मेरी साली पिंकी
 

मेरी साली पिंकी  

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 Anonymous
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दोस्तो, मेरा नाम है वरिंदर, मैं गाज़ियाबाद का रहने वाला हूँ, मैं EXBii का बेहद शौक़ीन आदमी हूँ। इसकी हर चुदाई को पढ़-पढ़ कर मुझे बहुत आनंद आता है और रात को मैं लैपटॉप पर कहानी अपनी बीवी को पढ़वा कर फिर उसको चोदता हूँ।

वैसे मेरी बीवी भी बहुत चुदक्कड़ है, रात को मेरे से ज्यादा उसको चूत मरवाने की जल्दी रहती है, काम काज निबट कर जब वो बिस्तर में आती है तो सेक्सी बन के, ताकि मेरा लौड़ा खड़ा हो जाए, वो मेरे लौड़े से खूब खेलती है, पूरा चूस चूस कर बेहाल कर देती है और फिर जल्दी से अपनी टाँगे फैला देती है, कहती है- मेरी भी चाटो !

और फिर मैं उसकी चूत चाटता हूँ और फिर लौड़ा घुसा कर उसकी चूत मारता हूँ।

मेरी दो सालियाँ हैं, दोनों विवाहित है, छोटी वाली कनाडा में है, बड़ी वाली पिंकी यहीं भारत में थी, उसने भाग कर शादी कर ली थी वो भी जाति से बाहर जाकर !

पहले उसको किसी ने नहीं अपनाया था, सभी ने नाता तोड़ लिया था उससे, लेकिन शायद उसको उम्मीद थी कि एक दिन आएगा जब सबका गुस्सा पानी होकर बह जाएगा और सभी मिलने लगेंगे।

शादी के डेढ़ साल बाद उसने एक लड़की को जन्म दिया। धीरे धीरे कुछ सामान्य होने लगा, मिलना-बरतना चालू हो गया, अब वो अपने पति के साथ घर आने-जाने लगी, उसके पति का वो आदर सत्कार नहीं होता था, बस इतना था कि उसको आने से कोई नहीं रोकता और एक सामान्य मेहमान की तरह उसकी खातिदारी होती, ना कि वो जमाई वाली !

उसके लिए दारु, मुर्गा और पकवान आदि कुछ नहीं !

वो खुद ही कम जाता लेकिन पत्नी को नहीं रोकता जाने से, उसका अपना घर भी नहीं था, किराए पर रहते थे, उसको उम्मीद थी कि ससुराल से उसकी पत्नी का बनता हिस्सा एक दिन मिल जाएगा क्यूंकि उनका भाई नहीं था, इसी लालच से शायद उसने भी शादी की थी। जब उसको लगा की दाल जल्दी नहीं गलने वाली तो उसने अपने घर में लड़ाई-झगड़ा करना शुरु कर दिया, दोनों में रोज़-रोज़ लड़ाई-झगड़ा होने लगा, पीट देता, घर से निकाल देता, वो मायके आती, फिर कुछ दिन बाद वो गलती मान माफ़ी मांगता और उसको ले जाता।इस बीच उनका एक लड़का हुआ, अब उनकी जिंदगी पटड़ी पर आने लगी, ससुराल वालों ने उनको एक छोटा सा घर खरीद कर दिया तो दोनों की जिंदगी अच्छी चलने लगी, बच्चे बड़े होने लगे।

अब कभी-कभी वो मेरी साली पर शक करने लगता और झगड़ा हो जाता।

मेरी साली है ही बहुत ज़बरदस्त माल, उसकी जवानी हाय-तौबा थी, उसके मम्मे उसका खास आकर्षण का केंद्र थे, उसकी लड़की सोनिया बचपन से बहुत गोलू-मोलू सी थी, फिर मेरा रिश्ता उस घर में तय हो गया, तब उसकी लड़की की उम्र दस साल के करीब थी, शादी के बाद सबने हमें खाने पर बुलाना चालू कर दिया।

