हम पाँच  

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 Anonymous
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यश और समीर दोस्त हैं। यश अपनी बहन नेहा के साथ समीर के गाँव गया है वहाँ समीर की छोटी बहन पूर्वी उन से मिलती है समीर पद्मा नाम की नौकरानी को अक्सर चोदता आया है यश भी पद्मा को चोदना चाहता है दीवाली के दिन होने से समीर की माताज़ी ने महेमान घर की सफ़ाई का काम निकाला है महेमान घर गाँव से बाहर है नेहा और पूर्वी पद्मा के साथ वहाँ गयी है। समीर और यश महेमान घर जा पहुँचते हें और नेहा और पूर्वी को चाय नाश्ता लेने बड़े घर भेज देते हें। पद्मा अकेली रह जाती है दोनो दोस्त एक साथ पद्मा को चोदते हें।

चुदाई चालू है आगे पढ़ी ये --------

समीर पद्मा के सर के पास बैठ गया और अपना लंड उस के मुँह में धर दिया। पद्मा को अपना मुँह पूरा खोलना पड़ा समीर का मोटा लंड अंदर लेने के लिए इधर मैने उसकी जांघें फैला के लंड भोस पर टिका दिया और एक धक्के से सारा का सारा लंड चूत में घुसेड़ दिया। उधर अपने हिप्स हिला कर समीर पद्मा का मुँह चोदने लगा तो मैं धीरे धक्के से उस की टाइट चूत चोदने लगा। पद्मा के मुँह से उन न न न न आवाज़ आने लगी और उसके चुतड़ घूम ने लगे। थोड़ी ही देर में उसकी चूत ने फटाके मारने शुरू किया। मैने लंड को पूरा बाहर निकल कर क्लाइटोरिस पर रगडा। अचानक पद्मा का बदन अकड़ गया और रोएँ खड़े हो गये मैने झट से लंड चूत में डाला और तेज़ रफ़्तार से चोदने लगा। पद्मा की चूत ने सिकोड़ कर मेरा लंड निचोड़ लिया। जब उस का ओर्गेज़्म शांत हुआ तब हमने लंड निकाले। दोनो लंड कड़े ही थे क्योंकि हममें से कोई झड़ा नहीं था।

पद्मा बोली : हाय दईया, ऐसी चुदाई तो कभी नहीं करवाई।

हम दोनो ने कन्डोम लगाए। मैं पलंग पर लेट गया। समीर ने पद्मा को मेरी जांघों पर बिठाया। मैने लंड सीधा पकड़ रखा। पद्मा ने लंड के मत्थे पर चूत टिकाई। जैसे उसने नितंब गिराए मेरा लंड स र र र करता चूत में घुसने लगा। जब मोन्स से मोन्स टकराई तब मूल तक का लंड चूत में पैठ गया था।

समीर ने कहा: यश, अभी ज़रा रुकना, धक्के मत देना। पद्मा, तू आगे झुक और गांड उधर कर।

मैं देख नहीं पाता था लेकिन पद्मा के कराहने की आवाज़ से समझ गया की समीर उसकी गांड में लंड डाल रहा था। जब पूरा लंड डाला गया तब समीर पद्मा की पीठ पर झुका और बोला: यश, मैं गांड मार रहा हूँ और पद्मा भी हिप्स हिलाएगी वैसे ही तेरा लंड चूत में आता जाता रहेगा तुझे धक्के लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

समीर उपर से पद्मा की गांड मारने लगा। उस के धक्के से पद्मा के नितंब आगे पीछे हिलते थे। बिना कुछ किए मेरा लंड चूत में आता जाता था। जब पद्मा गांड सिकॉड़ती थी तब साथ साथ चूत भी सिकुड़ती थी और मेरा लंड दब जाता था। समीर ने शुरुआत धीरे धक्के से की थी लेकिन पद्मा की उत्तेजना तेज़ी से बढ़ने लगी समीर ने धक्के की रफ़्तार बढ़ाई पीछे से हाथ डाल कर समीर ने पद्मा के स्तन थाम लिए थे। मैं उसका मुँह चूम रहा था। मैने एक हाथ हमारे बदन बीच से भोस पर लगा दिया। पद्मा की सारी भोस गीली हो गयी थी। जैसे मैने उसकी कड़ी क्लाइटोरिस को छुआ वैसे उसको ओर्गाज़्म हो गया। हमने धक्के लगाने रोक लिए।

ओर्गाज़्म के फटाके शांत हुए तब समीर ने कहा : पद्मा, प्यारी, तू कहे तो हम दोनो जगह बदल कर चुदाई करें? पद्मा मुँह से बोली नहीं, छूट सिकोड़ कर जवाब दिया।

हमने जगह की अदला बदली की। गांड मारने का ये मेरा पहला अनुभव था। चूत के बजाय गांड इतनी टाइट होती है वो मैंने पहली बार जाना।

गांड में लंड डालने की तकनीक अलग है जो मुझे समीर ने सिखाई। जब मेरा लंड पद्मा की गांड में पूरा बैठ गया तब समीर ने मुझे फिर चित लेटाया। अपनी गांड में मेरा लंड लिए पद्मा ऊपर आ गयी उसने जांघे चौड़ी कर दी। समीर उपर चढ़ गया। एक ही धक्के से उसने अपना लंड चूत में घुसेड़ दिया। पाँच सात धक्के मार कर वो रुक गया और बोला : यश, अब तेरी बारी। तू धक्के लगाएगा तब मैं स्थिर रहूँगा।

मैने धीरे धक्के से गांड मारनी शूरू की। दोस्तो, चूत और गांड में बहुत फ़र्क है उसे चोदने का आनंद भी अलग अलग है हाथ की मुट्ठी में पकड़ा हो वैसे पद्मा की गांड ने मेरा लंड पकड़ा था, मानो कि वो गांड से मुठ मार रही थी। जब वो चूत सिकॉड़ती थी तब उसकी गांड भी सिकुड़ जाती थी और लंड और ज़ोर से भिंच जाता था। लंड में इतनी गुदगुदी होती थी कि वहाँ से निकल कर सारे बदन में फैल जाती थी।

