मैं फिर से चुदी
 

मैं फिर से चुदी  

Page 1 / 2
  RSS
 Anonymous
(@Anonymous)
Guest

हाय मैं मुक्ता ! गत कहानी में मैंने आपको अपने जीजू विपुल से अपनी धमाकेदार चुदाई के बारे में बताया था। जीजू तो मेरी चूत की सील तोड़कर चले गए थे लेकिन उसके बाद मेरी क्या हालत हुई वो मैं आपको बताती हूँ।

जब तक किसी लड़की की चुदाई नहीं होती, तब तक तो कोई बात नहीं, लेकिन लौड़ा खाने के बाद तो चूत हमेशा चाहती है कि कोई न कोई लौड़ा हमेशा उसमें घुसा रहे।

जीजू के जाने के बाद मैं हर मर्द को उसी नजरिये से देखने लगी, 18 साल का लोंडा हो या 50 साल का बुढ्ढा, मेरी निगाहें हमेशा उसकी कमर के नीचे होती, निगाहें तलाशती रहती कि इसका लौड़ा कैसा होगा, कितना लम्बा या मोटा होगा और अगर यह मेरी चूत में होता तो कैसा लगता।

घर में अगर आस पड़ोस के छोटे बच्चे आ जाते तो मैं उनकी छोटी सी लूली सहलाने लगती, उसको कभी जोर से दबा देती तो बच्चा रोने लगता। भगवन से दुआ करती- हे भगवन ! इसका लंड जल्दी से बड़ा कर दे ताकि मैं अपनी चूत की ज्वाला शांत कर सकूँ !

थोड़े दिनों में तो यह हाल हो गया कि मैं जब भी किसी मर्द को देखती तो काफी देर तक उसके लंड की जगह तकती रहती, मुझे लगने लगता कि मेरे देखने से इसका लौड़ा तन रहा है।

हालत जब बेकाबू होने लगे तो मैं अपने घर में ही राह देखने लगी। जीजी, मैं और हमसे छोटा हमारा भाई अभिषेक दोस्तों की तरह रहे थे। जीजी की शादी के बाद अभिषेक भी अपनी दुनिया में मस्त हो गया था। अभिषेक के घर से जाने के बाद में ही उसके कमरे की सफाई करती।

एक दिन जब मैं उसके कमरे की सफाई कर रही थी तो पलंग के नीचे मुझे उसके सफ़ेद रंग का जांघिया दिखा। मैंने उसको उठाया, न जाने मुझे क्या सूझी कि मैं जांघिए में वो जगह देखने लगी जहाँ लण्ड छुपा होता है। मुझे उस जगह कुछ दाग-धब्बे से नज़र आये। मैंने जांघिए को अपने नाकसे सूँघा। मैं क्या बताऊँ आपको ! उस खुशबू को सूंघते ही मैं तो मस्त हो गई, मेरा रोम-रोम उत्तेजना से भर गया, चूत गीली-गीली सी लगने लगी। मैंने एक हाथ से जांघिये को सूंघना जारी रखा और दूसरे हाथ से अपनी चूत सहलाने लगी। दस मिनट तक ऐसा करने के बाद मुझे लगा कि मेरी चूत से कुछ निकल रहा है। मैंने एक बार जोर से चूत को रगड़ लगाई और मुझे लगा कि मेरी चूत से कोई द्रव निकला और मैं शांत हो गई।

मुझे मज़ा आ गया !

अब तो मुझे रोज की राह मिल गई अभिषेक के जाने के बाद मैं उसके कमरे में जाती, उसका कोई सा भी जांघिया लेती, उसे सूंघती, उत्तजित हो जाती, चूत को सहलाती-मसलती और स्खलित हो जाती।

एक परिवर्तन मुझमें और आ गया था, पहले मुझमें अपने शरीर को लेकर काफी संकोच था, मैं अपने शरीर को काफी छुपा कर रखती थी लेकिन जीजू से चुदाई के बाद मेरे मन में यह लगने लगा कि ज्यादा से ज्यादा लोंडे मेरे शरीर को देखें, इसलिए मैंने अपने पहनावे में भी बदलाव कर दिया। अब मैं एसे कपड़े ज्यादा पहन कर निकलने लगी जिसमें मेरे शरीर का एक एक उभार दिख सके।