मेरी मर्दानगी मुंह बोलती है, मुझे अपने मर्द होने पर नाज़ है, मेरा लौड़ा बहुत ज़बरदस्त है।

मैंने भी नोट किया कि मेरी बड़ी साली कुछ-कुछ चालू है, ज्यादा नहीं, शायद उसके पति के लौड़े में अब दम का नहीं था, उसका पति एक प्राइवेट कम्पनी में नौकरी करता था, उसकी तनख्वाह अच्छी थी। बच्चे बड़े हुए, मेरी साली ने एक स्कूल में नौकरी कर ली और बेटे को उसी स्कूल में दाखिल करवा लिया।

मेरी साली की बेटी सोनिया की अपनी मौसी से बहुत पटती थी, कभी कभी रहने आती थी। तब मेरा कोई ऐसा-वैसा ख़याल नहीं था, छोटी थी, मेरे साडू ज्यादातर घर से बाहर रहता था, उसकी नौकरी ऐसी थी कि रहना पड़ता था।

अब भी उनमें झगड़ा हो जाता, कारण वही शक था, वह कहता- तू नौकरी छोड़ दे, बच्चे सम्भाल बस !

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Posted : 13/01/2012 4:05 pm
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Posted : 13/01/2012 4:05 pm
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मेरी नियत साली पर बेईमान थी, मेरा दिल उसको चोदने का करने लगा, मेरी साली भी जानती थी कि मैं उस पर मरता हूँ।

शादी के बाद मेरी पत्नी जम्मू से बी.एड करने लगी, कभी चली जाती थी, कभी आ जाती थी।

एक दिन में घर अकेला था, उस दिन मेरे घर वाले भी गाँव में गए हुए थे, हमारा खेती-बाड़ी का बहुत बड़ा काम है, डैड और मॉम कभी हमारे पास शहर रुकते, कभी गाँव। मेरा अपना बिज़नस है।

रात के साढ़े आठ बजे का वक्त था, मैं घर में बैठा दारु के पैग लगा रहा था, साथ साथ टी.वी देख रहा था, अकेला था, पहले सोचा अपनी किसी माशूक को बुला लेता हूँ, लेकिन उस दिन सभी व्यस्त थी, कोई रात को आ नहीं सकती थी।

तभी दरवाज़े ( www.indiansexstories.mobi ) की घण्टी बजी, मैंने दरवाज़ा खोला, मेरे आँखों में नशा था, मेरे सामने मेरी साली खड़ी थी,

पिंकी ! तुम? इस वक़्त अकेली आई हो?

हाँ ! अकेली हूँ !

इतनी रात को? सब ठीक ठाक तो है?

हाँ !

कह कर वो अंदर चली आई। मैंने मुख्य दरवाज़ा बंद किया और उसके पीछे अंदर आ गया।

वो चुप थी।

पिंकी, क्या हुआ? झगड़ा हो गया क्या?

इतने में उसका मोबाइल बजा, उसने काट दिया। फिर मेरी सासू माँ का फ़ोन आ गया।

मेरी साली पिंकी मुझसे बोली- मेरे बारे मत बताना !

मेरी सास ने कहा- पिंकी का जमाई जी से झगड़ा हो गया है। पता नहीं, घर से चली गई।

मुझसे पूछा- तुम्हारे घर आई है क्या?

नहीं मम्मी ! यहाँ नहीं आई !

फ़ोन बंद किया मैंने और उसके करीब जाकर उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा- पिंकी, हुआ क्या?

कुछ नहीं जीजाजी ! होना क्या है, बस वैसे आ गई, नहीं आ सकती क्या?

ऐसी बात नहीं है ! मैंने उसके कंधे से हाथ उसकी पीठ पर फेरते हुए बोला- क्यूँ नहीं आ सकती? इस वक़्त आई हो ना अकेली ! इसलिए !

