सेक्सी लड़किया
 

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 Anonymous
(@Anonymous)
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आज मेरा रिजल्ट आने वाला था, मेने बहुत मेहनत की थी इस पेपर के लिए जब सुबह घर में न्यूज -पेपर आते ही में दोड़ पड़ा और पेपर में देखने लगा, में फोरेस्ट अधिकारी की पोस्ट पर सलेक्ट हो गया था, उसमे १० दिन बाद मुझे अपने पुरे कागजो के संग फोरेस्ट कार्यालय में उपस्तिथ होना था, मेरे पुरे परिवार वाले खुस थे .. आखिर मेरी मेहनत रंग लायी थी,
निशचित दिन में कार्यालय में अपने डोकोमेंट के साथ वहा गया और सभी पेपर कार्यवाही के बाद मुझे राजस्थान सरिस्का नेशनल पार्क में जोनिंग मिली,
...
घर आकर मेने अपना सामान पैक किया और निकल पड़ा, अपनी मंजिल पर मुझे दुसरे दिन ही जोइनिंग (रिपोर्ट) करना था,
में तो अपने बारे में बताना ही भूल गया, में रूध्र शर्मा, उम्र २५ साल राजस्थान के छोटे से गाव (माहावा) से मुस्किल से मेरे गाव में ६० घर हे,
.
दुसरे दिन निशचित समय पर पहुच गया कार्यालय और रिपोट कर जोनिंग की ऑफिस की तरफ से मुझे जंगल में ही एक अच्छा सा क्वाटर (घर) मिल गया , रूम की साफ़ सफाई के लिए एक नोकर मिला था, मामराज जो पास में किसी गाव का रहने वाला था, और रोज अपनी साइकिल से आता जाता था जॉब पर मेरे से उम्र में वो कोई ५ साल ही बड़ा होगा उसकी शादी को हुए २ साल हो गए थे लेकिन उसको कोई बच्चा नहीं हुया था, वो ५-७ रोज में मेरे से बहुत खुल गया था, में ऑफिस जाता और आता वो मेरी हर-तरह से हर जरूरत का ख्याल रखता था , वो मुझे जंगल की भूतो वाली कई बार कहानिया कह देता, जो उसने अपने दादा और गावो से सुन रखी थी, में उसकी बातो को हसी में उड़ा दिया करता क्यों की मेने कभी कोई ऐसी वाकया मेरे साथ नहीं हुआ था आज तक इस लिए मुझे उन बातो पर विस्वास नहीं होता, ऐसे करते करते पता ही नहीं चला और एक महिना गुजर गया जॉब करते हुए,
आज सुबह जब उठा तो मामराज अपनी पत्नी के साथ आया था, उसकी पत्नी घाघरा,चोली, लुघ्ड़ी(पोमचा) पहने हुए थी उसने अपना चहरे पर पोमचा ओढ़ रखा था, जिसे मुझे उसका चहरा नहीं दिख रहा था, उसने अपना नाम कमली बताया, शरीर से वो भरी हुयी लग रही थी , उसका बदन देखते ही मेरे शरीर में उसको पाने की इच्छा जाग गयी
में उसको देख ही रहा था की मामराज बोला साहिब ये हमरी जोरू हे, आज से आप का खाना ये बना दिया करेगी .. मेने उसे पूछा तुम कही जा रहे हो क्या, वो बोला साहब मुझे १० दिन के लिए कही बाहर जाना हे , इस लिए ये मेरी जगह आप का काम यह कर दिया करेगी, आप बड़े साहब को मत बोलियेगा नहीं तो में नोकरी चली जायेगी, मन में सोचा वाह बेटा रुध्र तेरी तो लोटरी निकल गयी हे, मेने कमली को देखते हुए उसको कहा ठीक हे लेकिन तुम जल्दी आने की सोचना और हा इसको पूरा काम समजा दिया हे ना, हा साहब हा , आप की सेवा में कोई कमी नहीं रहेगी, में बोला ठीक हे , वो उसको व्ही छोड़कर चला गया, कमली को मेने अन्दर आने के लिए कहा, और बोला मुझे काहे श्रम कर रही हो में तो तुम से छोटा ही हु, मेरे से केसा पर्दा, वो बोली साहब हमारी बिरादरी में पराये मर्द के सामने बिना पर्दा जाना मना हे,
मेने धीरे से कहा ...........
