मौजा ही मौजा
 

मौजा ही मौजा  

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 Anonymous
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मैं बाज़ार जाने के लिये घर से निकल पड़ी। मुख्य सड़क पर आते ही मैंने सिटी बस ली और उस भीड़ में घुस गई। वही हुआ जो मैं चाहती थी। बस में घुसते ही जवान लड़की को देख कर उसके बदन पर हाथ मारना आरम्भ कर दिया। सभी भैन के लौड़े, कोई मेरे चूतड़ों को दबा कर मुझे आनन्दित करता तो कोई मेरे कोमल स्तनों पर हाथ मार देता। कभी कभी तो बस के धक्कों में उनका लण्ड तक मेरे चूतड़ों से दब जाता था। ये हरामजादे मेरी गाण्ड क्यों नहीं मार देते। बस मुझे भड़काते रहते हैं। बस यों ही मस्ताती हुई मैं सब्जी मण्डी पर उतर गई।

सब्जी मण्डी में भी मैंने भीड़ वाली जगह ढूंढ ली और उसमें घुस गई। मेरा तन कईयों के बदन से रगड़ गया। किसी मनमौजी ने एक जगह तो मेरी चूंचियाँ तक भींच डाली। मैंने भी उसे पूरा मौका दिया। एक मीठी सी टीस उठ गई दिल में। मैंने उसे इधर उधर देखा, वो मुस्कराता हुआ मेरे पीछे ही नजर आ गया। फिर मैंने अपनी गाण्ड उसी की तरफ़ घुमा दी। फिर मैं सब्जी वाले के पास झुक कर चूतड़ों को उभार कर सब्जी लेने लगी। मेरी चूतड़ से एक के बाद एक कई लण्ड टकराये। कोई कोई तो दरार में दबा भी देते थे और ऐसे अन्जान बन जाते थे कि जैसे कुछ नहीं किया हो। इसी तरह से मैं बाजार में अक्सर मस्ताती थी।

फिर खूब उत्तेजित हो कर घर पर आ कर मैं हस्त मैथुन करके शान्त हो जाया करती थी। मेरी यह तरकीब बहुत सी बहनें जानती होंगी, पर मुझे पता है वो किसी को बतायेंगी नहीं। वैसे जिंदगी में मैंने बस एक बार अपने चचेरे भाई से चुदवाया था। भोसड़ी के ने रगड़ कर मुझे मस्त कर दिया था। उसी ने मेरी सील तोड़ दी थी। मैं उस समय नासमझ थी। बस भाव में बह गई और चुद गई। उसके बाद से मेरा वो चचेरा भाई कभी नहीं आया। पर मेरे मन में वो आग लगा गया, मुझे जवानी का मतलब समझा गया। अब भी चुदने की इच्छा बहुत होती है पर कोई चोदने वाला मिलता ही नहीं था। यह एक बहुत बड़ी मजबूरी थी।

आज शाम को मेरी सहेलियाँ घर पर आ गई और अगले दिन का पिकनिक का कार्यक्रम बनाने लगी। एक सहेली के बॉयफ़्रेंड ने अपने बंगले पर यह कार्यक्रम रखा था। उस दिन वो अकेला था। उसके घर वाले मुम्बई गए हुए थे। मैं बहुत खुश हो गई कि कल छुट्टी का दिन अच्छा बीतेगा। मेरे मम्मी पापा ने मुझे मंजूरी दे दी। यह उसका फ़ार्म-हाउस था। करीब दस किलोमीटर दूर था।

सहेली ने मुझे यह बता दिया दिया था कि वहाँ पर सभी लड़कियाँ खूब मस्तियाँ करेंगी। तो करे ना ! मुझे क्या, मेरा तो कोई बॉय फ़्रेंड है नहीं। अब्दुल, अनवर, युसुफ़ तो बाहर गए हुए थे किसी शादी में। स्वीमिंग पूल का आनन्द भी लेना था जो उसके पिछवाड़े में था।