थोड़ी देर बाद मैने और समीर ने एक साथ धक्के लगाने शुरू किए। मैं अब पूरी ताक़त से पद्मा की गांड मारने लगा। समीर भी ऐसे ही उसकी चूत मार ने लगा। दूसरी दस मिनट तक चुदाई चली तब पद्मा बोली : मैं तीन बार झड़ चुकी हूँ अब तो बस कीजिए।

हम दोनो ने तेज़ी से धक्के लगाए और एक साथ झड़े। पद्मा भी एक बार और झड़ी..। लंड निकाल कर हम उतरे।

थकी हुई पद्मा थोड़ी देर पड़ी रही, बाद में उठ कर बाथरूम में चली गयी हमने भी सफ़ाई की और कपड़े पहन लिया। आगोश में ले कर समीर ने पद्मा को किस किया और पूछा : तुझे लगा तो नहीं न? मज़ा आया?

वो बोली : बहुत मज़ा आया

समीर : कैसा लगा मेरे दोस्त का लंड? फिर से चुदवायेगी?

धत्त कह के पद्मा ने हलकी चपत लगाई और अपने आपको छुड़ा कर भाग गयी

पद्मा के जाने के बाद हम अगले कमरे में गये वहाँ पूर्वी और नेहा चाय नाश्ता साथ हमारी राह देख रही थी। हमें देख वो खिल खिल हँसने लगी समीर ने पूछा : कब की आई हो तुम? और ऐसे हँस क्यों रही हो?

एक दूजे की ओर देख कर वो दोनो फिर से हँसने लगी

मैं: चाय लाई हो या नहीं?

जवाब में नेहा ने चाय नाश्ता लगाया। हम चारों ने नाश्ता किया। बाद मे बातें चली।

नेहा : समीर भैया, पूर्वी कहती है कि आप दोनो को दूध पीना चाहिए।

समीर :क्यूं भला?

अपने मुँह पर हाथ रख कर पूर्वी हँसती हुई बोली: इतना जो दूध अभी आपने निकाल दिया वो दूध पीने से नया बन जाएगा।

नेहा : पूर्वी, भैया ने जो निकाला वो दूध कहाँ था? क्रीम था क्रीम, दूध इतना खट्टा कहाँ होता है?

थोड़ी देर समीर सोच में पड़ गया। बोला: कितना क्रीम निकाला ये तुम्हें कैसे मालूम?

उन दोनो की हँसी बढ़ गयी

समीर: समझा, अब मैं समझा। तुम दोनो ने हमारी चुदाई देख ली है सही ना? पूर्वी?

पूर्वी शर्म से हमसे नज़र नहीं मिला सकती थी। बोले बिना उस ने हाँ कही।

समीर: यश, इन दोनो ने हमारी चुदाई देख ली है क्या करेंगे उनका?

पूर्वी : दूध ले आ?

पूर्वी ज़ोर से हँस पड़ी।

समीर : नेहा, दूध की ज़रूरत नहीं है जहाँ क्रीम बनता है वो फेक्टरी ओवर टाइम काम करती है अभी काफ़ी क्रीम पड़ा है चाहिए तुझे?

नेहा ने अपना चेहरा ढक दिया। आश्चर्य से पूर्वी की आँखें फट गयी वो बोली : मैने कहा था ना? समीर भैया को मत उकसाना? सुन लिया जवाब?

मैं: मेरे पास भी काफ़ी क्रीम है किस को चाहिए?

लड़कियों के मुँह से सेक्स की बातें सुन कर हमारे लौड़े खड़े होने लगे थे। उन दोनो की नज़रें बार बार उस तरफ़ जाती थी। दोनो के चेहरे लाल लाल हो गये थे।

मैं बनावटी मुँह लंबा कर के बोला : समीर ये तो बुरा हुआ। नेहा तो कँवारी नहीं है उस के लिए चुदाई नयी चीज़ नहीं है लेकिन पूर्वी?

अब की बारी थी समीर की खड़ खड़ हँसने की। वो बोला: पूर्वी, तू कँवारी है?

पूर्वी नज़र नीची कर बोली: ऐसे भी क्या पूछ रहे हैं भैया? आप जानते तो हैं।

ज़ाहिर हुआ कि पूर्वी को भी किसी ने चोदा था। मैं मन ही मन ख़ुश हुआ कि चलो इस लड़की को चोदना आसान होगा। मैने प्रार्थना की हे! भगवान एक मौक़ा दे दे मुझे इस कुड़ी को चोदने का।

समीर : नेहा, ये बता कि तुझे किसने चोदा पहली बार?

पूर्वी ने मेरी ओर इशारा कर दिया। समीर बोला: अच्छा तो ये है बहन चोद। कहाँ और कब?

नेहा: मंजुला भाभी के घर उसी वक़्त।

समीर: उसी वक़्त? वाह रे मेरे शेर, तूने दो दो चूत मार दी एक साथ। लेकिन बदमाश, तू तो कहता था कि तूने अकेली भाभी को चोदा था।

मैं: मैं क्या करता? मुझे भाभी को चोदते देख नेहा गरम हो गयी और ---

समीर: -----और तूने उसे भी चोद लिया। शाबाश।

मैं: बात ये है कि -----बताऊं नेहा?

नेहा ने हाँ कहा।

मैं: बात ये है कि बचपन से ही नेहा जल्दी गरम हो जाती है मैने तो तब जाना जब एक दिन ------

एक दिन नेहा के घर कुछ मेहमान आए तांगा लिए जैसे तांगा रुका, घोड़े ने अपना दो फूट लंबा लंड निकाला और पेसाब किया। यश और नेहा वहाँ मौजूद थे। बारह साल की नेहा घोड़े का लंड देख उत्तेजित होने लगी उसकी पीकी गीली हो गयी वो अपनी पीकी खुजलाने लगी रात को जब माताज़ी और पिताजी सो गये तब वो यश के पास जा कर बोली : भैया, मेरी पीकी तो देखो, कितनी सूज गयी है और गीली भी हो गयी है।

यश ने उस दिन पहली बार अपनी बहन की भोस देखी। नेहा थी बारह साल की लेकिन उसके बदन में जवानी खिल रही थी। सीने पर बड़े नींबू की साइज़ के स्तन उभर आए थे। भोस पर काले झांट उग निकले थे। यश को मालूम था क्या करना। नेहा को लेटा कर उसने उगालियों से भोस सहलाई और क्लाइटोरिस मसली। नेहा बोली : भैया बहुत गुदगुदी होती है दो पाँच मिनट में नेहा को ओर्गेज़्म हो गया। इसके बाद बैठकर यश ने उसे समझाया कि लंड क्या है चूत क्या है चुदाई क्या है वग़ैरह। -----

मैं : याद है नेहा तेरा वो पहला ओर्गेज़्म ?