जानम काहे करती हो सरम..
कही फुट ना जाए, हमारे मुन्ना के कर्म,
उसने बोला साहब आपने कुछ कहा, मेने बोला नहीं हा तुम जल्दी से खाना बना दो में ऑफिस से आज सीधे जंगल के लिए भी निकलना हे ,
वो मेरी बात सुन कर किचन में चली गयी और अपना काम करने लगी,
में नहाने चला गया, जब वापस आया तब तक उसने खाना बना लिया था, वो बोली साहब खाना डाल दू, मेने हां बोल दिया .......
खाना डालते समय मेने उसका हाथ छू लिया, दिल की रफ़्तार तो जेसे ४२० की करंट लगने से ............. दोड़ने लगी थी ...
धक-धक-धक -धक-धक-धक -धक-धक-धक -धक-धक-धक -धक-धक-धक -...........
जब मेरी नजर उसकी चोली में से निकल रही गोलियों पर गयी , मानो में तो स्वर्ग जाने वाला ही था ....
अचानक उनसे बोला साहब खाना खा लीजिए वरना ठंडा हो जाएगा, मेने धीरे से बोला यहाँ खाना खाने की किस को पड़ी हे ,,,,, यहाँ तो नजर से ही पेट भर गया हे ....
में बोला ठीक हे में खा लुगा तुम और दुसरे काम कर लो, ठीक हे साहब वो बोल कर चली गयी ,
केसे जेसे मेने खाना खाया और उसको घर के सारे काम करने के लिए बोल कर जल्दी से ऑफिस निकल गया ...
ऑफिस पहुचकर जल्दी से अपना काम किया और ड्राइवर को साथ लेकर ओपन जिप से जंगल देखने चला गया ..........
जंगल का मोका मुआयना करने के बाद सीधे घर चला गया ....................
कमली अपना काम कर के घर चली गयी थी , थकान के कारण खाना खाते ही मुझे नीद आ गयी .............
अचानक मुझे सामने जंगल की तस्वीरे सामने चलने लगी, मुझे ऐसा लग रहा था, जेसे मेरा कोई पीछा कर रहा था,
मुझे बचा लो . मुझे बचा लो ...
ये मुझे मार देगा .......
ऐसी आवाजे मुझे सुनाई दे रही थी ..
अचानक मेरी आखे खुल गयी, मुझे सपना आया था, में पूरा पसीने में भीग गया था ,
खड़ा होकर पानी पीया और फिर सो गया ..........
ये सोचकर कल कमली के संग कुछ बाते करुगा, और अपने मुन्ना (बबलू) के लिए कोई जुगाड़ तो कर ही लुगा ....................
रात को पहले तो सपने के कारण, फिर कमली की यादो ने सोने नहीं दिया, कल सन्डे था, सो जल्दी उठने का टेंसन भी नहीं था, रात को गर्मी लगने के कारण में केफ्री में ही सो गया था उसके निचे भी कुछ नहीं पहना था, आज कमली जल्दी आ गयी थी, वो चाय बनाकर दे गयी थी, मेने चाय पि और फिर सो गया, फिर वो घर के काम करने लगी, जब कमली रूम में झाड़ू मारने आई तब में सीधा सोया हुआ था, सुबह आप सब को तो पता ही हे, अपने मुन्ना जी पुरे सबाब पर खड़े रहते हे, एक तो प्यारी नींद और ऊपर से मुन्ना में मूत्र विसर्जन का जोर दोनों ही अपनी जंग लड़ते रहते हे, सफाई करते करते कमली की नजर बार बार हमारे मुन्ना जी से टकरा ही जाती किसने सच ही कहा हे ओरत की जिज्ञाषा और उसकी मुनिया में शांति कमी नहीं मिलती, उसने टाइम देखा और सोचा आज साहब को ऑफिस नहीं जाना हे क्या उसको क्या पता सन्डे को मेरी छुट्टी होती हे, वो मेरे पास आकर बोली साहब खड़े हो जाइए, ऑफिस नहीं जाना हे क्या, बोलते समय भी उसकी नजर अपने तम्बू पर ही थी, मेने धीरे से आखे खोली और देखा फिर मन ही मन मुस्कराया, मेने उसका बोलते हुए खड़ा हुआ, अरे कमली मेरी सन्डे को छुट्टी होती हे, इंतना कह में बाथरूम में चला गया, ..........