सुबह सवेरे दो एयर कण्डीशन कार मेरे घर आ गई थी। मैंने एक जोड़ी कपड़े रखे और केजुअल ड्रेस पहन कर कार में आ गई। कार में सभी लड़कियाँ अपने-अपने बॉय फ़्रेंड्स के साथ थी। बस मैं और रोहित जिसका वो फ़ार्म-हाऊस था, बिना किसी जोड़े के थे। सभी गाने गाते और मस्ती करते हुए चल दिये। कुछ लड़कियाँ तो अपनी कमीज ऊपर उठा उठा कर अपने स्तन दिखा रही थी। कुछ चुम्मा ले रही थी। मस्ती का आलम था। उनके बॉय फ़्रेंड मस्ती में किसी के भी स्तन को दबा कर चीखते थे। मैं शरम के मारे एक तरफ़ बैठी थी। मन तो बहुत कर रहा था कि मैं भी खूब उछल कूद करूं, अपने सुडौल चूचों को दबवाऊं, पर मेरा कोई दोस्त भी तो नहीं था, जो ऐसा करता।

कुछ ही देर हम सभी रोहित के फ़ार्म हाऊस में आ गये। पूरे फ़ार्म में कोई नहीं था। अन्दर आकर हमने फ़ाटक पर ताला लगाया और शोर मचाते हुए घर में घुस गये।

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Posted : 11/01/2012 6:41 am
 Anonymous
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चाय नाश्ता करके हम सभी स्वीमिंग पूल की ओर भागे। सभी अपने अपने कपड़े फ़ेंक कर उसमे कूद पड़े। रोहित भी अकेला ही कूद गया। मैं अपने सलवार कुर्ते में दूसरी ओर जाकर एक बड़ी कुर्सी पर लेट गई। तभी रोहित पूल में से उछल बाहर आ गया। वो सिर्फ़ एक छोटी सी अन्डरवियर पहना हुआ था। जैसा कि आजकल लड़के पहनते है। वो पतली सी थी, बहुत छोटी सी थी। उसका कसा हुआ बलिष्ठ तन तराशा हुआ था। उसकी भीगी हुई टाईट अन्डरवियर में से उसका मोटा सा लण्ड और अन्य सामान फ़ूला हुआ सा साफ़ नजर आ रहा था। वो मेरे पास ही बड़ी कुर्सी सरका कर लेट सा गया। उसका भारी सा लण्ड उसकी अन्डरवियर में समा भी नहीं रहा था। उसके लाल सुपाड़े का अग्र भाग उसके पेट से लगा हुआ बाहर झांकता हुआ अपने दर्शन दे रहा था।

"बानो, वो सरदार है ना, तेजी इस टीम का भी सरदार है।"

"जी, यानि बॉस है?"

"हां, जो इस टीम का मेम्बर होता है इसकी एक विशेष परमिशन होती है, उसे प्राप्त करना होता है।"

"ओह, क्या करना होता है?"

"वक्त आने पर पता चल जायेगा। वैसे तुम इन लड़कियों जैसी नहीं हो।"

मैं सिर्फ़ हंस दी। मुझे उसके भीगे हुए लण्ड को देखना भा रहा था। पर नजर बचा कर ! कहीं रोहित देख ना ले। पर उसकी नजरें मुझसे अधिक तेज थी, वो ना सिर्फ़ मेरे भावों के उतार-चढ़ाव देख रहा था बल्कि मेरी नजरें भी वो भांप चुका था। इसी कारण उसला लण्ड धीरे धीरे सख्त होता जा रहा था। उसने बात सेक्स की ओर मोड़ दी।

"देखो बानो ! सभी कितना मस्त हो रहे हैं, वो देखो तो कैसे प्यार कर रहे हैं !"

मैं शरमा गई। मैंने देखा कि तभी एक जोड़ा हमारे बिल्कुल पास आकर ( www.indiansexstories.mobi ) पानी में चिपक कर खड़ा हो गया। उनकी कमर नीचे चल रही थी। मैं तो कांप गई। लग रहा था रवि रजनी को चोद रहा था। रजनी की कमर हिलने से पानी उछल रहा था। रवि के हाथ उसके स्तनों को मल रहे थे।