समीर : बारह साल की उमर से ओर्गेज़्म का मज़ा लेती हो तुम?

नेहा : शुरू शुरू में इतने ज़ोरदार नहीं होते थे।

समीर : अब कैसे होते हैं?

नेहा : मैं क्या कहूँ? आप ही देख लीजिए न।

समीर ख़ुश हो गया। उसके लंड ने पाजामा का तंबू बना दिया।

समीर : पूर्वी तो लंबे अरसे तक बेख़बर रही थी, क्यूं पूर्वी?

मैं : आख़िर किस ने ज्ञान करवाया?

समीर : एक बार ऐसा हुआ कि -------

एक बार पूर्वी को साइकिल पर बिठा कर समीर कहीं जा रहा था कि रास्ते में एक गधी दौड़ आई। उसके पीछे गधा पड़ा था। जैसी गधी उनके पास आकर खड़ी हो गयी वैसे ही गधा ऊपर चढ़ गया और चोदने लगा। उसका दो फूट का लंड गधी की चूत में आता जाता पूर्वी और समीर दोनो देखते रहे। पूर्वी घबरा गयी और बोली : ये क्या कर रहा है? गधी मार जाएगी?

समीर ने पूर्वी के कान में कहा : घर जा कर सब समझाउंगा। गधे गधी की चुदाई देख कर समीर का लंड तो खड़ा हो गया लेकिन पूर्वी पर कोई असर पड़ा नहीं. घर पहुँचे तब घर में कोई था नहीं। समीर बहुत एक्साइट हो गया था। पूर्वी की मौजूदगी की परवाह किए बिना वो बाथरूम में गया और मुठ मारने लगा। ताज्जुब हो कर पूर्वी देखती रही। उस ने पहली बार बालिग लंड देखा था। बोली : भैया इतना तेज़ी से घिसते हो तो कहीं लग जाएगा। समीर जवाब देने के मूड में नहीं था। फ़च्छ फ़च्छ करती वीर्य की चार पाँच पिचकारियाँ छोड़ कर वो झड़ा। समीर ने उस वक़्त पूर्वी को समझाया कि चुदाई क्या है लोग क्यों करते हैं। सुनकर पूर्वी बोली: चलो ना भैया, हम दोनो चुदाई करें

समीर: न, अभी तू छोटी हो। तेरी चूत सिकुड़ी है तू ज़रा बड़ी हो जाए, तेरी महवारी शुरू हो जाए बाद में तू चुदवा सकेगी, इनसे पहले नहीं।

पूर्वी: ऐसा? लेकिन भैया, जब मैं बड़ी हो जाउं तब आप ही मुझे पहली बार चोदना ------------

समीर: ऐसा हुआ भी सही, क्यों पूर्वी?

नेहा: समीर भैया, पूरी कहानी कही ये। कब, कहाँ, कैसे ? आपने हमारी तो सुन ली है अब आपकी सुनाईये।

समीर: वक़्त आने पर कहूँगा। फिलहाल मैं देख रहा हूँ कि यश के बदन में क्रीम का प्रेशर बढ़ गया है उसका कुछ करना पड़ेगा वरना बेचारे की गन फट जाएगी समीर सच कह रहा था। मेरा लंड तन कर लोहे जैसा हो गया था।

मैं: नेहा, हमारी चुदाई देख तुझे कुछ नहीं हुआ?

नेहा: भैया, कैसी बात करते हैं आप? मैं पत्थर की बनी हूँ क्या?

मैं: तो अब तक तू राह किसकी देख रही है? निमंत्रण चाहिए तुझे? देखती नहीं है समीर का -------

समीर बीच में बोला: यश, नेहा लड़की है बुलाए बिना नहीं आएगी, क्यूं नेहा?

समीर उठकर नेहा के पास गया। उसने बाहें लंबी की, नेहा ने उसके हाथ पकड़ लिए खींचकर नेहा को उसने खड़ा कर दिया और अपनी बाहों में भर लिया। उन दोनो के मुँह किस में जुट गये। मैं सोफ़े पर बैठा था। हाथ लंबे करके मैने पूर्वी को बुला लिया। पूर्वी मेरे पास चली आई और खड़ी हो गई। वो शरमा रही थी। दाँत से उंगली काट रही थी। उसका चेहरा लाल लाल हो गया था। दो तीन बार मुझसे आँख चुरा कर उसने समीर और नेहा की ओर देखा। उन दोनो को चुंबन में लगे हुए देख पूर्वी ज़्यादा शरमाई। बहुत प्यारी लग रही थी वो। उसने रेशमी चोली, घाघरी और ओढ़नी पहनी थी। चोली छोटी होने से उसकी गोरी गोरी कमर और सपाट पेट का काफ़ी हिस्सा खुला था। मैने उसे कमर से थाम लिया। उसने अपनी बाहें मेरे गले में डाल दी। मैने उसे पास खींच लिया। मेरा सिर उसके सीने से दब गया। सिर हिला कर मैने उसके स्तन टटोला। ऐसे में ओढ़नी का पल्लू थोड़ा खिसक गया। खुले हुए गोरे पेट पर मैने किस कर दिया। गुदगुदी से वो छटपटाई। उसे पकड़ कर मैं किस करता रहा। आख़िर मेरे बाल पकड़ कर उसने मेरा सिर हटा दिया। बोली: मुझे बहुत गुदगुदी होती है

मैं: ये तो तेरा पेट है यहाँ (भोस पर हाथ रखते हुए) किस करूँगा तब क्या होगा?