वो खड़ी हुई और मुझसे लिपट गई, उसकी छाती का दबाव जब मेरी छाती पर पड़ा, मैं तो पागल होने लगा।

वही लड़ाई-झगड़ा ! वही बचकानी बातें !

मैंने भी पी रखी थी, अपनी बाँहों को पीछे ले जाकर उसकी पीठ पर कसते हुए मेरा हाथ जब उसके ब्लाऊज़ के ऊपर उसके जिस्म पर लगा, उसने खुद को और कस लिया, वो रोने लगी।

मैंने अपने होंठ उसकी गर्दन पर टिका दिए- चुप हो जाओ पिंकी ! मैं हूँ ना !

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Posted : 13/01/2012 4:06 pm
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मैंने उसके करीब जाकर उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा- पिंकी, हुआ क्या?

कुछ नहीं जीजाजी ! होना क्या है, बस वैसे आ गई, नहीं आ सकती क्या?

ऐसी बात नहीं है ! मैंने उसके कंधे से हाथ उसकी पीठ पर फेरते हुए बोला- क्यूँ नहीं आ सकती? इस वक़्त आई हो ना अकेली ! इसलिए !

वो खड़ी हुई और मुझसे लिपट गई, उसकी छाती का दबाव जब मेरी छाती पर पड़ा, मैं तो पागल होने लगा।

वही लड़ाई-झगड़ा ! वही बचकानी बातें !

मैंने भी पी रखी थी, अपनी बाँहों को पीछे ले जाकर उसकी पीठ पर कसते हुए मेरा हाथ जब उसके ब्लाऊज़ के ऊपर उसके जिस्म पर लगा, उसने खुद को और कस लिया, वो रोने लगी।

मैंने अपने होंठ उसकी गर्दन पर टिका दिए- चुप हो जाओ पिंकी ! मैं हूँ ना !

मेरे होंठों की छुअन से वो कसमसा सी गई, मानो करंट का झटका लगा हो !

लेकिन उसने मुझे और कस लिया मेरा हाथ पीठ से अब नीचे बढ़ने लगा, उसके पेट पर चला गया, साड़ी के ऊपर से उसकी गांड पर हाथ फेरा- बस चुप हो जाओ पिंकी ! आओ बैठो !

इतने में साडू का फ़ोन बजा- पिंकी आई है क्या यहाँ?

मैंने कहा- नहीं आई ! लेकिन उसका फ़ोन आया था, शायद वो आपसे गुस्सा थी, लेकिन मोना नहीं है इसलिए बोली कि किसी गुरुद्वारे में रात काट लूंगी। गुस्सा कम होगा घर लौट आएगी और कहीं नहीं गई।

उसने मुझे दुबारा कस लिया- थैंक्स ! मुझे आज के लिए रखने के लिए !

नहीं ऐसी बात नहीं है यह भी तो... !! यह भी तो तेरा घर है, इसमें थैंक्स वाली क्या बात है? तुम फ्रेश हो लो फिर डिनर मंगवाता हूँ !

मैं बना लेती हूँ ना !

नहीं तुम घर रोज़ बनाती हो ! आज बैठ कर खाओ !

वाह जीजा ! बहुत खातिर करने के मूड में हो?

मूड में तो में हर पल रहता हूँ !

वो चली गई वाशरूम, मैंने अपना पैग बनाया और उसको पीते पीते टी.वी पर चल रहे अफ्रीका और इंग्लैंड के बीच चल रहे क्रिकेट मैच देखने लगा।

इतने में वाशरूम से आई- क्या बात है ! अकेलेपन का फायदा उठा रहे हो दारु पीकर?

ऐसी बात नहीं ! उसके होते भी लगाता हूँ !