मैंने रोहित को देखा। वो हाथ हिला कर उन्हें बढ़ावा दे रहा था। तभी रोहित ने मुझे देखा। मैं उत्तेजना छिपाने के लिये उठ कर एक तरफ़ चल दी। वो माँ का लौड़ा रोहित भी उठ कर मेरे पीछे पीछे आ गया, मेरे कंधे पर हाथ रख कर बोला,"जानती हो, ये समझ रहे हैं कि तुम मेरे साथ हो, इसलिये सिर्फ़ दिखाने के लिये ही सही, मेरे पास आ जाओ।"

ये साला हारामी मुझे फ़ंसाने की कोशिश कर रहा है। साला यूं तो नहीं कि मुझ जैसी छिनाल में क्या शरम ! पकड़ कर अपना मस्त लौड़ा मेरी चूत में ठांस दे। बहुत शराफ़त दिखा रहा है मादरचोद।

"ओह, नहीं रोहित जी, मुझे शरम आती है।" मैंने भी उस चूतिये को अपनी नाटकबाजी दिखाई।

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Posted : 11/01/2012 6:41 am
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अरे बस यूं ही ! नाटक करना है।"

मुझे कुछ कहते नहीं बन पड़ा, साला ये तो मुझसे भी तेज निकला और फिर उसने जैसा कहा था वैसा करने लगी, मेरे दिल में भी तो उसका लौड़ा खाने की थी। उसने बस होंठ से होंठ मिला दिये। सभी ने यह देखा और हाथ हिलाया। मेरा मन विचलित हो रहा था। मुझे तो सब कुछ करने की इच्छा होने लगी थी। मैंने नीचे से अपनी चूत हिला कर उसे हल्का सा इशारा भी दिया।

अब गले से लग जाओ, थोड़ी सी बदतमीजी सह लेना।

जी !

ओह साला भड़वा, भेन चोद, ये तो मुझे तड़पाने लगा है।

उसने मुझे गले से लगा लिया और मेरे कोमल चूतड़ दबाने लगा। मेरा जिस्म पिघलने लगा। फिर उसने मुझे छोड़ दिया। मैं उसे देख कर और उत्तेजित होने लगी थी। मेरी चूत गीली होने लगी थी। मुझ जैसी रण्डी भी कुछ नहीं कर पा रही थी। हाय, कैसे लूँ इस गाण्डू का लौड़ा।

"बानो, इतना क्यूँ शरमाती हो, यह तो आजकल का दस्तूर है, ये शारीरिक सम्बन्ध तो अब जरूरत की श्रेणी में आता है, ये तो अब एक एन्जोयमेन्ट है।"

उसका गोरा लण्ड मेरी चूत के आस पास गुदगुदी मचाने लगा था। तेरी भेन की चूत, साला, मादरचोद, तो लण्ड घुसेड़ क्यों नहीं देता !

"बानो, देखो तुम्हारे अलावा सभी लड़किया पूरी नंगी हैं, तुम्हीं एक अलग सी लग रही हो, प्लीज ये ऊपरी कपड़े तो उतार ही दो !"

"मैं तो मर ही जाऊंगी, रोहित ! " मेरे मन में जैसे फ़ुलझड़िया छूट पड़ी। अब आया ना रास्ते पर।

"ऐसा कुछ नहीं होगा, वो सारी लड़किया शरमा रही हैं क्या, किसी को भी नंगेपन की परवाह नहीं है।"

मुझे लगा कि रोहित ठीक ही कह रहा है। मुझे भी तो चुदाने का अधिकार है ना। मैंने इधर उधर देखा और रोहित से आँखें चुरा कर अपने कपड़े उतारने लगी, अरे सच में, मुझे तो किसी ने भी नोटिस नहीं किया। मैं तो यूं ही घबरा रही थी। मेरी नीली छोटी सी पैंटी और पतली सी नीली ब्रा में मैं तो पटाखा सी लगने लगी थी।

"बानो, तुम तो गजब की हो, तुम्हारा शरीर तो मिस इण्डिया से भी खूबसूरत है, यहां तो देखो, कोई है तुमसा?"

रोहित ने तो अब अपनी वो छोटी सी अण्डरवियर भी उतार दी थी। अब उसका लण्ड फ़्री स्टाइल में सीधा खड़ा हुआ लहरा रहा था। इह्ह्ह, मस्त है साला, मजा आ जायेगा चुदवाने का।

"बानो पकड़ लो मेरा लण्ड और घूमो मेरे साथ !"