उसने तुरंत मेरा हाथ हटा दिया। एक उंगली मेरे होठों पर रख कर बोली: धत्त, ऐसा नहीं बोलते।

मैने होंठ खोल उंगली मुँह में ली और चूसने लगा। मेरा दूसरा हाथ कमर पर से उतार कर उसके भरे भरे नितंब पर जा पहुँचा। मैने कूल्हे सहलाए और दबाए। उसने मेरे मुँह से उंगली निकाल ली और सिर झुकाकर अपने होंठ मेरे होंठ से लगा दिए जांघें चौड़ी कर मैने उसे मेरी बाई जाँघ पर बिठा दिया। हमारे होंठ किस में जुटे हुए थे। बंद होंठ से ही मैने उसके कोमल होंठ रगड़े। मुँह खोल मैने उसके होंठ मेरे होंठ भींच लिए और जीभ से चाटे। फूल की पंखुड़ी जैसे कोमल उसके होंठ मुझे इतने मीठे लगे कि मेरा लंड अकड़ने लगा। जीभ से मैने होंठ टटोले तब वो फिर छटपटा गयी मैने कहा : मुँह खोल तो ज़रा। थोड़ी हिचकिचाहट के बाद उसने मुँह खोला। मेरी जीभ अंदर जाकर चारों ओर घूम चुकी और उसकी जीभ से खेलने लगी। मैने जीभ लंड जैसी कड़ी बनाई। कड़ी जीभ अंदर बाहर करके मैने पूर्वी का मुँह चोदा। जब मैने मेरी जीभ वापस ले ली तब उसने अपनी जीभ से वो सब किया जो मैने किया था। हम दोनो एक्साइट होने लगे।

उधर समीर ने नेहा को पलंग की धार पर लेटाया था और ख़ुद ज़मीन पर बैठ उसकी भोस सहला रहा था। भोस के होठ चौड़े करके वो जीभ से क्लाइटोरिस टटोल रहा था। उसकी दो उंगलियाँ नेहा की चूत में डाली हुई थी जो उस के जी स्पोट का मर्दन कर रही थी। अचानक समीर उंगलियाँ तेज़ी से अंदर बाहर करके नेहा की चूत को चोदने लगा। नेहा के कूल्हे हिलने लगे। वो मुँह से सी सी सी आवाज़ करने लगी, समीर क्लाइटोरिस चूसता रहा और उंगलियों से चूत मारता रहा। किस चालू ही थी कि मेरा हाथ पूर्वी के पेट पर चला गया। ओढनी का पल्लू हटा कर मैने पेट सहलाया। उसकी बाहें मेरे गले में थी इसलिए दोनो स्तन खुले थे। पेट पर से मेरा हाथ चोली में क़ैद पूर्वी के स्तन पर गया। पहले मैने हलके स्पर्श से स्तन सहलाया, बाद में दबाया। चोली पतले कपड़े की थी और लो कट भी थी। मेरी उंगलियों ने कड़ी निप्पल ढूँढ निकाली। दो उंगलियों से टटोलने के बाद मैने निप्पल चिपटी में ली। पूर्वी ने मेरी कलाई पकड़ ली और हाथ हटाने का प्रयत्न किया। मुट्ठी में स्तन भर के मैने हटाने दिया नहीं। उधर फ़्रेंच किस की मस्ती में वो अपना स्तन भूल गयी चिपटी में पकड़ी हुई निप्पल मैने मसली और खींची। उसकी बाहों की पकड़ ज़्यादा ज़ोरदार हो गयी निप्पल छोड़ मेरी उंगलियों स्तन के खुले हिस्से पर घूमने लगी मैने चोली के अंदर उगली डालने का प्रयत्न किया लेकिन डाल न सका क्योंकि चोली छोटी और टाइट थी। किस करते करते मैने एक एक कर चोली के सब हुक खोल डाले। चोली हटते ही उसके नंगे स्तन मेरी हथेलियों में क़ैद हो गये। पूर्वी के स्तन इतने बड़े तो नहीं थे जितने पद्मा के थे। लेकिन संपूर्ण गोल और कठोर थे। दबाने से दबे नहीं जाते थे। अनजाने में मुझसे ज़रा ज़ोर से स्तन दब गया। पूर्वी कराह उठी। किस छोड़ कर उसने अपना सिर मेरे कंधों पर रख दिया और बोली: मुझे दर्द होता है

मैने स्तन सहलाया और कहा: जब तक तेरे स्तन बढ़ते रहेंगे तब तक उसे दबाने से दर्द होता रहेगा। पूरे विकसित हो जाने पर दर्द नहीं होगा।

अब मैने उसकी ओढनी और चोली निकाल दिए उसने शर्म से आँखें बंद कर दी। उसके प्यारे प्यारे स्तन मैं अच्छी तरह देख सका। क्या स्तन पाए थे उस लड़की ने? इतने ख़ूबसूरत स्तन की मुझे उम्मीद नहीं थी। गोरे गोरे गोल गोल छोटे श्रीफ़ल की साइज़ के उसके स्तन कड़े थे। चिकनी मुलायम चमड़ी के नीचे ख़ून की नीली नसे दिखाई दे रही थी। स्तन की चोटी पर बादामी कलर की दो इंच की एरोला थी। एरोला के मध्य में कि के दाने जैसी कोमल छोटी सी नीपल थी। उस वक़्त एक्साइटमेंट से एरोला उभर आई थी और निप्पल कड़े हो गये थे। मैने पहले हलके स्पर्श से सारा स्तन सहलाया, बाद में मुट्ठी में लिया। निप्पल को चिपटी में लेकर मसला। पूर्वी के मुँह से आह निकल पड़ी। स्तन साथ खेलते हुए मैने पूर्वी का हाथ लंड पर रख दिया। पाजामा के आर पार मेरे तने हुए लंड को छूते ही उसने हाथ हटा लिया।

मैं: पकड़ ले, डरती क्यूं हो? काटेगा नहीं।

उसे हँसी आ गयी मैने फिर लंड पकड़ाया। इस वक़्त उसने मुट्ठी में लिया और होले से दबाया। लंड ने ठुमका लगाया।

मेरे आश्चर्य की हद न रही जब वो मेरे कान में बोली: इतना बड़ा और मोटा?