Quote
Posted : 13/01/2012 3:02 pm
 Anonymous
(@Anonymous)
Guest

ReplyQuote
Posted : 13/01/2012 3:02 pm
 Anonymous
(@Anonymous)
Guest

भाई का जांघिया सूंघने से मेरी उत्तेजना इतनी बढ़ गई कि मुझे लगने लगा कि अगर मेरी चूत को जल्दी ही कोई लौड़ा नहीं मिला तो मैं जाने क्या कर बैठूंगी।

अचानक एक दिन ऐसा हादसा हो गया जो मैंने सोचा भी नहीं था। मैं अपनी 8 सहेलियों के साथ एक ऑटो में सदर से स्कूल जाया करती थी। ऑटो ड्राईवर का नाम मुकेश था और उसकी उम्र 25 साल के लगभग होगी। वैसे तो मुकेश रोजाना हमें हमारे घर से लेता और स्कूल छोड़ता। मेरा घर सबसे पहले था इसलिए वो मुझे सबसे पहले लेता और स्कूल से आने के बाद छोड़ता भी सबसे बाद।

मुझे लगभग 20 मिनट उसके साथ अकेले ऑटो में बैठना होता था।

उस दिन जैसे ही ( www.indiansexstories.mobi ) मुकेश ने मुझे घर के बाहर उतारा तो मैंने उसे अपना बैग ऑटो के पीछे से उतार कर देने को कहा। मुकेश ने मुझे बैग तो दिया लेकिन इस तरीके से कि जब तक में बैग संभालूं वो मेरे दोनों बोबों को पकड़ चुका था। मुझे एकदम करंट सा लगा। यह तो सही है कि मैं चुदने को बेताब थी लेकिन इतनी भी नहीं कि एक ऑटो ड्राईवर ही मेरे से छेड़खानी की सोचने लगे।

मैंने एक चांटा उसके गाल पर रसीद किया और घर में भागकर चली आई।

घर आकर जब मैं संयत हुई तो मुझे महसूस हुआ कि मेरे दोनों बोबे बुरी तरह दुःख रहे हैं। मुकेश ने थोड़ी देर में ही उन्हें इतनी बेदर्दी से मसला था कि वो ढीले पड़ गए थे। मैंने तसल्ली से मुकेश के बारे में सोचा। वो एकदम काला लेकिन कसे हुआ बदन का मालिक था। ऑटो चलते समय भी वो किसी के ऑटो के एकदम सामने आ जाने पर माँ-बहन की गालियाँ दिया करता था।

अगले दिन मुकेश ने मुझसे निगाहे नहीं मिलाई लेकिन मैंने देख लिया था की वो पीछे देखने वाले शीशे से बार बार मुझे घूर रहा है।

उस दिन पापा ने मुझसे कहा कि वो दिन में मम्मी के साथ शोपिंग पर जायेंगे और अभिषेक भी देर से आएगा इसलिए घर पर 2-3 घंटे मुझे अकेले रहना पड़ेगा।

मैंने कहा- ठीक है, मैं रह लूंगी।

मेरे मन में तो यह चल रहा था कि आज घर पर कोई नहीं होगा तो मज़ा रहेगा। मैं सारे कपड़े उतार कर नंगी रहूंगी, भाई का जांघिया लूंगी, उसे अपनी चूत पर मसलूँगी और जमकर मस्ती करुँगी।

लेकिन उस दिन जो हुआ वो मेरी कल्पना से भी बाहर था। घर से कुछ दूर पहले ही मुकेश का ऑटो ख़राब हो गया।

मैंने मुकेश से कहा- जल्दी करो, आज घर पर कोई नहीं है और मुझे 2-3 घंटे घर पर अकेले रहना है, मुझे जल्दी से घर भिजवाने की व्यवस्था करो।

मुकेश ने एक ऑटो रोक मुझे बैठा दिया। मैं उस ऑटो में बैठ कर घर आ गई। घर आते ही मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और बिल्कुल नंगी हो गई। घर में आप अकेले हों और बिल्कुल नंगे हों तो मज़ा ही कुछ और होता है।

ReplyQuote
Posted : 13/01/2012 3:02 pm
 Anonymous
(@Anonymous)
Guest

मैंने शीशे में अपने आपको निहारा, हाय ! क्या प्यारे प्यारे स्तन हैं मेरे ! पतली कमर, चूत कमसिन सी, जिस पर रोयेदार बाल ! घूमी तो दोनों चूतड़ क़यामत ढाते हुए !