हाँ, यह हुई ना बात, मुझे भी अब बेशर्मी दिखाने का मौका मिला। मेरे दिल की रण्डी अब तड़प कर बाहर लगी थी। अब मेरी शरम कम होती जा रही थी। उसका कोमल पर कड़क लण्ड मैंने थाम लिया। मेरे दिल में कई सूईयाँ चुभने लगी। मैंने भी अपने सीने को उभारा और मैं इतरा कर उसके साथ साथ चलने लगी। वो भी अपना लण्ड पकड़ाये हुए आराम से पूल के किनारे किनारे चलने लगा। जाने कब मैंने भी उसके लण्ड को धीरे धीरे आगे पीछे करना शुरू कर दिया था। रोहित भी उत्तेजना में घिरने लगा था। सभी लड़कियों को चोदने में व्यस्त थे। आखिर मेरी सहन शक्ति जवाब दे ही गई।

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Posted : 11/01/2012 6:41 am
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"रोहित, अब बस करो, नहीं रहा जाता है !" मैं उतावली होकर कह उठी और उससे जोर से लिपट गई।

अब मैं उसके कठोर चूतड़ों को दबाते हुए नीचे बैठने लगी। कुछ ही क्षणों में उसका सुन्दर सा लण्ड मेरी आंखों के सामने था।

"ओह रोहित … रोहित, मुझे अपना लो, हाय अल्लाह मुझे ये क्या हो गया है !"

उसका लहराते हुए लण्ड को चूसने का लालच मैं नहीं छोड़ सकी। उसके मस्त कड़क लण्ड को मैंने अपने मुख में भर लिया। उसका नरम सुपाड़ा मुख में गुदगुदा रहा था। मैं उसे जोर जोर से चूसने लगी, यहां तक कि चप चप की आवाज भी आने लगी थी। रोहित मस्ती में झूम उठा। फिर जब बहुत चूस लिया तो उसने मुझे खड़ी कर दिया और खुद नीचे झुक गया। मेरी चूत के बराबर में आकर उसने मेरी पैंटी उतार दी। मेरी भीग़ी हुई चूत का रस उसने चाट लिया और मेरी यौवन कलिका को अपनी जीभ से हिला हिला कर मुझे मस्त करने लगा। मैं एक मस्त चुदैल रण्डी की तरह उसका सर पकड़ कर अपनी भोसड़ी हिला हिला कर उसे चटवा रही थी। मैं मदहोश सी हो कर झूम रही थी। बीच बीच में इधर उधर देख कर संतुष्ट हो जाती थी कि अधिकतर लड़के मेरी चूत चटाई को ध्यान से देख रहे थे। उनके मुझे इस तरह से देखने से मैं अपने आप को हिरोईन जैसा महसूस करने लगी थी। मेरी उत्तेजना तेज होती जा रही थी।

तभी पास पड़े गद्दे पर रोहित ने मुझे कमर से उठा कर लेटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गया।

"रोहित, क्या कर रहे हो?"

"कुछ नहीं बानो, अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें बहुत प्यार से चोद दूँ, बोलो?"

साला चोदेगा भी मुझे पूछ पूछ कर। मैं भला उस चोदू को क्या कहती। मैंने कुछ नहीं कहा, बस अपनी आँखें बन्द ली और आने वाले सुखदायी पलों का इन्तज़ार करने लगी। रोहित मेरे से लिपट गया। उसका भार मुझ पर बढ़ने लगा। तभी मुझे चूत में खूबसूरत सी, मीठी सी गुदगुदी हुई। मैं तड़प उठी। उसका मस्त लण्ड मेरी योनि में प्रवेश कर रहा था। मैंने अपनी दोनों टांगें चुदवाने के लिये ऊपर उठा ली और उसकी कमर से लिपटा दी। उसके भीगे होंठ मेरे नाजुक लबों पर आ गए और उसकी जीभ मेरे मुख में आकर कुछ तलाशने लगी।