मुझे मुँह में लेना है ले सकती हूँ?

इसके बाद क्या हुआ? कैसे पूर्वी और नेहा की चुदाई हुई? ये जानने के लिये अगला भाग अवश्य पढ़े ............

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Posted : 26/02/2011 6:02 am
 Anonymous
(@Anonymous)
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मैं कुछ कहूँ इससे पहले वो मेरी गोद से सरक कर ज़मीन पर आ गयी मेरे पाजामा के आर पार उसने लंड टटोला। मैने नाड़ा खोल दिया। आठ इंच का कड़ा लंड निकर में से वो निकाल ना सकी। मैने निकर भी उतार दी और लंड आज़ाद किया। फ़ौरन उसने लंड पकड़ लिया। मुठ मारने लगी लंड और ज़्यादा तन गया। टोपी हटाकर उसने लंड का मत्था खुला किया और तुरंत अपने मुँह में ले लिया। मत्थे को जीभ और तालु के बीच दबाए रखकर वो स्थिर हो गयी दो मिनट तक वो हिली नहीं। मुझे बहुत अच्छा लगता था। लंड में हलके हलके ठुमके होते थे। बाद में उसने लंड का मत्था चूसना शुरू किया, जैसे बच्चा लॉलिपोप चूसता है वैसे। चूसते चूसते जीभ से चाटा और मुट्ठी में पकड़े हुए लंड के हिस्से पर मुठ मारने लगी मेरे हिप्स हिलने लगे। लंड ने भरपूर कामरस बहाया।

मेरा मोटा लंड लेने के लिए पूर्वी को अपना मुँह पूरा चौड़ा करना पड़ा था। लंड के पानी के साथ मुँह का थूक मिलकर सारे लंड को गीला कर दिया था। मैने उसका सिर पकड़ कर धक्के देना शुरू किया। गीला मोटा लंड उसका मुँह को पूच्च पूच्च आवाज़ से चोदने लगा। मेरी उत्तेजना तेज़ी से बढ़ गयी लंड और कड़ा हो गया और ठुमके लगाने लगा। पूर्वी ने जब जीभ से मत्थे के नीचे छुआ तब मुझे लगा कि मैं उसके मुँह में ही झड़ जाउंगा। मैने झट से लंड निकाल दिया। पूर्वी को फिर गोद में बिठाकर मैं फ़्रेंच किस करने लगा। उसके थूक के साथ मेरे लंड का पानी भी मेरे मुँह में आ गया।

समीर और नेहा अपनी मस्ती में खोए हुए थे। समीर चित लेटा था। नेहा उसपर औंधी पड़ी थी। समीर का सिर नेहा की चौड़ी की हुई जांघें बीच था और मेरे ख़याल से वो नेहा की पीकी को चुस रहा था। दूसरी ओर नेहा समीर का तना हुआ लंड अपने मुँह में लिए चुस रही थी।

पूर्वी को बाहों में भरकर मैं पलंग पर ले गया। उसे चित लेटा कर मैं बगल में लेट गया। मैने उसके सीने पर जगह जगह पर चुंबन किए। ऐसे करते करते मैने दोनो स्तनों भी चूम लिए। अंत में मैने निप्पल मुँह में ले लिये। मैने जीभ से निप्पल टटोले, बाद में चूसा। मुँह खोल कर मैने एरोला साथ थोड़ा सा स्तन मुँह में लिया और चूसने लगा। पूर्वी के नितंब हिलने लगे। मेरा हाथ पेट पर फिसल रहा था, उसका हाथ मेरे बालों में रेंग रहा था।

निप्पल चूसते चूसते मैने मेरा हाथ भोस की ओर बढ़ाया। मैने घाघरे के नाड़े को छुआ तो पूर्वी ने मेरी कलाई पकड़ ली। मैने ज़ोर लगाया लेकिन वो मानी नहीं। उसने टाँगें सीधी रखी थी। एक ओर मैं स्तन छोड़कर उसके पेट पर किस करने लगा और दूसरी ओर घाघरे के आरपार भोस सहलाने लगा। भोस ने भरपूर काम रस बहाया था। जिस तरह घाघरा गीला हुआ था इससे मालूम होता था कि पूर्वी ने पेंटी पहनी नहीं थी।

मैं पेट पर किस करते करते भोस की ओर चला। मैने जब उसकी नाभि पर होंठ लगाए तब गुदगुदी से वो तड़प उठी। मैने उसे छोड़ा नहीं। मैने जीभ से उसकी नाभि टटोली। पूर्वी खिल खिल कर हँस पड़ी और उसकी जांघें ऊपर उठ गयी

फिर क्या कहना था? रेशमी घाघरा सरक कर कमर तक चढ़ गया मेरे कुछ किए बिना पूर्वी की भोस खुली हो गयी उसने टांगे लंबी करने का प्रयत्न किया लेकिन मेरा हाथ जाँघ के पीछे लगा हुआ था, मैने जांघें उठी हुई पकड़ रखी थी।

पूर्वी जांघें सिकोड़ दे इससे पहले मैने अपने हाथ से भोस ढक दी। मैं अब बैठ गया। होले से उसकी जांघें चौड़ी कर दी। पूर्वी ने आँखें बंद कर दी। दोनो हाथ से मैने जांघें सहलाई और चौड़ी पकड़ रखी।

पूर्वी की जांघें सुडोल चिकनी और भारी भारी थी। जब पाँव लंबा रखती थी तब घुटनों से भोस तक दोनो जांघें आपस में सटी हुई रहती थी। दो भारी जांघें और उँची मोन्स ये तीनो बीच खड्डा सा बन जाता था जिसके तल में थी पूर्वी की भोस। अलबत्ता इस पोजिशन में भोस का थोड़ा सा हिस्सा ही दिखाई दे सकता था।

