब बाते बंद करो और खाना खा लो I
मधु - ऐसे नही खाऊंगी, तुम मूज़े अपने हाथो से खिलाओ तभी खाऊंगी I
मैने मधु को प्यार से अपने हाथो से खाने खिलाने लगा तो मधु भी मूज़े एक एक कौर खिलाने लगी I दोनो हस्ते हुवे खाना ख़तम किया I
जब में जाने लगा तो मधु ने फिर से मूज़े रोखना चाहा पर मैं इस बार रूखा नही I मधु को अपनी बहो में बार कर किस करके मैं जब मधु से घर से निकला तो 8.30 बजे थे I मधु के आँखो में कुछ खोने का गम और ला-चारी मूज़े देखाई दी I
मैं अपने घर 9.15 बजे पौंचा तो पिताजी ने मूज़े खूब बाते सुनाई I मैं चुप छाप सुनकर अपने कमरे में जैसे ही पौंचा मधु के ख़यालोने मूज़े घेर लिया I तभी मधु का कॉल आया I मधु से 2 घंटे बात करके आज जो कुछ मधु के साथ किया चुदाईके ख़यालो में डूबा कब सोया मूज़े पता नहीं चला I
आगे क्या हुवा? क्या संजय रंजिनी को बुल जाएगा?
जानने के लिए कल ज़रूर मिलिगा I
तब तक के लिए शुभ रात्रि और स्वीट ड्रीम्स I

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Posted : 10/12/2012 1:04 am
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