मेरी चूत ने भी ऊपर उठ कर लण्ड लेने की भरपूर कोशिश की । नतीजा लण्ड की एक मधुर ठोकर पड़ी मेरी बच्चेदानी पर । अब रोहित मेरी चूत पर आगे पीछे घर्षण करने लगा था। मेरा तन पसीजने लगा था। उसके मनोहर धक्कों ने मुझे मदमस्त कर दिया और मैं अपना होश खो बैठी। मुझे होश जब आया जब मैं झड़ी थी। रोहित ने भी तभी अपना वीर्य त्याग दिया था। रोहित अब खड़ा हो गया था। मैं भी खड़ी हो गई थी।

मैंने देखा कि सभी मुझे देख रहे थे, कुछ तो हाथ से लण्ड की शेप बना बना कर उसे हिला हिला कर मुझे चुदाने की दावत दे रहे थे। मुझे यह देख कर मन में उत्साह की तरंगें उठने लगी। मैं वैसे ही नंगी पूल में उतर गई। अन्य लड़कियों की तरह नंगी होकर मैं भी तैरने लगी। बहुत सुहाना सा लग रहा था। कहाँ मैं अपनी वासना तृप्ति के लिये भीड़ में अपने तन को घिसवाती थी। यहां तो कोई बन्धन नही, सभी कितने अच्छे हैं।

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Posted : 11/01/2012 6:42 am
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तभी तेजी सरदार पीछे से आया और मेरी पतली कमर थाम ली।

"नई सदस्या का स्वागत है !"

उसने मेरी गाण्ड से चिपकते हुए कहा। उसका मोटा लण्ड मेरी गाण्ड से चिपक चुका था। सरदार लोग मुझे वैसे ही बहुत अच्छे लगते थे। खास कर उनकी सेक्स अपील बहुत प्यारी होती है।

"धन्यवाद तेजी, पर मेरे पीछे तुम क्या कर रहे हो?"

"तुम्हें पक्की सदस्या बना रहा हूँ, और क्या !" उसका सख्त लण्ड मेरी गाण्ड को खोलने की कोशिश कर रहा था।

मुझमें सनसनी सी छा गई। अब गाण्ड चुदेगी मेरी ! ये लोग कितना ख्याल रखते है सबका। मेरा मन खुश हो गया। मैं उसकी सहायता करने लगी। कुछ देर में पानी के भीतर मेरी गाण्ड में उसका लण्ड घुस गया था।

तेजी ने जोर से सभी को पुकारा,"हमारी नई मेम्बर शमीम बानो जी !"

सभी का ध्यान मेरी ओर आ गया। सभी आस पास झुण्ड बना कर कोई तैर रहा था तो कोई किनारे पर आ कर पानी में ही मुझे निहारने लग गया था।

"ये देखो, मेरा लण्ड इसकी गाण्ड में भीतर चला गया है, इसे बधाई दो !"

उफ़्फ़, ये क्या, अब तो सबने देख लिया, ओह मां, चुदाते देखते तो साधारण बात थी पर गाण्ड मराते हुए देख लिया। ओह मैया री, ये तो सब जाने क्या सोचेंगे। एक नम्बर की चुदक्कड़ होते हुए भी शरम के मारे मैं तो मर ही गई थी।

तभी सबने कहा,"तेजी, मारो उसकी गाण्ड मारो, बना लो मेम्बर उसे !" ओह तो क्या यहाँ गाण्ड मार कर मेम्बर बनाया जाता है।

आह मुई ! मैं मर क्यों नहीं जाती। उसका लण्ड जैसे मेरे तन को फ़ाड़ने लगा। मेरी चीख निकल गई। वो बेदर्दी से गाण्ड मारता रहा। मुझे उतना दर्द नहीं हुआ जितना मैं चीखी थी। पर मुझे लगा कि सभी को मेरा चीखना अच्छा लग रहा है। सो मैं अब जान कर बिना दर्द के ही जोर जोर चीखने लगी। तब तक चीखती रही जब तक तेजी झड़ नहीं गया। सभी मेरी कष्टमय चुदाई को देख देख कर खुश हो रहे थे। लड़कियाँ तो खुशी के मारे चीख रही थी मेरी गाण्ड फ़ाड़ चुदाई देख कर।