ऊपर उठी हुई जांघें जब चौड़ी की गयी तब पूर्वी की भोस ठीक से दिखाई दी।

उसके स्तन की तरह उसकी भोस भी छोटी थी, बारह साल की लड़की की हो वैसी। फ़र्क इतना था कि पूर्वी की भोस पर झांट निकल आए हुए थे। बड़े होंठ मोटे और भरावदार थे, उस वक़्त सूजकर गुलाबी हो गये थे। तीन इंच की दरार में से छोटे होंठ सूजकर बाहर निकल आए थे। एक इंच लंबी और मोटी क्लाइटोरिस लंड की तरह खड़ी हो कर बाहर झाँख रही थी। दरार के पिछले कोने में था चूत का मुँह। इस वक़्त मुँह बंद था। सारी पीकी अपने पानी से गीली गीली हो गयी थी।

मैं अब ऐसे औंधा लेट गया जिससे मेरा सिर उसकी जांघें बीच आ जाये। अब पूर्वी ने ख़ुद जांघें चौड़ी कर दीं। भोस से मादक सुगंध आ रही थी जिसे सूंघकर मेरा लंड ज़्यादा तन गया। लंड मेरे पेट से दबा हुआ था और कामरस उगल रहा था।

पहले मैने उंगलिओं से भोस सहलाई। आगे से पीछे और पीछे से आगे सब जगह उंगलियां फिराई। एक उंगली पर चूत का पानी लेकर क्लाइटोरिस पर लगाया और उसे मसली। दो अंगूठे से बड़े होंठ चौड़े कर जीभ से छोटे होंठ चाटे। क्लाइटोरिस को मेरे होठों बीच ले कर चूसा। उसी वक़्त मैने दो उंगलियाँ चूत में डाली और जी स्पोट का मर्दन किया। क्लाइटोरिस चूसते चूससते मैने उंगलियाँ अंदर बाहर करके चूत को चोदा। पूर्वी के नितंब डोलने लगे। उस से सहा नहीं गया। उसे पहला ओर्गाज़्म हो गया।

पूर्वी का सारा बदन अकड़ गया और आँखे मिंच गयी भोस ने कामरस का फ़ौव्वारा छोड़ दिया। सिकुड़ कर उसकी जांघों ने मेरा सर भोस से दबा रखा चूत में फटाके हुए और सारे बदन पर रोएँ खड़े हो गये जब उसका ओर्गाज़्म शांत हुआ तब में उठा और उसकी जांघों के बीच आ गया। उसने ख़ुद लंड पकड़ कर भोस की ओर खींच लिया। मुझ से रहा नहीं गया। लंड का मत्था क्लाइटोरिस से घिसा, चूत के मुँह पर धरा और एक ही धक्के से सारा लंड चूत में पेल दिया। पूर्वी के मुँह से आह निकल गयी।

चूत में लंड दबा के मैं रुका। लंड झटके पे झटका देने लगा जिसका जवाब चूत ने संकोचन करके दिया। मैने लंड निकाला तो पूर्वी ने मेरे चूतड़ पर हाथ रख कर मुझे अपनी ओर खींच लिया। लंड फिर से चूत की गहराई में उतर गया। ऐसे धीरे धक्के से मैं पूर्वी को चोदने लगा।

उधर समीर अब पलंग पर लेटा था। नेहा उसकी जांघें पर बैठी थी। समीर का लंड नेहा की चूत में फसा था। अपने चूतड़ उठा गिरा के नेहा लंड को चूत से अंदर बाहर किए जाती थी। कभी कभी समीर भी धक्का दे कर नेहा को चोदता था। समीर के दोनो हाथ नेहा के स्तनों पर लगे हुए थे। समीर का पूरा लंड बाहर निकल कर फिर चूत में घुसता हम दोनो देख सकते थे

हमें देख कर समीर बोला :यश, डरना मत। पूर्वी दिखती है इतनी नाज़ुक नहीं है ज़ोर से चोदना, वरना उसे संतोष नहीं होगा। क्यूं, पूर्वी?

जवाब में पूर्वी ने चूत सिकोड़ी और लंड दबाया। मैंने कहा : नेहा भी लंड ले सकती है तू भी उसे ज़ोर से चोदना।

समीर के कहने पर भी मैने धीरे धक्के से ही पूर्वी को चोदना चालू रखा। मैने पूर्वी से कान में पूछा: समीर सच कहता है क्या? चुदवाना है तेज़ धक्के से?

वो कुछ बोली नहीं, सिर हिलाकर न कही।

मैने फिर पूछा: धीरे धक्के मीठे लगते हैं। हैं न?

बोले बिना ही फटाफट चूत से लंड दबा कर उसने जवाब दिया।

मैं: मोटा लगता है मेरा लंड? दर्द तो नहीं होता न?

वो बोली नहीं सिर हिला कर न कही।

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Posted : 26/02/2011 6:03 am
 Anonymous
(@Anonymous)
Guest

मैं: कुछ तो बोल। जवाब दे, कैसा लगता है मेरा लंड? नहीं बोलोगी तो मैं उतर जाउंगा।

उसने अपने पाँव मेरी कमर से लिपटाये और धीरे से बोली: बहुत मीठा लगता है

प्यार से मैने चार पाँच धक्के लगा कर पूर्वी को चोदा। वो फिर बोली: आप ऐसा करते हें तब बहुत मीठी मीठी गुदगुदी होती है वहाँ

मैं: वहाँ मायने कहाँ?