मैंने अपनी छोटी अंगुली चूत में घुसाना शुरू की तो चूत एकदम पनिया गई। मैं धीरे धीरे अंगुली चूत में करने लगी और गति बढ़ाने लगी। मेरे आनंद की कोई सीमा नहीं रही।

अचानक दर्वाज़े की घण्टी बजी तो मेरी तन्द्रा टूटी।मैंने जल्दी से निकर और टीशर्ट पहनी और दरवाजे पर आकर कहा- कौन है?

बाहर से आवाज़ आई- बेबी, मैं मुकेश ! आपका टिफिन ऑटो में रह गया था, वो देने आया हूँ।

मैंने दरवाजा खोला ही था कि मुकेश तेजी से अन्दर आया और उसने दरवाजा बंद कर लिया। मेरी समझ में कुछ आता इससे पहले मुकेश मेरे ऊपर झपटा और मुझे अपनी बाहों में ले लिया, वो कहने लगा- मादरचोदनी ! तूने मेरे को चांटा मारा था? तुझे बताता हूँ इसका नतीजा !

मुकेश तेजी से टीशर्ट के ऊपर से मेरे बोबों को मसलने लगा और कहने लगा- मुझे पता है कि तू 2-3 घंटे घर में अकेली है। आज तो मैं तेरा वो हाल करूँगा कि तू आगे से किसी को चांटा मारने से पहले सौ बार सोचेगी।

मैं समझ गई कि आज फिर से मेरी चूत का बाजा बजने वाला है लेकिन बाजा यह मुकेश बजाएगा, यह बात मेरे गले नहीं उतर रही थी। मैंने मुकेश का विरोध करने का फ़ैसला किया।

मैंने मुकेश से अपने बोबों को छुड़ाने की कोशिश की और उसके हाथ पर काट खाया। मुकेश तिलमिला उठा उसने मेरे गाल पर कस कर दो चांटे मारे और मेरे दोनों हाथ कसकर पकड़ लिए। उसने मुझे सीधा किया और अपने दोनों होठ मेरे होंठों पर रख दिए और उन्हें बेदर्दी से चूसने लगा।

मैं बेबस हो गई।

मुकेश अब तेजी से मेरे होंठों को तो चूस ही रहा था साथ ही वो दोनों चूचों को भी कसकर दबा रहा था। मुकेश के काले-काले होठ मेरे पतले-पतले गुलाबी होंठों का जमकर रस-स्वादन कर रहे थे।

मुकेश ने मेरी चूचियों को मसलते मसलते एकदम टीशर्ट को खींच दिया जिससे टीशर्ट फट गई और मेरे दोनों स्तन आज़ाद हो गए। अब तो मुकेश के हाथो में मेरे दोनों बोबे आ गए वो उनको और जोर से मसलने लगा और बीच बीच में मेरे चुचूकों को नोचने लगा।

मैं छटपटाने लगी। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ। अब मुकेश पर वासना का भूत तेजी से सर चढ़ कर बोलने लगा और उसने मेरी निक्कर भी खींच दिया। अब मैं उसके सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी।

चूत को देखते ही तो मुकेश पर और वहशीपन छा गया, वो कहने लगा- आज रांड तेरा वो हाल करूँगा कि तू और तेरी चूत रोजाना मुझ जैसे का लौड़ा मांगेगी।

मैंने फिर एक बार विरोध का फ़ैसला किया, मैं जमीन पर बैठ गई और अपना मुँह घुटनों में छुपा लिया। मुकेश ने मुझे जोर से धक्का दिया। धक्के से मैं जमीन पर सीधी लेट गई। मुकेश को मौका मिला और वो मुझ पर चढ़ गया। उसने फिर से 3-4 चांटे मेरे गाल पर मारे और जल्दी से मेरे दोनों बोबों को अपने मुँह में ले लिया और उन्हें तेजी से चूसने लगा। उसके चूसने का तरीका ऐसा था कि मुझे लगने लगा कि जैसे वो दूध निकाल लेगा। वो बार-बार मेरे चुचूकों को काट रहा था उसकी यह हरकत मुझे बेचैन करने लगी मेरे स्तनाग्र सख्त होने लगे और उसका असर चूत पर भी होने लगा। चूत अब गीली होने लगी थी, मुझे मेरी बेबसी पर तरस आने लगा की आखिर मेरी चूत इतनी जल्दी हथियार क्या डाल देती है।

