मेरी कहानी पार्ट ४
 

मेरी कहानी पार्ट ४  

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 Anonymous
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करीब एक हफ़्ते के बाद भाभी लौट कर घर आई तो हमारे घर मिलने चली आई, एकान्त पाते ही मैने पूछा कि कहाँ गई थी? तो उसने कहा दोपहर में घर आना वहीं पर बातें होंगी, मैं तो तुम्हें ही बताने आई थी कि मैं लौट आई हूं। दोपहर में मैं स्कूल से ही उनके घर चला गया, बेल बजाने पर भाभी ने दरवाजा खोला, मैने देखा भाभी बहुत प्रसन्न दिख रही है मैने पूछा तो उसने कहा अन्दर तो आओ मैं अन्दर सीधे बेडरूम में चला गया बेड पर छोटू सो रहा था इसलिए मैं सोफ़े पर बैठ गया।थोड़ी देर में भाभी दो कप कोफ़ी लेकर आई और मेरे से सट कर बैठ गई उसने गुलाबी रंग की सलवार कमीज पहने थी काले रंग की ब्रा ऊपर से दिख रही थी। भाभी अक्सर काली ब्रा और काली पैंटी पहनना पसन्द करती है। मैने पूछा कहा गई थी? तो उसने कहा मैं इलाहाबाद अपनी बहन के घर गई थी वो मुझसे केवल दो साल छोटी है और वो मुझसे पूरी तरह खुली हुई है मैने उसे तुम्हारे बारे में बताया तो वो कह रही थी मैं भी मिलना चाहती हूं।

कोफ़ी खत्म होने के बाद मैने भाभी को अपनी तरफ़ खींचा भाभी मेरी गोद मे गिर गई मैने उसकी चूचियों को ऊपर से ही दबाने लगा तो मुझे महसूस हुअ कि साइज़ में कुछ अन्तर आ गया है, मैने पूछा तो वो हसने लगी और कहा लगता है दवा का असर हो रहा है, मैने तबतक सलवार खोल दी थी भाभी जब खड़ी हुई तो सलवार नीचे सरक गई, उसने कहा लो मैं पूरा काम किए देती हूं यह कह कर उसने अपनी कमीज भी निकाल दी फ़िर से मेरे सामने उसका भरा हुआ शरीर सामने था। मेरे लंड में तनाव भरता जा रहा था, मैने भाभी को नीचे कालीन पर लिटा कर अपने होंठों को उनके होंठों से जकड़ दिया, भाभी ने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी।

ऊऊह कितना मीठा स्वाद लग रहा था, मैने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया मैं अपने हाथों से उसके चेहरे को पकड़ रखा था उसकी लार मेरे अन्दर बह रही थी कुच देर के बाद मैने अपनी जीभ उसके अन्दर डाल दी और उसे पूरा अन्दर डाल कर चारों ओर घुमाता रहा काफ़ी देर तक हम एसा करते रहे फ़िर उसने कहा चलो ६९ करते हैं, मैने पूछा ये क्या होता है तो उसने कहा पहले अपने कपड़े उतारो तो बताती हूं। मैने अपनी पैंट और शर्ट निकाल दी और बेड के किनारे बैठ कर भाभी को कपड़े उतारते देखने लगा अब उसने अपनी ब्रा को उतार दिया और मेरे पास आ कहा चलो मैं तुम्हारी सफ़ाई कर दूं यह कह कर उन्होंने वही बोतल निकाली और उसे मेरे लंड के चारों ओर लगा दिया तो मैने कहा लाओ मैं भी तुम्हारी पूरी सफ़ाई कर दूं तो उसने कहा ये बहुत अच्छा रहेगा यह कह कर वो बेड पर लेट गई मैने उनकी पैंटी निकाल दी उसकी फ़ूली हुई बुर पर छोटे छोटे काले बाल थे मैने उंगली डाल कर बोतल से ढेर सारी क्रीम निकाल कर उसकी चूत पर लगा दिया और धीरे धीरे मालिश करने लगा मेरा लंड हिलोरे लेने लगा, मैने उसकी चूचियों को दबाना चाहा तो उसने कहा पहले क्रीम को पोंछ लो, तभी मेरी नजर उसके बगल के बालों पर पड़ी मैने कहा इसे भी साफ़ कर दूं तो बोली नहीं ये जब कुछ बड़े हो जायेंगे तो तुम्हें अच्छे लगेंगे इसे रहने दो