बाथरूम से निकल देखा कमली किचन में खाना बना रही थी, मेने उसको आवाज दी कमली जरा अखबार दो पकड़ा दे और हां चाय भी बनाती लाना साथ में अपनी भी और में एक चेयर पर बैठकर कुछ सोचने लगा, कमली को केसे साचे में लाया जाए, वो कुछ देर में आ गयी, मेने उसे पूछा तुमारी चाय कहा पर वो बोली आप के संग केसे बैठकर पि सकती हु भला, तपाक से मेने कहा में कोई जिन्न हु क्या जो तुम्हे खा जाउगा, ये सुन कर वो हसने लगी, सच में उसकी हसी कतल करने वाली थी .............
इतना कह वो अपनी चाय भी ले आई, फिर मेने उसको बोला तुम मुझे साहब मत कहा करो, आखिर में तुम से छोटा हु, तुम मेरी भाभी जेसी हो, और ये अपना पर्दा हटा लो, में तुम को जब परदे में देखता हु तो ऐसा लगता हे, में बूढ़ा हो गया हु, और मेरी बहु मुझे पर्दा कर हालचाल पूछ रही हो.. इतना सुन फिर से वो हसने लगी ..... मेरे मन ने धीरे से कहा क्या जालिम अपनी हसी से ही मार दोगी ..........
जब धीरे से उसने अपने चहरे पर से पर्दा हटाया, मेरे दिल से यही आवाज निकली ये हूर कहा उस लंगूर को मिल गयी, आखो में कशक थी मानो किसी को भी देख ले .. सामने वाला खड़े खड़े मूर्ति बन जाए, मेरी तो नजरे उसके चहरे से हट ही नहीं रही थी, उसने कहा साहब-साहब कहा खो गए, जब उसने हाथ लगा कर कहा साहब तब मेरी निद्रा टूटी, जेसे में कोई सपना देख कर उठा हु... ...................
.....
मेने उसको फिर कहा क्या साहब साहब बोल रही हो तोड़ी देर पहले तो कहा ही था , मेरा नाम भी हे ... मुझे प्यार से रुध्र कहकर भी बुला सकती हो, उसने माफ़ी मागी और बोली थी हे साहब ... मेने आखे दिखा कर फिर देखा... तो अपनी नजरो से देखकर धीरे से बोली रुध्र माफ़ी दे दो... उसके ये बोल ऐसे लगे जेसे दिल पर किसी ने खन्जर डाल दिया हो.. फिर वो मेरे से खुल सी गयी .. बातो का अच्छा ख़ासा दोर चला..... फिर में नहाने चला गया और वो खाना बनाने .. मुझे जो घर मिला था वो जंगल के सुरु में ही था .. और वहा में अकेला रहता था, और घर का बाथरूम तोडा हट कर बना हुआ था ... में नहाने चला गया .. वहा कोई आता जाता तो हे नहीं सो अपने सभी कपडे निकाल कर नहाने लगा ... जल्दी जल्दी में तोलिया ( टोवल) भी लाना भूल गया था, और साबुन भी ... अपना पूरा बदन गिला अब अन्दर जाऊ भी तो केसे जाऊ ... जो पहन कर आया था वो भी कपडे गिले हो गए थे, मेने अपनी जोकि वाली चडी पहन कर कमली को आवाज दी, उसको कहा साबुन और टोवल लाना, वो लेकर आई , अब आप सब को तो पता ही हे गाव में लोग खुले में नहा लेते हे .. इस लिए मेने भी पूरा दरवाजा खोल कर नहा रहा था.. जब उसकी नजर मेरे बदन पर गयी .. तो उसका हाथ अपने आप उसके मुह पर चला गया .. और अपनी पलके झुका कर तिरछी नजरो से मेरे बदन को देखने लगी.... अब भाई गाव में पला बड़ा हुआ हु ... वो खेती बाड़ी और मेहनत से अपना शरीर भी फिट हे और हिट हे .................