क्या खाओगी? यह पेम्पलेट पकड़ो और देखो, बताओ ! मैं फ़ोन कर देता हूँ, खाना आ जाएगा।

शाही पनीर, दाल मखनी, बटर नान, सलाद और खीर मंगवा लो।

मैंने आर्डर दिया और इतने में पिंकी के मोबाइल पर उसके पति का यानि मेरे साडू का फ़ोन आया। उसने उठा लिया और दोनों बहस करने लगे, आवाज़ साफ़ बाहर तक सुन रही थी- कौन से गुरुद्वारे में हो? मैं लेने आता हूँ।

आज तो मैं गुरु घर में रहूँगी, कम से कम यहाँ पाठ सुनकर शांति तो मिलती है। घर में वही किच-किच !

उसने गाली निकाल दी, झगड़ा हो गया, फिर रोने लगी- हाय मेरी किस्मत ! कोसती हूँ उस दिन को जिस दिन घर वालों के खिलाफ चली गई इस नामर्द के लिए !

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Posted : 13/01/2012 4:06 pm
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वो हिचकियाँ लेने लगी, मैंने पैग खींचा और उसके बराबर बैठ गया, उसके गले में बाजू डाल अपनी तरफ खींचा- बस चुप ! रोना बंद करो !

बहुत दुखी हूँ मैं !

पिंकी, बस अब रोना बंद !

वो अपना चेहरा मेरे सीने में छुपाकर रोने लगी।

मैंने उसको बाँहों में कस लिया उसकी गर्दन पर चूम लिया, मैं बहक रहा था। वो इतने करीब आती जा रही थी, ऊपर से दारु का सरूर था, बोली- लाओ, आज हम भी पीकर देखेंगे ! सुना है गम को भुला देती है।

तुम पिओगी?

हां !

नहीं जाने दो !

नहीं वरिंदर ! बहुत दुखी हूँ, लाओ ! अगला पैग अपनी साली का बनाया हुआ पीना !

उसने दो मोटे पैग बना दिए।

इतने बड़े?

कुछ नहीं होगा !उसने घूँट भरा- कड़वी है !

हाँ, तभी तो दुःख दूर कर देती है !

उसने आँखें बंद करके पूरा पैग गटक लिया।

मैंने अपना पैग धीरे धीरे ख़त्म किया, चार पांच मिनट बाद उसको जब सरूर हुआ- वाह वरिंदर जीजू ! सच में यह चीज़ मस्त है ! कमरा घूम रहा है या मैं?

तुम घूम रही हो !

मैं बैड के एक किनारे बैठा था, वो सामने पड़ी कुर्सी पर !

उठकर बैड के दूसरे तरफ वाले किनारे बैठ गई, रिमोट पकड़ा, म्यूजिक चैनल लगा दिया।

पिंकी सरक कर मेरे और करीब आ गई, दोनों बैड पर बैठे थे, सामने मर्डर फिल्म का सेक्सी सीन वाला गाना चलने लगा, उसने अपना सर मेरे कंधे पर रख लिया।

क्या हुआ पिंकी? सीन देख कर पति की याद आने लगी?

जीजू, उसका नाम लेकर मूड खराब ना करो, मुश्किल से बदला है !

उसने अपना हाथ मेरे सीने पर रख दिया, सहलाने लगी।

मैंने उसके गले में बाहें डाल दी उसके कान के नीचे अपने होंठ रख दिए, यह औरत का रिमोट कण्ट्रोल होता है, ना जाने मैंने कितनी औरतों का रिमोट चलाया था।

उसके मुख से हल्की सी सिसकी निकली और आंखें बंद होने लगी।

मैं अब होंठ रगड़ने के साथ सांसें लेकर उसको मदहोश करने लगा।

उसने अब अपनी टांग मेरी जांघ पर टिका दी- क्या हुआ जीजू? रुक क्यूँ गए?

