विधवा महिला की गांड...
 

विधवा महिला की गांड मारकर उसका बुखार ठीक कर दिया  

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मेरा नाम अमित है और मैं चंडीगढ़ का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 30 वर्ष है। मेरे घर में मेरे माता-पिता और एक बड़े भैया हैं। मेरे भैया की शादी अभी तक नहीं हुई है और मेरे पिता एक अधिकारी हैं जो कि चंडीगढ़ में ही पोस्टेड हैं और मेरे भैया भी एक अच्छे पद पर हैं। मैं भी एक कंपनी में ही जॉब कर रहा हूं और हम तीनों सिर्फ छुट्टी के दिन ही मिल पाते हैं। मेरे पापा बहुत ही सख्त किस्म के व्यक्ति हैं। उनके सामने हम में से किसी की भी बोलने की हिम्मत नहीं होती क्योंकि हम सब लोग उनसे बहुत डरते हैं। मेरी मां भी एक ग्रहणी है जो सिर्फ घर का ही काम करती हैं और वह भी मेरे पापा की बात में हां में हां मिलाती है और उसके आगे उन्होंने आज तक कुछ नहीं कहा। मेरे घर में मेरे दोस्त भी नहीं आते क्योंकि वह मेरे पापा से बहुत ही डरते हैं इस वजह से वह मेरे घर पर नहीं आते। यदि कभी कोई मेरे घर गलती से भी आ जाये तो मेरे पापा उस पर सवालों की बौछार कर देते हैं और उससे उसके घर की सारी जानकारियां निकाल लेते हैं और उसे समझाने लग जाते हैं, इस वजह से मेरे सारे दोस्त मेरे पापा से मिलने से बचते रहते थे और वह कहते थे कि तुम्हारे पापा बहुत ही खतरनाक किस्म के व्यक्ति हैं।

मैं कहता था कि मैं तो उन्हें बचपन से ही देख रहा हूं, वह इसी प्रकार के हैं इसलिए अब मुझे उनके साथ रहने की आदत सी हो गई है। मेरे ऑफिस का दोस्त एक दिन मुझे एक महिला से मिलाता है, वह शादीशुदा होती है उसका नाम गीता है। मुझे उसे देखकर बहुत ही अच्छा लगता है लेकिन मैं उससे ज्यादा बात नहीं करता और उससे हम लोगों की कम ही बात हुई। फिर मैं अपने ऑफिस चला गया। एक दो बार मेरी गीता के साथ मुलाकात हो चुकी थी। जब मुझे उसके बारे में पता चला तो मुझे भी बहुत बुरा लगा। उसके पति और उसका डिवोर्स होने वाला था। उसकी उम्र भी 35 वर्ष की होगी और जब मैंने एक दिन गीता से इस बारे में पूछा तो वह कहने लगी कि मेरे पति और मेरे बीच में बिल्कुल भी बनती नहीं है क्योंकि वह बहुत ही सख्त किस्म का व्यक्ति हैं और मुझे वह कुछ भी नहीं समझते। मैंने उसे कहा कि तुम्हें इस बारे में घर पर बात करनी चाहिए थी। वह कहने लगी कि मैं उनसे इतने वर्षों से बात ही कर रही हूं लेकिन उनकी समझ में कुछ भी नहीं आता और वह सिर्फ अपने काम में ही लगे रहते हैं।