ReplyQuote
Posted : 13/01/2012 3:03 pm
 Anonymous
(@Anonymous)
Guest

मुकेश को मौका मिला और वो मुझ पर चढ़ गया। उसने फिर से 3-4 चांटे मेरे गाल पर मारे और जल्दी से मेरे दोनों बोबों को अपने मुँह में ले लिया और उन्हें तेजी से चूसने लगा। उसके चूसने का तरीका ऐसा था कि मुझे लगने लगा कि जैसे वो दूध निकाल लेगा। वो बार-बार मेरे चुचूकों को काट रहा था उसकी यह हरकत मुझे बेचैन करने लगी मेरे स्तनाग्र सख्त होने लगे और उसका असर चूत पर भी होने लगा। चूत अब गीली होने लगी थी, मुझे मेरी बेबसी पर तरस आने लगा की आखिर मेरी चूत इतनी जल्दी हथियार क्या डाल देती है।

अब मुकेश उठा, उसने इधर उधर देखा और एक परदे को जोर से खींच उसकी डोरी निकाल ली, उसने मेरे दोनों हाथ पीछे किये और डोरी से बांध दिए। मुकेश अब खड़ा हुआ उसने अपने कपड़े उतारना शुरू किया। मैंने शर्म के मारे अपनी आँखें बंद कर ली।

थोड़ी देर में मुकेश मेरे सामने आया और बोला- आँखे खोल !

मैंने डर के मारे आँखे खोली तो दंग रह गई, सामने मुकेश का 10 इंच का लौड़ा किसी फन फहराते सांप की तरह लहरा रहा था। यही नहीं उसकी मोटाई को देखकर तो मैं दंग रह गई। उसका लौड़ा जीजू के लौड़े से लम्बा भी था और मोटा भी ! लेकिन जहाँ जीजू का लौड़ा गुलाबी था, वहीं इसका लौड़ा बिल्कुल काला !

मुकेश ने अपने लंड को मुझे इस तरह तकते हुए देखा तो वो बोला- चिंता मत कर ! इसके सारे उपयोग तेरे पर ही होंगे !

मुकेश ने मेरे बाल पकड़े और अपने लौड़े को बिल्कुल मेरे मुँह पर लाकर बोला- इसको चूस चूतमरवानी !

मैंने गर्दन हिलाकर मना किया तो उसने अपने लंड को जबरन मेरे मुँह में घुसा दिया, मेरा पूरा मुँह उसके लौड़े से भर गया, मैं उसका लौड़ा चूसने लगी।

मुकेश मेरे फ़ूले गालों पर थपकियाँ देता रहा और कहने लगा- तेरी चिकनी जांघों पर मेरी कब से नजर थी बहन की लौड़ी ! मैं तो कब से सोच रहा था कि तेरी चूत देखने को मिलेगी, कब अपना लंड उसमें घुसाने का मौका मिलेगा, मेरी छप्पन-छूरी ! आज तो तेरी चूत, तेरी गांड, तेरे बोबों के इतने मज़े लूँगा और दूंगा कि तू तो क्या, तेरी अम्मा भी मुकेश को याद करेगी।

मुकेश का लौड़ा चूसते चूसते मेरा हलक सूखने लगा था लेकिन मेरी चूत तरबतर हो गई थी और शरीर में एक अजीब सी उत्तेजना भर गई थी, मैंने मुकेश से कहा- मेरा हलक सूख रहा है !

मुकेश ने कुछ सोचा और फिर मेरे मुँह को कसकर पकड़ लिया और उसमे पेशाब की धार छोड़ दी।

न चाहते हुए भी मुझे मुकेश के लौड़े से पेशाब को पीना पड़ा।

अब मैंने सोचा कि चुदाई तो होनी ही होनी है ! तो फिर मज़े से ही क्यों नहीं करवाऊँ !

मैंने मुकेश से कहा- मेरे हाथ खोल दो ! तुम जैसा कहोगे, मैं वैसा ही करूँगी !

मुकेश ने मेरी आँखों में देखा, शायद उसने मेरी आँखों के वासना के डोरे पढ़ लिए और उसने मेरे हाथ खोल दिए। मैंने लपक कर मुकेश का लौड़ा लिया और अपने मुँह में भर लिया। मुकेश मेरे बालों से अठखेलियाँ करता रहा और मैं उसका लौड़ा चूसती रही। मुकेश मुझे अनवरत गालियाँ भी दिए जा रहा था- बहन की लौड़ी, रंडी की औलाद, गंडमरी चूस ! जोर से चूस ! निकाल ले इसका सारा माल और पी जा !