उसने अब हाथ टीशर्ट के नीचे से मेरी छाती पर रखा, वहाँ के बाल सहलाने लगी- चलो एक एक हल्का सा पैग और हो जाए।

इतने में दरवाज़े पर घण्टी बजी।

खाने वाला था, उसने पैकेट दिया, मैंने पेमेंट की और अंदर आया।

इतने में उसने पैग बना डाला। वो बार के पास खड़ी थी, मैं उसके पास गया पीछे से उसको बाँहों में भर लिया, उसकी पीठ पर चुंबन जड़ दिया, वो सिसक उठी।

मेरा हाथ उसके चिकने सपाट पेट पर रेंगने लगा। एक हाथ उसके ब्लाऊज़ के ऊपर से ही उसकी चूची को दबाने लगा।

मैंने उसका पल्लू पकड़ा, वो घूमने लगी। मैंने उसकी साड़ी उतारी, पेटीकोट-ब्लाऊज़ में वो कयामत लग रही थी।

मैंने अपनी टीशर्ट उतार फेंकी, उसको अपनी और घुमाया उसके होंठ चूम लिए। मेरी बांह उसकी कमर पर चली गई, वहां से झटका देकर उसको अपने साथ चिपका लेता- पिंकी, तुम बहुत खूबसूरत दिख रही हो !

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Posted : 13/01/2012 4:07 pm
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आपकी पत्नी की बड़ी बहन हूँ ! उससे दो कदम आगे हुंगी !

मैंने उसके ब्लाऊज़ को उतार दिया और कुछ ही देर में वो सिर्फ ब्रा-पैंटी में थी।

उसने भी मेरे लोअर को खोल दिया, बाकी का काम मैंने अपने आप उतार कर कर दिया।

वो लिपट गई, बोली- उस दरिन्दे की पिटाई झगड़े से तंग हूँ।

बस, अब सब भूल जाओ ! अपने हाथ से एक पैग बनाओ। ऐसे ही चलकर आना मॉडल की तरह !

वो पैग बना लाई, मैंने कहा- एक बात कहूँ? लगता नहीं है कि तेरी दस साल की बेटी होगी।

उसने पैग पकड़ा दिया और खुद का पी लिया, मुझे लगा अब उसको और नहीं पीने दूंगा, वरना वो सो जायेगी और मेरा मूड खराब होगा।

मैं उसके पास गया पीछे से उसको बाँहों में भर लिया, उसकी पीठ पर चुंबन जड़ दिया, वो सिसक उठी।

मेरा हाथ उसके चिकने सपाट पेट पर रेंगने लगा। एक हाथ उसके ब्लाऊज़ के ऊपर से ही उसकी चूची को दबाने लगा।

मैंने उसका पल्लू पकड़ा, वो घूमने लगी। मैंने उसकी साड़ी उतारी, पेटीकोट-ब्लाऊज़ में वो कयामत लग रही थी।

मैंने अपनी टीशर्ट उतार फेंकी, उसको अपनी और घुमाया उसके होंठ चूम लिए। मेरी बांह उसकी कमर पर चली गई, वहां से झटका देकर उसको अपने साथ चिपका लेता- पिंकी, तुम बहुत खूबसूरत दिख रही हो !

आपकी पत्नी की बड़ी बहन हूँ ! उससे दो कदम आगे हुंगी !

मैंने उसके ब्लाऊज़ को उतार दिया और कुछ ही देर में वो सिर्फ ब्रा-पैंटी में थी।

उसने भी मेरे लोअर को खोल दिया, बाकी का काम मैंने अपने आप उतार कर कर दिया।

वो लिपट गई, बोली- उस दरिन्दे की पिटाई झगड़े से तंग हूँ।

बस, अब सब भूल जाओ ! अपने हाथ से एक पैग बनाओ। ऐसे ही चलकर आना मॉडल की तरह !

वो पैग बना लाई, मैंने कहा- एक बात कहूँ? लगता नहीं है कि तेरी दस साल की बेटी होगी।

उसने पैग पकड़ा दिया और खुद का पी लिया, मुझे लगा अब उसको और नहीं पीने दूंगा, वरना वो सो जायेगी और मेरा मूड खराब होगा।

मैंने अब उसको बाँहों में उठाया और अपने बिस्तर पर जा पटका, लाईट बंद कर दी, लाल रंग का जीरो वाट का बल्ब जला लिया। उसकी रोशनी में उसके अंग और मस्त लगने लगे।

वरिंदर, मैं कबसे तुम्हें पसंद करती थी !