पूर्वी: आपका वो घुसा है वहाँ

मैं: मेरा क्या कहाँ घुसा है? साफ़ साफ़ बोल तो।

पूर्वी: मुझे शर्म आती है

मैं: मुझ से शर्म? अब? एक बार बोल ज़रा, क्या कहाँ घुसा है तेरे मुँह से सुनना चाहता हूँ

अपना मुँह मेरे कान से लगा कर वो बोली: आपका लंड घुसा है वहाँ से, मेरी चूत में गुदगुदी होती है

सुन कर मेरा लंड और तन गया, मेरे कूल्हे हिल पड़े, कमर ने और धक्के लगा दिए

धीरे चुदाई की वजह थी। एक तो ये कि पूर्वी अभी उमर में कम थी और नयी नयी लंड ले रही थी। उसकी चूत बहुत सिकुड़ी थी। प्रमाण से मेरा लंड बहुत मोटा था। चूत में कहीं घाव न लग जाय इस लिए मैं सावधानी से लंड डालता था। चूत और लंड काफ़ी गीले थे फिर भी अंदर जाते समय लंड की टोपी उपर चढ़ जाती थी और नंगा मत्था चूत की दीवारों साथ घिस पाता था। जब लंड बाहर निकलता था तब टोपी उतर कर मत्थे को ढक देती थी। हाथ से मुठ मारते वक़्त ऐसा ही होता है न? मानो पूर्वी की चूत मुठ मार रही थी मेरे लंड पर

दूसरे, जब पूरा लंड अंदर घुस जाता था तब लंड का मूल जो ज़्यादा मोटा है वो चूत के मुँह में बैठ कर चूत को चौड़ा कर देता था। वैसे भी भोस की दरार लंड से चौड़ी होकर गोल बन गयी थी। लंड का मूल क्लाइटोरिस को छू लेता था। इसी वक़्त लंड का मत्था गर्भाशय का मुख धकेल देता था। बाहर निकलते वक़्त गर्भाशय वापस अपनी जगह पर आ जाता था। अब गर्भाशय की ये हलन चलन से आनंद का फ़ौव्वारा छूट जाता था पूर्वी की भोस में और पेडू में। वो अपने हिप्स हिलने से रोक नहीं पाती थी।

मुझे भी धीमी चुदाई से बहुत मज़ा आ रहा था। अंदर घुसे हुए लंड को जब पूर्वी की योनी भींच लेती थी तब मेरे सारे लंड से रस झड़ता हो ऐसा महसूस होता था। योनी की करकरी दीवाल साथ घिसने से लंड में से इलेक्ट्रिक करंट निकल कर मेरे सारे बदन में फैल जाता था

ऐसी मजेदार चुदाई को जल्दी से कौन ख़तम कर दे? लेकिन, अफ़सोस, सब चीज़ का अंत तो होता ही है चाहे वो चुदाई हो या और कुछ। क़रीबन दस मिनट तक आराम से मैने पूर्वी को चोदा होगा। हमारी उत्तेजना बहुत बढ़ गयी थी। मेरा लंड इतना सेंसीटिव हो गया था कि अब वो चूत सहन नहीं कर पाता था अंदर घुसते ही ठुमक ठुमक करने लगता था। बार बार पूरा बाहर निकाल कर उसे हवा देनी पड़ती थी। पूर्वी का बदन पसीने से छा गया था, चहेरा लाल लाल हो गया था, निप्पल्स खड़ी की खड़ी रहती थी। मेरा दिमाग़ सिर से निकल कर लंड के मत्थे में जा बैठा था और मेरी सुनता नहीं था।

मैने लाख चाहा फिर भी धक्के की रफ़्तार अपने आप बढ़ने लगी पूर्वी के कूल्हे भी ज़ोरों से हिलने लगे। मैने सोचा कि पोजिशन बदलने से चुदाई लंबी चल सकेगी। मैने कहा: तू ऊपर आ जा।

उसे बाहों में भरकर मैं पलटा और नीचे आ गया। तुरंत पूर्वी धक्के लगाने लगी आगे पीछे सीधे गोल ऐसे सब तरह से उसने नितंब घुमा कर लंड से अपनी क्लाइटोरिस रगड़ दी। ओर्गाज़्म के क़रीब होने पर भी ओर्गाज़्म पा नहीं सकती थी। हमारे पेट बीच हाथ डाल कर जैसे मैने क्लाइटोरिस को उंगली से छुआ कि तुरंत पूर्वी को ओर्गाज़्म हो गया।

उसके धक्के बंद हो गये योनी फट फटा कर लंड को चुसने लगी पूर्वी को बाहों में भर कर मैं फिर पलट गया और ऊपर आ गया। मैं स्थिर रहा, बड़ी मुश्किल से अपने आप को झड़ने से रोक सका। तीस सेकंड चले ओर्गाज़्म से पूर्वी बेहोश सी हो गयी।

जब वो होश में आई तब बोली: ये क्या हो गया मुझे?

उसके सूजे हुए होंठों को चूम कर मैने कहा: इसे ओर्गेज़्म कहते हें, प्यारी।

वो इतनी थक गयी थी कि मेरे गले में बाहें डालने सिवा और कुछ कर न सकी। उसकी आँख में आँसू आ गये और वो धीरे से बोली: मैने सही सुना? आपने मुझे प्यारी कहा?

चुम्बन करते करते मैने कहा: हाँ, प्यारी, तूने सही सुना। प्यारी प्यारी, हज़ार बार प्यारी।
vख़ुशी से वो रो पड़ी। मेरे चेहरे पर हाथ फिराकर बोली: मुझे आप कितने प्यारे लगते हें? आपको हुआ वो - - - वो ओर्गाज़्म?

मेरा लंड अभी उसकी योनी में था और कड़ा ही था। मैने कहा: नहीं हुआ, अब होगा। तू थक गयी हो तो उतर जाउं, बाद में फिर चोदेंगे।

उसने मुझे हाथ पाँव से जकड़ लिया और बोली: न, अभी ही कर लीजिए जो चाहे सो, मेरी फिकर मत कीजिए।

अब आप ही कही ये मैं क्या करता? मैने लंड निकाला। फिर डालने में ज़रा देर लगी क्योंकि वो थोड़ा सा नर्म पड़ गया था। नर्म लंड भी योनी के मुलायम स्पर्श से तन गया। ओर्गाज़्म से पूर्वी की चूत काफ़ी खुल गयी थी। अब उसे लग जाने का डर नहीं था। थोड़ी देर में जब लंड पूरा अकड़ गया तब मैं घचा घच्छ, घचा घच्छ धक्के से चोदने लगा। पूर्वी भी नितंब उछाल उछाल कर लंड लेने लगी दो पाँच मिनट की ऐसी घमासान चुदाई बाद मैं ज़ोर से झड़ा। पूर्वी को मैने बाहों में जकड़ लिया। लंड से वीर्य की न जाने कितनी पिचकारियाँ छूटी। छोटी सी चूत में जगह कहाँ थी, लंड जो भरा था? ढेर सारे वीर्य से चूत छलक गयी पूर्वी भी मेरे साथ एक बार फिर झड़ी।