ReplyQuote
Posted : 13/01/2012 3:03 pm
 Anonymous
(@Anonymous)
Guest

थोड़ी देर में मुकेश ने अपना सारा वीर्य मेरे मुंह में छोड़ दिया, मैं गटागट सारा वीर्य पी गई, मुझे भी मस्ती चढ़ गई थी, मैंने मुकेश से कहा- बहन के लौड़े ! अब तू भी तो मेरी चूत का रस निकाल ! मुकेश ने मुझे जमीन पर लिटाया और अपनी जीभ मेरी चूत के दोनों होठों पर रख दी। मैं तो निहाल हो गई, मुकेश मेरी चूत को चूसने लगा, मैं मुकेश के सर पर हाथ फिराने लगी।

अब गालियाँ देने की बारी मेरी थी- ओ भाडू की औलाद, तेरी बहन की चूत में इतने लौड़े घुसें कि उसकी चूत में पूरा आगरा समा जाये ! तेरी माँ को पूरा देश चोदे ! तेरी माँ की चूत में गधे का लंड ! तेरी बहनों की चूत में कुत्ते का लौड़ा ! गांडू की औलाद, गांडू चूस ! चूस इस चूत के रस को !

मुकेश ने अपनी जीभ चूत के पूरे अन्दर तक घुसा दी थी। मुझे एसा लग रहा था कि दुनिया यहीं थम जाये !

मैं अब अपने चूतड़ों को थिरकाने लगी। थोड़ी देर में मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया और मुकेश सारे पानी को चाट गया जैसे कुत्ता हड्डी को चूसता है।

अब मुकेश ने मुझे उल्टा कर दिया, मैं समझ गई कि अब मेरी गांड का तबला बजने वाला है। मुकेश ने गांड में अंगुली डाली तो मैं चिंहुक उठी, मैंने कहा- भाडू धीरे धीरे कर !

उसने कहा- तू शकल से तो लगती नहीं है कि इतनी बड़ी छिनाल होगी? यह तो बता कि अपनी चूत किस से चुदवाई है?

मैं बोली- मेरे गांडू जीजा से !

वो बोला- अरे तेरी बड़ी बहन नीलम के पति से?

मैंने कहा- ठीक कहा !

मुकेश बोला- उस भाडू को भी कौन सा सील-पाक माल मिला है !

मैंने कहा- क्या मतलब?

उसने कहा= अरे कोई मतलब-वतलब नहीं ! तेरी बहन भी तो मेरे ऑटो में ही तो जाती थी, उससे मालूम कर लेना कि मुकेश का लौड़ा कैसा लगा?

ओ हो ! दीदी भी शादी से पहले अपनी सील तुड़वा चुकी थी? मैंने मुकेश से कहा- यह कब और कैसे हुआ?

उसने कहा- पहले तू आम खा ! अपनी दीदी के पेड़ बाद में गिनना !

मुकेश ने अब अपनी जीभ मेरी गांड में घुसा दी, मुझे बड़ा अजीब सा लगा। मैंने मुकेश से कहा- मेरी गांड से अपनी जीभ निकाल ! यह गन्दी जगह है।

मुकेश ने कहा- रानी, हम जिस से प्यार करते हैं, उसकी कोई चीज भी हमें गन्दी नहीं लगती।

ReplyQuote
Posted : 13/01/2012 3:03 pm
 Anonymous
(@Anonymous)
Guest

मैं उसकी बात सुनकर निहाल हो गई।

मुकेश की जीभ का स्पर्श मेरी गांड को बहुत अच्छा लग रहा था। वो मेरी गांड में जीभ फिरा फिरा कर इस तरह चूस रहा था कि मैं आपको भी सलाह देना पसंद करूँगी कि अपनी गांड में किसी मर्द की जीभ जरूर चटवाना ! आपकी गांड मस्त हो जाएगी।

मुकेश जब मेरी गांड को अच्छी तरह से चाट चुका, उसके बाद वो मेरे चूतड़ों को चूसने लगा, कई बार वो अपने दांत भी लगा देता।

मैं इतनी मस्त हो गई कि मैंने मुकेश से कहा- अगर गांड मारनी है तो जल्दी कर !

मुकेश ने कहा- तू घोड़ी बन !

मैं घोड़ी बनी ही थी कि मुकेश ने अपना लौड़ा मेरी गांड के मुँह पर लगा दिया और ठक ठक कर घुसाने लगा। मैं दर्द से तड़प उठी, मैंने कहा- मादरचोद, क्या गांड फाड़ेगा? पहले लौड़े को चिकना तो कर !