तेरा झगड़ा किस बात पर होता है?

अब क्या कहूँ? उसकी गैर-मौजूदगी में उसके एक दोस्त के साथ मेरे संबंध बन गए थे, उस कमीने ने मुझे कई बार चोदा और जब मैंने एक दिन मना किया तो उसने मुझे फंसा दिया, पति के दिमाग में शक डाल दिया कि उसकी बीवी उसके पीछे से गैर-मर्दों से मिलती है। बस तब से लड़ाई होने लगी है। हालाँकि उन्होंने कभी मुझे किसी के साथ रंगे-हाथ नहीं पकड़ा !

छोड़ो जीजू सबको !

वो मेरे होंठ चूसने लगी। मैंने भी अपना पूरा सहयोग दिया। मैंने उसको उल्टा लिटा लिया और उसकी गर्दन से चूमता हुआ नीचे आता गया और फिर धीरे से उसकी ब्रा की हुक खोल दी जिससे उसके दोनों कबूतर आज़ाद होकर फड़फड़ाने लगे। मैंने हाथ घुसा उसके चुचूक को चुटकी में लिया और मसल दिया।

वो गर्म होने लगी।

मैंने उसकी ब्रा पूरे तरीके से अलग कर दी और उसको पलट कर पहले उसके गुलाबी होंठों से शराब पी और फिर धीरे से उसका एक चूची मुँह में ली।

वाह ! क्या मस्त चूची थी !

मैंने उसके चुचूक को अंदर ही अंदर चूस लिया।

वो कसमसा गई, सिमटने लगी।

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Posted : 13/01/2012 4:07 pm
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मैंने उसकी दूसरी चूची चूसी, मुझे इतना आनंद आ रहा था, सच में कयामत थी, न जाने कितनी लड़कियों को नंगी कर चुका था, लेकिन साली का शबाब था कि सबसे अलग !

ऊपर से उसके नखरे, अंदाज़ साफ़ दिखाते थे कि वो कितनी चुदक्कड़ औरत होगी।

उसने भी मुझे अपने ऊपर से धकेल दिया, मैं सीधा लेट गया, मेरा लौड़ा कच्छे में तम्बू बना कर खड़ा था।

उसने पहले मेरी छाती को सहलाया, बालों से खेली, धीरे से नीचे सरकी और एकदम से उसने मेरा लौड़ा निकाल लिया- वाह जीजू ! कितना बड़ा लौड़ा है आपका? छुटकी के तो वारे-न्यारे होंगे ! क्या

पति मिला है उसको ! काश मुझे पहले मिल गए होते तो उस लंगूर के प्रेम में न पड़ती।

मैं भी तो तेरा हूँ ! साली आधी घरवाली होती है !

उसने पहले मेरे लौड़े को सहलाया, फिर उसके सुपारे को चूमा, मांस नीचे करते हुए उसने मुंह में ले लिया और चूसने लगी।

फिर उसने लौड़े को चूसना चालू कर दिया, मेरा सांवला लौड़ा अकड़ रहा था पर वो थी कि उसकी अकड़ को अपने होंठों से निकाल रही थी- अह अह !

बहुत मस्त लग रही हो साली साहिबा !

पिंकी कहो वरिंदर !

हाँ पिंकी ! बहुत मस्त लगती हो जब लौड़ा चूसती हो !

वो पूरे नशे में थी।

वरिंदर, तेरे तो आज वारे-न्यारे हो गए ! सोचा भी नहीं था परसनल माल खुद घर आ जाएगा।

मैंने उसकी टाँगें खुलवा ली और बीच लेट अपनी जुबां से उसकी चूत के दाने को रगड़ने लगा। वो कांप उठी !