वह ना तो रात को घर समय पर आते हैं और ना ही मुझे कहीं घुमाने के लिए अपने साथ लेकर जाते हैं। इस बात से मैं बहुत ही परेशान हो चुकी हूं और कई बार तो मैंने उन्हें कई महिलाओं के साथ भी देखा था। उनके संबंध और महिलाओं के साथ हैं इस वजह से मुझे उनके साथ रहना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। शुरुआत में तो हम दोनों एडजस्ट कर ही रहे थे लेकिन अब हम दोनों के बीच में बहुत ही झगड़े होने लगे हैं इसलिए मैं उन्हें डिवॉर्स देने की सोच रही हूं लेकिन वह मुझे डिवोर्स लेने को तैयार नहीं है और कहते हैं कि तुम मुझे डिवोर्स नहीं दे सकती। मुझे उनके साथ रहना बिल्कुल भी पसंद नहीं है। मैंने गीता से पूछा कि तुम्हारे बच्चे कहां रहते हैं। वह कहने लगी कि वह मेरी मां के साथ ही रहते हैं क्योंकि मेरे पति उन पर बहुत ही गुस्सा होते हैं और कभी तो हाथ भी उठा देते हैं इस वजह से मैंने उन्हें अपनी मां के पास ही भेज दिया है और वह मेरी मां के साथ बहुत खुश हैं। वही उनका ध्यान रखती है और मैं जॉब कर के अपना खर्चा चलाती हूं। मैंने जब उनसे पूछा क्या आपके पति आपको घर खर्चे के लिए पैसे नहीं देते। तो वो कहने लगी कि नहीं, उन्होंने मुझे कई सालों से कुछ भी पैसा नहीं दिया है, मैं ही घर का खर्चा उठा रही हूं, वह सिर्फ अय्याशी करते रहते हैं। उन्हें अपने कामो से ही फुर्सत नहीं है इसलिए वह सिर्फ अपनी लाइफ पर ही ध्यान देते हैं। अब मैं उनसे ज्यादा ही परेशान हो चुकी हूं। गीता और मेरे बीच में बाते बढ़ने लगी और मुझे भी उसकी तरफ एक लगाओ सा होने लगा। मेरा लगाओ उसकी तरफ कुछ ज्यादा ही हो गया था और मुझे ऐसा लगता था कि मुझे उससे प्यार हो गया है लेकिन मैं डर भी रहा था यदि यह बात मेरे पिता जी को मालूम चली तो वह मुझे घर से ही निकाल देंगे लेकिन मैंने उन्हें इस चीज का आभास नहीं होने दिया और मैं गीता से फोन पर बात कर लिया करता था और वह भी मुझसे मिलती रहती थी। एक दिन मैंने गीता से अपने दिल की बात कह दी और उसे मैं कहने लगा कि मैं तुम्हें अब पसंद करने लगा हूं। वो कहने लगी कि तुम इस तरीके से मुझसे बात मत किया करो क्योंकि मैं नहीं चाहती कि मैं अब किसी के साथ भी रिलेशन में रहूं। मैं अब अकेले ही रहना चाहती हूं मुझे अकेला रहना ही पसंद है। मैंने उसे कहा कि तुम इस प्रकार की बात क्यों कर रही हो। वो कहने लगी कि अब मुझे किसी भी रिलेशन में नहीं पड़ना और मैं अकेली ही रहना चाहती हूं लेकिन हम दोनों के बीच में फिर भी बातें हो रही थी और हम दोनों अक्सर घूमने भी चले जाया करते थे। जब हम दोनों साथ में होते तो हम दोनों बहुत ही अच्छा समय बिताते थे और मुझे भी उसके साथ समय बिताना बहुत अच्छा लगता था।

एक दिन वह मुझे अपने बच्चों के पास मिलाने के लिए लेकर गयी। जब मैं उसके बच्चों से मिला तो मुझे उन्हें देख कर बहुत ही अच्छा लग रहा था और मैं उनके लिए गिफ्ट भी लेकर गया था। मैंने जब उन बच्चों को गिफ्ट दिया तो वह भी बहुत खुश हुए उसके बाद जब मैं गीता की मां से मिला तो वह भी बहुत दुखी थी और कह रही थी कि यह हमारी एकलौती ही लड़की है। उसके बावजूद भी उसके पति ने उसके साथ बहुत ही बुरा बर्ताव किया है। उसने इसे बीच रास्ते में ही छोड़ दिया है और अब इसे इतना संघर्ष करना पड़ रहा है। इसे बहुत ही समस्या होती है लेकिन यह किसी को भी नहीं बोलती। जब मैंने उसकी मां से यह बात सुनी तो मुझे भी वाकई में लगने लगा कि वह तो बहुत ही संघर्ष कर रही है और उसे किसी का साथ चाहिए। मैं उसे अपना साथ देना चाहता था लेकिन वह अकेले रहने की जिद कर रही थी और कहने लगी कि मैं अकेले ही रहना चाहती हूं।