लेकिन उसने मेरी एक भी नहीं सुनी और वो अपना लौड़ा मेरी गांड में पेलता रहा। धीरे धीरे उसने पूरा लौड़ा अन्दर कर दिया और धक्के लगाना शुरू कर दिया।

मैं आनंद के सागर में डूब गई, मुकेश का लौड़ा मेरी गांड के अन्दर था तो उसके दोनों आंड मेरे चूत और चूत के बीच टकरा रहे थे।

मुकेश ने मेरे दोनों बोबों को सहारे के लिए पकड़ रखा था। हर धक्के के साथ छातियाँ खूब मसली जा रही थी।

मुकेश का लौड़ा मुझे गांड में ऐसा लग रहा था जैसे कोई जहाज समुन्दर को फाड़ता हुआ जा रहा हो। आप यह न समझ लेना कि मेरी गांड समुन्दर थी, बल्कि मुकेश का लौड़ा जहाज था।

15 मिनट तक मेरी गांड की मराई के बाद मुकेश के धक्के तेज हो गए, वो हांफने लगा और बुदबुदाने लगा- मेरी जान, तेरी गांड की खूबसूरती पर मैं कुर्बान !

मुकेश अब हर धक्के के साथ मेरी गांड को भी मसल रहा था, नोच रहा था, चुटकियाँ भर रहा था।

और फिर उसने अपने सारे लंड की मलाई यानि वीर्य मेरी गांड में छोड़ दिया। मेरी गांड में जैसे गरम गरम लावे का सैलाब आ गया हो ! मैं जमीन पर गिर गई और मुकेश मेरे ऊपर !

ReplyQuote
Posted : 13/01/2012 3:04 pm
 Anonymous
(@Anonymous)
Guest

मुकेश का लौड़ा मुझे गांड में ऐसा लग रहा था जैसे कोई जहाज समुन्दर को फाड़ता हुआ जा रहा हो। आप यह न समझ लेना कि मेरी गांड समुन्दर थी, बल्कि मुकेश का लौड़ा जहाज था।

15 मिनट तक मेरी गांड की मराई के बाद मुकेश के धक्के तेज हो गए, वो हांफने लगा और बुदबुदाने लगा- मेरी जान, तेरी गांड की खूबसूरती पर मैं कुर्बान !

मुकेश अब हर धक्के के साथ मेरी गांड को भी मसल रहा था, नोच रहा था, चुटकियाँ भर रहा था।

और फिर उसने अपने सारे लंड की मलाई यानि वीर्य मेरी गांड में छोड़ दिया। मेरी गांड में जैसे गरम गरम लावे का सैलाब आ गया हो ! मैं जमीन पर गिर गई और मुकेश मेरे ऊपर !

काफी देर तक हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे।

अब मेरी चूत की बारी थी, मैंने सोचा कि मुकेश थक गया होगा, मैं उसके लिए दूध लाती हूँ।

मैं उठने लगी तो मुकेश ने कहा- कहाँ जा रही हो?

मैंने बहाना बनाया कि मुझे जोर से पेशाब लगी है।

मुकेश ने कहा- मुझे भी लगी है ! आज हम दोनों साथ साथ पेशाब करते हैं !

मैं मान गई।

हम टॉयलेट में गए, मुकेश ने कहा- मेरे सामने खड़े होकर पेशाब कर !

मैंने अपनी चूत से खड़े खड़े ही पेशाब की धार छोड़ी, मुकेश मेरे सामने खड़ा रह कर मेरी जांघों से बह कर मेरे पेशाब की धार को देख रहा था। उसने मेरी जांघ के साथ चुल्लु बना कर अपने हाथ में मेरा मूत्र लिया और उसे मेरे चेहरे और मेरी चूचियों पर मल दिया। इससे मैं उत्तेजित हो गई और मैंने मुकेश का लौड़ा पकड़ लिया और उसे हिला हिला कर पेशाब करवाने लगी।

मुकेश ने मुझे बांहों में उठा लिया और बेड पर लाकर पटक दिया। उसने मेरी दोनों जांघें चौड़ी कर दी और मेरे ऊपर चढ़ गया।