जब जोर से जुबां चलती तो थरथराने लगती।

69 की अवस्था में आकर मैं एक साथ उसकी चूत चाट रहा था और वो मेरा लौड़ा चूस रही थी।

वरिंदर, आपका सच में बहुत बड़ा लौड़ा है !

साली, मैं जब तेरी बहन को ठोकता हूँ तो कभी-कभी आंखें बंद कर लेता हूँ, तेरा चेहरा सामने रखकर उसकी मारता हूँ !

हाय मेरे वरिंदर शेर ! मुझे क्या मालूम था कि घर में इतना बड़ा मूसल है !

दोनों हल्फ नंगे होकर चिपकने लगे। दोनों उठे और वो घोड़ी बन गई, बोली- चल वरिंदर घुसा दे ! नहीं रहा जा रहा !

मैंने उसकी चूत में लौड़ा घुसाना शुरु कर दिया।

हाय ! धीरे करो ! बहुत बड़ा और मोटा है ! ऐसे की आदत नहीं है राजा !

मैंने पूरा लौड़ा घुसा दिया।

हाय जीजू ! आपका तो मेरी बच्चेदानी से रगड़ खा रहा है !

मैंने गति बढ़ा दी, उसकी दोनों चूचियाँ लटक रही थी, जब झटका लगता तो वो झूलने लगती।

मैंने उनको हाथों में पकड़ लिया और ठोकने लगा।

कुछ देर बाद मैंने उसको सीधा लिटाया और उसके ऊपर सवार हो चला। इससे दोनों की छाती घिसने लगी तो आग निकलती।

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Posted : 13/01/2012 4:07 pm
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बिस्तर में एक घंटा उथल-पुथल करने के बाद जब हम हांफने लगे तो कमरे में तूफ़ान के बाद वाली शांति थी, सिर्फ सांसें सुन रही थी।

मैंने उसको मोना की सबसे सेक्सी नाईटी पहना दी और खाना खाने लगे। खाने से पहले एक-एक पैग ठोक लिया।

बिस्तर में जाकर मैंने दोबारा उसका दूध पीना चालू किया और मेरा लौड़ा भी खड़ा हो गया। उसने दुबारा चूसना चालू कर दिया।

अब मैंने उसकी गाण्ड में ऊँगली घुसा दी, फिर दो ऊँगलियाँ, फिर तीन ! अंगूठा चूत में, चार ऊँगली गाण्ड में !

मैंने पीछे से उसकी टांग उठाई और उसकी गाण्ड में सुपारा घुसा दिया।

वो थोड़ी हिल गई, लेकिन साली ने रोका तक नहीं।

मेरा हौंसला बढ़ा तो मैंने झटके से आधा लौड़ा घुसा दिया उसको दर्द हुई लेकिन फिर से सह गई।

पता नहीं साली किस मिट्टी से बनी थी, मैंने पूरा उतार दिया और रगड़ने लगा। साथ साथ वो खुद अपनी चूत के दाने को मसल रही थी और मैं उसकी चूचियों को और गाण्ड को दबा कर चोद रहा था। पूरी रात हमने नज़ारे लूटे !

सुबह जब उसकी आँख खुली तो खुद को पूरी नंगी मेरे साथ चादर में पाया तो मेरी भी आंख खुल गई।

मैंने उसको खींच लिया।

जीजू, यह क्या हो गया?

उसकी गालें शर्म से सुर्ख लाल होने लगी, वो आँख मिलाने से बचना चाहती थी।

मैंने उसको दबोच कर उसके होंठ चूम लिए ताकि उसकी शर्म उतरे और वो आगे भी मेरी सेवा करती रहे।

मुझे शर्म आती है ! वो उठी, कपड़े पहनने लगी, बोली- जीजू सर चकरा रहा है, बदन टूट रहा है।

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Posted : 13/01/2012 4:08 pm