शाम ढल चुकी थी। उधर समीर और नेहा ने अपनी चुदाई पूरी कर ली थी।

समीर बोला : चल घर चलें, वरना माताज़ी को शक पड़ेगा।

मैं: मुझे नहीं आना। नींद आ रही है कह देना सेहत अच्छी नहीं होने से सो गया हूँ

वो तीनो स्वस्थ हो कर चले गये मैं गहरी नींद में सो गया।

दूसरे दिन सुबह आँख खुली तब पूर्वी मुझे जगा रही थी: उठिये न। साढ़े नौ बज गये हें। सब आपका इंतेज़ार कर रहे हैं चाय पर अभी माताज़ी मंदिर से लौटेगी और यहाँ आ जाएगी।

मैने उसे बाहों में भर लिया और किस करने लगा। ज़ोर लगा कर वो छूट गयी और हँसने लगी तब मुझे पता चला कि मैं नंगा था।

फटाफट कपड़े पहन कर मैने फिर पूर्वी को पकड़ लिया। मैने कहा: जाने से पहले एक बात बता। मुझसे शादी करोगी, प्यारी?

पल भर के लिए वो आश्चर्य से अवाक हो गयी फिर मुझसे लिपट गयी फिर रो पड़ी। मेरे चहेरे पर प्यार से हाथ फिरा कर बोली: एक बार नहीं, हज़ार बार करूंगी। आप मुझे इतने अच्छे क्यों लगते हैं?

किस करके मैंने कहा : चल चलें, उन लोगो को बता दें हमारा इरादा।

नेहा और समीर चाय पर हमारा इंतेज़ार कर रहे थे। पद्मा भी आ गयी थी। समीर बोला : चलो, चलो, अभी माताज़ी आ जाएंगी तो उसे शक पड़ जाएगा।

मुझे हँसी आ गयी और पूर्वी शरमा गयी देखकर नेहा ने पूछा : कितनी बार चोदा कल रात?

मैं: पहले तू बता।

समीर : हमने कुछ बाक़ी रखा है सुहाग रात के लिए

मैं: ओह हो। क्या मैं शाहनाईयाँ सुन रहा हूँ शादी की?

समीर: हाँ, हमने शादी का फ़ैसला कर लिया है आशा है कि माताज़ी और पिताजी मंज़ूर दे देंगे। मैं माताज़ी से पूछ लूंगा।

इस वक़्त पूर्वी धीरे से बोली: भैया, साथ साथ हमारी भी पूछ लेना।

दो मिनट के लिए सन्नाटा छा गया। बाद में सब ख़ुशी से झूम उठे। नेहा और पूर्वी लिपट गये मुझे गले लगाते हुए समीर ने कहा: वाह मेरे छुपे रुसतम आख़िर तूने मेरी गुड़िया ले ही ली। पूर्वी, कैसा जादू चलाया है इस बेवकूफ़ के लंड ने जिससे तू अपना दिल दे चुकी हो?

अब देखी ये दोस्तो, प्यार से की गयी चुदाई कैसे शर्म के परदे तोड़ डालती है कल की शरमिली पूर्वी आज अपने भैया से बिँदास कहने लगी: वो ही जादू भैया जो आपके लंड ने नेहा भाभी की चूत पर चलाया है

सुनकर नेहा बोली: अरे वाह रे मेरी पूर्वी भाभी, देखो न, लंड की कुंजी लगती है चूत में और खुल जाता है ताला ज़ुबान का।

इतने में माताज़ी आ गयी समीर ने हमारा इरादा सुना दिया। पहले तो वो घबरा गयी उन्हें किसी तरह तसल्ली हो गयी कि हम चारों ने चुदाई कर ली थी। लेकिन अब शादी की मंज़ूरी सबसे उत्तम रास्ता था। ख़ुश हो के उसने हा कह दी। हम चारों ने उन के चरण छुए। तब उन्होंने धमाका किया।

वो बोली: मैं तेरे पिताजी से बात करूंगी। हम यश और नेहा के माताज़ी पिताजी को बूलवा लेंगे बाद में ये रिश्ता जाहिर करेंगे अगले हफ़्ते। यश, नेहा बेटा, तुम लोग रह सकोगे न इतने दिन?

मैं: हाँ जी

माताज़ी: तब तो अच्छा। और पूर्वी, नेहा को लेकर घर आ जा अभी। आज से तुम दोनो घर पर सोओगी हमारी साथ।

आगे की कुछ कहे इससे पहले माताज़ी चली गयी हम चारों एक दूजे के मुँह देखते रह गये नेहा बोली: चल पूर्वी, माताज़ी को मदद करें,

जाते जाते दोनो दरवाज़े में खड़ी हो गयी दोनो ने अपनी चोली खोल कर चुचियाँ दिखाई। पूर्वी बोली: शाब मुझे यहाँ बहुत दर्द होता है ज़रा मालिश कर देंगे आप?

हम दोनो उनको पकड़ने गये लेकिन ठेंगा दिखाकर वो भाग गयी उस रात के बाद चुदाई का फिर चांस न मिला, माताज़ी ने कड़ा पहरा जो लगाया था। इन दौरान दोनो लड़कियों ने हम पर जो सितम गुज़ारे। कभी चुचियाँ दिखाकर कभी जांघें नंगी करके, कभी दूर से फ़्लाइंग किस करके तो कभी अंगड़ाई ले कर वो हमें लुभाती रही लेकिन कभी पकड़ी गयी नहीं। हमें उन दिनों अपना हाथ जगन्नाथ करना पड़ा।

अब आप ये बताईये, दोस्तों, सुहागरात पर उन दोनों से कैसा व्यवहार किया जाय?

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Posted : 26/02/2011 6:04 am