मैंने भी उसे अपनी बांहों में समेट लिया।

मुकेश ने मेरे एक बोबे को अपने मुँह में दबा लिया और उसे चूसने लगा, दूसरे बोबे को उसने हाथ से पकड़ लिया और उसे मसलने लगा। बीच में अपने दोनों होठो से उसने मेरे गालों पर कई चुम्बन जड़ दिए, कई बार उसने गालों को काट भी खाया। उसका मूसल जैसा लौड़ा मेरी दोनों जांघों के बीच फंसा हुआ था और चूत में घुसने को बेताब था।

मैंने भी अपने दोनों हाथ उसकी कमर पर रखे हुए थे। कभी-कभी मैं उसके चूतड़ों पर भी हाथ फिरा रही थी और उसकी गांड में अंगुली भी कर रही थी। मेरे होंठ भी उसके होंठों से मिले हुए थे, चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी।

मुकेश अब मेरी चूत में लौड़ा घुसाने लगा लेकिन लौड़ा अन्दर नहीं जा रहा था, वो बार बार चूत के मुँह पर लौड़ा टिकाता और जोर से धक्का मारने की कोशिश करता लेकिन मेरी चूत छोटी होने के कारण लौड़ा बार बार फिसल जाता।

मुकेश अब नीचे झुका और उसने मेरी चूत के होंठों पर अपने होंठ लगा दिए, वो मेरी चूत को चाटने लगा, उसने अपनी जीभ मेरी चूत के अन्दर घुसा दी।

ReplyQuote
Posted : 13/01/2012 3:04 pm
 Anonymous
(@Anonymous)
Guest

मैं तो पागल सी हो गई, मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी, मैं उसे गालियाँ देने लगी- अरे मादरचोद ! धीरे धीरे चूस ! ओ भोसड़ी के ! ओ बहनचोद ! आ आ आ अरे मादरचोद, क्या सारा रस जीभ से ही निकलेगा? क्या ...भाडू अब तो लौड़ा खिला ! अपना सारा रस मेरी चूत में डाल दे मादरचोद ! मुझे अपने बच्चो की माँ बना दे !

मुकेश भी अपना सर चूत से हटाकर मेरे बोबों को मसल देता और कहता- मादरचोदी, चिंता क्यों करती है? अपने वीर्य से तेरे इतने बच्चे पैदा करूँगा कि जिन्दगी भर वो तेरे चूचे चूसते रहेंगे।

मुकेश अब उठा, उसने कहा- मेरे लौड़े को चूसकर चिकना कर !

मैंने लपक कर उसका लौड़ा अपने मुँह में लिया और उसको चूसकर गीला कर दिया।

मुकेश ने अब लौड़ा चूत के मुँह पर टिकाया और जोर से थाप मारी, लौड़ा आधे के करीब मेरी तंग सी फ़ुद्दी में घुस गया पर दर्द के मारे मेरी जान निकाल गई, मैं चीख उठी- अरे मादरचोद, मुफ़्त में चूत मिल रही है तो उसको बेदर्दी से चोद रहा है भेण के लौड़े ? धीरे धीरे कर !

पर मुकेश पर तो जैसे जूनून सवार हो गया हो, उसने तो तीन धक्के और जोर से मारे और पूरा दस इंच का लौड़ा मेरी चूत में घुसा दिया।

मैं तड़पने लगी लेकिन उसको इससे क्या !

उसने तो धक्के मारने शुरू किये तो रुका ही नहीं ! दे दनादन ! दे दनादन !

मेरी नाजुक कमसिन चूत की धज्जियाँ उड़ गई- फच फच फच फच से पूरा कमरा गूंज उठा।

कुछ ही समय में चूत ने भी अपने तेवर ढीले कर दिए और वो पूरे लौड़े को गपागप लेने लगी। मैं भी अब लौड़े की अभ्यस्त हो गई तो मैंने भी अपनी गांड को नीचे से हिलाना शुरू किया ताकि चूत और लौड़े का संगम अच्छी तरह से हो सके।

मुकेश मेरे ऊपर पूरी तरह छा गया था, मेरी चूत से तो जैसे पानी की गंगा बह रही थी, जो बह बहकर मेरी जांघों पर आ रही थी। मुकेश के धक्को से दो बार तो मैं झड गई लेकिन उसका धक्का मारना नहीं रुका।

मैं मुकेश से बार बार विनती करती रही- चोद चोद मादरचोद ! एक बार तो चूत को पानी पिला एक बार तो इसकी अग्नि ठंडी कर !