मैंने उसकी मां से भी इस बारे में बात की और कहा कि मैं गीता के साथ अपना जीवन बिताना चाहता हूं लेकिन गीता इस बात को टाल देती है। उसकी मां कहने लगी कि उसे बहुत ही दुख हुआ है अपने रिलेशन को लेकर, इसलिए वह किसी से भी अब बात नहीं करना चाहती और ना ही इस बारे में किसी से बात करती है। मुझे गीता की मां से मिलकर बहुत ही अच्छा लगा। वह एक समझदार महिला थी और उन्होंने कहा कि यदि मैंने यह शादी नहीं करवाई होती तो शायद आज गीता की जिंदगी बर्बाद भी नहीं होती, यह सब मेरी गलती की वजह से ही हुआ है। गीता ने अरेंज मैरिज की थी इसलिए उसकी मां अपने आप को दोषी ठहरा रही थी। मैंने उन्हें कहा कि आप अपने आप को दोषी क्यों ठहरा रही है, यह हो तो गीता के पति की समझ है वह इससे किस तरीके से बर्ताव करते हैं। हमारी काफी बातें हुई। उसके बाद मैं अपने घर चला गया और जब मैं अगले दिन गीता को मिला तो वह बहुत ही दुखी थी और कहने लगी कि अब मैं अपने लिए कोई घर देख रही हूं। मैंने उसे कहा कि तुम अपने लिए कहा घर देख रही हो। तो उसने मुझे लोकेशन बताया और मैंने उसके लिए उस एरिया में घर ढूंढ लिया। वह बहुत ही खुश हुई जब मैंने उसके लिए घर देख लिया और वह मुझे कहने लगी कि तुम मेरा बहुत ही साथ दे रहे हो। जब उसने यह बात कही तो मुझे भी लगने लगा कि उसके दिल में भी मेरे लिए कुछ चल रहा है लेकिन वह अपने मुंह से कहना नहीं चाहती थी। हम लोगों ने वहां पर सारा सामान शिफ्ट करवा दिया।

जब मैं अगले दिन गीता के घर पर गया तो वह लेटी हुई थी मैंने उसे कहा कि तुम ऐसे क्यों लेटी हुई हो। वह कहने लगी मेरी तबीयत खराब है मैंने जैसे ही उसके हाथ को पकड़ा तो वह बहुत गर्म हो रखी थी। गलती से मेरा हाथ उसके स्तनों पर लग गया मैंने उसके स्तनों को दबा दिया। जब मैंने उसके स्तनों को दबाया तो वह मचल उठी और मैंने बड़ी जोर से उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया। जैसे ही मैंने उसके होठों को अपने होठों में लिया तो वह पूरे मूड में आ गई और उसने अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया। मैंने उसके पूरे कपड़े उतार दिए उसका शरीर बहुत गर्म हो रखा था क्योंकि उसे बुखार भी था और वो पूरी उत्तेजित भी हो चुकी थी। मैंने उसकी योनि को चाटना शुरू किया मुझे बहुत अच्छा लग रहा था वह अब भी पूरी जवान थी।

मैंने बहुत देर तक उसकी चूत को चाटा उसके बाद मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह के अंदर समा लिया। मैं उसके स्तनों का रसपान कर रहा था मैंने उसे उल्टा लेटा दिया और उसकी गांड को चाटने लगा। मैंने जब उसकी गांड को चाटा तो उसे बहुत अच्छा लगा। मैंने धीरे से उसकी गांड के अंदर अपने लंड को डाल दिया और जैसे ही मेरा लंड उसकी गांड में घुसा तो वह चिल्ला उठी उसे दर्द होने लगा। मैं धीरे-धीरे से धक्के मार रहा था और उसके गले से उतनी तेज आवाज निकल रही थी। उसकी गांड से खून भी निकल चुका था मैं उसे अब ऐसे ही धक्के मार रहा था। थोड़ी देर मे वह पूरे मजे मे आ गई और अपनी गांड को ऊपर करने लग गई। मुझे अच्छा लगने लगा लेकिन गीता से नहीं जा रहा था और उसकी गांड से गर्मी बाहर निकल रही थी उन्ही झटकों के बीच में उसकी गांड मे मेरा माल गिर गया। मैंने उसकी गांड से अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके मुंह के अंदर डाल दिया। वह बहुत अच्छे से मेरे लंड को चूसने लगी कुछ देर उसने ऐसे ही चूसा उसके बाद मेरा वीर्य उसके मुंह में ही गिर गया। उसने वह सब अपने अंदर ही ले लिया।

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Posted : 17/07/2019 7:07 am