मेने उसको आवाज दी कमली जरा साबुन तो दे दो .. अब क्या ऐसे ही खड़ी खड़ी क्या सोच रही हो ... उसने अपना हाथ बढाया अपने उसका हाथ छूते हुए साबुन लिया और फिर नहाने लगा, आज सन्डे था सो खूब रगड-रगड के नहा रहा था .. मुझे तो याद ही नहीं रहा कमली भी यही हे.. और भाई अपना हाथ चला गया साबुन सहित अन्दर .. मुन्ना की धुलाई के लिए और फिर तिरछी नजरो से देख ही रही थी .. अब मेने साबुन लिया और पीठ पर साबुन लगाने लगा .. अपनी किस्मत भी जोर पर थी .. साबुन को भी कमली के हाथ प्यार थे सो हाथ से निकल कर बाथरूम से बाहर उसके चरण कमलो में जा गिरा... जब मेरी नजर उस पर तो में सकपका गया .. धीरे से बोला अभी तक यही मेरा नहाना देख रही हे....... इतने में वो बोली रुध्र में साबुन लगा दू क्या ... अरे भाइयो अपने को तो मन मागी मुराद मिल गयी मेने नाटक करते हुए कहा नहीं में लगा लुगा ... इतने में वो बोली एक तो मुझे भाभी जेसी बोलते हो . और मेरे से ही शर्माते हो .. इतना कह मेरी पीठ पर साबुन मलने लगी .. कसम से ऐसा लगा जेसे मखमल मेरी पीठ को सहला रही हे ....
............ वो लगी साबुन लगाने .. और हमारे दिमाग के घोड़े दोड पड़े ... तुरंत पानी अपने पर डालने लगा ... अचानक पानी डालने से उसकी चोली और घाघरा ... भी गिला हो गया .. कसम से भी जब हमरी नजर उसकी चोली पर तो उसकी गोलिया मुझे बुला रही थी ... मानो .. मेने भी जल्दी जल्दी और अपने पुरे शरीर पर पानी डालने लगा .. उसको बोलने का मोका ही नहीं दिया .. इतने में वो पूरी भीग गयी .. और उसके कपडे उसके बदन से चिपक गए .. उसके बदन को देख अपना मुन्ना भी पुरे जोर पर खड़ा हो गया .. वो मुझे अपनी और देखकर सरमा कर घर में भाग गयी .. मेने जल्दी से टोवल को अपने बदन से लपेट कर ... में भी घर के अन्दर आ गया .. वो एक कोने में कड़ी होकर अपने कपडे झाड़ा रही थी .. मेने देखकर उसको बोला कमली कपडे निकल कर और कुछ पहन लो नहीं तो बीमार हो जाओगी ... मेरी आवाज सुनकर वो झेप सी गई.. और वहा से जाने लगी .. मेने आगे बढकर उसका हाथ पकड लिया ... उसका दिल की धडकन मुझे भी सुनाई दे रही थी ... दिल के जोर जोर से धडकने ने उसके उरोज भी ऊपर निचे हो रहे थे ... वो सरमा सरमा कर लाल हो गयी थी ... मेने उसको एक टीसर्ट और पाजामा दिया ... वो बोली इनको पहना केसे जाता हे ... .. मेने उसको बता दिया .. और वो कपडे बदलने चली गयी मेने भी एक टीसर्ट और केफ्री पहन ली .. जब वो उनको पहना कर सामने आई .. तो कसम से खिला हुआ गुलाब लग रही थी .....