मुझे तो गाण्ड चुदाने में भी बहुत आनन्द आ रहा था पर मैं सब कुछ समझ रही थी। यानि चुदाओ तो जोर जोर से ! खुशी की सीत्कारें भरो और गाण्ड चुदाओ तो चीखो, चिल्लाओ जैसे बहुत कष्ट हो रहा हो।

हम सभी लन्च के लिये एक बन्द हॉल में बड़े से गद्दे पर नंगे ही गए थे। वहाँ अब दारू, बीयर का दौर चलने वाला था। मैंने भी अपने लिये एक बीयर मंगवा ली। मुझे बीयर बेहद स्वादिष्ट लगती है। लगभग आधे घण्टे में ही सभी नशे में मस्त हो गए थे।

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Posted : 11/01/2012 6:42 am
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"अरे नई मेम्बर कहाँ है यार, चलो उसे तो चख लें !"

मेरे पास सबसे पहले आने वाले में विकास था। उसने मुझे कमर से पकड़ लिया और चूमने चाटने लगा। तभी पीछे से राहुल लिपट गया। मैं बहुत मस्ताने लगी थी। नशे में इन सब कामों में बहुत मजा आ रहा था। तभी जाने कब मुझे नीचे गद्दे पर गिरा दिया। विकास ने मुझे ऊपर लेकर मुझे कहा,"बानो आज मुझे चोद दे यार, दिल की हसरत निकल जायेगी।"

"ओह तो यह बात है !" मैंने उसके तने हुए लण्ड पर अपनी कोमल चूत रख दी और उसका लण्ड भीतर घुसा लिया। अब मैं उस पर झुक गई उसे चोदने के लिये। तभी मेरी गाण्ड में राहुल का लौड़ा प्रवेश कर गया।

आह ! मैं दोनों ओर से चुदने लगी। हाय मेरे अल्लाह, मुझे ये कहा जन्नत में ले आया। शायद जन्नत होती होगी तो कुछ ऐसा ही होता होगा। बहुत देर तक मस्ती से चुदती रही। जब वे दोनों मस्त हो कर अपना वीर्य त्यागने लगे तब मेरी तन्द्रा टूटी।

लंच लग चुका था। सभी खाने के बाद अब थक कर सोने लगे थे। मुझे भी बहुत शांति की नींद आ गई। मेरी नींद खुली तब मेरे ऊपर ताहिर और शब्बीर चढ़ चुके थे। ओह ये इतना मोटा लण्ड बहुत सख्त है यार !

"अरे कौन, ओह ताहिर, यार जरा प्यार से, तेरी आपा जैसी हूँ ना !" मेरी बात सुन कर वो मुस्कराने लगा।

फिर एक दौर और चल गया। सो कर सभी तरोताजा हो गए थे और लगे थे फिर से चुदाई में।

गाड़ी शहर की ओर चल दी थी। सभी अत्यन्त सभ्य तरीके से बैठे थे। कोई नहीं कह सकता था कि अभी ये ही सब वासना के खेल में खूब चुद रहे थे।

"हां भाईयों और बहनों !"

सभी ने अपना मुख दबा लिया और हंसने लगे।

"अगला कार्यक्रम हमारे नई मेम्बर बहना शमीम बानो प्रस्तावित करेगी।"

"बताऊं, वो विकास भैया के फ़ार्म हाउस पर !" विकास ने मेरी ओर देखा और मुझे आँख मार दी।

"विकास। बोलो ठीक है, और यह आंख मारना मना है।"

"जैसा बानो बहन ने कहा है वैसा ही होगा !" विकास झेंप सा गया।

गाड़ियाँ एक होटल के आगे खड़ी हो गई। हमारा रात्रि-भोज यहीं पर था। खाना खाते खाते रात के नौ बज गए थे। अन्त में सभी लड़कियों को दस दस हजार रुपये लड़कों को भरपूर सहयोग देने के लिये दिये गए थे और ये राशि हम लड़कियों को उनकी ओर से मनपसन्द गिफ़्ट लेने के लिये दी गई थी। धन्यवाद के साथ हम सब विदा हुए।

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Posted : 11/01/2012 6:42 am
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Posted : 11/01/2012 6:42 am