लेकिन वो तो जैसे मेरी पूरी परीक्षा लेना चाहता था, उसने अपने लौड़े का पानी चूत में छोड़े बगैर ही बाहर निकाल लिया।

मैंने कहा- क्या कर रहे हो?

उसने कहा- आज मैं तुझको हर तरीके से चोदूंगा !

यह कह कर उसने मुझे बैठा लिया और खुद भी बैठ गया, अपनी जांघें मेरी जांघों के बीच फंसा ली और लौड़े को फिर चूत में घुसा दिया।

ReplyQuote
Posted : 13/01/2012 3:04 pm
 Anonymous
(@Anonymous)
Guest

अब हम दोनों आमने-सामने थे, उसका लौड़ा तो वापस चूत में घुसा हुआ था, मेरे दोनों बोबे उसकी बलिष्ट छाती से टकरा रहे थे, चूमा-चाटी का सिलसिला अनवरत जारी था, उसने अपने दोनों हाथ मेरी गांड के नीचे टिका रखे थे जिससे वो गांड को सहला रहा था तो कभी कभी उस पर चिकोटी भी काट रहा था, कभी गांड में अंगुली भी कर देता तो मैं उछल जाती।

बीच बीच में वो बोबों को भी मसल देता, चुचूक तो इतनी घायल हो चुकी थी कि अगर मेरा बच्चा भी होता तो छः महीने में उसको दूध नहीं पिला पाती।

मेरी समझ नहीं आ रहा था कि मैं कैसे चुदक्कड़ औरतों की तरह लौड़ा खा रही थी। लेकिन एक बात तो मेरे समझ आ गई थी कि भगवान किसी लोंडिया की शादी चाहे उस पैसे वाले से नहीं करे जिसका लौड़ा चार इंच का ही हो, शादी उससे करे जिसका लौड़ा नौ इंच का हो और जो चूत का रोज बाजा बजाये।

मुकेश के लौड़े ने मेरी चूत को सुजा दिया था फिर भी उसका लौड़ा वीर्य रूपी प्रसाद छोड़ने को तैयार नहीं था।

मैंने सोचा कि मुकेश ऐसे नहीं मानेगा, मैंने उसको जोर से धक्का दिया और नीचे गिरा दिया, अब मैं उसके ऊपर चढ़ गई और अपनी चूत को उसके लौड़े पर टिका अन्दर घुसा लिया। अब मैं मुकेश पर सवार थी और धक्के लगाने लगी।

मुकेश ने मेरे दोनों बोबों को पकड़ लिया और उनकी मसला-मसली शुरू कर दी। मेरी गांड में उसकी झांटों के बल चुभ रहे थे जो मेरी गांड को अनूठा मजा दे रहे थे। मेरी चूत अब वीर्य को तरस रही थी ,मैंने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी और उत्तेजनावश जोर-जोर से चिल्लाने लगी- छोड़, मादरचोद छोड़ ! अब अपना पानी छोड ! अब मत तरसा ! मत तरसा मादरचोद ! जो तू कहेगा वो ही मैं करूँगी ! अपनी सब सहेलियों की चूत में तेरा लौड़ा डलवाऊँगी, तेरे लौड़े की हमेशा पूजा करूँगी ! तू जब कहेगा तेरा लौड़ा खाने आ जाऊँगी !

मुकेश भी अब पूरे जोश में आ गया था, उसने भी धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी और थोड़ी देर में ही मेरी चूत में वीर्य की ऐसी धार छोड़ी कि मैं निढाल होकर उस पर गिर गई। काफी देर तक मैं उसकी बांहों में पड़ी रही।

अचानक मुझे ख्याल आया कि काफी देर हो चुकी है और पापा मम्मी आने वाले होंगे।

मैंने मुकेश से कहा- अब तू चला जा !

मुकेश ने मेरे आठ-दस कस कर चुम्बन लिए और उठ खड़ा हुआ।

हम दोनों ने एक दूसरे को कपड़े पहनाये और फिर लिपट गए। दोनों ने वादा किया कि जल्दी ही हम फिर मिलेंगे, चुदाई करेंगे। मैं अपनी और सहेलियों को उसका लौड़ा खिलाने की व्यवस्था करूँगी और वो भी मेरे लिए उस जैसे नए लौड़े का इंतजाम करेगा।

इस तरह हम दोनों विदा हुए और मैंने आपको बताई अपनी कहानी एक बार फिर चुदी मैं।

ReplyQuote
Posted : 13/01/2012 3:04 pm
Page 1 / 2