मैं सोफ़े पर बैठ गया और हम बातें करने लगे तो भाभी ने बताया तुम्हारे भैया तो रात में कपड़े निकाल कर अपना लंड मेरी बुर में डालने की कोशिश में लगे रहते हैं उन्हे ये भी जानने की जरुरत नहीं महसूस होती कि मेरी चूत सूखी होने के कारण कितना दर्द कर रही होती है जब तक मेरी चूत गीली होती है तब तक वो अपना पानी छोड़ चुके होते हैं इस तरह मैं असन्तुष्ट रह जाती हूं। मैने भाभी से पूछा अच्छा बताओ तो जरा लेडीज़ को क्या करना अच्छा लगता है तो भाभी ने कहा ये कोई नियम की बात नहीं है सेक्स तो महसूस करने की बात है केवल महसूस करके भी सेक्स में संतुष्टि मिल सकती है, तुम निश्चिंत रहो मैं तुम्हें सब कुछ बता दूंगी तो तुम शादी के बाद अपनी बीवी को पूरी तरह सन्तुष्ट कर पाओगे, मैने कहा भाभी तुम कितनी प्यारी हो और मेरा कितना ख्याल रखती हो, भाभी ने कहा देखो सेक्स तो एक भूख की तरह है इस तो सन्तुष्ट करना ही पड़ता है, कुछ लोग अपने हाथों से अपने आपको सन्तुष्ट कर लेते हैं तो कुछ लोग बाहर किसी को खोज लेते हैं इसमें तो कोई बुराई नहीं है केवल इस बात का ध्यान रखना है कि आस पास के लोगों में ये बात पता नहीं चले क्योंकि ये सब हमारे समज में अच्छा नहीं माना जाता।

बातें करते काफ़ी देर हो गई तो भाभी ने कहा चलो बाथरूम में नहा लें, हम दोनो साथ ही बाथरूम में घुस गये शोवर चला कर हम एक दूसरे से लिपट कर देर तक भीगते रहे। मैं बीच बीच में भाभी के पीठ पर हाथ फ़िरा रहा था हम दोनो ने अच्छी तरह एक दूसरे को साबुन लगा कर नहलाया। भाभी की चूचियों पर साबुन वाला हाथ रगड़ने में बहुत अच्छा लग रहा था उसने भी मेरे लंड की अच्छी तरह से रगड़ाई की, हम दोनो बाहर आ कर टोवल से अपना बदन पोंछ लिए तो भाभी ने कहा चलो एक खेल खेलते हैं, हम दोनो बेड पर लेट गै भाभी ने पोंड्स का पाउडर निकाल कर उसे मेरे बदन पर पोत दिया और एसा ही करने को कहा मैने भी उनके बदन पर पाउडर डालकर पूरे शरीर पर लगा दिया तो भाभी ने कहा चलो मेरे ऊपर लेट जाओ मैं पूरी तरह उनके ऊपर लेट गया अब हम आपस में बदन रगड़ते रहे मेरा लंड भाभी की फ़ूली हुई चूत में घुसने के लिए बेताब हो रहा था

भाभी ने कहा तुम मेरी ऊपर की तरफ़ से धीरे धीरे नीचे की तरफ़ जाओ मैने भी चूत पर पहुंच कर अपनी जीभ को चूत में घुसाना चाहा तो भाभी ने कहा अभी समय नहीं हुआ है, अब मेरा मुंह भाभी के पैर की तरफ़ था और मेरा लंड भाभी के चेहरे को छू रहा था उसने मेरा लंड अपने दोनो हाथों से पकड़ लिया और अपने मुंह में डाल दिया अपने आप मेरा मुंह भाभी की चूत से सट गया अब भाभी की चूत से रस बह रहा था मैने चूत में अपनी पूरी जीभ घुसा कर चूसने लगा भाभी भी मेरे लंड को अपने मुंह से चूस रही थी कि अचानक मेरे लंड का पानी छूट गया भाभी ने उसे पूरा पी लिया अब भाभी जोर जोर से सिसकियां ले रही थी यस और करो और करो और करो यह कहते हुए भाभी ने अपने दोनो पैरों से मेरे सिर को दबा लिया और अब भाभी ने पलटने की कोशिश शुरु कर दी अब मैं भाभी के नीचे था भाभी मेरे मुंह पर धक्के मार रही थी और उसकी चूत से गरम गरम कुछ निकल रहा था जो सीधे मेरे गले में जा रहा था

भाभी, बोले जा रही थी ओह ऊओह ओह ओह ओह अंत में भाभी मेरे ऊपर पसर गई हम एक दूसरे के ऊपर लेटे रहे भाभी का चिकना बदन बहुत ही कोमल लग रहा था मेरा मन कह रहा था कि काश ये समय खत्म ही न हो। हम दोनो एक दूसरे के बहुत करीब आ चुके थे, थोड़ी देर बाद हम उठ गये तो भाभी ने कहा अब समझ में आया कि ६९ क्या होता है, मैं भाभी से लिपट गया हम दोनो काफ़ी देर तक लिपटे ही रहे तब भाभी ने मेरे माथे को चूमते हुए कहा जानते हो जब दो लोग सेक्स करते हैं तो उनका आपस में रिश्ता बहुत मजबूत हो जाता है। काफ़ी देर हो गई थी हालांकि मन नहीं हो रहा लेकिन भाभी ने कहा अब घर जाओ नहीं तो तुम्हारी मम्मी खोजेंगी, अधूरी प्यास लिए मैं अपने घर आ गया। आगे की कहानी पार्ट ५ में।

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Posted : 09/11/2010 4:59 am