............ मेने उसको देखकर कहा कमली आप तो बहुत सुन्दर हो .. इतना सुनकर वो सरमा गयी .. और हसने लगी ... मेरे दिल ने आवाज दी ,,, बेटा लड़की हसी तो फसी , आगे बढकर मेने उसका हाथ पकड़ा और कहा अगर सच में तुम्हारी शादी नहीं होती तो में तुमारे साथ खड़े खड़े शादी कर लेता ... ऐसा सुन वो जमीन की तरफ देखते हुए बोली धत ..केसी बात करते हो साहब .. मेने बोला फिर साहब . ... रुध्र बोला ना ... मुझे अच्छा लगता हे तुमारे मुह से मेरा नाम ,.............................
इतना सुन जो जाने के लिए मुड गयी मेने उसका हाथ फिर से थाम लिया और .. अपनी और खेचा .. वो टूटे हुए फुल की तरह मेरे सिने से आकर लग गयी .. वो बोली रुधर मुझे छोड़ दो .. कोई आ जाएगा .. कोई देख लेगा ... मेने उसके चहरे को उठाते हुए कहा .. यहाँ पर कोई नहीं आने वाला .. और आप तो मेरी भाभी हो .. आप से जोराजोरी करने का मेरा पूरा हक़ हे ....
कमली मेरी बाहों में पत्तो की तरह काफ रही थी, उनकी धडकन हमारे सिने से लग कर हाफ रही थी,
हमने कहा ये तो भाभी आप की जवानी का जोर हे, हमारे बाबूलाल का निशाना आप की योनी की और हे!!

मेरी बाहों में आने के बाद उसके मुह से बस कुछ नहीं फुट रहा था, मेने कहा भाभी कुछ तो बोलिए, मेने चुटकी लेते हुए कहा आप की सासे इतनी तेज क्यों चल रही हे, और आप काप क्यों रही हे, आप को कही बुखार तो नहीं आ गया, फिर वो बोली रुध्र मुझे बहुत श्रम आ रही हे तुम मुझे छोड़ दो, कोई आ जाएगा और देख लेगा, अब भला आप ही लोगो बोलो कोई हाथ में आया माल छोड़ देता हे क्या, मेने भी तो व्ही कार्य कर रहा था , उनको बाहों में लेकर उनकी कमर को सहला रहा था, धीरे धीरे उनका शरीर गर्म होने लगा था, उनकी तपन से मेरे बाबू लाल ने तो कसम ही खाली थी, जोर जोर से यही आवाज दे रहा था, मुझे बाहर निकाल दे, में मुस रहा हु, अब भला ये कार्य इतनी जल्दी केसे कर दू .. अभी तो समल समल कर कदम रखना था, क्यों आप सब को तो पता ही हे वो ठहरी गाव की गोरी, उनका तापमान चड़ते देर नहीं लगती भाई ... फिर भला में केसे उनको हाथ से जाने देता एक तो यहाँ आये मुझे एक महीने से ऊपर हो गया था, और काम के चक्कर में गाव की हरियाली भी नहीं देख पाया था, अब एक मुर्गी केसे हाथ आई थी उसको भी ऐसे ही जाने देता तो अपनी जवानी पर लानत हे, वो तोडा बहुत गर्म तो हो गयी थी, लेकिन उसके दिल में अभी भी लाज श्रम बची थी, सो मुझ से छुट कर वो किचन में भाग गयी, अब मेने बाबूलाल पर हाथ रख कर बोला बेटा, ठंडी कर के खायेगे तो मजा आएगा, कही गुस्सा हो गयी गाव में किसी ने देख लिया तो ना बचेगी नोकरी और ना मिलेगी छोकरी, अब उसको शांत करने के लिए बाथरूम में जाना पड़ा और वहा जाकर उनका तिया पाचा कर दिया, ...
रूम में आकर अपना काम करने लगा और सोचने लगा चाहे कुछ भी हो जाए आज दोपहर तक भाभी की जवानी का मजा तो लेकर रहूगा..
और दिमाक में एक नया प्लान तेयार करने लगा ......
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Posted : 05/12/2012 7:47 am